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मण्डली सुसमाचार की सब आशीषों के लिए पूरी तरह तैयार थी, और हर शब्द को निगल रही थी
रेव. जे. वेस्ली का
[अप्रैल, 1785। अपनी सहेली से, "जब तुम देख नहीं सकतीं?"
"बहुत अच्छी तरह," उसने कहा; "क्योंकि प्रभु मुझे स्मरण दिलाता है।"
इस प्रकार, बिना किसी सन्देह या भय के, उसने अपनी आत्मा अपने दयालु और विश्वासयोग्य सृष्टिकर्ता को सौंप दी।
लगभग ग्यारह बजे मैंने वुल्वरहैम्प्टन में प्रचार किया, और दोपहर हिल्टन-पार्क के स्नेही परिवार के साथ बिताई।
मंगलवार, 29। दोपहर को मैंने स्टैफ़र्ड के कमरे में एक गहरे रूप से प्रभावित मण्डली को प्रचार किया।
यह और भी आश्चर्य की बात थी, क्योंकि इंग्लैंड में बहुत कम नगर ऐसे हैं जहाँ धर्म का प्रभाव उतना कम हो जितना
स्टैफ़र्ड में है।
सन्ध्या को मैंने न्यूकैसल में एक अत्यन्त गम्भीर और बहुत प्रभावित मण्डली को प्रचार किया।
बुधवार, 30। लेन-एंड में हमें एक कठिनाई मिली।
दोपहर में भी भवन में मण्डली का एक तिहाई भाग भी नहीं समा सका।
हवा बेधने वाली ठण्डी थी; फिर भी मैंने बाहर खुले में प्रचार किया, और परमेश्वर ने हमारे हृदयों को गरमाया।
सन्ध्या को बर्सलम में अपने भाइयों के बीच, जो अनुग्रह में भली-भाँति स्थिर हैं, मुझे बड़ा आराम मिला; और वैसी ही एक और मण्डली मुझे गुरुवार, 31 को कांग्लटन में मिली।
शुक्र. अप्रैल 1।—मैं मैक्लेसफ़ील्ड आया, जहाँ श्री सिम्पसन ने अपने गिरजे में मेरे प्रचार करने की सूचना दे रखी थी।
यहाँ मैंने अपनी आत्मा को पूरी तरह छुड़ा लिया; और शनिवार, 2 को मैं आगे मैनचेस्टर गया।
रविवार, 3। हमारे भाई सब ओर से उमड़ आए, और भवन, चाहे कितना ही बड़ा हो, उन्हें समा न सका।
अनुमान था कि हमारे यहाँ बारह सौ लोगों ने प्रभु-भोज लिया।
सोमवार, 4। मैंने बोल्टन में अपनी पुरानी, प्रेमी मण्डली को प्रचार किया।
मंगलवार, 5। दोपहर को मैंने विंगेट में खुली हवा में प्रचार किया। मण्डली सुसमाचार की सब आशीषों के लिए पूरी तरह तैयार थी, और हर शब्द को निगल रही थी।
सन्ध्या को मैंने विगन में प्रचार किया।
मैंने इस प्रचार-भवन को पहले कभी भरा हुआ नहीं देखा था; पर आज रात यह भरे से भी अधिक था, और बहुत ध्यान से सुनने वाले श्रोताओं से भरा था।
बुधवार, 6। मैंने लिवरपूल में प्रचार किया; पर मुझे वहाँ कोई जहाज़ चलने को तैयार नहीं मिला।
इसलिए गुरुवार, 7 को (मार्ग में वारिंगटन में प्रचार करके) मैं शीघ्रता से चेस्टर गया। पार्कगेट में भी कोई जहाज़ चलने को तैयार नहीं था; इसलिए शुक्रवार, 8 को हम गाड़ी में बैठे, और शनिवार को दोपहर बाद चार और पाँच के बीच होलीहेड पहुँचे।
नौ और दस के बीच हम क्लरमोंट डाक-जहाज़ पर चढ़े :
परन्तु रविवार, 10 को दस बजे के बाद तक पूरी शान्ति रही, जब यात्रियों ने मुझसे उपदेश देने को कहा।
उपदेश के बाद मैंने प्रार्थना की कि परमेश्वर हमें पूरी और शीघ्र यात्रा दे।
जब मैं बोल ही रहा था, हवा चल पड़ी; और बारह घण्टों में हमें डबलिन की खाड़ी में ले आई। क्या हमारा प्रभु अब भी प्रार्थना नहीं सुनता?
मुझे अपने ही घर में ऐसा विश्रामस्थान मिला जैसा मैंने आयरलैंड में पहले कभी नहीं पाया था; और ऐसे दो प्रचारक,
अप्रैल, 1785।] जर्नल।
और ऐसी दो पत्नियाँ, मैं नहीं जानता कि फिर कहाँ मिलेंगे।
सन्ध्या को, और इसी प्रकार हर सन्ध्या को, हमारी रविवार-सन्ध्या जैसी मण्डलियाँ होती थीं; और सुबह वे उन मण्डलियों से, जो पिछली बार यहाँ आने पर मुझे मिली थीं, एक तिहाई अधिक बड़ी थीं।
मंगलवार को, और उसके बाद तीन दिन तक, मैंने सोसाइटी की जाँच की।
मैंने उसे पहले कभी ऐसी दशा में नहीं पाया; उनमें से बहुत से अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर में आनन्दित थे, और स्त्री-पुरुष दोनों अपने पहनावे में उतने ही सादे थे जितने ब्रिस्टल और लंदन के लोग।
मेरा सचमुच विश्वास है कि बहुतेरे अपने पूरे हृदय से परमेश्वर से प्रेम रखते हैं; और इनकी संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है।
सारी सोसाइटी की संख्या सात सौ सैंतालीस है।
इनमें से तीन सौ से अधिक कुछ ही महीनों में जोड़े गए हैं ;—यह एक नई और अनपेक्षित बात है!
