व्याख्यान 242 (253 में से)

VII. कलीसिया के अधिकांश लोगों को परमेश्वर के वचन के विषय में कितना कम ज्ञान है

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VII. कलीसिया के अधिकांश लोगों को परमेश्वर के वचन के विषय में कितना कम ज्ञान है।

उदाहरण के लिये, उन्हें पत्रियाँ, और अन्य भाग पढ़ने को दीजिए, और सम्भवतः उनके पास इतना ज्ञान भी न होगा कि वे बाइबल के दसवें भाग के भी वास्तविक अर्थ के विषय में कोई राय दे सकें।

कोई आश्चर्य नहीं कि कलीसिया पवित्र नहीं हुई है! उन्हें और अधिक सत्य की आवश्यकता है। हमारा उद्धारकर्ता कहता है, “अपने सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर।” इससे पहले कि कलीसिया जाने कि पूर्ण पवित्रीकरण का अर्थ क्या है, पवित्रीकरण के इस महान साधन का और अधिक भरपूरी से आनन्द लिया जाना चाहिए। कलीसिया बाइबल को नहीं समझती। और इसका कारण यह है कि वे उसे समझाने के लिये उसके लेखक के पास नहीं गए। यद्यपि उन्हें यह धन्य विशेषाधिकार हर दिन प्राप्त है, और जितनी बार वे चाहें, कि वे पुस्तक को सीधे उसके लेखक के पास उसकी व्याख्या के लिये ले जाएँ; फिर भी कलीसिया बाइबल को कितना कम, कितना बहुत ही कम जानती है—ऐसा ज्ञान, जिसके विषय में वे जानते हों कि उन्हें पवित्र आत्मा ने सिखाया है!

पाठ-वचन को फिर से पढ़िए, अन्य समान खण्डों को पढ़िए, और फिर कहिए कि क्या मसीही बाइबल को न समझने के लिये अत्यन्त दोषी नहीं हैं।

VIII. आप देखते हैं कि यह आवश्यक है कि हम सब ईश्वरीय शिक्षा के अधीन बाइबल के अध्ययन में अपने आप को लगा दें।

मैंने हाल ही में आपको पढ़ने के लिये कई पुस्तकों की सिफ़ारिश की है, जैसे वेस्ली की ‘मसीही सिद्धता पर विचार’, ब्रेनर्ड टेलर, पेसन, श्रीमती रॉजर्स, और अन्य लोगों के संस्मरण।

मैंने पाया है कि मन की एक विशेष दशा में ऐसी पुस्तकें पढ़ना उपयोगी होता है। परन्तु मैं एक ही पुस्तक के सिवाय किसी को अपने अध्ययन का विषय बनाने का दावा कभी नहीं करता। मैं उन्हें कभी-कभी पढ़ता हूँ, परन्तु जब तक मुझे अपनी बाइबल से इतना कुछ सीखना है, तब तक दूसरी पुस्तकें अधिक पढ़ने के लिये मेरे पास न अधिक समय है, न अधिक रुचि। मैं उसे एक गहरी खान के समान पाता हूँ; जितना अधिक मैं उसमें खोदता हूँ, वह उतनी ही अधिक धनी होती जाती है। हमें उसे किसी भी या सब अन्य पुस्तकों से अधिक पढ़ना चाहिए। हमें उस पर, पद के बाद पद, रुककर प्रार्थना करनी चाहिए, और एक भाग की दूसरे भाग से तुलना करनी चाहिए, उस पर मनन करना चाहिए, उसे पचाना चाहिए, और उसे अपने मनों में उतार लेना चाहिए, जब तक हमें यह अनुभव न हो कि परमेश्वर के आत्मा ने हमें पवित्रता की आत्मा से भर दिया है।

क्या आप ऐसा करेंगे? क्या आप अपने हृदय परमेश्वर के सामने खोल देंगे, और उसे तब तक चैन न लेने देंगे, जब तक वह आपको ईश्वरीय ज्ञान से भर न दे? क्या आप पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ेंगे? नए विश्वासियों ने, और सेवकाई की तैयारी करनेवाले जवानों ने, मुझसे प्रायः पूछा है कि उन्हें क्या पढ़ना चाहिए। बाइबल पढ़िए। मैं पाँच सौ बार भी यही उत्तर दूँगा। अन्य सब बातों से बढ़कर, बाइबल का अध्ययन कीजिए। यह एक दुःखद तथ्य है कि अधिकांश जवान, जब सेवकाई में प्रवेश करते हैं, तो जिन पुस्तकों का वे अध्ययन करते हैं, उनमें से किसी भी अन्य पुस्तक की अपेक्षा प्रायः बाइबल को ही कम जानते हैं। हाय! हाय! ओह, यदि उनमें जेम्स ब्रेनर्ड टेलर की आत्मा होती, पवित्रशास्त्र के प्रति उसका प्रेम, ईश्वरीय शिक्षा के लिये उसकी प्रार्थना होती, तो हमें उन बहुत से जवान प्रचारकों की निष्फलता पर कलीसियाओं की कराहें फिर सुनाई न देतीं, जो हमारे सेमिनरियों से पुस्तकीय विद्या से भरे हुए और पवित्र आत्मा से लगभग खाली होकर निकलते हैं।

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