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प्रायः धर्म का अंगीकार करनेवालों को फ़ैशन की चरम सीमा तक जाते देखते हैं। जो फ़ैशन के शिखर पर न हो, ऐसी कोई भी बात उन्हें सन्तुष्ट नहीं करती। और कोई मसीही दर्ज़िन, जो विवेक के कारण फ़ैशनों के पीछे चलने का विरोध करती है, अपनी रोटी नहीं कमा सकती। जब तक वह फ़ैशनों के सब अनगिनत परिवर्तनों के पीछे न चले, तब तक उसे मसीही होने का अंगीकार करनेवाली महिलाओं के बीच भी काम नहीं मिल सकता। परमेश्वर जानता है कि ऐसा ही है, और यदि उनका विवेक उन्हें फ़ैशन के परिवर्तनों के पीछे चलने की अनुमति न दे, तो उन्हें अपना धन्धा छोड़ना ही पड़ेगा।
3. यह सदृशता संसार की आत्मा का व्यापक और पूर्ण समर्थन है।
इस सारे बदलते हुए दृश्य की जड़ में क्या है? वह कौन-सा कारण है जो यह सारा भड़कीला दिखावा, और ठाठ-बाट, और प्रदर्शन उत्पन्न करता है? वह वाहवाही का प्रेम है। और जब
मसीही फ़ैशन के परिवर्तनों के पीछे चलते हैं, तो वे इस सब को निर्दोष ठहराते हैं। धन और समय और विचार का यह सारा अपव्यय, दम्भ और वाहवाही के प्रेम का यह सारा पालन-पोषण, इन सब पर कलीसिया अपनी मुहर लगा देती है, जब वह संसार के सदृश बनती है।
4. यही नहीं, एक और कारण यह है कि संसार के फ़ैशनों के पीछे चलकर मसीही होने का अंगीकार करनेवाले यह दिखाते हैं कि वे वास्तव में संसार से प्रेम रखते हैं।
वे इसे अपने आचरण से दिखाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भक्तिहीन लोग उसी आचरण से इसे दिखाते हैं। जब वे एक-सा आचरण करते हैं, तो वे इस बात का प्रमाण देते हैं कि वे एक ही सिद्धान्त से, अर्थात फ़ैशन के प्रेम से, प्रेरित हैं।
5. जब मसीही होने का अंगीकार करनेवाले ऐसा करते हैं, तो वे बहुत स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि वे मनुष्यों की प्रशंसा से प्रेम रखते हैं।
यह स्पष्ट है कि वे पापियों के समान ही सराहना और चापलूसी से प्रेम रखते हैं। क्या उन्हीं बातों में सीधे जा घुसना, जिन्हें भक्तिहीनों के घमण्ड और फ़ैशन और अभिलाषा ने खड़ा किया है, मसीही सिद्धान्त से असंगत नहीं है?
6. फ़ैशन में संसार के सदृश बनकर आप यह दिखाते हैं कि आप अपने आप को उस रीति के लिए परमेश्वर के प्रति उत्तरदायी नहीं मानते जिस रीति से आप धन ख़र्च करते हैं।
आप व्यावहारिक रूप से उस धन के भण्डारीपन को अस्वीकार करते हैं जो आपके अधिकार में है। अपने दम्भ और अभिलाषा को तृप्त करने के लिए धन ख़र्च करके आप उस सत्य की तीखी धार को भोथरा कर देते हैं, जो उस पापी को, जो अपने ही लिए जी रहा है, काटकर दो टुकड़े कर देना चाहिए। यह व्यावहारिक रूप से इस बात का इनकार करना है कि पृथ्वी प्रभु की है, हज़ारों पहाड़ों के पशुओं समेत, और सब कुछ उसकी महिमा के लिए काम में लाया जाना चाहिए।
7. आप दिखाते हैं कि प्रतिष्ठा आपकी मूर्ति है।
जब हर हवा के साथ सब जातियों के अज्ञानी और खोए हुए लोगों की यह पुकार आपके कानों तक आती है, “पार उतरकर आओ और हमारी सहायता करो, पार उतरकर आओ और हमारी सहायता करो,” और हर सप्ताह कोई न कोई पुकार आती है कि जो लोग ज्ञान के न होने से नाश हो रहे हैं उनके पास सुसमाचार भेजा जाए, पर्चे, और बाइबलें, और मिशनरी भेजे जाएँ, तब यदि आप फ़ैशनों के पीछे चलने में धन ख़र्च करना चुनते हैं, तो यह इस बात का प्रमाण है कि प्रतिष्ठा आपकी मूर्ति है। अब, तर्क के लिए मान लीजिए कि परमेश्वर के वचन में फ़ैशनों के पीछे चलना वर्जित नहीं है, और मसीही होने का अंगीकार करनेवाले,
