व्याख्यान 165 (253 में से)

IV. अब मैं आगे यह दिखाऊँगा कि धर्मी ठहराए जाने की इस रीति का क्या प्रभाव होता है; अथवा वह

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IV. अब मैं आगे यह दिखाऊँगा कि धर्मी ठहराए जाने की इस रीति का क्या प्रभाव होता है; अथवा वह उन लोगों को, जो धर्मी ठहराए जाते हैं, किस दशा में पहुँचा देती है।

1. ध्यान देने योग्य पहली बात यह है कि जब किसी व्यक्ति को क्षमा किया जाता है, तो व्यवस्था का दण्ड हटा लिया जाता है। क्षमा का पहला प्रभाव यह है कि दण्ड का लागू होना रुक जाता है और रद्द हो जाता है। क्षमा यह स्वीकार करती है कि दण्ड उचित था, परन्तु उसे रद्द कर देती है। तब, जहाँ तक सज़ा का सम्बन्ध है, उस व्यक्ति को व्यवस्था से उससे अधिक डरने की कोई बात नहीं रहती, जितनी तब होती जब उसने कभी अपराध किया ही न होता। वह पूर्णतः मुक्त कर दिया जाता है। अतः जो लोग सच्चे विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराए गए हैं, उन्हें क्षमा पाते ही फिर भय या सज़ा से प्रेरित होने की आवश्यकता नहीं रहती। दण्ड इतनी पूर्णता से रद्द कर दिया जाता है, मानो वह कभी उन पर आया ही न था।

2. क्षमा का अगला प्रभाव यह है कि अपराध के परिणामस्वरूप जो भी दायित्व और अयोग्यताएँ आ पड़ी थीं, वे सब दूर हो जाती हैं, जैसे सम्पत्ति का ज़ब्त होना, या गवाह बनने के अयोग्य होना, या सरकार के अधीन कोई पद धारण करने के अयोग्य होना। सच्ची क्षमा इन सबको दूर कर देती है, और उस व्यक्ति को फिर वहीं पहुँचा देती है जहाँ वह अपराध करने से पहले था। इसी प्रकार, परमेश्वर के शासन के अधीन, क्षमा पाया हुआ पापी परमेश्वर के अनुग्रह में फिर से स्थापित किया जाता है। वह एक नए सम्बन्ध में वापस लाया जाता है, और परमेश्वर के सामने खड़ा होता है, और जहाँ तक व्यवस्था का सम्बन्ध है, परमेश्वर उसके साथ ऐसा व्यवहार करता है मानो वह निर्दोष हो। क्षमा यह नहीं मानती या घोषित करती कि वह वास्तव में निर्दोष है, परन्तु वह उसे उसी दशा में पहुँचा देती है मानो वह निर्दोष हो।

3. परमेश्वर के शासन के अधीन क्षमा का एक और कार्य यह है कि वह व्यक्ति फिर से पुत्र के पद पर स्थापित किया जाता है। दूसरे शब्दों में, क्षमा उसे परमेश्वर के साथ ऐसे सम्बन्ध में ले आती है कि वह वास्तव में परमेश्वर की सन्तान के रूप में ग्रहण किया जाता है और उसके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाता है।

मान लीजिए कि सिंहासन पर बैठे किसी राजा के पुत्र ने हत्या की हो, और वह दोषी सिद्ध होकर मृत्यु-दण्ड का भागी ठहराया गया हो। तब क्षमा न केवल उसे मृत्यु से छुड़ाएगी, बल्कि उसे परिवार में उसका स्थान भी लौटा देगी। परमेश्वर की सारी सन्तान भटक गई है, और शैतान की सेवा में लग गई है; परन्तु जिस क्षण उनके लिए क्षमा जारी होती है, वे वापस लाए जाते हैं; वे लेपालकपन की आत्मा पाते हैं, परमेश्वर के वारिस होने की मुहर उन पर लगाई जाती है, और परमेश्वर की सन्तान के सारे अधिकार उन्हें लौटा दिए जाते हैं।

4. धर्मी ठहराए जाने के द्वारा पूरी होनेवाली एक और बात यह है कि वह उन्हें वह सारा आवश्यक अनुग्रह निश्चित रूप से दिलाता है जिससे वे शैतान के फन्दे से, और उन अनगिनत उलझनों से, जिनमें पाप ने उन्हें फँसा रखा है, अपने आपको पूरी तरह छुड़ा सकें।

प्रियो, यदि परमेश्वर आपको केवल क्षमा कर दे, और फिर आपको छोड़ दे कि आप जैसे-तैसे अपने ही बल से पाप से बाहर निकलें, तो आपकी क्षमा आपके किस काम की होगी? संसार में किसी काम की नहीं। यदि कोई बालक अपने पिता के घर से भाग जाए, और किसी जंगल में भटकता फिरे, और एक गहरे गड्ढे में गिर पड़े, और पिता उसे ढूँढ़ ले और उसे बचाने का बीड़ा उठाए; यदि वह उसे केवल भाग जाने के लिए क्षमा कर दे, तो इसका कोई लाभ न होगा, जब तक कि वह उसे गड्ढे से ऊपर न उठाए और जंगल से बाहर न ले जाए। इसी प्रकार छुटकारे की योजना में, आपको जो भी सहायता और सहारे की आवश्यकता है, यदि आप विश्वास करें तो वे सब आपको निश्चित रूप से दिए जाते हैं। यदि परमेश्वर आपका उद्धार करने का बीड़ा उठाता है, तो वह वह सारी ज्योति, अनुग्रह और सहायता देने का वचन देता है जो शैतान की ज़ंजीरों और पाप की उलझनों को तोड़ने के लिए आवश्यक है, और वह आपको आपके पिता के घर वापस ले आता है।

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