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इसी प्रकार किसी भी अच्छी वस्तु का दुरुपयोग हो सकता है। परन्तु यह इस बात का कोई कारण नहीं कि उसका उपयोग न किया जाए, यदि वह अच्छी सिद्ध की जा सकती है। मैं यह बात आपत्ति करनेवाले पर ही लौटाता हूँ:
क्या यह इस बात का कोई कारण है कि कोई मसीही स्त्री, जो परमेश्वर का भय मानती है और मनुष्यों के प्राणों से प्रेम करती है, उन साधनों की उपेक्षा करे जिनसे यह छाप पड़ सकती है कि वह संसार से अलग है, और जिनसे वह भक्तिहीनों के उन फ़ैशनों पर तिरस्कार डाल सकती है जिनमें वे नाचते हुए नरक की ओर बढ़ रहे हैं?
आपत्ति। “यह एक छोटी सी बात है, और इस पर एक सेवक को मंच पर इतना समय नहीं लगाना चाहिए।”
यह आपत्ति सांसारिक अंगीकार करनेवालों से अक्सर सुनने में आती है। परन्तु जो सेवक परमेश्वर का भय मानता है वह इससे रुकेगा नहीं। वह इस विषय को तब तक आगे बढ़ाता रहेगा, जब तक ऐसे अंगीकार करनेवाले मसीही या तो संसार के सदृश बनने से कट न जाएँ, या कलीसिया से ही काट न दिए जाएँ। केवल वस्त्र, वस्त्र के रूप में, नहीं, बल्कि वस्त्र और फ़ैशन में संसार के सदृश बनना ही पापियों के मार्ग में बड़ी ठोकर है। जब तक अंगीकार करनेवाले
मसीही संसार के सदृश बने हुए हैं, तब तक संसार का मन-परिवर्तन कैसे हो सकता है? जब मसीही अपने देश में ऐसा जीवन बिताते हैं, तो अन्यजातियों के पास सुसमाचार भेजने के लिए धन देने से क्या भलाई होगी? अन्यजाति ठीक ही पूछ सकते हैं, “मसीही बनने से क्या लाभ होगा, जब जो मसीही हैं वे भक्तिहीनों की सी पूरी उतावली के साथ संसार के पीछे दौड़ रहे हैं?” कलीसिया के लिए सबसे आवश्यक बात यह है कि वह संसार के सदृश बनना छोड़ दे, और तब प्रार्थना में परमेश्वर के साथ उसकी सामर्थ होगी, और पवित्र आत्मा उतरकर उसके प्रयत्नों को आशीष देगा, और संसार का मन-परिवर्तन हो जाएगा।
आपत्ति। “परन्तु यदि हम ऐसे वस्त्र पहनेंगे, तो हम कट्टरपंथी कहलाएँगे।”
भक्तिहीन लोग आपको चाहे जो कहें — कट्टरपंथी, मेथोडिस्ट, या कुछ भी — आप मसीहियों के रूप में पहचाने जाएँगे, और मनुष्यों के गुप्त विवेक में आप ऐसे ही स्वीकार किए जाएँगे। अविश्वासियों के बस में यह नहीं है कि वे ऐसी पवित्र कलीसिया पर तिरस्कार डाल सकें जो संसार से अलग है। आरम्भिक मसीहियों के साथ क्या हुआ था? वे संसार से अलग रहते थे, और इसका ऐसा प्रभाव पड़ा कि नास्तिक लेखक भी उनके विषय में कहते हैं, “ये लोग जनसाधारण का मन जीत लेते हैं, क्योंकि वे अपने आप को दया के कामों में लगा देते हैं, और संसार पर तिरस्कार डालते हैं।” निश्चय जानिए, यदि मसीही अब ऐसा जीवन बिताएँ, तो सुसमाचार के फैलाव को रोकने के लिए नरक का अन्तिम प्रयत्न भी शीघ्र ही व्यर्थ हो जाएगा। लहर पर लहर चारों ओर बहती जाएगी, यहाँ तक कि सबसे ऊँचे पहाड़ों की चोटियाँ भी जीवन के जल से ढँक जाएँगी।
3. राजनीति के विषय में।
आपत्ति। “इस रीति से, इन सिद्धान्तों पर चलने और राजनीति में संसार के साथ मिलने से इनकार करने से, शासन और राष्ट्रीय मामलों में हमारा कोई प्रभाव नहीं रहेगा।”
मैं उत्तर देता हूँ, पहला, अभी भी तो ऐसा ही है। मसीहियों का, मसीहियों के रूप में, कोई प्रभाव नहीं है। एक भी मसीही सिद्धान्त इसलिए नहीं अपनाया जाता कि वह मसीही है, या इसलिए कि वह परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार है।
मैं उत्तर देता हूँ, दूसरा, यदि मसीहियों के लिए शासन में प्रभाव रखने का इसके सिवा और कोई मार्ग नहीं कि वे अपने नित्य के सिद्धान्तों और दलबन्दियों में संसार के सदृश बन जाएँ, तो भक्तिहीनों को शासन ले लेने दीजिए और उसे अपने ढंग से चलाने दीजिए, और आप जाकर परमेश्वर की सेवा कीजिए।
