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13. वे रीति-रिवाज के आगे वह बात मान लेंगे जिसे वे जानते हैं कि वह धर्म के काम के लिए, और मानवजाति के कल्याण के लिए हानिकारक है।
इसका एक स्पष्ट उदाहरण नए वर्ष का दिन मनाने के ढंग में पाया जाता है। कौन नहीं जानता कि नए वर्ष का दिन मनाने का प्रचलित ढंग—अपना दाखरस और अपने स्वादिष्ट केक सजाकर रखना, और महँगी दावतें देना, और दिन को उस प्रकार बिताना जैसे वे बिताते हैं—धन की बर्बादी है, स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, और उनके अपने प्राणों के लिए तथा धर्म के हितों के लिए हानिकारक है?
और फिर भी वे ऐसा करते हैं। क्या हमसे यह कहा जाएगा कि जो लोग यह जानते हुए भी कि यह हानिकारक है, ऐसा करेंगे, वे परमेश्वर से सर्वोपरि प्रेम करते हैं? मुझे परवाह नहीं कि कौन ऐसे रिवाज का बचाव करने का प्रयत्न करता है; यह गलत है, और हर मसीही को यह अवश्य जानना चाहिए कि यह गलत है। और जो लोग बेहतर जानते हुए भी इस पर अड़े रहते हैं, वे यह प्रमाणित कर देते हैं कि परमेश्वर के प्रति सर्वोपरि आदर उनके जीवन का नियम नहीं है।
14. वे जनमत की आज्ञा मानकर संदिग्ध प्रकार के काम करेंगे, या ऐसे काम जिनके उचित होने पर उन्हें प्रबल संदेह है।
आपको स्मरण होगा कि वर्ष के पहले दिन की शाम को मैंने यह विषय उठाया था, और दिखाया था कि जो लोग संदिग्ध प्रकार के काम करते हैं, जिनके उचित होने के विषय में वे संतुष्ट नहीं हैं, वे उसके लिए परमेश्वर की दृष्टि में दोषी ठहरते हैं।
15. वे प्रायः अपना कर्तव्य करने में “लजाते” हैं, और इतना लजाते हैं कि उसे करते ही नहीं।
अब जब कोई व्यक्ति परमेश्वर की माँग को पूरा करने में इतना लजाता है कि उसे करता ही नहीं, तो स्पष्ट है कि उसकी अपनी प्रतिष्ठा उसकी मूर्ति है। आप कितनों को पाते हैं जो यीशु मसीह को मान लेने से लजाते हैं, ऊँचे स्थानों में हो या नीचे स्थानों में, पाप को डाँटने से लजाते हैं, और जब धर्म पर आक्रमण होता है तो खुलकर बोलने से लजाते हैं! यदि वे परमेश्वर का सर्वोपरि आदर करते, तो क्या वे कभी अपना कर्तव्य करने से लजा सकते थे? मान लीजिए किसी मनुष्य की पत्नी की झूठी निन्दा की जाए, तो क्या वह अपनी पत्नी का बचाव करने में लजाएगा? कदापि नहीं। यदि उसके बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जाए, तो क्या वह उनका पक्ष लेने में लजाएगा? यदि वह उनसे प्रेम करता है तो नहीं; लज्जा वह बात न होगी जो उसे अपनी पत्नी या बच्चों का बचाव करने से रोके। यदि कोई मनुष्य अपने देश की सरकार के प्रशासन का हितैषी हो, और उसकी झूठी निन्दा सुने, तो क्या वह उसका बचाव करने में लजाएगा? हो सकता है कि वह दूसरे कारणों से बोलना उचित न समझे; परन्तु यदि वह सरकार का सच्चा मित्र है, तो वह कहीं भी उसके पक्ष में बोलने से “लजाएगा” नहीं।
अब जिस प्रकार के लोगों के विषय में मैं बोल रहा हूँ, वे जब सत्य के शत्रुओं के बीच होते हैं, जहाँ ऐसा करने पर उनकी निन्दा होती, तो दृढ़ पक्ष नहीं लेंगे। जब वे सत्य के मित्रों के बीच होते हैं तो सत्य के लिए बड़े निडर होते हैं, और अपने साहस का बड़ा प्रदर्शन करते हैं।
परन्तु जब परीक्षा की घड़ी आती है, तो वे दुष्टता को डाँटने, या उसके शत्रुओं के बीच उसके पक्ष में खुलकर बोलने के बजाय, प्रभु यीशु मसीह को बेच देंगे, या उसके शत्रुओं के सामने उसका इनकार करेंगे, और प्रगट में उस पर कलंक लगाएँगे।
16. व्यावहारिक विषयों पर बढ़ती हुई ज्योति के द्वारा उनके भोग-विलास पर होनेवाले हर अतिक्रमण का वे विरोध करते हैं।
हर उस नए प्रस्ताव से वे बहुत बेचैन हो जाते हैं जो उनकी जेबों पर भार डालता है, या उनके आदतन भोग-विलास में बाधा डालता है। और आप चाहे जितनी बातें करें, और चाहे जितना प्रचार करें
