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प्रचार करने के लिए ; महापौर ने मुझे टाउन-हॉल के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
नवम्बर 1776।] जर्नल।
जो उपलब्ध है उनमें सर्वश्रेष्ठ।
परन्तु यहाँ कैसा दृश्य खुल गया है!
वहाँ के प्रबन्धक कैसे घोर दुष्ट, कैसे साक्षात् शैतान के अवतार थे!
वे न्याय, दया और सत्य से, और मानवता की हर भावना से कितने पूर्णतः अपरिचित थे!
मेरा विश्वास है कि किसी भी अन्यजातीय इतिहास में इसकी बराबरी नहीं मिलती; मुझे प्राचीन काल के समस्त वृत्तान्तों में एक भी ऐसा उदाहरण स्मरण नहीं: यहाँ तक कि दिव्य कैटो या सद्गुणी ब्रूटस ने भी अपने अधीन सौंपे गए प्रान्तों को उतनी निर्दयता से नहीं लूटा, जितनी निर्दयता से अंग्रेज़ों ने हिन्दुस्तान के उजड़े हुए प्रान्तों को लूटा है।
जब हम नॉर्विच पहुँचे, तो यह पाकर कि हमारे बहुत-से मित्र उस भयानक निर्णय के समर्थकों के कारण डगमगा गए थे, मैंने अगली तीन सुबहें इस प्रश्न की तह तक जाँच करने में लगाईं।
इससे बहुतेरे दृढ़ हो गए; और मुझे भरोसा है कि वे फिर सच्चे सुसमाचार से नहीं हटाए जाएँगे।
गुरु. 14।—मैंने सन्ध्या को दिखाया कि सुसमाचार क्या है, और सुसमाचार का प्रचार करने का क्या अर्थ है।
अगली सन्ध्या मैंने विस्तार से समझाया कि "तुम विश्वास के द्वारा उद्धार पाए हो" का ग़लत अर्थ क्या है और सही अर्थ क्या है।
और बहुतों ने देखा कि जिन्हें साधारणतः सुसमाचार प्रचारक कहा जाता है, उनके द्वारा उनके साथ कितना बुरा छल किया गया था।
रवि. 17।—सुबह लगभग एक सौ पचास सहभागी थे, और एक विशेष आशीष मिली।
दोपहर के बाद और सन्ध्या को हम काफ़ी भीड़ में थे। सोमवार, 18। हम यारमाउथ के लिए रवाना हुए।
यहाँ मुझे समझ नहीं आया कि कहाँ प्रचार करूँ; महापौर ने मुझे टाउन-हॉल के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
परन्तु चैम्बरलेन ने मुझे एक बड़ी इमारत का उपयोग करने दिया, जो पहले गिरजाघर थी।
इसमें शीघ्र ही एक बड़ी मण्डली इकट्ठी हो गई, जिसे मैंने उस "सम्प्रदाय" का वर्णन सुनाया "जिसके विरुद्ध सब जगह बातें की जाती हैं।" मेरा विश्वास है कि जिन्होंने ध्यान से सुना, वे आगे से कुछ अधिक उदार होंगे।
मंगल. 19।—मैंने लोवेस्टॉफ़्ट में नए प्रचार-भवन का उद्घाटन किया,—एक नया और उजला भवन। वह गहरा ध्यान लगाकर सुनने वाले श्रोताओं से पूरी तरह भर गया था।
निश्चय ही उनमें से कुछ सिद्धता तक फल लाएँगे। बुधवार, 20। श्री फ्लेचर ने सुबह प्रचार किया, और मैंने दोपहर को दो बजे।
तब पूरी आँधी चलने लगी, ऐसी कि चलना या खड़ा रहना कठिन था, हवा हमें पाँव से उखाड़ ले जाने को तैयार थी।
उसने किनारे पर खड़ी नावों में से एक को उसके लंगर से खींचकर समुद्र में बहा दिया।
उसमें तीन मनुष्य थे, जो हर क्षण निगल लिए जाने के सिवा और कुछ नहीं देख रहे थे।
परन्तु तुरन्त पाँच बलवान पुरुष एक और खुली नाव में उतरे और प्राण लगाकर चप्पू चलाते हुए उन्हें जा पकड़ा, और उन्हें सुरक्षित किनारे पर ले आए।
पूज्य जे. वेस्ली का
[दिसम्बर 1776।
गुरु. 21।—मैंने बेक्लीज़ में प्रचार किया।
ऐसा नीरस स्थान मैंने कम ही देखा है।
नगर के लोग न प्रसन्न हुए, न रुष्ट, मानो वे "इन बातों की कुछ चिन्ता ही नहीं करते" थे।
फिर भी पचास-साठ लोग भवन में आए, सुनने या देखने के लिए।
सन्ध्या को लोडन के लोग और ही आत्मा के जान पड़े, दृढ़ निश्चय किए हुए कि "सँकरे फाटक से प्रवेश करें।"
शुक्रवार, 22। नॉर्विच में अपने मित्रों से हमारी गम्भीर विदाई हुई; और शनिवार की सन्ध्या मैं श्री फ्लेचर को लंदन वापस ले आया, उनके निकलने के समय से काफ़ी अच्छी दशा में।
शुक्र. 29।—हमने नए चैपल के लिए प्रस्तुत की गई कई योजनाओं पर विचार किया।
एक पर सहमत होकर हमने एक सर्वेक्षक से कहा कि वह ब्योरे बनाए और व्यय का अनुमान भी दे।
फिर हमने उन लोगों के लिए प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया जो भवन का कोई भाग बनाने का काम लेने को इच्छुक थे।
सोम. दिसम्बर 2।—मैं बेडफ़ोर्ड के लिए डिलिजेंस गाड़ी में चला और वहाँ दोपहर के चार बजे पहुँचा।
सन्ध्या को मुझे बोलने में बड़ी स्वतन्त्रता मिली, और मैंने जाना कि परमेश्वर इन लोगों में अपना कार्य फिर जगा रहा है।
मंगल. 3।—मैं सेंट नीट्स गया और श्री वी. के साथ एक घण्टे तक मित्रतापूर्ण बातचीत की।
काश सब मनुष्य मतों से उतने ही ढीले रहते जितना मैं रहता हूँ; काश वे स्वयं सोचते और दूसरों को सोचने देते!