अनेक स्थानों में, सचमुच, हमने बार-बार उद्धार करने वाले अनुग्रह की उमड़ती हुई सामर्थ्य को अनुभव किया है; जो लगभग अप्रतिरोध्य रूप से कार्य करती थी।
परन्तु अनुग्रह की ऐसी वर्षा कभी देर तक नहीं टिकी; और बाद में लोग पवित्र आत्मा का वैसे ही विरोध कर सकते थे जैसे पहले।
जब सामान्य उत्तेजना थम जाती है, तब जो भी उसमें सहभागी हुआ, उसकी आजीवन परीक्षा होती है; और बाढ़ जितनी ऊँची होती है, भाटा उतना ही नीचे जाता है; वरन जितनी तेज़ी से वह चढ़ी, उतनी ही तेज़ी से उतरती है : इसलिए यदि हम यहाँ ऐसा देखें तो हमें हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।
हमें केवल पूरे यत्न से इसका प्रयास करना चाहिए कि जितनों को सम्भव हो, उन्हें लौटती लहर के बावजूद आगे बढ़ते रहने का प्रोत्साहन दें। अब, विशेष रूप से, हमें एक-दूसरे को चेतावनी देनी चाहिए कि मन में थकें या हियाव न छोड़ें; कदाचित हम बाथ के निकट पॉल्टन की हाल की अद्भुत घटना जैसी कोई और घटना देखें, जहाँ परमेश्वर का कार्य बहुत तेज़ी से हुआ; फिर भी एक वर्ष बाद, सौ मन-फिराए हुओं में से एक भी पीछे नहीं हटा !
परमेश्वर की ओर स्पष्ट रूप से फिरने वाले बच्चों की संख्या विशेष रूप से उल्लेखनीय है। एक ही वर्ग में तेरह-चौदह छोटी लड़कियाँ अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर में आनन्दित हैं; और अपने सारे व्यवहार में ऐसी गम्भीर और स्थिर हैं मानो तीस या चालीस वर्ष की हों।
मुझे बड़ी आशा है कि उनमें से आधी उस परमेश्वरीय अनुग्रह में दृढ़ बनी रहेंगी जिसका आनन्द वे अब ले रही हैं।
रवि. 17।—गिरजाघर में प्रभु-भोज लेने वालों की इतनी संख्या थी जितनी वहाँ शायद ही कभी देखी गई हो।
सन्ध्या को बहुतों के हृदय छिद गए; और मेरा विश्वास है कि कुछ कम नहीं, जिन्होंने शान्ति पाई।
उसके बाद प्रेम-भोज हुआ; जिसमें बहुतों ने पूरी स्पष्टता और सरलता से बताया कि परमेश्वर ने उनकी आत्माओं के लिए क्या किया है।
सोम. 18।—मैं एक मनोहर देहात से होकर प्रॉस्परस गया; एक छोटा नगर, जिसे पाँच वर्ष पहले कप्तान ब्रुक ने बसाना आरम्भ किया था,
रेव. जे. वेस्ली का
[अप्रैल, 1785। जो अभी पूर्वी भारत से लौटा था।
यहाँ उसने सूती कपड़े के कारखाने की हर शाखा बहुत बड़े पैमाने पर आरम्भ की।
उसने सब सुविधाओं और जुड़ी हुई वस्तुओं सहित आरामदेह घरों की दो पंक्तियाँ बनवाईं; और अब वह यहीं लगभग दो हज़ार स्त्री, पुरुष और बच्चों को काम देता है, और इतने ही और लोगों को दूसरे स्थानों में।
उनके पास एक बहुत बड़ा कमरा था, पर मण्डली के लिए बिलकुल पर्याप्त नहीं था।
जो भीतर आ सके वे सब बहुत प्रभावित दिखाई दिए, और सुबह पाँच बजे भी वैसे ही।
उनमें से लगभग पचास पहले ही एक सोसाइटी में जुड़ चुके हैं।
सुन्दर कलियाँ!
परन्तु फल कैसा होगा?
हमें बताया गया कि लगभग तीन सप्ताह पहले इस स्थान के निकट एक उल्लेखनीय घटना हुई :—एक निर्धन स्त्री पर अपने मकान-मालिक का चौदह पाउण्ड बकाया था; उसने सात पाउण्ड जोड़कर उसके पास पहुँचाए।
परन्तु उसने पूरी रकम से कम लेना बिलकुल अस्वीकार कर दिया, और उसे सन्ध्या तक बातों में रोके रखा।
तब वह एक गाड़ी पर चल पड़ी।
जब वह घर से एक मील दूर थी, तब उसे एक सिपाही मिला, जिसने कहा कि वह बहुत थक गया है, और उससे गिड़गिड़ाकर विनती की कि उसे अपने साथ गाड़ी पर बैठने दे; वह अन्त में मान गई।
जब वे उसके घर पहुँचे, तो यह देखकर कि दो मील तक कोई नगर नहीं है, उसने विनती की कि उसे सुबह तक आग के पास बैठने दिया जाए।
उसने उससे कहा कि वह ऐसा करने का साहस नहीं कर सकती, क्योंकि उसका घर अकेला है, और उसमें उसके और उसकी लड़की के सिवाय कोई नहीं है : परन्तु अन्त में वह मान गई कि वह लड़की के बिस्तर पर सोए, और वह तथा लड़की साथ सोएँगी।
आधी रात को दो पुरुष, जिन्होंने अपने मुँह काले कर रखे थे, घर में घुस आए, और उसका धन माँगने लगे।
उसने कहा, "तो मुझे अगले कमरे में जाकर उसे ले आने दो।"
भीतर जाकर उसने सिपाही से कहा, "तुमने मेरी दया का मुझे अच्छा बदला दिया, कि अपने साथियों को मेरा घर लूटने के लिए ले आए।"
उसने पूछा, "वे कहाँ हैं?"
उसने कहा, "अगले कमरे में।"
वह उछलकर उठा, और वहाँ दौड़ गया।
वे पुरुष पूरी तेज़ी से भाग गए।
उसने उनके पीछे गोली चलाई, और एक को मार गिराया; जाँच करने पर वह उसी का मकान-मालिक निकला!
इस प्रकार एक सिपाही एक निर्दोष स्त्री की रक्षा करने और एक कठोर दुष्ट को दण्ड देने के लिए भेजा गया!
