व्याख्यान 32 (253 में से)

9. पाप करनेवाले अपने पड़ोसी को डाँटकर, आप उसे बचा सकते हैं।

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अध्याय 4: डाँटना — एक मसीही कर्तव्य।

9. पाप करनेवाले अपने पड़ोसी को डाँटकर, आप उसे बचा सकते हैं।

समय पर दी गई ताड़ना से कितने असंख्य लोग सुधर गए हैं। जो लोग उद्धार पाते हैं उनमें से अधिकांश इसी प्रकार उद्धार पाते हैं कि कोई उन्हें उनके पापों के लिए डाँटता है और उनसे पश्चाताप करने का आग्रह करता है; यदि आप किसी भी मनुष्य से बात करें, और उसे डाँटें, और उसके लिए प्रार्थना करें, जैसा आपको करना चाहिए, तो आप उसके उद्धार का साधन बन सकते हैं। कितने ही उदाहरण हैं जहाँ एक ही ताड़ना अपराधी के प्राण में काँटेदार तीर के समान बन गई, जो चुभती रही, और चुभती रही, और जिसका विष उसकी आत्मा को सोखता रहा, जब तक कि उसने परमेश्वर के आगे अपने आप को समर्पित न कर दिया। मैं ऐसे उदाहरण जानता हूँ जहाँ ताड़ना की एक दृष्टि ने भी यह काम कर दिया।

10. यदि आप उस व्यक्ति को नहीं बचा पाते जिसे आपने डाँटा, तो भी आपकी ताड़ना किसी और को बचा सकती है जो इस बात से परिचित हो।

ऐसी घटनाएँ बहुधा हुई हैं, जहाँ अपराधी तो वापस नहीं लाया गया, परन्तु उसे दी गई डाँट के द्वारा दूसरे लोग उसके उदाहरण पर चलने से रुक गए। कौन सन्देह कर सकता है कि यदि धर्म का अंगीकार करनेवाले इस कर्तव्य में विश्वासयोग्य होते, तो मनुष्य उनकी ताड़नाओं का सामना करने से डरते, और वह डर उन्हें ऐसे आचरण से रोक देता, और असंख्य लोग जो अब बिना लज्जा और बिना भय के चले जा रहे हैं, ठहरकर सोचते, और लौटाए जाते और उद्धार पाते? क्या आप, विश्वासयोग्यता के लिए ऐसा तर्क अपने सामने रखकर भी, पापियों को बिना डाँटे तब तक चलते रहने देंगे जब तक वे ठोकर खाकर नरक में न जा गिरें?

11. परमेश्वर स्पष्ट रूप से इसकी माँग करता है।

मूल भाषा में इस पद की भाषा अत्यन्त प्रबल है। शब्द को दोहराया गया है, जो इब्रानी भाषा में सर्वोच्च भाव प्रकट करने की रीति है, ताकि मन में कोई सन्देह न रहे, कर्तव्य के विषय में तनिक भी अनिश्चितता न रहे, और न उसे न करने का कोई बहाना रहे। बाइबल में परमेश्वर की इससे अधिक प्रबल कोई आज्ञा नहीं है। परमेश्वर ने इसे भाषा की सबसे बड़ी प्रबलता दी है जो वह दे सकता है। “तू उसे अवश्य डाँटना,” अर्थात् बिना किसी बहाने के,

“और उसका पाप न उठाना,” अर्थात् उसके विनाश में सहअपराधी न बनना। कानून का यह एक सूत्र है कि यदि कोई मनुष्य जानता है कि कोई हत्या होने वाली है और उसे रोकने के साधनों का उपयोग नहीं करता, तो वह घटना से पहले का सहअपराधी माना जाएगा। यदि वह किसी हत्या के विषय में जानता है जो हो चुकी है, और अपराधी को न्याय तक पहुँचाने का यत्न नहीं करता, तो वह घटना के बाद का सहअपराधी है। उसी प्रकार परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार, यदि आप किसी जाने-पहचाने अपराधी को पश्चाताप तक पहुँचाने का यत्न नहीं करते, तो आप उसके अपराध के दोष में फँसे हुए हैं, और परमेश्वर के सिंहासन के सामने उत्तरदायी ठहराए जाते हैं।

12. यदि आप इसे सही रीति से करते हैं, तो अपने पड़ोसी के विषय में आपका विवेक निर्दोष बना रहेगा, चाहे उसका अन्त कुछ भी हो।

और पाप को डाँटने में विश्वासयोग्य हुए बिना आप ऐसा नहीं कर सकते। कोई मनुष्य परमेश्वर या मनुष्य के प्रति विवेकपूर्ण जीवन नहीं जीता, जब तक कि उसे उन अपराधियों को डाँटने की आदत न हो जो उसके प्रभाव के भीतर हैं। कलीसिया में विवेक के इतना कम होने का यह एक बड़ा कारण है। किस बात में धर्म का अंगीकार करनेवाले अपने विवेक का विरोध करने के इतने अभ्यस्त हैं, जितने पाप को डाँटने के कर्तव्य के विषय में? यहाँ बाइबल की सबसे प्रबल आज्ञाओं में से एक है, और फिर भी असंख्य लोग उस पर तनिक भी ध्यान नहीं देते। क्या उनका विवेक शुद्ध हो सकता है? वे उतनी ही आसानी से शुद्ध विवेक का दावा कर सकते हैं, और फिर भी हर

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