व्याख्यान 166 (253 में से)

मैं जानता हूँ कि जब लोग पहली बार पाप के बोध के नीचे टूट जाते हैं, और उनके हृदय

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मैं जानता हूँ कि जब लोग पहली बार पाप के बोध के नीचे टूट जाते हैं, और उनके हृदय कोमलता से उमड़ पड़ते हैं, तो वे अपने बीते जीवन पर दृष्टि डालते हैं और अपने आपको दोषी पाते हैं और देखते हैं कि वह सब का सब गलत है, और तब वे परमेश्वर के चरणों में टूटकर गिर पड़ते हैं और अपने आपको यीशु

मसीह को सौंप देते हैं; वे इस विचार से बहुत आनन्दित होते हैं कि अब पाप से उनका नाता टूट गया है। परन्तु थोड़े ही समय में वे पुरानी आदतों और पहले के प्रभावों का दबाव अनुभव करने लगते हैं, और उन सब पर जय पाने से पहले उन्हें इतना कुछ करना दिखाई देता है कि वे प्रायः निराश हो जाते हैं और पुकार उठते हैं, “हाय, मैं क्या

करूँ, जब मुझे इतने सारे शत्रुओं का सामना करना है, और उन पर जय पाने के लिए मुझमें संकल्प का बल और इरादे की दृढ़ता इतनी थोड़ी है?” प्रियो, मैं आपसे कहता हूँ कि यदि परमेश्वर ने आपका उद्धार करने का बीड़ा उठाया है, तो आपको केवल उसके निकट बने रहना है, और वह आपको पार लगा देगा। आपको अपने शत्रुओं से डरने की आवश्यकता नहीं।

चाहे आकाश गरजे और पृथ्वी डोले, और तत्व पिघल जाएँ, तौभी आपको काँपने की, या बाहर के शत्रुओं अथवा भीतर के शत्रुओं से डरने की आवश्यकता नहीं। परमेश्वर आपकी ओर है, तो आपका विरोधी कौन हो सकता है? “फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिए निवेदन भी करता है।”

6. धर्मी ठहराया जाना परमेश्वर के सारे गुणों को आपके पक्ष में लगा देता है, ठीक वैसे ही मानो आपने कभी पाप किया ही न हो।

उस पवित्र स्वर्गदूत को देखिए, जिसे प्रेम के किसी काम पर ब्रह्माण्ड के किसी दूर के भाग में भेजा गया है। परमेश्वर की आँख उसका पीछा करती है, और यदि वह देखता है कि किसी भी प्रकार से उसे हानि पहुँचने की सम्भावना है, तो परमेश्वर के सारे गुण तुरन्त उसकी रक्षा करने और उसे सम्भाले रखने में लग जाते हैं। ठीक इसी पूर्णता से, यदि आप धर्मी ठहराए गए हैं, तो वे सब आपकी रक्षा करने, आपको सम्भालने और आपका उद्धार करने के लिए वचनबद्ध हैं। यद्यपि आप अब भी बचे हुए पाप से मुक्त नहीं हैं, और परमेश्वर के प्रेम के सर्वथा अयोग्य हैं, तौभी यदि आप सचमुच धर्मी ठहराए गए हैं, तो एकमात्र बुद्धिमान और सनातन परमेश्वर आपको ऊपर उठाने के लिए वचनबद्ध है। और क्या ऐसे सहारे के रहते हुए भी आप काँपेंगे और हियाव छोड़ देंगे?

यदि कोई मानवीय सरकार किसी अपराधी को क्षमा कर देती है, तो फिर वह एक प्रजा के रूप में उसकी रक्षा करने के लिए उतनी ही वचनबद्ध होती है, मानो उसने कभी कोई अपराध किया ही न हो। जब परमेश्वर किसी पापी को धर्मी ठहराता है, तब भी ऐसा ही होता है। प्रेरित कहता है, “सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो परमेश्वर के साथ हमारा मेल है।” तब से परमेश्वर उसके पक्ष में है, और उसके विश्वासयोग्य और सनातन मित्र के रूप में वचनबद्ध है।

सुसमाचार के अनुसार धर्मी ठहराया जाना व्यवस्था के अनुसार धर्मी ठहराए जाने से इस बात में भिन्न है: यदि व्यवस्था किसी व्यक्ति को धर्मी ठहराती है, तो वह धर्मी ठहराया जाना केवल तभी तक टिका रहता है जब तक वह निर्दोष बना रहता है। जैसे ही वह एक बार अपराध करता है, उसका पहले का धर्मी ठहराया जाना किसी काम का नहीं रहता। परन्तु जब सुसमाचार किसी पापी को धर्मी ठहराता है, तो ऐसा नहीं होता; बल्कि “यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह।” अब एक नया सम्बन्ध स्थापित होता है, जो पूरी तरह निराला है। पापी अब कर्मों की वाचा के अधीन से निकाल लिया जाता है, और अनुग्रह की वाचा के अधीन रखा जाता है। अब वह परमेश्वर के अनुग्रह को पूर्ण और निष्पाप आज्ञाकारिता की शर्त पर बनाए नहीं रखता। अब यदि वह पाप करता है, तो उसे फिर से व्यवस्था के अधीन धकेल नहीं दिया जाता, बल्कि उसे नई वाचा का लाभ मिलता है। यदि वह विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराया गया है, और इस प्रकार परमेश्वर की सन्तान बनाया गया है, तो उसके साथ सन्तान का सा व्यवहार किया जाता है, और उसे सुधारा जाता है, ताड़ना दी जाती है, दीन किया जाता है, और फिर वापस लाया जाता है। “क्योंकि परमेश्वर अपने वरदानों से, और बुलाहट से कभी पीछे नहीं हटता।” इसका अर्थ यह नहीं कि परमेश्वर पापी को उसके पश्चा-

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