मंगल. 19।—मैंने दस बजे एडेनडेरी में एक असाधारण रूप से बड़ी और गम्भीर मण्डली को प्रचार किया।
सन्ध्या को मैंने टिरेल्स पास में प्रचार किया, जहाँ अब केवल एक छोटी, मुरझाई हुई सोसाइटी ही शेष है।
वैसी ही एक सोसाइटी मुझे बुधवार, 20 को कूलीलफ़ में मिली।
गुरुवार, 21। एथलोन जाते हुए मैंने दृश्य को पूरी तरह बदला हुआ पाया; अनेक वर्षों से सोसाइटी में इतना
अप्रैल, 1785।] जर्नल।
जीवन नहीं रहा था। पुराने मुरझाए सदस्यों में से बहुत से फिर जिलाए गए हैं।
उनके साथ बहुत से और जुड़े हैं; और उनके बीच किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है; वे एक-दूसरे को केवल प्रेम और भले कामों के लिए उभारते हैं।
शुक्र. 22।—मुझे यहाँ पिछली बार आए ठीक सात वर्ष हुए हैं; और मैं बहुतों में थोड़ा ही परिवर्तन पाता हूँ, केवल यह कि वे संसार के लिए और अधिक मरे हुए हैं, और इसलिए परमेश्वर के लिए और अधिक जीवित हैं; और जो थोड़े से उन्हें छोड़ गए हैं, उनके बदले परमेश्वर ने उन्हें दुगुने दिए हैं, जो या तो परमेश्वर के लिए जीवित हैं, या उसके प्यासे हैं।
रवि. 24।—दोपहर बाद मैंने बाज़ार-भवन के पूर्वी सिरे पर प्रचार किया।
मैंने एथलोन में इतनी बड़ी मण्डली शायद ही कभी देखी हो; और सब ध्यानपूर्वक सुन रहे थे : एक शब्द भी नहीं सुनाई दिया, और शायद ही कोई हलचल दिखी। मुझे भरोसा है कि अब बोया गया बीज मुरझाएगा नहीं, परन्तु बढ़कर अनन्त जीवन तक पहुँचेगा!
सोम. 25।—एघ्रिम के मार्ग में बैलिनास्लो में प्रचार करने के लिए कहे जाने पर, मैं लगभग ग्यारह बजे एक बड़े मकान की छाया में खड़ा हुआ, और रोमन कैथोलिकों तथा प्रोटेस्टेंटों की एक बड़ी मण्डली को, जो समान रूप से ध्यान से सुन रही थी, इस पर प्रचार किया, "परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है।"
जब मैं एघ्रिम में प्रविष्ट हुआ, तो पादरी, जो अपने फाटक पर प्रतीक्षा कर रहा था, ने इस देश में मेरा स्वागत किया; और कहा कि मैं उसके गिरजे का उपयोग अभी भी करूँ, और जब कभी चाहूँ तब भी : मैंने वहाँ छह बजे प्रचार किया। वह भली-भाँति व्यवहार करने वाले श्रोताओं से पूरी तरह भरा था। परन्तु यहाँ की सोसाइटी, और टिरेल्स पास की भी, लगभग शून्य हो चुकी है!
धन का कैसा विनाशकारी प्रभाव है!
हम हर स्थान में यही परिणाम पाते हैं। जैसे-जैसे लोग धन-सम्पत्ति में बढ़ते हैं, (बहुत कम को छोड़कर,) वैसे-वैसे अनुग्रह में घटते जाते हैं।
मंगल. 26।—मैं आगे आयर-कोर्ट गया।
यहाँ भी पादरी ने मुझे अपने गिरजे का उपयोग करने दिया; परन्तु लोग इस बात को बहुत कम समझते जान पड़े।
क्योंकि बर में मुझे यह सुविधा नहीं मिली, मैं चौक में गया, जहाँ एक बड़े मकान के स्वामी ने मुझे उसके सामने प्रचार करने के लिए बुलाया।
मण्डली बहुत बड़ी थी; परन्तु उनमें से बहुत से बिना सधाए बछेड़ों की तरह उद्दण्ड थे।
फिर भी, उनमें से कहीं अधिक लोग गम्भीरता से ध्यान दे रहे थे।
मुझे आशा है कि परमेश्वर का कार्य यहाँ भी फिर जाग उठेगा; और इसलिए भी कि उसने राज्य के सबसे प्रसिद्ध पीछे हटने वालों में से एक को पूरी तरह लौटा लिया है।
जब मैं टलमोर आया, तो पादरी इच्छुक था कि मैं गिरजे में प्रचार करूँ; जहाँ सिपाही और सब अफ़सर उपस्थित थे, और हमारा महान सेनापति भी उपस्थित था।
गुरु. 28।—मैंने सोचा था कि पोर्टार्लिंगटन का भवन मण्डली से भी अधिक को समा लेगा; परन्तु वह मुश्किल से
रेव. जे. वेस्ली का
[मई, 1785। उनके एक तिहाई को समा सका।
इसलिए मैं बाज़ार-भवन में गया, और सामान्य न्याय-विचार पर प्रचार किया।
वचन जीवित और सामर्थी था, ऐसा कि बहुत थोड़े ही अप्रभावित दिखाई दिए।
सन्ध्या को मैंने माउण्ट-मेलिक के गिरजे में प्रचार किया।
शायद वहाँ पहले कभी ऐसी मण्डली नहीं हुई थी।
परन्तु उनमें से अधिकांश गल्लियो के से मन के जान पड़े, जिसे इन बातों की कुछ चिन्ता न थी।
शुक्र. 29।—मैंने किल्केनी में अपने ही भवन में बिलकुल वैसी ही एक मण्डली को प्रचार किया।
परन्तु जो सुबह आए थे वे अधिक उदार मन के थे, और मैंने उनके बीच असाधारण स्वतन्त्रता पाई।
शनि. 30।—मैंने वाटरफ़ोर्ड में कचहरी-भवन में प्रचार किया, जो राज्य के सबसे बड़े भवनों में से एक है।
लोगों की भीड़ शीघ्र ही दौड़कर इकट्ठी हो गई, जिससे आरम्भ में कुछ हलचल हुई; परन्तु वह जल्दी थम गई, और सब गहरे ध्यान से सुनते रहे।
निश्चय ही परमेश्वर के इस नगर में बहुत से लोग होंगे।
रवि. मई 1।—आठ बजे मैंने कचहरी-भवन में पहले से बड़ी मण्डली को प्रचार किया।
ग्यारह बजे मैं गिरजाघर गया, जो आयरलैंड के सबसे सुन्दर गिरजों में से एक है।
सारी आराधना अत्यन्त गम्भीरता से सम्पन्न हुई।
आराधना के बाद, वरिष्ठ प्रीबेण्ड डॉ. फ़ॉल ने मुझे भोजन के लिए बुलाया; और कहा कि जब मैं फिर आऊँ तो उसके घर में ठहरूँ।
मुझे सन्देह है कि ऐसा कभी नहीं होगा!
चार बजे मैंने मॉल के सिरे पर, मूरफ़ील्ड्स की-सी मण्डली को प्रचार किया, जो सब शान्त और ध्यानपूर्वक थी।
सोमवार, 2। सुबह पाँच बजे की मण्डली शनिवार की सन्ध्या की मण्डली से बड़ी थी; और सब को (कम से कम इस समय) अपने उद्धार की सच्ची चिन्ता जान पड़ी।
काश कि यह भोर की ओस के समान न उड़ जाए!
