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संसार की, प्रतिष्ठा की, धन, सम्मान और सुख की शून्यता देखेगा। पहले इसी की आशा रखना, विश्वास का प्रयोग करने की तैयारी के रूप में, उलटे सिरे से आरम्भ करना है। यह उस बात को विश्वास की तैयारी के रूप में खोजना है, जो सदा विश्वास का परिणाम होती है।
IV. सिद्ध विश्वास सिद्ध प्रेम उत्पन्न करेगा।
जब मन मसीह को उचित रूप से पहचान लेता है, और उसे उसके विभिन्न सम्बन्धों में ग्रहण करता है; जब विश्वास अडिग होता है और दृष्टि स्पष्ट होती है, तब मन में परमेश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध कुछ भी शेष न रहेगा।
V. स्थायी विश्वास स्थायी प्रेम उत्पन्न करेगा।
बढ़ता हुआ विश्वास बढ़ता हुआ प्रेम उत्पन्न करेगा। और यहाँ आपको ध्यान देना चाहिए कि प्रेम हर समय सिद्ध हो सकता है, और फिर भी भिन्न-भिन्न समयों पर भिन्न-भिन्न मात्रा में हो सकता है। एक व्यक्ति परमेश्वर से सिद्ध रूप से और अनन्त काल तक प्रेम कर सकता है, और फिर भी उसका प्रेम सारी अनन्तता तक बल में बढ़ता जा सकता है, जैसा कि मेरा अनुमान है कि वह बढ़ेगा भी।
जैसे-जैसे महिमा में पहुँचे हुए पवित्र लोग परमेश्वर की उत्तमताओं को अधिकाधिक देखेंगे, वे उससे अधिकाधिक प्रेम करेंगे, और फिर भी सारे समय उनका प्रेम सिद्ध रहेगा। अर्थात्, मन में प्रेम से असंगत कुछ भी न होगा, जबकि परमेश्वर के चरित्र के विषय में उनकी दृष्टि के खुलते जाने के साथ-साथ प्रेम की मात्रा भिन्न-भिन्न होगी। जब परमेश्वर उनकी दृष्टि के सामने अपने महिमामय परोपकार की अद्भुत बातें खोलता है, तो उनके प्राण परमेश्वर के प्रति नए प्रेम से पुलकित हो उठेंगे। इस जीवन में प्रेम के अभ्यास की मात्रा में बहुत अन्तर होता है। कभी-कभी परमेश्वर अपने पवित्र लोगों के सामने अपने शासन की अद्भुत बातें खोलता है, और उन्हें ऐसे दर्शन देता है जो शरीर को लगभग धराशायी कर देते हैं, और तब प्रेम की मात्रा बहुत बढ़ जाती है। और फिर भी हो सकता है कि प्रेम पहले भी सिद्ध रहा हो; अर्थात्, परमेश्वर के प्रति प्रेम सर्वोच्च और एकनिष्ठ था, और उसमें किसी असंगत भावना का कोई मेल न था। और यह मान लेना अनुचित नहीं कि सारी अनन्तता तक ऐसा ही होगा; कि ऐसे अवसर आएँगे जिनमें परमेश्वर की महिमा के नए प्रकटीकरणों के द्वारा पवित्र लोगों का प्रेम और भी सजीव अभ्यास में लाया जाएगा। जैसे-जैसे परमेश्वर उनके सामने एक के बाद एक अद्भुत बात प्रकट करेगा, उनका प्रेम असीम रूप से बढ़ता जाएगा, और सारी अनन्तता तक उसके बल और उत्साह में निरन्तर बढ़ती हुई वृद्धि होती रहेगी।
मेरा विचार था कि तुरन्त होनेवाले और क्रमिक पवित्रीकरण के विषय पर कुछ बातें कहूँ। परन्तु आज रात समय नहीं है, और उन्हें आगे के लिये टालना पड़ेगा।
VI. प्रियो, आप इस विषय से देखते हैं कि आप किस रीति से पवित्र बनाए जा सकते हैं, और कब आपका पवित्रीकरण हो सकता है।
जब कभी आप मसीह के पास आएँगे, और जो कुछ वह है उस सब के रूप में उसे ग्रहण करेंगे, और अनुग्रह के द्वारा सम्पूर्ण उद्धार स्वीकार करेंगे, तब जो कुछ मसीह आपके लिये है, वह सब आपको प्राप्त होगा—ज्ञान, और धार्मिकता, और पवित्रीकरण, और छुटकारा। अविश्वास के सिवाय और कोई बात आपको अभी इस सब का आनन्द लेने से नहीं रोकती। आपको किसी तैयारी की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं। कोई भी तैयारी किसी काम की नहीं। आपको सम्पूर्ण उद्धार सेंत-मेंत के दान के रूप में ग्रहण करना होगा। आप कब इस प्रकार मसीह को थामेंगे? आप कब विश्वास करेंगे? विश्वास, सच्चा विश्वास, सदा प्रेम के द्वारा कार्य करता है, और हृदय को शुद्ध करता है, और संसार पर जय पाता है। जब कभी आप अपने मार्ग में कोई कठिनाई पाएँ, तो आप जान सकते हैं कि बात क्या है। यह विश्वास की घटी है। बाहरी रूप से आप पर चाहे जो भी बीते: यदि आप पाते हैं कि आप धर्म में पीछे धकेल दिए गए हैं, या आपका मन पूरी तरह उलझन में पड़ गया है, तो अविश्वास
