व्याख्यान 109 (253 में से)

दूसरों को करता रहता है, तो यह निश्चित है कि वह किसी भी पाप से जो दूर रहता है, वह इस कारण नहीं कि वह परमेश्वर के अधिकार का आदर करता है, या

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दूसरों को करता रहता है, तो यह निश्चित है कि वह किसी भी पाप से जो दूर रहता है, वह इस कारण नहीं कि वह परमेश्वर के अधिकार का आदर करता है, या पाप से घृणा करता है।

3. जो लोग संयम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सब नशीले पेय छोड़ने को तैयार नहीं, उन्होंने संयम को बढ़ावा देने के लिए तेज़ शराब कभी नहीं छोड़ी थी।

यह स्पष्ट है कि उन्होंने संयम-आन्दोलन के प्रति आदर के अलावा किसी और विचार से तेज़ शराब छोड़ी थी। यदि उनका उद्देश्य वही होता, तो वे अल्कोहल को उसके सब रूपों में छोड़ देते, और जब उन्हें पता चलता कि दाखमधु में, और बियर में, और साइडर (सेब की मदिरा) में अल्कोहल है, तो वे स्वाभाविक रूप से उन्हें भी छोड़ देते। क्यों नहीं?

4. जो मनुष्य लाभ के लिए अपने पड़ोसी को रम या नशीले पेय बेचेगा, और अपने पड़ोसी के मुँह से प्याला लगाएगा, और इस प्रकार उसे प्राण और शरीर दोनों में बर्बाद करने के लिए सहमत होगा, वह अपने स्वार्थपूर्ण हितों को बढ़ाने के लिए अपने पड़ोसी को दासत्व में बेचने के लिए भी सहमत हो जाएगा, यदि वह दण्ड से बचकर ऐसा कर सके। और यदि उसने उसके धन के लिए उसे लूटा और उसकी हत्या न की, तो निश्चय ही यह इस कारण नहीं होगा कि परमेश्वर के या मनुष्य के प्रेम ने उसे रोका। यदि स्वयं का प्रेम इतना प्रबल है कि वह अपने पड़ोसी को तेज़ शराब बेचकर उसकी सीधी हानि करने के लिए सहमत हो जाएगा, तो धन के प्रेम पर किसी और रूप में प्रबल होनेवाले स्वार्थ के सिवा और कुछ भी उसे मनुष्यों को दासत्व में बेचने से, उन्हें लूटने से, या उनका धन पाने के लिए उनकी हत्या करने से रोक नहीं सकता था।

वह अपनी प्रतिष्ठा से प्रेम रख सकता है; वह मानवीय क़ानून के दण्ड से डर सकता है; वह अपने प्राण के विनाश से इतना डर सकता है कि यह उसे इन अत्याचार और हिंसा के कामों से रोक दे। परन्तु निश्चय ही वह परमेश्वर या मनुष्य के प्रति प्रेम का सिद्धान्त नहीं हो सकता जो उसे रोके।

5. जो व्यक्ति अपने स्वार्थपूर्ण उद्देश्यों के लिए अपने संगी मनुष्यों को दास बनाएगा, वह दूसरों को भी—किसी को भी या सब को—दास बना लेगा, यदि उसका हित ऐसा चाहे, और यदि उसे वैसा ही अवसर मिले।

यदि कोई मनुष्य एक के अधिकार हड़प लेगा, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के सब मनुष्यों के अधिकार हड़प लेगा, यदि वह दण्ड से बचकर ऐसा कर सके। जो व्यक्ति किसी काले मनुष्य को उसकी स्वतन्त्रता से वंचित करके उसे दास बनाएगा, वह किसी गोरे मनुष्य को दास बनाने में कोई संकोच न करेगा, यदि परिस्थितियाँ उतनी ही अनुकूल हों। जो मनुष्य यह तर्क देता है कि दक्षिण के काले मज़दूर को दासत्व में रखा जाना चाहिए, वह यदि साहस करे तो यह तर्क देगा कि उत्तर के गोरे मज़दूरों को भी दास बनाया जाए, और वैसे ही तर्क प्रस्तुत करेगा कि समाज की शान्ति और व्यवस्था इसकी माँग करती है, और जब मज़दूरों की देखभाल करनेवाला कोई स्वामी होता है तब उनकी दशा कहीं अच्छी रहती है। वह प्रसिद्ध बाइबल-आधारित तर्क भी गोरे दासों के पक्ष में उतना ही अच्छा है जितना काले दासों के पक्ष में, यदि केवल आपके पास उसे लागू करने की शक्ति हो। जो मनुष्य अपने संगी मनुष्य को सम्पत्ति के रूप में रखता है, वह अपने संगी मनुष्य को सम्पत्ति के रूप में ले भी लेगा, यदि वह दण्ड से बचकर ऐसा कर सके। सिद्धान्त सब में एक ही है। जो मनुष्य दास रखते हैं, उन्हें अफ़्रीका के तट पर मनुष्यों का अपहरण करने से, या उत्तर के स्वतन्त्र मज़दूरों को दास बनाने के लिए युद्ध छेड़ने से रोकनेवाली बात सिद्धान्त नहीं है।

6. जो मनुष्य धर्म को बढ़ावा देने के लिए छोटी बातों में आत्म-त्याग का अभ्यास नहीं करेगा, वह धर्म को बढ़ावा देने के लिए सताव नहीं सहेगा।

जो लोग अपनी भूख का त्याग नहीं करेंगे, वे कोड़ों की मार और खूँटे पर जलाया जाना नहीं सहेंगे।

शायद, यदि सताव उठ खड़ा हो, तो कुछ लोग उस वाहवाही के लिए उसे सह लें जो वह

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