व्याख्यान 220 (253 में से)

VII. कलीसिया में कामों की बढ़ती पवित्रता में बढ़ती का निश्चित चिह्न नहीं है।

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VII. कलीसिया में कामों की बढ़ती पवित्रता में बढ़ती का निश्चित चिह्न नहीं है।

यदि कलीसिया पवित्रता में बढ़ती है, तो वह कामों में भी बढ़ेगी। परन्तु इससे यह नहीं निकलता कि कामों में बढ़ती सदा पवित्रता में बढ़ती को प्रमाणित करती है।

हो सकता है कि धर्म के काम बहुत बढ़ जाएँ, जबकि धर्म की शक्ति वास्तव में और तेज़ी से घट रही हो। किसी कलीसिया में प्रायः ऐसा होता है कि जब धर्म की जागृति अपनी शक्ति खोने लगती है, तो कलीसिया कामों में पहले से भी अधिक करने को तैयार हो सकती है, परन्तु इससे गिरावट नहीं रुकेगी, जब तक वे परमेश्वर के सामने टूट न जाएँ।

मैं देखता हूँ कि मुझे इस विषय को फिर से उठाना होगा। भला होता कि मैं सारी कलीसिया को यह विश्वास दिला पाता कि उन्हें मसीह के सिवाय और किसी सहायता की आवश्यकता नहीं, और कि वे अपनी हर आवश्यकता के लिये तुरन्त मसीह के पास आएँ, और उसे अपने ज्ञान, और धार्मिकता, और पवित्रीकरण, और छुटकारे के रूप में ग्रहण करें। तब कितनी जल्दी उसकी असीम परिपूर्णता से उनकी सारी घटियाँ पूरी हो जातीं।

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