व्याख्यान 79 (253 में से)

नहीं? वह ऐसा करना चाहती ही नहीं। वह अपने पाँवों के लिए एक जोड़ी जूते भी मुश्किल से ख़रीदेगी; उसे अखरती है

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नहीं? वह ऐसा करना चाहती ही नहीं। वह अपने पाँवों के लिए एक जोड़ी जूते भी मुश्किल से ख़रीदेगी; जो रोटी वह खाती है वह भी उसे लगभग अखरती है, अपने उस महान लक्ष्य में वह इतनी लीन है।

अब मान लीजिए कि कोई व्यक्ति परमेश्वर से, और मनुष्यों के प्राणों से, और मसीह के राज्य से प्रेम रखता है, तो क्या उसे अपना धन और अपना जीवन फ़ैशन के पीछे चलने में ख़र्च करने से रोकने के लिए परमेश्वर की ओर से किसी स्पष्ट निषेध की आवश्यकता है? नहीं, कदापि नहीं, बल्कि उसे तो इस बात की स्पष्ट आज्ञा की आवश्यकता होगी कि वह अपने सुख और अपने जीवन के निर्वाह के लिए जो आवश्यक है उसे ले। तीमुथियुस का उदाहरण लीजिए। क्या उसे दाखमधु के सेवन में लिप्त होने से रोकने के लिए किसी निषेध की आवश्यकता थी?

उससे कहीं दूर, वह इतना सावधान था कि उसे औषधि के रूप में थोड़ा-सा पीने के लिए परमेश्वर की ओर से एक स्पष्ट आज्ञा की आवश्यकता पड़ी। यद्यपि वह बीमार था, फिर भी जब तक उसे इसके लिए परमेश्वर का वचन न मिला, उसने उसे नहीं पिया; वह उसकी बुराइयों को इतनी स्पष्टता से देखता था। अब, मुझे कोई ऐसा पुरुष या स्त्री दिखाइए, उनका अंगीकार चाहे जो भी हो, जो संसार के फ़ैशनों के पीछे चलता है, और मैं आपको दिखा दूँगा कि वे किस आत्मा के हैं।

आप अपने आप को घमण्ड और मूर्खता और सांसारिक आत्मा की परीक्षा में डालते हैं।

मान लीजिए कि कोई मनुष्य जो पियक्कड़ रहा था और सुधर गया था, जाकर अपने चारों ओर दाखमधु और ब्राण्डी और हर प्रकार की लुभानेवाली मदिरा रख ले, भूख भड़कानेवाली वस्तु को सदा अपनी आँखों के सामने रखे, और समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा चखता रहे; तो क्या वह अपने आप को परीक्षा में नहीं डालता? अब उस स्त्री को देखिए जो घमण्ड और दिखावे की आत्मा में पली-बढ़ी है, और जो सुधर गई है, और जिसने उन सब को त्याग देने का अंगीकार किया है; यदि वह इन आडम्बरों को अपने पास रखे, और फ़ैशनों के पीछे चलती रहे, तो उसके जीवन की शपथ, घमण्ड उसे पीछे घसीट ले जाएगा। वह अपने आप को पाप और मूर्खता की परीक्षा में डालती है।

12. आप संसार को परीक्षा में डाल रहे हैं।

आप संसार को इन वस्तुओं के पीछे और भी उग्र और तीव्र दौड़ में लगा रहे हैं। वे ही वस्तुएँ जिनसे संसार प्रेम रखता है, और जिनके उचित होने के विषय में उसे अवश्य ही संकोच होता है, मसीही होने का अंगीकार करनेवाले उन्हीं में सम्मिलित हो जाते हैं और उन्हीं के पीछे चलते हैं, और इस प्रकार संसार को उस बात के पीछे लगे रहने की परीक्षा में डालते हैं जो उनके प्राणों को नरक में नाश कर देगी।

13. फ़ैशनों के पीछे चलकर आप शैतान को उकसाते हैं कि वह आपकी परीक्षा करे।

जब आप फ़ैशनों के पीछे चलते हैं, तो आप अपना हृदय उसके लिए खोल देते हैं। आप उसे उसके लिए सूना, झाड़ा-बुहारा और सजा-सजाया रखते हैं। हर वह स्त्री जो अपने आप को फ़ैशनों के पीछे चलने देती है, यह निश्चय जान ले कि वह शैतान को इसमें सहायता दे रही है कि वह उसे घमण्ड और पाप की परीक्षा में डाले।

14. आप मनुष्यजाति के सबसे बड़े भाग के सामने एक बड़ी ठोकर रखते हैं।

कुछ थोड़े-से लोग हैं जो फ़ैशन से बड़े लक्ष्यों के पीछे लगे हुए हैं। वे राजनीतिक सत्ता की छीना-झपटी में लगे हैं, या साहित्यिक ख्याति के लिए उत्सुक हैं, या धन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। और वे नहीं समझते कि उनका मन फ़ैशन पर बिलकुल भी लगा है। वे बड़े पैमाने पर स्वार्थ के पीछे चल रहे हैं। परन्तु समाज का बड़ा भाग अधिकतर इन्हीं बदलते हुए फ़ैशनों से प्रभावित होता है। इस प्रकार के लोगों के लिए यह एक बड़ी और भारी ठोकर है, जब वे मसीही होने का अंगीकार करनेवालों को अपने ही समान तत्परता और उत्सुकता से फ़ैशन के बदलते

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