व्याख्यान 39 (253 में से)

अपराधी कितनी बार विश्वासयोग्य डाँटनेवालों से कहते हैं कि वे अपने काम से काम रखें

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अध्याय 4: डाँटना — एक मसीही कर्तव्य।

अपराधी कितनी बार विश्वासयोग्य डाँटनेवालों से कहते हैं कि अच्छा होगा कि वे अपने काम से काम रखें और उन बातों में हाथ न डालें जिनसे उनका कोई सरोकार नहीं। और दूसरों के मामलों में दख़ल देने के कारण उन्हें दख़लअन्दाज़ और पराए कामों में टाँग अड़ानेवाले कहा जाता है। दक्षिण में, वे बड़े क्रोध में भर गए हैं क्योंकि हम उत्तरवाले उन्हें दास-प्रथा की दुष्टता का निश्चय दिलाने का यत्न कर रहे हैं। और वे कहते हैं कि यह हमारा काम नहीं है, कि दास-प्रथा विशेष रूप से उनका अपना मामला है, और वे किसी और को उसमें दख़ल नहीं देने देंगे, और वे माँग करते हैं कि हम उन्हें छोड़ दें, और हमें इस विषय पर बात तक करने की अनुमति नहीं देंगे। और वे चाहते हैं कि हमारी उत्तरी विधान-सभाएँ ऐसे कानून बनाएँ जो हमें अपने दक्षिणी पड़ोसियों को मनुष्यों को दासता में रखने के उनके पाप के लिए डाँटने से रोकें। परमेश्वर न करे कि हम चुप रहें। स्वयं यहोवा ने हमें आज्ञा दी है कि हम अपने पड़ोसी को अवश्य डाँटें, परिणाम चाहे जो भी हों।

और हम उन्हें डाँटेंगे, चाहे सारा नरक इसके विरुद्ध उठ खड़ा हो।

क्या हम चुप रहें और आँखें मूँदकर दास-प्रथा के पाप में सहभागी बनें, जैसे अब तक रहे हैं? परमेश्वर न करे। हम इसके विषय में बोलेंगे, और इसके विरुद्ध अपनी गवाही देंगे, और इस पर प्रार्थना करेंगे, और परमेश्वर और मनुष्य दोनों से इसकी शिकायत करेंगे। स्वर्ग जानेगा, और संसार जानेगा, और नरक जानेगा, कि हम इस पाप के विरुद्ध विरोध प्रकट करते हैं, और जब तक यह मिट न जाए, इसे डाँटते रहेंगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है, “अपने पड़ोसी को अवश्य डाँटना,” और हमें ऐसा करना ही होगा।

इसी प्रकार शराब का व्यापारी बराबर यही दुहाई देता रहता है, “मैं क्या करता हूँ इससे आपका कोई सरोकार नहीं; कृपया अपने काम से काम रखिए, और मुझे छोड़ दीजिए।” परन्तु जब वह अपना विष बाँटता है तब उसे डाँटना हमारा काम है, और यह हर एक का सरोकार है, और हर मनुष्य उसके अपराध को तब तक डाँटने के लिए बाध्य है जब तक कि वह उसे छोड़ न दे, और अपने पड़ोसियों के प्राणों और आत्माओं को नष्ट करना बन्द न कर दे।

6. हम धर्म में एकरूपता के महत्व को देखते हैं।

यदि कोई मनुष्य परमेश्वर से प्रेम करने का दावा करता है, तो उसमें इतनी एकरूपता होनी चाहिए कि वह परमेश्वर का विरोध करनेवालों को डाँटे। यदि मसीही इस कर्तव्य में केवल एकरूप होते, तो इसके द्वारा बहुत से लोगों का मन-परिवर्तन होता, एक सही लोकमत बनता, और पाप डाँटा जाता और मसीही डाँट के प्रताप के आगे पीछे हटने को विवश होता। यदि मसीही ऐसे कायर न होते, और परमेश्वर की इस स्पष्ट आज्ञा के प्रति पूरी तरह अवज्ञाकारी न होते, तो इसका एक परिणाम निश्चय ही निकलता — या तो वे शहीदों के रूप में गलियों में मार डाले जाते, क्योंकि मनुष्य सत्य की असहनीय उपस्थिति को सह न पाते, या वे शीघ्र ही परमेश्वर की ओर फिर जाते।

तो फिर, धर्म का अंगीकार करनेवाले ऐसे लोगों से हम क्या कहें? पापियों को डाँटने से डरते हैं! जब परमेश्वर आज्ञा देता है, तब भी मानने को तैयार नहीं? वे परमेश्वर को इसका क्या उत्तर देंगे?

अब, प्रियो, क्या आप इस कर्तव्य का पालन करेंगे? क्या आप पाप को विश्वासयोग्यता से डाँटेंगे, ताकि आपको अपने पड़ोसियों के कारण पाप का भार न उठाना पड़े? क्या आप अपने सारे जीवन को पाप के विरुद्ध एक गवाही बना देंगे? क्या आप अपने प्राणों को निर्दोष ठहराएँगे, या आप चुप रहेंगे और अपने चारों ओर के, और अपने प्रभाव के क्षेत्र के भीतर के सब अपराधियों के दोष से दबे रहेंगे? परमेश्वर कहता है, “अपने पड़ोसी को अवश्य डाँटना, और उसके कारण पाप का भार न उठाना।”

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