सन्ध्या को मैंने एक बड़ी मण्डली को प्रचार किया, आत्मा के बड़े विस्तार के साथ।
बुधवार, 4।
मैंने गॉडमैनचेस्टर में प्रचार किया, और गुरुवार को लंदन लौट आया।
मार्ग में मैंने श्री ग्रे की रचनाएँ और श्री मेसन द्वारा लिखा उनका जीवन-चरित पूरा पढ़ा।
वे एक सराहनीय कवि हैं, प्रायर या पोप से कुछ कम नहीं; परन्तु कुल मिलाकर वे एक मिलनसार व्यक्ति प्रतीत नहीं होते।
उनका चित्र, मेरी समझ में, उनके चरित्र को व्यक्त करता है;—तीखा, समझदार, प्रतिभाशाली; परन्तु साथ ही घमण्डी, चिड़चिड़ा, ईर्ष्यालु, क्रोधी और प्रतिशोधी।
मैं यह देखकर बिलकुल स्तब्ध रह गया कि वे एक से अधिक बार श्री मेसन का कितनी अवज्ञा से उल्लेख करते हैं; जो स्वयं उन्हीं के समान प्रतिभाशाली, वरन् उन्हीं के समान अच्छे कवि हैं;
(जैसा कि "एल्फ्रीडा" भी दिखाती है, चाहे श्री ग्रे उसे कितना ही तुच्छ समझें या समझने का दिखावा करें;) और इसके अतिरिक्त उनमें वह नम्रता और मानवता भी है, जिसकी श्री ग्रे में बहुत कमी थी।
शुक्रवार, 13, राष्ट्रीय उपवास का दिन था।
यह केवल नगर भर में ही नहीं, वरन् (जैसा मुझे बाद में बताया गया) सारे देश में पूरी गम्भीरता से मनाया गया। यदि परमेश्वर अब हस्तक्षेप करके हमें भेजे तो मुझे आश्चर्य न होगा
जन. 1777। ] जर्नल।
समृद्धि, क्योंकि अन्ततः हम इतने घमण्डी नहीं रहे कि यह स्वीकार न करें कि "एक परमेश्वर है जो पृथ्वी का न्याय करता है।"
सोम. 16।—मैंने कैंटरबरी में प्रचार किया; मंगलवार को,
डोवर में; बुधवार को लगभग ग्यारह बजे, दीन, सूखे, मुर्दा-से सैंडविच में।
परन्तु अब मुझे उन दीन लोगों के विषय में कई वर्षों से अधिक आशा दिखाई दी।
सन्ध्या को मैंने मार्गेट में एक बहुत शिष्ट, फिर भी बहुत गम्भीर मण्डली को प्रचार किया; और मेरा विश्वास है कि (यद्यपि आँधी चल रही थी) सुबह लगभग सौ लोग उपस्थित थे।
गुरु. 19।—कैंटरबरी में मुझे एक और सचमुच सुखदायक अवसर मिला।
परमेश्वर ने ढीले पड़े हाथों को उठाया, और बहुतों को दृढ़ आशा दी कि अन्धकार और बोझिलता के सब दिनों के बाद वे अब भी अच्छे दिन देखेंगे।
शुक्रवार, 20। मैं लंदन लौट आया; और रविवार, 22 को एलिज़ाबेथ ड्यूशेन की अन्त्येष्टि की; वे हृदय की उत्कृष्ट खरी थीं, फिर भी बहुत वर्षों तक परिश्रम और शोक की सन्तान रहीं।
लगभग चालीस वर्ष तक वे भले कामों के लिए उत्साही रहीं, और अन्त में अपनी शक्ति से बढ़कर निर्धनों के लिए परिश्रम करके अपने दिन घटा लिए।
परन्तु उनका अन्त शान्तिमय था।
अब वे अपने परिश्रम से विश्राम पाती हैं, और उनके कर्म उनके साथ-साथ चलते हैं।
मंगल. 31।—हमने वर्ष का अन्त परमेश्वर की गम्भीर स्तुति के साथ किया, कि वह हमारे देश में अपना महान कार्य जारी रखे हुए है।
वर्ष 1738 से यह कार्य न एक वर्ष, न एक महीने के लिए भी रुका है; जिस वर्ष मेरे भाई और मैंने विश्वास द्वारा उद्धार के उस अनोखे सिद्धान्त का प्रचार आरम्भ किया।
बुध.
1 जनवरी, 1777।—हम सदा की भाँति परमेश्वर के साथ अपनी वाचा नई करने के लिए इकट्ठे हुए।
यह एक गम्भीर समय था, जिसमें बहुतों ने अनुभव किया कि उसकी सामर्थ्य चंगा करने को उपस्थित है, और वे नए सिरे से बल पाकर आगे बढ़ने में समर्थ हुए।
गुरु. 2।—मैंने सभोपदेशक की पुस्तक की क्रमवार व्याख्या आरम्भ की।
इससे पहले मुझे उसके अर्थ या उसकी सुन्दरताओं की इतनी स्पष्ट झलक कभी नहीं मिली थी।
न ही मैंने कल्पना की थी कि उसके अलग-अलग भाग इतने उत्तम रीति से एक-दूसरे से जुड़े हैं; सब के सब इस महान सत्य को प्रमाणित करते हैं,—कि परमेश्वर के बिना कोई सुख नहीं।
बुध. 8।—मैंने उस महान और भले पुरुष चार्ल्स पेरोनेट की पाण्डुलिपियाँ देखीं।
मैंने नहीं सोचा था कि उसकी परमेश्वर के साथ इतनी गहरी संगति थी।
मैं बहुत ही थोड़ों को जानता हूँ जो उसके बराबर हों; और यदि उसे विश्वविद्यालय की शिक्षा मिली होती, तो इंग्लैंड में थोड़े ही उससे उत्तम लेखक होते।
सोम. 13।—मैंने हर
पूज्य जे. वेस्ली का
[जन. 1777। सुबह प्रचारकों के साथ एक घण्टा बिताने का अवसर लिया, जैसा मैं ऑक्सफ़र्ड में अपने विद्यार्थियों के साथ करता था।
और हमने यह प्रयत्न किया कि न केवल एक-दूसरे का ज्ञान बढ़ाएँ, वरन् "एक-दूसरे को प्रेम और भले कामों में उसकाएँ।"
बुध. 15।—मैंने अपनी सोसाइटी के उन सदस्यों से भेंट करना आरम्भ किया जो बेथनल-ग्रीन बस्ती में रहते थे।
उनमें से बहुतों को मैंने ऐसी निर्धनता में पाया जैसी देखे बिना कम ही लोग कल्पना कर सकते हैं।
हाय, परमेश्वर का भय मानने वाले सब धनी लोग निर्धनों से नित्य भेंट क्यों नहीं करते?
