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इस रीति से अच्छा ठहरा लेंगे। यह सब क्यों होता है? पापी को इससे दूर खदेड़ा जाना चाहिए, और उसे यह दिखाया जाना चाहिए कि वह इस पूरे समय व्यवस्था के अधीन उद्धार की खोज कर रहा है। उसे यह दिखाया जाना चाहिए कि यह सब सुसमाचार के द्वारा हटा दिया गया है, जो उसे वह सब कुछ जो उसे चाहिए, केवल एक सेंत-मेंत के दान के रूप में प्रस्तुत करता है। उसे यीशु को यह कहते हुए सुनना चाहिए, “फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते:
ओह, नहीं, तू प्रार्थना करने को, और सभा में जाने को, और बाइबल पढ़ने को, या और कुछ भी करने को तैयार है, पर मेरे पास आने को नहीं। हे पापी, मार्ग यही है; मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूँ। बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता। पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ। जगत की ज्योति मैं हूँ। हे पापी, जो तुझे चाहिए वह यहाँ है।
अपनी स्व-धार्मिक प्रार्थनाओं और प्रयत्नों को आज़माने के बदले, जिसकी तू खोज कर रहा है वह यहाँ है, केवल विश्वास कर तो तू उद्धार पाएगा।”
VII. आप देखते हैं कि धर्म का अंगीकार करनेवाले इतने सारे लोग सदा अन्धकार में क्यों रहते हैं।
वे अपने पापों को देखते रहते हैं, अपने अवलोकन को अपने आप तक ही सीमित रखते हैं, और इस तथ्य को आँखों से ओझल कर देते हैं कि उन्हें केवल यीशु मसीह को ठीक रीति से थामना है, और अपने आप को उस पर डाल देना है, और तब सब कुछ ठीक है।
VIII. व्यवस्था मनुष्यों को पाप का बोध कराने के लिए उपयोगी है; परन्तु वास्तव में वह कभी हृदय को नहीं तोड़ती।
केवल सुसमाचार ही ऐसा करता है। कोई नया विश्वासी जिस अंश तक टूटे हुए हृदयवाला होता है, वह उस स्पष्टता के अनुपात में होता है जिससे वह सुसमाचार को समझता है।
IX. जो नए विश्वासी, यदि आप उन्हें ऐसा कहें, व्यवस्थावादी प्रचार के अधीन आशा पाल लेते हैं, उनमें व्यवस्था के प्रति बौद्धिक स्वीकृति और एक प्रकार का सूखा जोश तो हो सकता है, परन्तु वे कभी कोमल, टूटे हुए हृदयवाले मसीही नहीं बनते।
यदि उन्होंने परमेश्वर को उस रूप में नहीं देखा जिसमें वह सुसमाचार में प्रकट किया गया है, तो वे ऐसे मसीही नहीं हैं जैसे आप कभी-कभी देखते हैं, जिनकी आँखों में आँसू काँप रहे होते हैं, और यीशु का नाम सुनते ही जिनके शरीर भावना से थरथराने लगते हैं।
X. पाप का बोध पाए हुए पापियों को, और अन्धकार में पड़े हुए धर्म का अंगीकार करनेवालों को, सीधे मसीह के पास ले जाया जाना चाहिए, और उनसे विश्वास के द्वारा उद्धार की योजना को थमवाया जाना चाहिए।
आप किसी और रीति से उनका भला नहीं कर सकते।
