व्याख्यान 99 (253 में से)

3. यहाँ आप देखते हैं कि धर्म का अंगीकार करनेवाले उन मसीहियों के साथ क्या गड़बड़ है जो

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3. यहाँ आप देखते हैं कि धर्म का अंगीकार करनेवाले उन मसीहियों के साथ क्या गड़बड़ है जो धर्म में बहुत कड़ाई से चलने को एक क्रूस समझते हैं।

ऐसे लोग सदा अपने पापों के लिए सफ़ाई देते रहते हैं, और कुछ ऐसे कामों की पैरवी करते रहते हैं जो कड़ाई से चलनेवाले धर्म से मेल नहीं खाते। इससे प्रकट होता है कि वे अब भी पाप से प्रेम रखते हैं, और उसमें जहाँ तक साहस कर सकें वहाँ तक जाएँगे। यदि वे सच्चे मसीही होते, तो वे उससे घृणा करते, और उससे फिर जाते, और उसकी ओर घसीटा जाना उन्हें क्रूस के समान लगता।

4. आप उसका कारण देखते हैं कि क्यों कुछ लोग नहीं जानते कि धर्म का आनन्द लेना क्या होता है।

वे धर्म में प्रफुल्लित और सुखी नहीं रहते। वे दुःखी रहते हैं क्योंकि उन्हें बहुत-सी उन बातों से नाता तोड़ना पड़ता है जिनसे वे प्रेम रखते हैं, या क्योंकि उन्हें इतना अधिक धन देना पड़ता है। वे हर समय आग में रहते हैं। आत्म-त्याग के हर अवसर पर आनन्दित होने के बदले, और सत्य की सबसे स्पष्ट और सबसे चुभनेवाली प्रस्तुति पर आनन्दित होने के बदले, जब उनका कर्तव्य उनकी रुचियों और आदतों के विरुद्ध पड़ता है, तब उन्हें उनका कर्तव्य बताया जाना उनके लिए बड़ी कठिन परीक्षा होती है।

स्पष्ट सत्य उन्हें व्याकुल कर देता है। क्यों? क्योंकि उनका हृदय कर्तव्य करने से प्रेम नहीं रखता। यदि वे अपना कर्तव्य करने से प्रेम रखते, तो स्वर्ग से उनके मन पर पड़नेवाली ज्योति की हर किरण, जो उन्हें उनका कर्तव्य दिखाती, स्वागत पाती, और उन्हें अधिकाधिक सुखी बनाती।

जब कभी आप ऐसे लोगों को देखें—यदि सत्य उन पर दबाव डालता है तो वे जकड़े हुए और व्याकुल अनुभव करते हैं, यदि उनका हृदय झुककर सत्य के साथ नहीं चलता—तो धर्म का अंगीकार करनेवाले ऐसे सब लोगों का नाम है: कपटी। यदि आप पाएँ कि वे चिन्तित पापियों के समान व्याकुल हैं, और जितना अधिक आप उनके पाप दिखाते हैं उतना ही अधिक वे व्याकुल होते हैं, तो निश्चय जान लीजिए कि उन्होंने अपने पापों से कभी सच्चा पश्चाताप नहीं किया, और न कभी अपने आपको परमेश्वर का होने के लिए सौंपा है।

5. आप देखते हैं कि क्यों बहुत-से अंगीकार करनेवाले नए विश्वासी, जिनके मन-परिवर्तन के समय बहुत गहरे आत्मिक अनुभव हुए थे, बाद में धर्मत्यागी हो जाते हैं।

उन्हें पाप का गहरा बोध और मन की बड़ी व्याकुलता हुई थी, और बाद में उन्हें राहत मिली और उनका आनन्द बहुत बड़ा था, और कुछ समय तक वे आश्चर्यजनक रूप से सुखी रहे। परन्तु कुछ समय बाद वे ढीले पड़ जाते हैं, और फिर धर्मत्यागी हो जाते हैं। कुछ लोग, जो सच्चे और झूठे पश्चाताप के बीच ठीक-ठीक भेद नहीं करते, और जो सोचते हैं कि ईश्वरीय सामर्थ के बिना ऐसे “गहरे” अनुभव हो ही नहीं सकते, इन घटनाओं को अनुग्रह से गिर जाना कहते हैं। परन्तु सच तो यह है कि वे हम में से निकल गए, क्योंकि वे हम में के थे नहीं। उन्हें कभी वह पश्चाताप हुआ ही नहीं जो पाप करने की प्रवृत्ति को मार डालता और मिटा देता है।

6. देखिए कि पीछे हटनेवाले क्यों इतने दुःखी रहते हैं।

पाप करने की प्रवृत्ति के टूट जाने और बदल जाने के विषय में जो मैंने कहा, उससे शायद आप यह निष्कर्ष निकालें कि मैं मानता हूँ कि सब सच्चे मसीही सिद्ध हैं। परन्तु इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता। पीछे हटे हुए मसीही और उस कपटी के बीच, जो अपने अंगीकार से पीछे हट गया है, मूलभूत अन्तर है। कपटी संसार से प्रेम रखता है, और जब वह पाप की ओर लौटता है तो उसका आनन्द लेता है।

उसे कुछ भय और कुछ पछतावा, और अपनी साख खो जाने की कुछ आशंका हो सकती है; परन्तु इन सब के बावजूद वह पाप का आनन्द लेता है। पीछे हटे हुए मसीही के साथ ऐसा नहीं होता। वह अपना पहला

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