क्या वे अपना कुछ खाली समय इससे अच्छे काम में लगा सकते हैं?
निश्चय ही नहीं।
वे उस दिन यह पाएँगे जब "हर एक अपने ही परिश्रम के अनुसार अपना प्रतिफल पाएगा।"
अगले दिन सोसाइटी के दूसरे भाग से भेंट करते हुए मैंने वैसा ही एक और दृश्य देखा।
मैंने ऐसी दुर्दशा कहीं नहीं पाई, न्यूगेट के कारागार में भी नहीं।
एक दीन पुरुष अभी-अभी अपने रोग-शय्या से रेंगकर अपनी चिथड़ेधारी पत्नी और तीन छोटे बच्चों के पास निकला था; वे आधे से भी अधिक नंगे थे, और अकाल की साक्षात् मूर्ति; तभी किसी ने एक रोटी लाई, और वे सब दौड़े, उस पर झपटे, और पल भर में उसके टुकड़े-टुकड़े कर डाले।
कौन आनन्दित न होगा कि एक और लोक है?
सोम. 20।—श्रीमती टी. ने हमें एक अद्भुत वृत्तान्त सुनाया :—इसी महीने की 11 तारीख, शनिवार को, उनके छोटे बेटे ने, जो उत्कृष्ट भक्ति वाला बालक था और पाँच-छः वर्ष का था, अपनी आत्मा परमेश्वर को सौंप दी।
वे घर में किसी से कह रही थीं, "मेरा बेटा महिमा में चला गया।"
पास खड़े एक युवक ने चिल्लाकर कहा, "पर मैं तो नरक में जा रहा हूँ।"
वह रविवार और सोमवार भर प्रार्थना करता रहा; परन्तु पूरी निराशा में। मंगलवार को उसे दया की आशा मिली, जो धीरे-धीरे बढ़ती गई। अगली सुबह वह अवर्णनीय आनन्द से आनन्दित हुआ, यह जानकर कि उसके पाप मिटा दिए गए हैं; और शीघ्र ही हेनरी टैरी
(जो अपनी दीन माँ के बहुत आँसुओं का पुत्र था) शान्ति में सो गया।
मंगल. 21।—मैंने श्री ए. के यहाँ भोजन किया। एक-दो महीने पहले उन पर एक मसीही के योग्य परीक्षा आई थी।
उन्होंने अपने छोटे बेटे को (जो चार-पाँच वर्ष का था) एक पल में कुचलकर मरते देखा।
परन्तु उन्होंने कुड़कुड़ाया नहीं :
वे कह सके, "प्रभु ने दिया, और प्रभु ही ने ले लिया।"
रवि. 26।—मैंने फिर ऑलहैलोज़ गिरजाघर में प्रचार किया, सुबह और दोपहर के बाद।
मुझे आत्मा में बड़ी स्वतन्त्रता मिली; और मण्डली बहुत प्रभावित जान पड़ती थी।
यह कैसे?
क्या मैं अब भी मनुष्यों को प्रसन्न करता हूँ?
क्या क्रूस की ठोकर समाप्त हो गई?
लगता है, लगभग पचास वर्ष तक निन्दनीय रहने के बाद, मैं अन्ततः एक सम्मानित पुरुष बनता जा रहा हूँ!
गुरु. 30।—श्री बी. मुझसे मिलने आए, जो बूढ़े, दुर्बल, जर्जर हो गए हैं; हवा के एक झोंके का सामना करना या
मार्च 1777।] जर्नल।
सीढ़ियों पर रेंगकर चढ़ना-उतरना भी उनसे मुश्किल से होता है!
घर में अपने आपको दड़बे में बन्द करके दिन-प्रतिदिन निष्क्रिय बैठे रहने का यही फल है!
सोम. फ़रवरी 3।—यह सुनकर कि ब्रिस्टल में कुछ उपद्रव हुआ है, जो उन लोगों के कारण था जिनकी जीभें सरकार के विरुद्ध आग लगाए हुए थीं, मैं डिलिजेंस गाड़ी से वहाँ गया, और मंगलवार की सन्ध्या को उन गम्भीर वचनों पर ज़ोर दिया,
उन्हें स्मरण दिला कि वे प्रधानों और अधिकारियों के अधीन रहें, किसी को बुरा न कहें।"
मेरा विश्वास है कि परमेश्वर ने अपना वचन लागू किया, और बहुतों को कायल किया कि वे मार्ग से भटके हुए थे।
यह पाकर कि नगर में आग लगाने के बार-बार के प्रयासों से सामान्य घबराहट फैल गई है, मैंने बुधवार, 5 को भरी हुई मण्डली के सामने ये वचन खोलकर लागू किए, "क्या किसी नगर में विपत्ति पड़ती है, जो यहोवा की ओर से नहीं होती?"
गुरुवार को मैंने "इंग्लैंड के निवासियों के नाम एक शान्त सम्बोधन" लिखा।
परमेश्वर इसे भी वैसे ही आशीष दे जैसे उसने पहले वाले को दी थी, कि वह बुरी आग बुझ जाए जो अब भी हमारे बीच है!
