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ऊपरी कोठरी (जारी)
सार-तत्त्व में नहीं है, और उसकी आराधना नहीं की जानी चाहिए; क्योंकि वह मूर्तिपूजा होगी, जिससे सब विश्वासी मसीहियों को घृणा करनी चाहिए।" अट्ठाईसवाँ अनुच्छेद कहता है, "प्रभु-भोज का संस्कार मसीह की आज्ञा से न तो सुरक्षित रखा जाता था, न इधर-उधर ले जाया जाता था, न ऊँचा उठाया जाता था, और न उसकी आराधना की जाती थी।"
19. क्या प्रभु-भोज में मसीह की देह और लहू का कोई बलिदान चढ़ाया जाता है?
निश्चय ही नहीं। नए नियम में इस विधि को कभी एक बार भी बलिदान नहीं कहा गया है। इसकी पहली स्थापना के चारों वृत्तान्तों में किसी बलिदान का तनिक भी चिह्न नहीं है। यह दिखाने के लिए एक शब्द भी नहीं है कि प्रेरितों ने समझा कि वे कोई बलिदान चढ़ते हुए देख रहे हैं। इसके अतिरिक्त, नए नियम में हमें बार-बार सिखाया गया है कि जैसे ही मसीह क्रूस पर हमारे पापों के लिए बलिदान हुआ, फिर किसी और बलिदान की आवश्यकता न रही, और उसके अपने एक बार के अर्पण के बाद पाप के लिए किसी अन्य अर्पण की आवश्यकता नहीं रही (इब्रानियों 10:14-18)। मसीह को फिर से चढ़ाने का प्रयत्न करना ऐसी अज्ञानता का कार्य है जो निन्दा के निकट है। प्रार्थना-पुस्तक कभी एक बार भी प्रभु-भोज को बलिदान नहीं कहती। एक स्थान पर वह जिन "भेंटों" की चर्चा करती है, वे दान-संग्रह के समय धन का अर्पण हैं। वह केवल "स्तुति और धन्यवाद" के "बलिदान" का उल्लेख करती है; और जिस अर्पण का उल्लेख करती है वह केवल "अपने आप को, आत्मा और देह समेत" परमेश्वर के लिए "विवेकपूर्ण, पवित्र और जीवित बलिदान" के रूप में अर्पित करना है। जो लोग संस्कार को बलिदान कहते हैं, वे अपनी बात को कदापि प्रमाणित नहीं कर सकते।
20. क्या प्रभु-भोज में रोटी और दाखरस को पवित्र ठहरानेवाला सेवक याजक है?
यदि "याजक" शब्द से हमारा अर्थ केवल प्रेस्बिटर, अर्थात् सेवकाई की दूसरी श्रेणी के व्यक्ति से है, तो निःसन्देह वह याजक है; और केवल इसी अर्थ में प्रार्थना-पुस्तक में उसे याजक कहा गया है। परन्तु यदि इस शब्द से हमारा अर्थ बलिदान चढ़ानेवाले से है, तो वह निश्चय ही याजक नहीं है। वह हो नहीं सकता, क्योंकि उसके पास चढ़ाने के लिए कोई बलिदान नहीं है, और बलिदान के बिना याजक एक निरर्थक उपाधि है। वह हो नहीं सकता, क्योंकि नए नियम में मसीही सेवकों को कभी एक बार भी "याजक" नहीं कहा गया है। पुराने नियम के यहूदी याजकों को प्रतिदिन बलिदान चढ़ाने पड़ते थे, और वे उस महान महायाजक के प्रतिरूप और चिह्न थे जो आनेवाला था। परन्तु जब मसीह ने क्रूस पर अपने आप को अर्पित किया, तब याजकीय सेवकाई सदा के लिए तुरन्त समाप्त हो गई। सब विश्वासी अब "राजा और याजक" हैं, क्योंकि वे "अपने शरीरों को जीवित बलिदान करके परमेश्वर के सामने अर्पित करते हैं" (रोमियों 12:1)। परन्तु मसीही सेवक नहीं हैं
