व्याख्यान 22 (253 में से)

कि इतने छोटे-से कारण से मद्यपान का रोग (और आप जानते हैं कि मद्यपान वास्तव में

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कि इतने छोटे-से कारण से मद्यपान का रोग (और आप जानते हैं कि मद्यपान वास्तव में शरीर का एक रोग है) या तो उत्पन्न होगा या बना रहेगा। और न ही मैं यह विश्वास करता हूँ कि इससे संयम के आन्दोलन को उतनी हानि पहुँचेगी जितनी कुछ लोगों ने समझी है। और इसलिए, जहाँ कोई व्यक्ति दाखरस का उपयोग वैसे ही करता है जैसे हम करते आए हैं, और अपने मन में पूरा निश्चय रखता है, वहाँ वह पाप नहीं करता।

(2.) दूसरी ओर, मैं नहीं समझता कि दाखरस का उपयोग इस विधि के लिए किसी भी प्रकार अनिवार्य है। इस विषय पर बहुत कुछ कहा, लिखा और छापा गया है, जिसने अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ दिया है। मेरे मन में यह मानने के लिए, कि दाखरस इस विधि के लिए अनिवार्य नहीं है, उनसे भी अधिक दृढ़ कारण हैं जो मैंने कहीं प्रस्तुत किए हुए देखे हैं। यह प्रमाणित करने के लिए बहुत परिश्रम किया गया है कि जब हमारे उद्धारकर्ता ने प्रभु-भोज की स्थापना की, तब उसने ऐसे दाखरस का उपयोग किया जो खमीरा नहीं हुआ था, और इसलिए जिसमें कोई मद्यसार नहीं था। वास्तव में, विवाद का मुख्य विषय यही रहा है। परन्तु वास्तव में यह उतना ही असंगत प्रतीत होता है जितना इस प्रश्न पर विवाद करना कि उसने गेहूँ की रोटी का उपयोग किया या जई की, या वह खमीरी थी या अखमीरी। हम इस प्रश्न पर ज़ोरदार विवाद क्यों नहीं सुनते? क्योंकि सब इसे अनावश्यक समझते हैं। दाखरस के विषय में इस प्रश्न का निपटारा करने के लिए, हमें यह पूछना चाहिए कि प्रभु-भोज की विधि का अर्थ क्या है। हमारे उद्धारकर्ता का उद्देश्य क्या करना था? उसका उद्देश्य यह था कि जीवन को सहारा देनेवाली दो मुख्य वस्तुओं, अर्थात् भोजन और पेय, को लेकर उनके द्वारा प्रायश्चित की आवश्यकता और उसकी सामर्थ को दर्शाए।

यह स्पष्ट है कि मसीह का इसके विषय में यही दृष्टिकोण था, क्योंकि यह उसके इस कथन से मेल खाता है, “क्योंकि मेरा मांस वास्तव में खाने की वस्तु है और मेरा लहू वास्तव में पीने की वस्तु है।” इसी प्रकार उसने मन्दिर में जल उंडेला, और कहा, “यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए।” उसे “जीवन की रोटी” कहा गया है।

इस प्रकार भोजन और पेय के द्वारा मसीह के दुःखों का मूल्य दिखाने की रीति थी। उसने भोजन की किसी और वस्तु के बदले रोटी ही क्यों ली? जो लोग उस देश के इतिहास और रीति-रिवाजों को जानते हैं, वे देखेंगे कि उसने भोजन की वह वस्तु चुनी जो लोगों में सबसे अधिक प्रचलित थी। जब मैं माल्टा में था, तो ऐसा लगता था मानो वहाँ के अधिकांश लोग केवल रोटी पर ही जीते हैं। वे झुंड के झुंड बाज़ार जाते, और हर एक मोटी रोटी का एक टुकड़ा खरीदता, और खड़ा होकर उसे खा लेता। इस प्रकार मसीह ने अपने मांस को दर्शाने के लिए भोजन की सबसे साधारण और सबके लिए सबसे अधिक स्वास्थ्यकर वस्तु को चुना। तो फिर उसने पीने के लिए दाखरस क्यों लिया?

इसी कारण से; उन सब देशों में दाखरस लोगों का साधारण पेय है, विशेषकर भोजन के समय। वहाँ वह लगभग एक सेंट प्रति बोतल बिकता है, और वहाँ दाखरस उससे भी सस्ता है जितनी यहाँ हल्की बियर।

सिसिली में मुझे बताया गया कि दाखरस पाँच सेंट प्रति गैलन बिकता था, और मैं नहीं कह सकता कि वह लगभग पानी जितना ही सस्ता न रहा हो। और आप ध्यान देंगे कि प्रभु-भोज पहली बार फसह के पर्व के भोज के अन्त में मनाया गया था, जिसमें यहूदी सदा दाखरस का उपयोग करते थे। तो इस विधि में उद्धारकर्ता का अभिप्राय यह है: जैसे भोजन और पेय शरीर के जीवन के लिए अनिवार्य हैं, वैसे ही उसकी देह और उसका लहू, अर्थात् उसका प्रायश्चित, प्राण के जीवन के लिए अनिवार्य है।

जहाँ तक मेरी बात है, मुझे पूरा निश्चय है कि दाखरस प्रभु-भोज के लिए अनिवार्य नहीं है, और यदि कोई व्यक्ति सच्चे विवेक से पानी को अधिक उचित समझे, तो मैं उसे पानी देने में संकोच नहीं करूँगा। बस वह

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