शनिवार को मैं लंदन लौट आया।
शनि. 15।—तीसरे संदेश पर मैंने अपना क्रूस उठाया, और कम्प्टर में डॉ. डॉड से भेंट करने गया। मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ।
वे गहराई से प्रभावित तो दिखे, फिर भी परमेश्वर की इच्छा के प्रति पूरी तरह समर्पित थे। श्रीमती डॉड ने भी पूर्ण औचित्य से व्यवहार किया।
मुझे सन्देह नहीं कि परमेश्वर इस बुराई से भलाई निकालेगा।
मंगलवार, 18। मैं उनसे फिर मिला, और उन्हें अब भी अच्छी मनोदशा में पाया : वे शान्ति से अपने को उस सब के हवाले कर रहे थे जो परमेश्वर उनके विषय में ठहराए।
बुध. 19।—मुझसे कहा गया कि मैं एक स्त्री को देखने जाऊँ, जो विश्वास में शान्ति और आनन्द से भर जाने के बाद, पूरी तरह विक्षिप्त हो गई थी।
मैंने शीघ्र जान लिया कि यह केवल स्वाभाविक मामला था; जीवन की उस अवस्था में स्त्रियों को होने वाला एक सामान्य अस्थायी विकार।
मंगल. 25।—मैंने डॉ. सी— एस— के साथ एक सुखद घण्टा बिताया, जो अत्यन्त गम्भीर पुरुष हैं और आर्मीनियाई तथा केल्विनवादियों में मेल कराना चाहते हैं।
नहीं, पर पहले उन्हें उनके हृदय बदलने होंगे।
रवि. मार्च 2।—धूप वाला गर्म दिन होने के कारण मैंने सन्ध्या को मूरफ़ील्ड्स में प्रचार किया।
वहाँ हज़ारों-हज़ार लोग थे; और सब रात की तरह शान्त थे।
अब न केवल हिंसा और उपद्रव, वरन् खुले में प्रचार करने वालों का उपहास भी समाप्त हो गया है।
आज मुझे एक प्रत्यक्षदर्शी से हाल की एक अद्भुत घटना का विस्तृत वृत्तान्त मिला।
कप्तान बेल, जो अत्यन्त मिलनसार पुरुष थे, उन सब के प्रिय जो उन्हें जानते थे, और जिनकी सगाई अभी-अभी उस स्त्री से हुई थी जिसे वे कोमलता से चाहते थे, पिछली शरद ऋतु में इंग्लैंड से जहाज़ पर चले।
20 सितम्बर को हॉक नामक एक छोटे जहाज़ ने उन्हें पुकारा,
94,
पूज्य जे. वेस्ली का
[मार्च 1777।
जिसके कप्तान आर्थर क्रॉफ़र्ड थे, जिन्होंने उनसे कहा कि वे हैलिफ़ैक्स से महामहिम की सेवा में आए हैं, अमेरिकी निजी जहाज़ों की खोज में गश्त कर रहे हैं।
कप्तान बेल ने उन्हें नाश्ते पर बुलाया, पूरी भलमनसाहत से उनका सत्कार किया, और उन्हें कुछ छोटे उपहार दिए : परन्तु जब वे अमेरिकियों को कोसने और गाली देने लगे, तो उन्होंने नम्रता से उन्हें टोका, और वे रुक गए।
सामान के निरीक्षक श्री मैकएनेस ने उन्हें जहाज़ का चक्कर लगाते और उसमें हर चीज़ को ध्यान से देखते हुए देखकर कप्तान बेल से कहा, "सावधान रहिए, यह निश्चय ही शत्रु है!"
परन्तु कप्तान ने उत्तर दिया, "ऐसा नहीं हो सकता; कोई मनुष्य इतना नीच काम नहीं कर सकता।"
कप्तान क्रॉफ़र्ड अपने जहाज़ पर लौट गए, और दूसरे जहाज़ के पिछले भाग के नीचे से गुज़रते हुए, जब कप्तान बेल और कुछ अन्य लोग क्वार्टर-डेक पर खड़े थे, अपने आदमियों को उन पर गोली चलाने का आदेश दिया।
उन्होंने ऐसा ही किया, और उनके पेट में गोली मारी, जिससे उनकी आँतें बाहर निकल आईं।
फिर भी वे गिरे नहीं।
उन्होंने फिर गोली चलाने का आदेश दिया : वे गिर पड़े; और जब उनके आदमी उन्हें ले जा रहे थे, क्रॉफ़र्ड ने जहाज़ पर अधिकार कर लिया।
कप्तान बेल को केबिन में ले जाया गया, तो उन्होंने कहला भेजा कि वे कप्तान क्रॉफ़र्ड से बात करना चाहते हैं : पर वह नहीं आया। तब उन्होंने चाहा कि अपने नाविकों से एक-एक करके बात करें।
उनमें से एक ने कहा, "महाशय, आपकी नीचता से हत्या की गई है," तो उन्होंने उत्तर दिया, "अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम्हारा अपमान करते हैं उनके लिए प्रार्थना करो।
हमारे दुःख उन दुःखों के सामने क्या हैं जो हमारे प्रभु ने हमारे लिए सहे?" फिर उन्होंने चाहा कि हमारे प्रभु के दुःखों का जो वर्णन सन्त यूहन्ना देता है, वह उन्हें पढ़कर सुनाया जाए।
उन्होंने उन सब को अपना प्रेम कहला भेजा जो प्रभु यीशु से प्रेम रखते थे; विशेषकर उसे जिससे वे विवाह करने वाले थे। फिर सब को विदा कहकर वे
शान्ति में चल बसे, दूसरी गोली लगने के लगभग दो घण्टे बाद।
परन्तु कप्तान क्रॉफ़र्ड ने क्या ग़लत किया?
क्या अंग्रेज़ों ने भी अमेरिकी जहाज़ों को अचानक नहीं पकड़ा?
हाँ; परन्तु ऐसी परिस्थितियों में नहीं।
क्योंकि, 1. उसने कोई झण्डा नहीं फहराया, और न जहाज़ को कभी आत्मसमर्पण के लिए ललकारा : 2. उसने उन लोगों पर गोली चलाई जो इस बात की कोई आशंका नहीं रखते थे, और अपने आदमियों को विशेषकर कप्तान बेल की ओर संकेत करके बताया।
इसलिए यह सोची-समझी हत्या थी।
अमेरिकी विद्रोहियों की दया और कृतज्ञता ऐसी ही है!
सोम. 10।—सन्ध्या को मैंने रीडिंग में प्रचार किया।
इस नगर में हम कितने वर्ष हवा को पीटते रहे! बैलों के समान मूढ़ लोगों की ओर हाथ फैलाते रहे!