मैंने इन स्नेही लोगों से गम्भीरता से विदा ली, और इन गम्भीर शब्दों से समाप्त किया :—
अब हम मृत्यु के किनारे पर खड़े हैं; और यदि मैं पहले पार हो जाऊँ, तो तुम सब सुरक्षित किनारे पर पहुँच सकते हो, और तट पर मेरा स्वागत करो।
मंगल. 3।—हम डन्गार्वन फ़ेरी के लिए निकले; परन्तु जितनी तेज़ी हम कर सकते थे सब करने पर भी, सड़क इतनी भयानक थी कि हम सन्ध्या छह बजे से पहले यॉघल नहीं पहुँच सके
सात बजे कचहरी-भवन एक सिरे से दूसरे सिरे तक भर गया : और सब का, क्या ऊँच क्या नीच, ऐसा ध्यान था कि मुझे आशा है उनमें से बहुत से सिद्धता तक फल लाएँगे।
मई, 1785।] जर्नल।
बुध. 4।—सुबह पाँच बजे कचहरी-भवन पूरी तरह भर गया।
इसलिए सन्ध्या को मैंने मॉल में प्रचार किया, जहाँ मण्डली लगभग वैसी ही थी जैसी वाटरफ़ोर्ड की पिछली; अन्तर केवल यह कि वे अधिकतर प्रोटेस्टेंट थे, जैसे नगर के अधिकांश लोग हैं; जो राज्य के सबसे विनम्र और शान्त लोगों में से भी हैं।
गुरु. 5।—कॉर्क के आधे मार्ग तक पहुँचने से पहले ही लगभग तीस घुड़सवार मुझसे मिले।
हमने मिडलटन में भोजन किया, और फिर एक सुहावने, भली-भाँति जोते हुए देहात से होकर कॉर्क तक सवारी की।
सन्ध्या को, भरी हुई मण्डली में से बहुतों को बड़ी शान्ति मिली।
शुक्र. 6।—मैंने सोसाइटी की दशा की ठीक-ठीक जाँच की।
मैंने पाया कि संख्या लगभग चार सौ थी, जिनमें से बहुत से बड़े उत्साही थे।
बहुत से बच्चे, अधिकतर लड़कियाँ, निर्विवाद रूप से धर्मी ठहराई गई थीं; उनमें से कुछ पवित्र भी की गई थीं, और सब पवित्रता की आदर्श थीं।
परन्तु हम इस ज्वाला को कैसे बनाए रखें जो अब न केवल कॉर्क में, परन्तु देश के बहुत से भागों में जल उठी है? बैठे रहने से नहीं; परन्तु उस वरदान को, जो उनमें है, उभारने से; निरन्तर जागरूक रहने से; हर एक को चेतावनी देने और हर एक को समझाने से; प्रार्थना की सब सामर्थ्य से सिंहासन को घेर लेने से; और इस सब के बाद भी कुछ उस अनुग्रह को, जो उन्होंने पाया है, काम में लाएँगे, और कुछ नहीं लाएँगे।
इसलिए पीछे हटना अवश्य होगा।
हमें इससे हताश नहीं होना चाहिए; परन्तु आज जो कुछ हमसे हो सकता है वह सब करना चाहिए, और कल को परमेश्वर पर छोड़ देना चाहिए।
शनि. 7।—इस दिन उस आदरणीय सन्त श्री पेरोनेट ने अपनी नातिन कुमारी ब्रिग्स से, जो दिन-रात उनकी सेवा करती थी, कहा कि बगीचे में जाकर थोड़ी हवा ले आओ। वे यशायाह के अन्तिम तीन अध्याय पढ़ रहे थे, और उसे पढ़ते हुए सुन रहे थे। जब वह लौटी, तो वे एक प्रकार के आनन्द-विभोर थे; उन महिमामय बातों के गहरे बोध से, जो शीघ्र ही पूरी होने वाली थीं, उनके गालों पर आँसू बह रहे थे। वे उस दिन अकथनीय रूप से आनन्दित रहे, और रविवार को, यदि सम्भव हो तो, और भी अधिक आनन्दित थे।
और सचमुच स्वर्ग मानो उन सब के लिए खुल गया था जो उनके आस-पास थे। जब वे बिस्तर पर थे, तो वह यह देखने उनके कमरे में गई कि कुछ चाहिए तो नहीं; और जब वह बिस्तर के पैताने खड़ी थी, तो वे मुस्कुराए, और फूट पड़े,
"परमेश्वर तुझे आशीष दे, मेरी प्यारी बच्ची, और उन सब को जो तेरे हैं!
हाँ, वह तुझे आशीष देगा!" जिसे उन्होंने बड़ी लगन से कई बार दोहराया, जब तक वह कमरे से बाहर न चली गई।
जब वह अगली सुबह, सोमवार, 9 को भीतर गई, तो उनका आत्मा परमेश्वर के पास लौट चुका था!
खण्ड 4।
रेव. जे. वेस्ली का
[मई, 1785।
इस प्रकार श्री विन्सेंट पेरोनेट का पवित्र और सुखी जीवन, उनकी आयु के बानवेवें वर्ष में, समाप्त हुआ।
मैं आयु में उनके बहुत निकट पीछे चल रहा हूँ, क्योंकि अब मैं अपनी आयु के बयासीवें वर्ष में हूँ।
काश कि मैं पवित्रता में उनके पीछे चल सकूँ; और मेरा अन्त उनके अन्त जैसा हो!
