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परन्तु मैं देखता हूँ कि मुझे फिर से धर्म का अंगीकार करनेवालों के अन्तिम वर्ग की जाँच को अगले शुक्रवार की शाम तक के लिए छोड़ना पड़ रहा है, जब परमेश्वर के विधान की अनुमति से उस पर ध्यान दिया जाएगा।
टिप्पणियाँ 1. मेरा विश्वास है कि जब मैं यह कहता हूँ कि जिस धर्म का मैंने वर्णन किया है, वह कलीसिया के एक बहुत बड़े समूह का धर्म प्रतीत होता है, तो आप मुझे अतिशयोक्ति करनेवाला नहीं समझेंगे।
कम से कम इतना तो कहना ही पड़ेगा कि इस बात का बड़ा भय है कि धर्म का अंगीकार करनेवाले मसीहियों में से अधिकांश इसी प्रकार के हैं। ऐसा कहना न तो प्रेमरहित है और न दोष लगानेवाला।
2. यह धर्म जड़ से ही दोषपूर्ण है।
इसमें सच्ची मसीहियत का कुछ भी नहीं है। यह मसीहियत से उतना ही भिन्न है जितना फरीसी मसीह से भिन्न थे—उतना ही जितना सुसमाचार का धर्म व्यवस्था पर आधारित धर्म से भिन्न है।
अब, मैं आपसे पूछता हूँ, आप इनमें से किस वर्ग के हैं? या आप किसी में भी नहीं हैं? हो सकता है कि चूँकि आप जानते हैं कि आप दूसरे वर्ग के नहीं हैं, इसलिए आप सोचें कि आप पहले वर्ग के हैं, जबकि वास्तव में, जब मैं धर्म का अंगीकार करनेवालों के तीसरे वर्ग का वर्णन करूँगा, तब आप पाएँगे कि मैं आपके सच्चे चरित्र का वर्णन कर रहा हूँ।
यह कितना महत्त्वपूर्ण है कि आप निश्चित रूप से जान लें कि आपका सच्चा चरित्र क्या है—कि धर्म में आप परमेश्वर और मनुष्य के प्रति सच्चे प्रेम से प्रेरित होते हैं, या आप केवल अपने स्वार्थ के कारण धार्मिक हैं। आह, कैसा गंभीर विचार है यह, यदि यह कलीसिया, जिसका मैं पास्टर रहा हूँ, कभी इस प्रश्न पर समझ-बूझकर किसी निर्णय पर नहीं पहुँची कि वे परमेश्वर और मनुष्य के सच्चे मित्र हैं या नहीं। प्रियो, इसे अवश्य तय कर लीजिए। अभी समय है। इसे तय कर लीजिए, और फिर परमेश्वर के लिए काम में लग जाइए।