परन्तु अब ऐसा नहीं है। वह पीढ़ी बीत गई, और उनकी सन्तानें कहीं उत्तम आत्मा की हैं।
मार्ग में न्यूबरी और रैम्ज़बरी में प्रचार करके, बुधवार, 12 को मैं ब्रिस्टल की ओर आगे बढ़ा।
अप्रैल 1777।] जर्नल।
रवि. 16।—मैंने सेंट वर्बर्ग में प्रचार किया, जो ब्रिस्टल में पहला गिरजाघर है जिसमें मैंने कभी प्रचार किया।
मैंने अपने मित्रों से कहा था कि वे वहाँ न आएँ, वरन् अजनबियों के लिए स्थान छोड़ दें।
इस तरह गिरजाघर अच्छी तरह भर गया, पर अत्यधिक ठसाठस नहीं; जो अवसर ढूँढ़ने वालों को अवसर देता है, क्योंकि यह सचमुच पल्लीवासियों के लिए असुविधा है।
शुक्र. 21।—मैंने बाथ में प्रचार किया। मुझे इस पर प्रायः आश्चर्य होता है,—हमारा चैपल सब पापियों के बीच में खड़ा है, फिर भी वहाँ आते-जाते मैंने कभी कोई अशोभन शब्द नहीं सुना, वरन् प्रार्थनाएँ और आशीर्वाद ही प्रचुरता से सुने।
रवि. 23।—मैंने सेंट इविन के गिरजाघर में प्रचार किया, पर विश्वास द्वारा धर्मी ठहराए जाने पर नहीं।
मैं नहीं पाता कि जो मण्डली जागृत नहीं हुई, उसके लिए यह विषय लाभदायक है। मैंने यहाँ उस भयानक वचन को समझाया और ज़ोर देकर लागू किया, "मनुष्यों के लिए एक बार मरना ठहराया गया है।"
सोम. 24।—मैं ब्रिस्टल से चला, और मार्ग में रैम्ज़बरी, विटनी, ऑक्सफ़र्ड और हाई-विकोम्ब में प्रचार करते हुए, गुरुवार को लंदन पहुँचा; जहाँ से नया चैपल बनते समय मैं अधिक समय तक अनुपस्थित नहीं रह सकता।
शुक्रवार, 28। मुझे एक बड़े आदमी से स्नेहपूर्ण संदेश मिला।—परन्तु यदि हवा बदल जाए तो मुझे आश्चर्य न होगा।
रवि. 30।—ईस्टर का दिन गम्भीर और सुखदायक रहा, जिसमें परमेश्वर अपने लोगों के बीच विशेष रूप से उपस्थित था। अष्टक के दौरान मैंने आदिम कलीसिया के उदाहरण के अनुसार प्रतिदिन सुबह प्रभु-भोज दिया।
रविवार, अप्रैल 6।
मैंने अपनी कुछ सोसाइटियों के बीच यात्रा आरम्भ की, कि नए चैपल के व्यय में उनकी सहायता माँगूँ।
मैंने सोमवार, 7 को बर्मिंघम में प्रचार किया; मंगलवार को कांग्लटन में; और बुधवार को मैक्लेस्फ़ील्ड की ओर आगे गया।
यहाँ का नया गिरजाघर उन सब में, जो मैंने इस राज्य में देखे हैं, कहीं अधिक सुरुचिपूर्ण है।
श्री सिम्पसन ने प्रार्थनाएँ पढ़ीं, और मैंने दूसरे पाठ के पहले पद, इब्रानियों 11 पर प्रचार किया।
और मेरा विश्वास है कि बहुतों ने उस विश्वास की अपनी कमी का अनुभव किया जिसका वहाँ वर्णन है।
अगली सन्ध्या मैंने इब्रानियों 12:14 पर प्रचार किया : "बिना पवित्रता के कोई प्रभु को न देखेगा।"
मुझे गहराई से लागू करने का सामर्थ्य मिला, मुख्यतः उन पर जो विश्वास द्वारा उद्धार पाने की आशा रखते थे।
मुझे आशा है कि उनमें से कोई भी आगे ऐसे किसी विश्वास से स्वर्ग जाने का स्वप्न न देखेगा जो पवित्रता उत्पन्न नहीं करता।
शुक्र. 11।—मैंने लगभग दस बजे स्टॉकपोर्ट में और सन्ध्या को मैनचेस्टर में प्रचार किया।
सोमवार, 14। मैंने दोपहर के लगभग वारिंग्टन में और सन्ध्या को लिवरपूल में प्रचार किया; जहाँ अब बहुत-से बड़े जहाज़ गोदियों में खड़े हैं, जो
पूज्य जे. वेस्ली का
[मई 1777। बहुत वर्षों तक दीन अफ़्रीकियों को खरीदने या चुराने और उन्हें अमेरिका में दास बनाकर बेचने के काम में लगे हुए थे।
इस सराहनीय व्यवसाय में अब इन मनुष्य-कसाइयों के पास करने को कुछ नहीं है।
जब से अमेरिकी युद्ध छिड़ा है, मानव-पशुओं की कोई माँग नहीं रही।
इसलिए अफ़्रीका के लोग, यूरोप के लोगों की तरह, अपनी जन्मजात स्वतन्त्रता का आनन्द ले सकते हैं।
बुध. 16।—दोपहर के लगभग मैंने विगन में प्रचार किया; सन्ध्या को बोल्टन के नए भवन में, जो भीतर-बाहर खचाखच भरा था, उस "बुद्धिमान मनुष्य" पर जिसने "अपना घर चट्टान पर बनाया।"
यहाँ बहुत-से लोग उसके उदाहरण पर चल रहे हैं, और परमेश्वर के ज्ञान और प्रेम दोनों में निरन्तर बढ़ रहे हैं।
गुरु. 17।—मैं लिटिल-लेह में श्री बार्कर के यहाँ गया, जो उस महान खाई के ऊपर लड़खड़ा रहे थे।
समय की तंगी के कारण मैं वहाँ से घोड़े पर चेस्टर गया।
कुछ वर्षों से मैं घोड़े पर इतनी दूर नहीं गया था, पर उससे मुझे कोई हानि नहीं हुई।
प्रचार के बाद मैंने चेज़ ली, और लिवरपूल की गाड़ी से कुछ पहले मिडिलविच पहुँचा, जिसमें बैठकर मैं लंदन आगे गया।
अब मैंने डॉ. गेल की "बाइबल के पिछले अनुवाद के संशोधन की ओर एक निबन्ध" पूरी पढ़ ली।
यह भाग केवल मूसा की पाँच पुस्तकों को लेता है; पर बीच-बीच में और भी बहुत-से पदों की व्याख्या की गई है।