रवि. 8।—दोपहर बाद मैं प्रचार-भवन के पास उस खाली स्थान में खड़ा हुआ, जिसमें हज़ारों समा सकते हैं।
बहुत बड़ी संख्या इकट्ठी हुई : कोई उपद्रव नहीं हुआ :
यहाँ उपद्रव के दिन बीत चुके हैं; और परमेश्वर ने अब बहुत समय से हमारे शत्रुओं को हमसे मेल-मिलाप से रखा है।
सोम. 9।—लगभग दोपहर को मैंने किन्सेल में पुराने बॉलिंग-ग्रीन पर प्रचार किया, जो पहाड़ी की चोटी पर है, और जहाँ से समुद्र और भूमि दोनों का बड़ा दृश्य दिखता है। सब ने अच्छा व्यवहार किया, केवल कुछ अफ़सरों को छोड़कर, जो पूरी आराधना भर इधर-उधर टहलते और आपस में बातें करते रहे।
आयरलैंड के निर्धन लोग सामान्यतः अच्छा व्यवहार करने वाले हैं : सारी बदतमीज़ी अच्छे कपड़े पहनने वालों में है।
सन्ध्या को मैंने बैंडन की मुख्य सड़क पर बहुत बड़ी मण्डली को प्रचार किया : परन्तु उनमें से कुछ शिक्षित होने से अधिक अच्छे कपड़े पहने हुए थे; क्योंकि वे अधिकतर समय हँसते और बातें करते रहे।
यहाँ पिछले सप्ताह ऐसी घटना हुई जैसी इस शताब्दी में नहीं हुई।
एक सिपाही पुल पर चलते हुए एक देहाती से मिला, और उसकी छड़ी उसे भा गई, तो उसने उसे छीनने का यत्न किया : उस देहाती के साथी ने सिपाही को पटक दिया।
इसकी खबर छावनी में पहुँचने पर सिपाहियों की पूरी टुकड़ी कूच करके नीचे आई, और बिना किसी उकसावे के नगर में आने वाले देहातियों पर टूट पड़ी, उनका पीछा करके उन घरों में भी गई जहाँ वे शरण लेने भागे थे, और उन्हें बेरहमी से काटा-पीटा : बयालीस घायल हुए, कई अपंग हुए, और दो वहीं मारे गए।
बुध. 11।—मैं बैंडन से कॉर्क लौटा; और उन्हें दृढ़ करने का यत्न करने के बाद जो परमेश्वर के लिए बहुत जीवित थे, शुक्रवार, 13 को कुछ कठिनाई से अपने स्नेही मित्रों से छूटकर, मैं दो लम्बे पड़ावों में किल्फ़िनान पहुँचा।
बाहर प्रचार करने के लिए बहुत तूफ़ान था, इसलिए मैंने सभा-कक्ष में प्रचार किया :
सब श्रोता गम्भीर और अच्छा व्यवहार करने वाले थे। मुझे भरोसा है कि कुछ धीरज से फल लाएँगे।
इसके बाद मैंने नगर के पास का डेनिश टीला देखा; जो मैंने पहली बार देखा जिसके चारों ओर तिहरी खाई थी; परन्तु वह डण्डी के निकट वाले टीले जितना न ऊँचा है न बड़ा।
क्या यह अचरज की बात नहीं कि आयरिश लोगों ने भी, स्कॉट लोगों की तरह, उन निर्दय लुटेरों को इतनी जल्दी खदेड़ दिया, जिन्होंने इतने लम्बे समय तक इंग्लैंड की सारी शक्ति को ललकारा था?
शनिवार, 14 को मुझे
मई, 1785।] जर्नल।
इससे कहीं बड़ी कौतूहल की वस्तु मिली, एक बड़ा द्रूइद मन्दिर।
मैंने आँख से अनुमान लगाया कि उसका व्यास सौ गज से कम नहीं था; और यदि मुझे ठीक स्मरण है, तो वह स्टोनहेंज या स्टैन्टन-ड्रू के मन्दिर जितना ही अखण्ड था।
हमारे पूर्वज इन विशाल पत्थरों को कैसे ला सके या उठा सके, इसे कौन आधुनिक व्यक्ति समझ सकता है?
सन्ध्या को हमने पाया कि लिमरिक में हमारे बहुत से पुराने मित्र इब्राहीम की गोद में पहुँचा दिए गए थे।
मई 15। (पिन्तेकुस्त का रविवार।) गिरजाघर की आराधना ग्यारह बजे आरम्भ हुई, और तीन बजे तक चली।
पादरियों के अनुरोध पर मेरे प्रभु-भोज में सहायता करने से वह कुछ पहले समाप्त हो गई।
पाँच और छह के बीच, मैंने कस्टम-हाउस के पास अगणित लोगों की भीड़ के बीच अपना स्थान लिया; परन्तु वे
बिना सिखाए इण्डियन के बच्चों के समान उद्दण्ड थे।
उन्होंने ऐसा आश्चर्यजनक शोर मचाया कि मैंने उचित समझा कि उन्हें स्थान दे दूँ और अपने भवन में लौट जाऊँ।
सोमवार, 16। मैंने चुनी हुई सोसाइटी को, जो बिलकुल उपेक्षित हो चुकी थी, पुनः स्थापित किया।
सन्ध्या को मैंने अपने सब भाइयों को गम्भीरता से समझाया कि वे फिर उसी भले पुराने मार्ग पर चलें; और उस दौड़ में, जो उनके सामने रखी है, धीरज से दौड़ें।
मंगल. 17।—गोर्ट के मार्ग में मुझे किल्क्राइस्ट के, जो उससे आठ मील आगे का एक गाँव है, हमारे कुछ भाई मिले, जिन्होंने कर्नल पियर्स की ओर से अपने घर में ठहरने का निमन्त्रण दिया।
उसने मुझे अपनी ही एक गाड़ी में किल्क्राइस्ट भेजा।
वहाँ मुझे बहुत से सीधे-सादे लोग मिले, जिन्हें मैंने आँगन में प्रचार किया।
वहाँ से मैं कर्नल के घर लौटा; परन्तु घर सभ्य अतिथियों से भरा था, इसलिए मैं अपने स्थान से बाहर-सा था; क्योंकि उस एकमात्र विषय पर बात करने की जगह नहीं थी जो एक विवेकशील प्राणी के ध्यान के योग्य है।
बुध. 18।—यह जानकर कि एक छोटी लड़की सारी रात जागती रही, और फिर मुझे देखने के लिए दो मील पैदल चली, मैंने उसे अपनी गाड़ी में बैठा लिया; और यह देखकर चकित हुआ कि वह निरन्तर परमेश्वर में आनन्दित है।
जिस व्यक्ति के यहाँ प्रचारक ठहरते हैं, उसने मुझे बताया कि उसे दो वर्ष से परमेश्वर का शुद्ध प्रेम प्राप्त है। हमने एथेनरी में, जो कभी घनी आबादी का नगर था, नाश्ता किया।
परन्तु अब seges est ubi Troja fuit.* [अर्थात्, जहाँ ट्रॉय था वहाँ अनाज उग रहा है।] दोपहर बाद हम बैलिनरोब गए।
यहाँ के चार्टर-स्कूल का एक उल्लेखनीय वर्णन सुनकर, मैंने ठान लिया कि उसे अपनी आँखों से देखूँ।
मैं वहाँ गया * उस स्थान पर, जहाँ पहले ट्रॉय खड़ा था, अनाज उग रहा है।—सम्पादक, X 2
रेव. जे. वेस्ली का
[मई, 1785। लगभग दोपहर बाद पाँच बजे, परन्तु वहाँ कोई शिक्षक या शिक्षिका नहीं मिली।
सात-आठ लड़के और नौ-दस लड़कियाँ, (शेष इधर-उधर भटक रहे थे,) बहुत गन्दे और फटेहाल, एक ऐसी लड़की की देखरेख में छोड़े गए थे जो औरों से आधा सिर ऊँची थी।
उसने हमें घर के भीतर ले जाकर दिखाया।
मैंने पहले पाठशाला का कमरा देखा, जो एक छोटी कोठरी से बहुत बड़ा नहीं था। वहाँ बीस बच्चों को एक साथ किसी सुविधा से नहीं पढ़ाया जा सकता था।
जब हम शयन-कक्ष में आए, तो मैंने पूछा, "अब इस घर में कितने बच्चे रहते हैं?" और उत्तर मिला, "चौदह-पन्द्रह लड़के और उन्नीस लड़कियाँ।" इन लड़कों के लिए तीन बिस्तर थे, और उन्नीस लड़कियों के लिए पाँच। भोजन के विषय में मुझे बताया गया कि शिक्षक को प्रत्येक के लिए प्रतिदिन सवा पेनी दी जाती थी!
