व्याख्यान 83 (253 में से)

मसीही वैसा जीवन बिताएँ जैसा उन्हें बिताना चाहिए, और कलीसिया संसार को हिला देगी! यदि न्यू

यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

मसीही वैसा जीवन बिताएँ जैसा उन्हें बिताना चाहिए, और कलीसिया संसार को हिला देगी! यदि न्यू

यॉर्क के मसीही ऐसा करें, तो इसका समाचार शीघ्र ही बन्दरगाह से निकलनेवाले हर जहाज़ में भर जाएगा, और हर हवा के साथ यह ख़बर उड़ती जाएगी, यहाँ तक कि सारी पृथ्वी उत्तेजना और पूछताछ से भर जाएगी, और मन-परिवर्तन भोर की ओस की बूँदों के समान बढ़ते जाएँगे।

मान लीजिए कि आप अपना कारोबार छोड़ दें, और अपने आप को पूरी तरह सुसमाचार के फैलाने के काम में लगा दें। कलीसिया ने एक बार ऐसा ही किया था, और आप जानते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। जब यरूशलेम के उस छोटे से दल ने अपना कारोबार छोड़ दिया और अपना समय परमेश्वर के काम में लगाया, तो उद्धार लहर की नाईं फैल गया। और मैं विश्वास करता हूँ कि यदि सारी मसीही कलीसिया सीधे बाहर निकल पड़े और संसार का मन फिराने में लग जाए, तो यह बहुत ही थोड़े समय में हो जाएगा।

और फिर, सच तो यह है कि आपसे अपना कारोबार छोड़ने की माँग भी नहीं की जाएगी। यदि मसीही सुसमाचार की आत्मा में व्यापार करें, तो वे शीघ्र ही संसार के व्यापार को अपने हाथ में ले लेंगे।

बस संसार यह देख ले कि यदि वे किसी मसीही के पास व्यापार करने जाएँ, तो वह न केवल ईमानदारी से, बल्कि परोपकार की भावना से व्यवहार करेगा, कि वह सचमुच उस व्यक्ति के हित का ध्यान रखेगा जिसके साथ वह व्यवहार करता है, मानो वह उसका अपना ही हित हो — तो फिर कौन किसी और के साथ व्यवहार करेगा? कौन सा व्यापारी किसी ऐसे भक्तिहीन मनुष्य के पास व्यापार करने जाएगा जिसके विषय में वह जानता हो कि वह उससे लाभ उठाने और उसे ठगने का प्रयत्न करेगा, जबकि वह जानता हो कि ऐसे मसीही व्यापारी भी हैं जिनके साथ वह व्यवहार कर सकता है, जो उसके हित का उतना ही ध्यान रखेंगे जितना अपने हित का? वास्तव में यह एक जानी-मानी बात है कि इस नगर में अब ऐसे मसीही व्यापारी हैं जो उन वस्तुओं के दाम निर्धारित करते हैं जिनका वे व्यापार करते हैं।

व्यापारी देहात से आते हैं, और इधर-उधर पूछताछ करते हैं कि वे माल कैसे ख़रीद सकते हैं, और वे इन मनुष्यों के पास यह जानने को जाते हैं कि उचित दाम पर वस्तुओं का ठीक-ठीक मूल्य क्या है, और उसी के अनुसार अपना व्यवहार चलाते हैं।

तो लाभ पूरी तरह एक ही पक्ष में है। कलीसिया ऐसी स्थिति ला सकती है कि भक्तिहीनों का अपना हित इसी में हो कि वे सही सिद्धान्तों पर व्यापार करें। कलीसिया संसार के व्यापार को नियंत्रित कर सकती है, और यदि वह ऐसा न करे तो उस पर हाय!

2. फ़ैशन के विषय में।

आपत्ति। “क्या मसीहियों के लिए निराला दिखना सबसे अच्छा है?”

निश्चय ही; मसीही निराले होने के लिए बाध्य हैं। वे एक निज प्रजा होने के लिए, अर्थात् एक निराली प्रजा होने के लिए बुलाए गए हैं, जो शेष मनुष्य-जाति से मूल रूप से भिन्न हो। यह कहना कि हमें निराला नहीं होना चाहिए, वैसा ही है जैसा यह कहना कि हमें संसार के सदृश बनना चाहिए। “निराले मत बनो,” अर्थात् संसार के समान बनो। दूसरे शब्दों में, “संसार के सदृश बनो।” यह मूल पाठ की आज्ञा के ठीक विपरीत है।

परन्तु अब प्रश्न फ़ैशन के विषय में है — पहनावे, सवारी और ठाट-बाट, इत्यादि में। और यहाँ मैं स्वीकार करता हूँ कि पहले मैं स्वयं भूल में था। मैं विश्वास करता था, और यही सिखाता भी था, कि मसीहियों के लिए सबसे अच्छा मार्ग यह है कि वे ऐसे कपड़े पहनें जिससे उन पर किसी का ध्यान न जाए, फ़ैशनों और उनके बदलावों के पीछे चलें ताकि निराले न दिखें, और ताकि किसी के मन में यह विचार न आए कि इन बातों में वे दूसरों से भिन्न हैं। परन्तु मैंने अपनी भूल देख ली है, और अब अपने पहले के अन्धेपन पर बड़ा आश्चर्य करता हूँ। आपका कर्तव्य है कि आप इतने सादे वस्त्र पहनें कि संसार पर यह प्रकट हो जाए कि आप

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