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क्या आप परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाने का, पापों की क्षमा का, परमेश्वर के साथ संगति का बोध अनुभव करते हैं?
यदि यह है, तो यह अनुभव की बात होगी। यह न सोचिए कि आप धर्मी ठहराए जाने की दशा में हो सकते हैं, और फिर भी आपके पास उसका कोई प्रमाण न हो। हो सकता है कि वास्तव में आपके प्राण में बड़ी शान्ति भरी हो, और फिर भी आप यह निष्कर्ष न निकालें कि आप धर्मी ठहराए गए हैं। मुझे वह समय याद है जब मेरा मन ऐसी मधुर शान्ति की दशा में था कि मुझे ऐसा लगता था मानो सारी प्रकृति परमेश्वर के बोलने की बाट जोहती हुई कान लगाए है; परन्तु फिर भी मुझे यह पता नहीं था कि यह परमेश्वर की शान्ति है, या यह इस बात का प्रमाण है कि मैं धर्मी ठहराए जाने की दशा में हूँ। मैंने सोचा कि मेरा सारा पाप का बोध जाता रहा है, और मैंने सचमुच उस दोषी ठहराए जाने के बोध को, जो पहले मुझमें था, वापस लाने का प्रयत्न किया। मैंने यह निष्कर्ष तब तक नहीं निकाला कि मैं धर्मी ठहराया गया हूँ, जब तक कि पवित्र आत्मा के द्वारा परमेश्वर का प्रेम मेरे प्राण में इतना उँडेला नहीं गया कि मैं पुकार उठने पर विवश हो गया, “प्रभु, बस, अब मैं और नहीं सह सकता।” मैं नहीं मानता कि जहाँ क्षमा का कार्य हो चुका है, वहाँ दोषी ठहराए जाने का बोध बना रहना सम्भव है।
(4.) क्या आपके पास लेपालकपन की आत्मा है? यदि आप धर्मी ठहराए गए हैं, तो आप परमेश्वर की प्रिय सन्तानों में से एक के रूप में गोद भी लिए गए हैं, और उसने अपने आत्मा को आपके हृदय में भेजा है, कि आप स्वाभाविक रूप से पुकारें, “हे अब्बा, हे पिता!” वह आपको ठीक एक पिता के समान लगता है, और आप उसे पिता कहना चाहते हैं। क्या आप इसके विषय में कुछ जानते हैं? परमेश्वर को स्वर्ग में रहनेवाला अपना पिता कहना एक बात है, और उसके प्रति पिता के समान भावना रखना दूसरी बात। जब परमेश्वर लेपालकपन की आत्मा देता है, तो यह धर्मी ठहराए जाने की दशा का एक प्रमाण है।
I. मैं आज रात अपने सब प्रिय श्रोताओं के पास जाकर उनसे एक-एक करके पूछना चाहता हूँ, “क्या आप धर्मी ठहराए जाने की दशा में हैं? क्या आप ईमानदारी से यह सोचते हैं कि आप धर्मी ठहराए गए हैं?”
मैंने संक्षेप में इस विषय पर दृष्टि डाली है, और दिखाया है कि धर्मी ठहराया जाना क्या नहीं है, और क्या है, आप कैसे उद्धार पा सकते हैं, और धर्मी ठहराए जाने के प्रमाण क्या हैं।
क्या यह आपको प्राप्त है? क्या आप अभी मरने का साहस करेंगे? मान लीजिए कि अन्तिम तुरही का प्रचण्ड गर्जन अभी सारे ब्रह्माण्ड को हिला दे, और आप परमेश्वर के पुत्र को न्याय के लिए आते देखें — क्या आप तैयार हैं? क्या आप शान्ति से ऊपर देखकर कह सकेंगे, “पिता, यह एक गम्भीर दृश्य है, परन्तु मसीह मर चुका है, और परमेश्वर ने मुझे धर्मी ठहराया है, और कौन है जो मुझे दोषी ठहराएगा?”
II. यदि आप सोचते हैं कि आप कभी धर्मी ठहराए गए थे, और फिर भी इस समय आपके पास उसका प्रमाण नहीं है, तो मैं एक बात पूछना चाहता हूँ। क्या आप वाचा की ताड़ना के अधीन हैं? यदि नहीं, तो क्या आपके पास यह विश्वास करने का कोई कारण है कि आप कभी धर्मी ठहराए गए थे? यदि आप मसीह के हैं, तो आपके साथ परमेश्वर की वाचा यह है, “यदि वे पीछे हटें, तो मैं उनके अधर्म का दण्ड सोंटे से दूँगा, और कोड़ों से उनकी ताड़ना करूँगा।”
क्या आप कोड़ों की मार अनुभव करते हैं? क्या परमेश्वर आपके मन को जगा रहा है, और आपके विवेक को पाप का बोध करा रहा है; क्या वह आपको मार रहा है? यदि नहीं, तो इस बात के प्रमाण कहाँ हैं कि वह आपके साथ पुत्र का सा व्यवहार कर रहा है? यदि आप परमेश्वर के साथ नहीं चल रहे हैं, और साथ ही ताड़ना के अधीन भी नहीं हैं, तो आपके पास यह विश्वास करने का कोई ठोस कारण नहीं हो सकता कि आप परमेश्वर की सन्तान हैं।
III. आप में से जिनके पास यह प्रमाण है कि आप धर्मी ठहराए गए हैं, उन्हें परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध को बनाए रखना चाहिए, और अपने वास्तविक अधिकारों के अनुसार जीवन बिताना चाहिए। यह अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसमें कोई सद्गुण नहीं है