इस प्रकार उन्हें कपड़े, आवास और भोजन दिया जाता है।
परन्तु उन्हें सिखाया क्या जाता है?
जहाँ तक मैं जान सका, बिलकुल कुछ नहीं!
इन बातों की सूचना मैंने डबलिन में इन स्कूलों के आयुक्तों को दी।
परन्तु मैं किसी परिवर्तन के विषय में नहीं सुनता।
यदि यह आयरलैंड के चार्टर-स्कूलों का नमूना है,
तो हम उनसे क्या भलाई की आशा कर सकते हैं?
लिमरिक से यहाँ आते हुए मार्ग में मैंने मेजर वैलेंस का आयरिश व्याकरण पढ़ा और ध्यान से विचारा, जिसे वर्तमान में सबसे उत्तम माना जाता है।
और यह मानते हुए कि उसने आयरिश भाषा का सच्चा वर्णन दिया है, वह न केवल उन सब प्राचीन भाषाओं से, जिनके विषय में मैं कुछ जानता हूँ, तुलना से परे बुरी है; परन्तु अंग्रेज़ी से भी निम्न है,
और फ़्रांसीसी, जर्मन, इतालवी, स्पेनी, या किसी और आधुनिक भाषा से भी।
उसे पढ़ने की कठिनाई असहनीय है, जो मुख्यतः स्वरों और व्यंजनों, दोनों के, मूक अक्षरों की असह्य संख्या के कारण है; जिसके समान स्वर्ग के नीचे किसी भाषा में नहीं मिलता।
सर्वनामों की संख्या और क्रियाओं की अनियमित बनावट भी उतनी ही असह्य है।
परन्तु उनकी कविता जितनी असह्य कुछ भी नहीं; जिसकी सारी रचना इतनी तुच्छ और बचकानी है; और फिर भी उसे लिखने में आधुनिक तुकबन्दी, या दीर्घ और ह्रस्व मात्राओं पर प्राचीन ध्यान, दोनों से अधिक परिश्रम लगता है।
शुक्रवार, 20। मैं आगे कैसलबार गया।
यहाँ मुझे प्रायः सत्कारपूर्ण स्वागत मिलता है।
यहाँ के लगभग सब निवासी हमसे अच्छा प्रेम रखते हैं, और मानते हैं कि मेथोडिस्ट भले मनुष्य हैं।
शनि. 21।—कैसलबार से लगभग तीन मील दूर रेलिन्स के श्री ब्राउन ने हमें अपने घर में बुलाया।
यह उन सबसे सुखद स्थानों में से एक है जो मैंने इस राज्य में देखे हैं : परन्तु यह उतना सुखद नहीं था जितना जब मैं पहली बार वहाँ गया था।
क्योंकि उसकी प्यारी पत्नी और एक स्नेही पुत्री, दोनों एक उत्तम देश में जा चुकी हैं।
मई 22।—(त्रिएक रविवार।) मैंने सुबह इस पर प्रचार किया,
मई, 1785।] जर्नल।
"स्वर्ग में तीन गवाही देने वाले हैं।"
गिरजे की मण्डली ने उल्लेखनीय रूप से अच्छा व्यवहार किया; और पादरी ने एक सही और उपयोगी उपदेश दिया।
पाँच बजे मैंने एक अत्यन्त बड़ी मण्डली को प्रचार किया, और उसके बाद सोसाइटी को प्रभु-भोज दिया।
दो पादरी हमारे साथ थे, कैसलबार का सहायक पादरी और पास के एक पल्ली का सहायक पादरी; जिनमें से एक पहले ही परमेश्वर की शान्ति का आनन्द ले रहा है, और दूसरा उसे लगन से खोज रहा था।
सोम. 23।—एक लम्बे दिन की यात्रा के बाद, मैंने स्लाइगो के नए कचहरी-भवन में उस मण्डली को प्रचार किया जो इस राज्य में आने के बाद से मैंने देखी सबसे बुरी थी। कुछ लोग (जो झूठ-मूठ भद्रजन कहलाते हैं) बिना भय या लज्जा के हँसते और बातें करते रहे, जब तक मैंने उन्हें खुलकर नहीं डाँटा : और भीड़ द्वार के पास उतनी ही रूखी थी।
सुबह मैंने अपने ही प्रचार-भवन में प्रचार किया, मुख्यतः श्रीमती सिम्पसन के कारण, जो इस्राएल में एक माता हैं, और जो बहुत समय से अपने कमरे में बन्द हैं। दोपहर के लगभग टहलते हुए, मैं भारी वर्षा में फँस गया, और मुझे बुरा जुकाम हो गया।
फिर भी, मैंने सन्ध्या को एक ऐसी मण्डली को प्रचार किया जो पिछली रात से कहीं अधिक शिष्ट थी।
इसलिए मुझे लगता है कि यहाँ मेरा परिश्रम बिलकुल व्यर्थ नहीं गया।
बुध. 25।—मैंने लगभग दस बजे मैनरहैमिल्टन के कचहरी-भवन में प्रचार किया; और फिर ब्लैक-माउण्टेन के ऊपर से, जो अब हरियाली से ढका है, एक मनोहर मार्ग से माउण्ट-फ़्लोरेंस तक सवारी की।
यहाँ मैंने देखा कि बहुरंगे फाटक (जैसे वे कुछ वर्ष पहले थे) सादे लाल रंग से रंगे गए हैं। हवा तेज़ और बेधने वाली ठण्डी थी; फिर भी लोगों की भीड़ ने मुझे खुली हवा में प्रचार करने को विवश किया।