निश्चय ही वे पवित्र शास्त्र में सामर्थी और आत्मा में परमेश्वर के कार्य से भली-भाँति परिचित पुरुष थे : और वे स्पष्ट दिखाते हैं कि व्यवस्था-विरोधी और सिद्धता-विरोधी तब ठीक वैसे ही थे जैसे अब हैं।
सोमवार, 21 नए चैपल की नींव रखने का ठहराया हुआ दिन था।
वर्षा ने हम पर बड़ा उपकार किया, क्योंकि उसने उन हज़ारों को आने से रोक दिया जो वहाँ आने का विचार रखते थे। फिर भी इतनी भीड़ थी कि पहला पत्थर रखने के लिए मैं उनके बीच से बड़ी कठिनाई से पहुँचा।
इस पर पीतल की एक पट्टी थी, (जो दूसरे पत्थर से ढकी थी,) जिस पर खुदा था, "यह श्री जॉन वेस्ली द्वारा 1 अप्रैल, 1777 को रखा गया।"
सम्भवतः इसे फिर कोई मानव-आँख नहीं देखेगी; पर यह वहाँ तब तक रहेगा जब तक पृथ्वी और उस पर के काम जलकर भस्म न हो जाएँ।
रवि. 27।—सूर्य निकल आने पर मैंने मूरफ़ील्ड्स में हज़ारों लोगों को प्रचार करने का अवसर झटक लिया।
सब रात की तरह शान्त थे, जब मैंने दिखाया कि "परमेश्वर का पुत्र इसलिए प्रगट हुआ कि शैतान के कामों को नष्ट करे।"
सोम. 28।—एक बजे मैंने गाड़ी ली, और बुधवार की सन्ध्या को न्यूकैसल-अपॉन-टाइन में प्रचार किया।
मैं दक्षिणी काउण्टियों के अपने भाइयों से प्रेम रखता हूँ; फिर भी उनमें मुझे थोड़े ही मिलते हैं जिनमें हमारी उत्तरी सोसाइटियों की आत्मा हो।
शनिवार, 8 मई। मैं गया
मई 1777।] जर्नल।
सन्डरलैंड को, और इन वचनों पर ज़ोर दिया, "जो कैसर का है वह कैसर को दो।"
सोम. 5।—इन ओर का अपना काम पूरा करके मैंने फिर दक्षिण की ओर मुँह किया; और डरहम में प्रचार करके लगभग ग्यारह बजे डार्लिंगटन आगे गया।
हाल में इंग्लैंड के किसी भाग में मुझे ऐसा जीवित कार्य नहीं मिला जैसा यहाँ।
सोसाइटी निरन्तर बढ़ रही है, और परमेश्वर के लिए पूरी तरह जलती हुई जान पड़ती है।
उनमें नम्र, सरल प्रेम के सिवा कुछ नहीं; न कोई विवाद, न किसी प्रकार की अनबन।
वे ठीक उसी वर्णन के अनुरूप हैं जो डेविड ब्रेनर्ड ने अपनी इंडियन मण्डली का दिया है। मैंने प्रचारकों और अगुवों दोनों से विशेष रूप से कहा कि वे उन पर विशेष ध्यान रखें, और यदि सम्भव हो तो शैतान या उसके दूतों को उनकी सरलता में विष घोलने से रोकें।
उनमें से बहुत-से अभी से जानते हैं कि "यीशु मसीह के लहू" ने उन्हें "सब पाप से शुद्ध किया है।"
बुध. 7।—मैं यार्म गया।
वहाँ मुझे एक सुन्दर युवती मिली, जो क्षय रोग की अन्तिम अवस्था में थी; पर ऐसे रोग में जिसके विषय में मैंने न कभी पढ़ा, न डॉ.
विल्सन के सिवा किसी चिकित्सक को बोलते सुना।
घावों का स्थान फेफड़ों में नहीं, वरन् श्वास-नली में है।
मैंने अब तक इसे ठीक होते नहीं जाना।
पिछले वर्ष मेरी घर की देखभाल करने वाली इसी से मरी।
यह युवती कुछ सप्ताहों में मर गई।
गुरु. 8।—लगभग ग्यारह बजे मैंने ओस्मदरली में प्रचार किया। मैंने अपने पुराने मित्र श्री वॉटसन को, जो मुझे पहले-पहल इस देश में लाए थे, अभी-अभी मरा हुआ पाया, लगभग पचास वर्ष एकान्त जीवन बिताने के बाद।
उनकी सेवा करने वाले एक व्यक्ति से मैंने जाना कि मृत्यु का डंक जाता रहा था, और उन्होंने शान्ति से अपनी आत्मा परमेश्वर को सौंप दी।
शुक्र. 9।—मैं मॉल्टन गया, आशा थी कि वहाँ कुमारी आर— वाई— से भेंट होगी : पर उसके स्थान पर मुझे एक पत्र मिला जिसमें लिखा था कि वह कब्र के कगार पर है; पर यह भी जोड़ा था, "निश्चय मेरा प्रभु मुझे एक बार फिर देह में आपको देखने देगा।"
मैं मण्डली को निराश नहीं करना चाहता था; पर प्रचार समाप्त करते ही चल पड़ा, और भोर के लगभग चार बजे ऑटली पहुँचा।
मैंने उसकी बीमारी की परिस्थितियाँ बारीकी से पूछीं।
वह अचानक क्षय रोग की तीसरी अवस्था में आ गिरी है; उसके फेफड़ों में एक या अधिक घाव हैं, वह रक्त थूकती है, छाती में निरन्तर पीड़ा रहती है, और लगातार क्षयज्वर रहता है, जो उसे घोड़े पर चढ़ने या गाड़ी की हिलावट सहने से भी रोकता है।
इस बीच, उसके श्वास में स्तुति और प्रेम के सिवा कुछ नहीं।
अल्पायु फूल, और किसी उत्तम भूमि के लिए पका हुआ!
शनि. 10।—नब्बे और सौ मील के बीच यात्रा करने के बाद खण्ड IV.
पूज्य जे. वेस्ली का
[मई 1777। मैं मॉल्टन लौटा; और एक घण्टा विश्राम करके स्कारबरो आगे गया और सन्ध्या को प्रचार किया।
परन्तु जो दस्त मुझे कुछ दिनों से हो रहे थे, वे इतने बढ़ गए कि आरम्भ में मुझे बोलना कठिन लगा।
फिर भी जितनी देर मैं बोलता गया उतना ही बलवान होता गया।
क्या परमेश्वर संकट में सदा सहायक नहीं?
