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पाद-टिप्पणियाँ: (जारी)
वह उसे जीवित रखने के लिए उँगली तक न उठाते, जबकि गृहस्थों के मताधिकार के द्वारा उन्होंने सारी शक्ति अपने हाथों में कर ली है! क्या! कोई खतरा नहीं, जबकि आयरलैंड की कलीसिया की राजकीय मान्यता समाप्त कर दी गई है, संघ-अधिनियम को पैरों तले रौंद डाला गया है, प्रोटेस्टेंट अनुदान पोप के अनुयायियों को सौंप दिए गए हैं, कलीसिया और राज्य को अलग करने की दिशा में पहली दरार डाल दी गई है, और जिस राजनेता ने यह सब किया वह अब भी जीवित है, और बहुतों के विचार में उससे चूक हो ही नहीं सकती। कोई खतरा नहीं, सचमुच! मुझे अपना आश्चर्य प्रकट करने के लिए शब्द नहीं मिलते कि लोग ऐसा कहते हैं। परन्तु हाय! ऐसे लोगों की कभी कमी नहीं होती जो आँखें रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते, और जो समझना ही नहीं चाहते।
इंग्लैंड की स्थापित कलीसिया खतरे में है। इसमें कोई भूल नहीं। कलीसिया-सुधारों का समर्थन करने का यही एक व्यापक और निर्णायक कारण है। सेंट जॉर्ज की खाड़ी के दूसरे किनारे से "दीवार पर लिखावट" भयानक रूप से चमक रही है, जिसका अर्थ बताने के लिए किसी दानिय्येल की आवश्यकता नहीं। सभी राष्ट्रीय कलीसियाओं की राजकीय मान्यता समाप्त करने की ओर एक धारा बह रही है, और हम उसमें पहले ही पड़ चुके हैं। हम धीरे-धीरे नीचे की ओर बहे जा रहे हैं, यद्यपि बहुत से लोग यह नहीं देखते; परन्तु जो पुराने सीमा-चिह्नों को देखते हैं वे यह देखे बिना नहीं रह सकते कि हम खिसक रहे हैं। शीघ्र ही हम तेज़ धारा में होंगे। कुछ ही वर्षों में, यदि हमने प्रयत्न न किया, तो हम जलप्रपात से नीचे गिर चुके होंगे। अंग्रेज़ जनता हर बात में "मुक्त व्यापार" के महान विचार से मानो मतवाली हो गई है, धर्म में भी और वाणिज्य में भी, कलीसियाओं में भी और अनाज में भी। दैनिक समाचार-पत्रों का एक भाग निरन्तर इसी विषय की रट लगाए हुए है। और क्या हम चुपचाप बैठे रहें और अपने घर को व्यवस्थित करने से इन्कार करें? मैं तो कहता हूँ, परमेश्वर न करे! क्या हम तब तक प्रतीक्षा करें जब तक हमें सड़क पर निकाल न दिया जाए और हमें अव्यवस्था के बवण्डर के बीच अपना सुधार करना पड़े? मैं तो कहता हूँ, परमेश्वर न करे! अनुभवी सेनापति हमें बताता है कि शत्रु के सामने मोर्चा बदलना पागलपन है। यदि हम मानते हैं कि स्थापित कलीसिया पर खतरा मँडरा रहा है, तो आँधी के फटने तक प्रतीक्षा न करें। जब तक हो सके हम कमर कस लें, और कलीसिया-सुधारों का प्रयास करें।
1. अब मैं इस सारे विषय को पादरी-वर्ग के प्रार्थनापूर्ण ध्यान के लिए सौंपता हूँ। "जो मैं कहता हूँ उस पर ध्यान कर, और प्रभु तुझे सब बातों में समझ दे।" काश मैं इंग्लैंड के हर रेक्टर और विकर के कान में तुरही फूँक सकता, और उसे कलीसिया के खतरे का बोध करा सकता! क्षितिज बहुत काला है। मेरा विश्वास है कि यही हम पर दृष्टि किए जाने का समय है। यह समय नहीं है कि