गुरुवार, 26। मैंने स्वैडलिनबार के सभा-कक्ष में प्रचार किया; परन्तु कठिनाई के बिना नहीं; मेरा जुकाम इतना बढ़ गया था कि मैं न गा सकता था, न बोल सकता था, केवल एक ही स्वर में। फिर भी, मैंने जैसे-तैसे सन्ध्या को बैलीकोनेल के गिरजे में प्रचार किया, यद्यपि वह बहुत भरा था, और इसलिए बहुत गर्म। शुक्रवार, 27। अपने को लगभग वैसा ही अनुभव करते हुए जैसा ग्यारह वर्ष पहले था, और यह न जानते हुए कि मेरे काम करने का समय कितना थोड़ा हो, मैंने ठाना कि जब तक हो सके कुछ करूँ : इसलिए मैंने पाँच बजे आरम्भ किया; और यद्यपि पहले मुश्किल से सुना जा सका, तथापि जितना अधिक मैं बोला, उतनी ही मेरी आवाज़ दृढ़ होती गई। आधा समाप्त होने से पहले ही हर एक सुन सकता था। सारी महिमा परमेश्वर की हो।
लगभग दस बजे मैंने किलेशांड्रा में लोगों की भीड़ को प्रचार किया।
परन्तु अब मेरी आवाज़ इतनी दृढ़ हो गई थी कि हर एक सुन सकता था। सन्ध्या को, किलमोर में कोई ऐसा भवन न होने से जो आधी मण्डली को भी समा सके, मुझे फिर बाहर प्रचार करना पड़ा।
कई तेज़ बौछारें आईं;
रेव. जे. वेस्ली का
[मई, 1785। परन्तु कोई नहीं गया : क्योंकि प्रभु ने प्रसन्न होकर उन पर, जो उसका भय मानते थे, उनकी आत्माओं पर अनुग्रह की वर्षा भेजी।
शनि. 28।—पाँच बजे, यद्यपि मेरी आवाज़ पूरी तरह लौटी नहीं थी, मैंने उचित समझा कि जैसे बन पड़े बोलूँ।
इसलिए मैंने श्री क्रेइटन के खलिहान में प्रचार किया, और सात बजे कैवन के नाच-घर में।
मैंने यहाँ से सीधे क्लोन्स जाने की योजना बनाई थी; परन्तु एक मित्र ने सन्देश भेजा कि श्री सैंडरसन चाहते हैं कि मैं बैलीहेज़ में उनके गिरजे में प्रचार करूँ, तो मैंने अपना विचार बदल दिया, और वहाँ गया।
बहुत से लोग मेरी प्रतीक्षा कर रहे थे : परन्तु श्री सैंडरसन के मन बदल लेने पर, मैंने सराय के आँगन में धनी और निर्धन दोनों की एक बहुत अच्छा व्यवहार करने वाली मण्डली को प्रचार किया।
यहाँ से मैं क्लोन्स गया, जहाँ मुझे ऐसी सोसाइटी मिली जैसी मैंने आयरलैंड में शायद ही देखी थी, जो हमारे सब नियमों का, बड़े और छोटे, पालन करना विवेक की बात समझती है।
नया प्रचार-भवन अत्यन्त स्वच्छ था, परन्तु मण्डली के लिए बहुत छोटा था।
आज पहली बार प्रचार करना कठिनाई से हुआ; दूसरी और तीसरी बार कम कठिनाई से; चौथी बार बिलकुल नहीं।
रवि. 29।—तथाकथित प्रातःकालीन आराधना बारह और एक के बीच आरम्भ हुई।
पाँच बजे तूफ़ान इतना तेज़ था कि मैं बाज़ार में प्रचार नहीं कर सका, जैसा मैंने पहले सोचा था।
अन्त में हमने नगर के पास एक ढलवाँ घास के मैदान को चुना, जहाँ हम पहाड़ी से पूरी तरह आड़ में थे।
मेरा अनुमान है कि मण्डली डबलिन के भवन को दो बार से भी अधिक भर देती।
हमें कई बौछारें मिलीं; परन्तु लोगों ने उनकी परवाह नहीं की, क्योंकि वे पूरी तरह उत्तम बातों में लगे थे।
सोम. 30।—हम कैलाडन गए। यहाँ अभी एक सुविधाजनक प्रचार-भवन बना है; जिसमें (बेंचें हटाने के बाद) मण्डली ठीक समा गई।
परमेश्वर की सामर्थ्य उनके बीच असाधारण रूप से उपस्थित थी। बहुत से हृदय में छिद गए; और जब तक परमेश्वर ने उनकी आत्माओं से शान्ति की बात न की, उन्होंने शान्ति पाने से इनकार किया; और बहुतेरे पहले ही अकथनीय आनन्द से आनन्दित हो रहे थे।
जब हम मंगलवार को आर्माघ पहुँचे, तो हवा बहुत तेज़ थी, और ठण्ड वैसी थी जैसी दिसम्बर में होती है।
फिर भी, मण्डली को समाने योग्य हमारे पास श्री मैगफ़ की वीथी के सिवाय कोई स्थान नहीं था।
और यहाँ लोग एक-दूसरे से सटकर भीड़ लगाए खड़े थे, और ठण्ड या हवा की परवाह करते नहीं जान पड़े।
मंगलवार, 31। हम प्राइमेट के महल की ओर टहलने गए, और भवन को पूरी तरह देखा।
वह अत्यन्त सुरुचिपूर्ण है, फिर भी भड़कीला नहीं; और सारा भवन सुघड़ ढंग से सजा है, यद्यपि बहुमूल्य ढंग से नहीं।
जबसे मैं
जून, 1785।] जर्नल।
यहाँ पहले आया था, उसने सौ फ़ुट ऊँचा एक स्तम्भ, एक दूध-घर, और अन्य अनेक सुविधाएँ, और एक प्रार्थनालय जोड़ा है, जो अभी तक कभी प्रयोग में नहीं आया।
परन्तु हमें बताया गया कि वह और बहुत सी बातें करने की योजना रखता है!