रवि. 11।—मैंने दूसरी बार वह अनुभव किया जिसे कोई Sebris ex insolatione [धूप लगने से उत्पन्न ज्वर] कहता है।* दिन ठण्डा था; पर जब मैं खिड़की में बैठा था तो सूर्य मेरी पीठ पर गर्म चमक रहा था।
आधे घण्टे से कम में मुझे कँपकँपी होने लगी, और शीघ्र ही जाड़ा देकर तेज़ बुखार चढ़ा।
मैं तुरन्त कम्बलों के बीच लेट गया, और गर्म नींबू-पानी खूब पिया।
दस मिनट में गर्मी का दौर आया, और उसके तुरन्त बाद मुझे नींद आ गई।
आधे घण्टे सोकर मैं उठा और प्रचार किया।
बाद में मैं सोसाइटी से मिला; और मुझे शक्ति की कोई कमी नहीं लगी, वरन् अन्त में उतना ही भला था जितना आरम्भ में।
सोम. 12।—मैंने ब्रिड्लिंगटन में प्रचार किया; मंगलवार, 18 को सुबह बेवर्ली में; और सन्ध्या को हल में, इस पर,
"सँकरा है वह मार्ग जो जीवन की ओर ले जाता है।"
और फिर भी, परमेश्वर का धन्यवाद हो, अब हज़ारों उस पर चल रहे हैं, जिन्होंने कुछ वर्ष पहले उसके विषय में कुछ सोचा ही न था।
बुध. 14।—ग्यारह बजे मैंने पॉकलिंगटन में प्रचार किया, उस सुन्दर स्त्री श्रीमती क्रॉस की मृत्यु को ध्यान में रखते हुए।
एक रंगीला युवक एक युवती के साथ भीतर आया, पाँच मिनट रुका, और ऐसी सहज बेपरवाही से फिर बाहर चला गया मानो वे किसी गवैये को सुन रहे हों।
मैंने मण्डली को ऐसे व्यवहार में निहित गहरी मूर्खता और अज्ञान की ओर ध्यान दिलाया।
इन सजीले मूर्खों ने कभी न सोचा कि इसी अवसर का हिसाब उन्हें मनुष्यों और स्वर्गदूतों के सामने देना होगा!
सन्ध्या को मैंने यॉर्क में प्रचार किया।
मैं अगले दिन खुशी से विश्राम करता, क्योंकि मेरी छाती बहुत बिगड़ी हुई लग रही थी।
परन्तु टैडकास्टर में मेरे प्रचार की सूचना दी जा चुकी थी, इसलिए मैं सुबह नौ बजे चल पड़ा।
लगभग दस बजे चेज़ टूट गई।
मैंने एक घोड़ा उधार लिया; परन्तु वह कुछ आरामदेह न था, तीन मील की सवारी में मुझे ऐसा बिजली-सा झटका लगा कि छाती की पीड़ा बिलकुल जाती रही।
सन्ध्या को मैंने यॉर्क में प्रचार किया; शुक्रवार को डिलिजेंस गाड़ी ली; और शनिवार की दोपहर के बाद लंदन पहुँचा।
18 मई।—(व्हिट-सन्डे होने के कारण।) फ़ाउंड्री में हमारी आराधना सदा की तरह चार बजे आरम्भ हुई; मैंने पूर्वाह्न में वेस्ट-स्ट्रीट चैपल में प्रचार किया; और सन्ध्या को फ़ाउंड्री में। * अनजाने में धूप में रहने से उत्पन्न ज्वर।—सम्पादक
May, 1777.] जर्नल।
दोपहर बाद मैंने जोसेफ गिल्डफ़र्ड की देह को मिट्टी दी, जो एक पवित्र जन और उपयोगी प्रचारक थे।
निश्चय ही इतनी साधारण योग्यता वाले किसी मनुष्य ने इससे पहले इतना भला कभी नहीं किया!
वे जैसे जिए, वैसे ही विश्वास की पूर्ण विजय में मरे, उत्साहपूर्वक आनन्द मनाते और परमेश्वर की स्तुति करते हुए।
मंगल. 20.—मैं भवन-निर्माण समिति से मिला, जो वास्तव में लंदन में मेरा मुख्य कार्य था।
हमने कई बातों पर मिलकर विचार किया, और हमें पूरा भरोसा हुआ कि जिसने हमें आरम्भ करने को प्रेरित किया, वही हमें पूरा करने की सामर्थ्य भी देगा।
शनि. 24,—मेरे भाई और मैंने डॉ. डॉड से एक बार फिर भेंट की, और एक उदास किन्तु लाभदायक घण्टा बिताया।
जहाँ तक मनुष्य निर्णय कर सकता है, वे सच्चे, सुसमाचार के अनुसार पश्चाताप करने वाले जन प्रतीत होते हैं।
यात्रा को सुगम बनाने के लिए मैं रविवार की सन्ध्या स्टीवनेज चला गया।
सोमवार, 26. मैं विदम-कॉमन तक आगे बढ़ा; और मंगलवार को शेफ़ील्ड पहुँचा।
अगले दिन मैं लीड्स गया; और सन्ध्या को प्रचार करने के बाद ओटली की ओर बढ़ चला। यहाँ मैंने ई— आर— को पहले से कहीं अधिक दुर्बल, किन्तु कहीं अधिक आनन्दित पाया। उसका जीवन मानो अन्तिम धागे तक कात लिया गया था।
मैंने आधा घण्टा उसके साथ बिताया, कि उसे सिखाऊँ, और साथ ही उससे सीखूँ, कि मरना कैसे है।
फिर मैंने दो-तीन घण्टे विश्राम किया; और बृहस्पतिवार, 29 को दो बजे घोड़ागाड़ी ली, इस आशा से कि सन्ध्या तक व्हाइटहेवन पहुँच जाऊँ; पर केवल कॉकरमाउथ तक ही पहुँच सका।
शुक्र. 30. मैं व्हाइटहेवन तक आगे गया, जहाँ मुझे एक छोटा जलयान मेरी प्रतीक्षा करता मिला।
सन्ध्या को प्रचार करने के बाद मैं लगभग आठ बजे जहाज़ पर चढ़ा, और सुबह आठ बजे से पहले आइल ऑफ़ मैन में डगलस पर उतर गया।
डगलस अपनी स्थिति, बनावट और भवनों में कॉर्नवॉल के न्यूलिन से बहुत मिलता-जुलता है; केवल वह कहीं बड़ा है, और उसमें कुछ घर पेन्ज़ान्स के अधिकांश घरों के बराबर हैं।
जैसे ही हम उतरे, श्री बूथ ने मुझे पहचानकर रोक लिया, जिन्होंने मुझे आयरलैंड में देखा था, और जिनका भाई कई वर्षों से कूलीलॉफ़ की सोसाइटी का सदस्य रहा है।
मुझे कैसलटाउन ले जाने के लिए एक घोड़ागाड़ी का प्रबन्ध किया गया।
मैं उस देहात को देखकर बहुत चकित हुआ।
डगलस से कैसलटाउन तक पूरे मार्ग में वह इंग्लैंड के अधिकांश भागों जितना ही सुहावना और सुव्यवस्थित खेती वाला है, और उसमें बहुत-से सज्जनों की हवेलियाँ हैं।
कैसलटाउन बहुत कुछ गॉलवे जैसा है; केवल उतना बड़ा नहीं है।
छः बजे मैंने गढ़ के पास प्रचार किया, मेरा विश्वास है कि नगर के सब निवासियों को।
दो-तीन बनी-ठनी युवतियों ने दिखा दिया कि वे धर्म के विषय में कुछ नहीं जानतीं; शेष सब लोग गहरी गम्भीरता से सुन रहे थे।
इसके बाद मैंने श्रीमती वुड के यहाँ, जो H 2 की विधवा हैं, एक घण्टा बड़े सुखद ढंग से बिताया
रेव. जे. वेस्ली का
(June, 1777. स्वर्गीय गवर्नर की।
मुझसे कैसलटाउन में कुछ और रुकने का बहुत आग्रह किया गया; पर मेरा समय निश्चित था।
रवि.
