पुस्तक II · सार

सार

Institutes of the Christian Religion · John Calvin

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सार

प्रेरितों के विश्वास-सूत्र के प्रथम भाग—अर्थात् सृष्टिकर्ता परमेश्वर के ज्ञान—का निपटारा हो चुकने पर, अब हम द्वितीय भाग पर आते हैं, जो मसीह में छुड़ानेवाले के रूप में परमेश्वर के ज्ञान से सम्बन्ध रखता है। अतः जिन विषयों पर विचार किया गया है वे ये हैं: पहला, छुटकारे का अवसर—अर्थात् आदम का पतन; और दूसरा, स्वयं छुटकारा। पहले विषय के लिए आरम्भ के पाँच अध्याय और शेष अध्याय दूसरे के लिए रखे गए हैं।

छुटकारे के अवसर के अन्तर्गत पतन पर केवल सामान्य रूप से ही नहीं, वरन् उसके विशेष प्रभावों के विषय में भी विचार किया गया है। इसीलिए पहले चार अध्यायों में मूल पाप, स्वतंत्र इच्छा, मानव स्वभाव की भ्रष्टता और मनुष्य के हृदय में परमेश्वर के कार्य का वर्णन है। पाँचवें अध्याय में उन तर्कों का खण्डन है जो स्वतंत्र इच्छा के समर्थन में प्रायः दिए जाते हैं।

छुटकारे का विषय पाँच विशेष शीर्षकों में समेटा जा सकता है:

I. उसका स्वरूप जिसमें खोए हुए मनुष्य के उद्धार को खोजना चाहिए, अध्याय 6।

II. वह जगत पर किस प्रकार प्रकट हुआ, अर्थात् दो प्रकार से। पहला, व्यवस्था के अधीन। यहाँ दस आज्ञाओं की व्याख्या की गई है, और व्यवस्था से सम्बन्धित कुछ अन्य बातों पर चर्चा हुई है, अध्याय 7 और 8। दूसरा, सुसमाचार के अधीन। यहाँ दोनों व्यवस्थाओं की समानता और भिन्नता पर विचार किया गया है, अध्याय 9, 10, 11।

III. मध्यस्थ का कार्य पूरा करने के लिए मसीह कैसा व्यक्ति था और उसे कैसा होना चाहिए था—अर्थात् एक ही व्यक्ति में परमेश्वर और मनुष्य, अध्याय 12, 13, 14।

IV. पिता ने उसे किस उद्देश्य से जगत में भेजा। यहाँ मसीह के भविष्यद्वक्ता, राजा और याजक के पदों पर विचार किया गया है, अध्याय 15।

V. मसीह ने हमारे छुड़ानेवाले का कार्य किस प्रकार, या किन क्रमिक पदों के द्वारा पूरा किया, अध्याय 16। यहाँ उसके क्रूस पर चढ़ाए जाने, मृत्यु, गाड़े जाने, अधोलोक में उतरने, पुनरुत्थान, स्वर्गारोहण और पिता के दाहिने हाथ बैठने पर, साथ ही सम्पूर्ण सिद्धान्त के व्यावहारिक उपयोग पर विचार किया गया है। अध्याय 17 में इस प्रश्न का उत्तर है कि क्या मसीह के विषय में यह कहना उचित है कि उसने हमारे लिए परमेश्वर का अनुग्रह अर्जित किया।

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