तो उससे कितना ठीक कहा जा सकता है, Tu secanda marmora Locas sub ipsum funus, et sepulchri Immemor struis domos | * [अर्थात्, तू मृत्यु के निकट होकर भी संगमरमर तराशने के ठेके देता है, और कब्र को भूलकर घर बनवाता है।] ग्यारह बजे मैंने फिर वीथी में प्रचार किया।
सारे समय वर्षा होती रही; फिर भी मण्डली बड़ी और ध्यानपूर्वक थी।
इसके बाद एक भद्र स्त्री ने, जिसे मैंने न पहले कभी देखा था न बाद में, मुझसे बात करने की इच्छा की; और कहा, "मैं आपसे कैलाडन में मिली थी।
मुझे चार सप्ताह से सिर में तीव्र पीड़ा थी; परन्तु मुझे पूरा भरोसा था कि यदि आप अपना हाथ मेरे गाल पर रख दें तो मैं अच्छी हो जाऊँगी; जो मैंने आपसे करने की विनती की थी।
उस क्षण से मैं पूरी तरह अच्छी हूँ।"
यदि ऐसा है, तो परमेश्वर की महिमा करो।
सन्ध्या को वर्षा हमें बाज़ार-भवन में ले गई, जहाँ दो-तीन नशे में धुत्त पुरुषों ने हमें थोड़ा विघ्न पहुँचाया; पर शेष सब (बड़ी मण्डली) ने गहरी गम्भीरता से व्यवहार किया।
बुध. जून 1।—मैंने अपने समवयस्क श्री
मैगफ़ से विदा ली, जिन्हें मैं इस संसार में फिर देखने की शायद ही आशा रखता हूँ।
लगभग दस बजे मैंने ब्लैकवाटर-टाउन में श्री रो के आँगन में एक बड़ी और भद्र मण्डली को प्रचार किया; और सन्ध्या को चार्लमाउण्ट में किले के किनारे उससे भी बड़ी मण्डली को।
जब श्री टी. वहाँ नियुक्त थे, तब श्रीमती टी. इस नगर के लिए अकथनीय आशीष थीं; और धर्म का जो पुनरुद्धार तब आरम्भ हुआ, वह तब से बढ़ता ही गया है।
चार्लमाउण्ट जाते और लौटते समय मार्ग में मैंने उस स्नेही स्त्री श्रीमती आर. से बहुत बातचीत की।
परमेश्वर ने सचमुच उसके साथ बड़ी दया का व्यवहार किया है; और उसकी आत्मा इस समय बहुत जीवित है।
मुझे बड़ी आशा है कि वह, और उसका सारा प्यारा परिवार, अपने आस-पास के सब लोगों के लिए आदर्श होंगे।
गुरु. 2।—मैं चार्लमाउण्ट से तीन मील दूर किल्मैन के पादरी श्री कॉलफ़ील्ड के यहाँ गया।
उनका घर एक सुन्दर वीथी के सिरे पर सुहावने स्थान पर है, जिसमें मैंने बहुत बड़ी मण्डली को प्रचार किया; जिनमें से अधिकांश
होरेस की इन पंक्तियों का बॉसकॉवन का अनुवाद यह है :— दिन पर दिन तेज़ी से बीतता जाता है; चन्द्रमा प्रकृति के विधान से घटने को दौड़ते हैं;
जबकि तू स्तम्भ की नींव डालता है, अपना महल खड़ा करने को, अपनी कब्र से बेसुध !—सम्पादक।
रेव. जे. वेस्ली का
[जून, 1785। गहराई से प्रभावित जान पड़ती थी।
मैंने अपने घोड़े आगे श्री कुक के नगर, दस आयरिश मील, भेज दिए; श्री कॉलफ़ील्ड ने शुक्रवार, 3 को अपने दो घोड़े देकर मुझे वहाँ भेजा।
मैंने वहाँ दस बजे प्रचार किया, और फिर शीघ्रता से आगे बढ़ा : परन्तु सात बजे से पहले लंदनडेरी नहीं पहुँच सका।
तब हमने पाया (यद्यपि उन्हें थोड़ी ही सूचना मिली थी) कि सब ओर से इकट्ठी हुई मण्डली थी।
यहाँ की सोसाइटी बहुत वर्षों से इतनी भली-भाँति स्थापित नहीं रही जितनी अब है।
मुख्य रूप से जिसकी कमी है, वह परमेश्वर के लिए उत्साह, और उसके प्रति पूर्ण आत्म-समर्पण है।
रवि. 5।—आठ बजे मैंने रोमियों के तेरहवें अध्याय के उत्तरार्ध को ज़ोर देकर लागू किया।
गिरजे में हमारी मण्डली बहुत शिष्ट थी, परन्तु प्रभु-भोज लेने वाले उतने नहीं थे जितनों की मुझे आशा थी।
छह बजे हमारा कमरा उतने ही गम्भीर श्रोताओं से भर गया जितने मैंने कभी देखे थे।
सोमवार, 6। सुबह हमारी मण्डली बड़ी थी, जिसमें धनी और निर्धन दोनों थे।
परन्तु इन्हें आने वाले क्रोध से भागने की चेतावनी प्रभावी रूप से कौन दे सकता है?
ग्यारह बजे मैंने लंदनडेरी से सोलह मील दूर न्यूटाउन के एक खुले स्थान में प्रचार किया। सन्ध्या को कोलरेन में हमारी मण्डली क्लोन्स की मण्डली से भी बड़ी थी; और वे मेरे मिले अधिकांश लोगों से अधिक समझदार जान पड़े।
सचमुच, सारा नगर उन सब से भिन्न है जो मैंने देखे हैं।
कोई हड़बड़ी या शोर नहीं, परन्तु दिन और रात दोनों में सब शान्त और स्थिर है; इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि यहाँ इतने लोग शान्ति के सुसमाचार को ग्रहण करते हैं, और "सिद्धता तक फल लाते हैं।"
मंगल. 7।—मैंने प्रेस्बिटेरियन सभा-गृह का प्रस्ताव स्वीकार किया; और वहाँ दोपहर को और सन्ध्या छह बजे प्रचार किया।
बुधवार, 8। सुबह प्रचार करने के बाद, मैं बहुत से प्रेमी लोगों को आँसुओं में छोड़कर बैलीमनी गया; जहाँ मैंने कचहरी-भवन में एक बहुत शिष्ट, और बहुत मन्द, मण्डली को प्रचार किया। वहाँ से हम बैलीमीना गए। दोपहर बाद मैं मोरेवियन बस्ती ग्रेसहिल तक पैदल गया।
विवाहितों के लिए बहुत से छोटे घरों के सिवाय, उनके तीन बड़े भवन हैं; (फ़ुलनेक के भवन की ही योजना पर;) जिनके बीच में प्रार्थनालय है, बायीं ओर अविवाहित पुरुषों का भवन, और दायीं ओर अविवाहित स्त्रियों का। हमने कई कमरे देखने में एक-दो सुखद घण्टे बिताए।
कमरों की स्वच्छता और निवासियों की शिष्टता से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता : परन्तु यदि उनमें शिष्टता अधिक है, तो हममें प्रेम अधिक है। हम किसी परदेशी को, विशेषकर किसी मसीही भाई को, बिना यह पूछे हमारे यहाँ नहीं आने देते कि क्या वह "कुछ खाएगा या पिएगा।"
"परन्तु यह उनका तरीका है।"
मुझे कहते हुए खेद है कि ऐसा ही है।
जब मैं