1 जून.—छः बजे मैंने अपने ही कक्ष में प्रचार किया; और आश्चर्य की बात यह कि वहाँ मैंने सब भद्र महिलाओं को देखा। युवा और वृद्ध सब अब गहरे प्रभावित थे, और चाहती थीं कि मैं बस एक-दो घण्टे ही और रुक जाऊँ; पर मुझे जल्दी निकलना पड़ा, ताकि सेवा आरम्भ होने से पहले पीलटाउन पहुँच जाऊँ।
श्री कॉर्बेट ने कहा कि वे मुझे प्रचार के लिए बड़ी प्रसन्नता से कहते, परन्तु बिशप ने उन्हें मना कर दिया है; जिसने अपने सब पादरियों को भी मना किया है कि वे किसी मेथोडिस्ट प्रचारक को प्रभु-भोज में सम्मिलित होने दें
भोज में।
परन्तु क्या कोई पादरी व्यवस्था या विवेक के अनुसार ऐसे निषेध को मानने के लिए बाध्य है? कदापि नहीं।
राजा की इच्छा भी किसी अंग्रेज़ प्रजाजन को तब तक नहीं बाँधती, जब तक कि उसे किसी स्पष्ट व्यवस्था का समर्थन न मिले।
तब बिशप की इच्छा कितनी कम बाँधेगी?
" परन्तु क्या तुमने उसकी आज्ञा मानने की शपथ नहीं ली थी?"
नहीं, न तीनों राज्यों में किसी पादरी ने।
यह केवल एक साधारण जन-भ्रम है।
लज्जा की बात है कि यह लगभग सर्वत्र फैला हुआ है।
वर्षा हो रही थी, इसलिए सेवा के बाद मैं एक बड़े माल्ट-घर में चला गया।
अधिकांश मण्डली पीछे-पीछे आ गई, और वचन को बड़ी भूख से सुना।
दोपहर बाद मौसम साफ़ था, इसलिए पूरी मण्डली गिरजे के आँगन में रुकी रही; और परमेश्वर का वचन सामर्थ्य के साथ था।
यह एक आनन्दमय अवसर था।
सोम. 2.—उनमें से अधिकांश सुबह पाँच बजे उपस्थित थे।
इनसे अधिक प्रेमी और सरल हृदय वाले लोग मैंने कभी नहीं देखे।
और इसमें आश्चर्य नहीं; क्योंकि पूरे द्वीप में केवल छः रोमन कैथोलिक हैं, और कोई असहमत सम्प्रदायी नहीं।
अनुमान है कि इसमें लगभग तीस हज़ार लोग रहते हैं, जो अत्यन्त शिष्ट और दयालु हैं।
जब से तस्करी बन्द हुई है, वे अपनी भूमि को लगन से जोतते हैं:
और उनके पास हेरिंग मछली का बड़ा मत्स्य-व्यवसाय है, जिससे देश दिन-प्रतिदिन उन्नति करता है।
पील का पुराना गढ़ (और उसके भीतर बना गिरजाघर भी) अब केवल खण्डहरों का ढेर है।
वह बहुत बड़ा और अत्यन्त सुदृढ़ था, और उसमें पीतल की बहुत-सी तोपें थीं; पर अब वे इंग्लैंड ले जाई जा चुकी हैं।
मैं एक घोड़े वाली घोड़ागाड़ी में डगलस के लिए चल पड़ा, श्रीमती स्मिथ मेरे साथ सवार थीं।
लगभग एक घण्टे में, मेरे सब प्रयासों के बावजूद, अड़ियल घोड़े ने पहिया एक बड़े पत्थर से टकरा दिया: गाड़ी पल भर में पलट गई; पर हम चिकनी घास पर इतने कोमलता से गिरे कि हम दोनों में से किसी को भी चोट नहीं आई।
सन्ध्या को मैंने डगलस में लगभग उतनी ही बड़ी मण्डली को प्रचार किया जितनी पील में थी, पर वह उतनी गम्भीर कहीं नहीं थी।
दस बजे से पहले हम जहाज़ पर चढ़ गए,
June, 1777.] जर्नल।
और मंगलवार, 3 को लगभग बारह बजे व्हाइटहेवन में उतरे।
मैंने दोपहर बाद पाँच बजे प्रचार किया; और शीघ्रता से कॉकरमाउथ पहुँचकर देखा कि गढ़ के आँगन में एक बड़ी मण्डली प्रतीक्षा कर रही है।
नौ और दस के बीच मैंने घोड़ागाड़ी ली; और बुधवार, 4 को लगभग दस बजे सेटल पहुँचा।
सन्ध्या को मैंने बाज़ार-स्थल के पास प्रचार किया, और दो-तीन भद्र जनों को छोड़ सब गम्भीरता से ध्यान दे रहे थे।
बृहस्पति. 5. लगभग दोपहर को मैं ओटली आया, और ई— आर— को बस जीवित पाया, पर परमेश्वर के लिए पूरी तरह जीवित।
सन्ध्या को ऐसा लगा मानो विदा होती वह सन्त अपनी चादर मण्डली पर डाल गई हो; जब मैं यह समझा रहा था और लागू कर रहा था, 'वे सब पवित्र आत्मा से भर गए,' तब उन पर ऐसा भय छाया हुआ था।
शुक्र. 6.—मैंने ब्रैडफ़र्ड में प्रचार किया, जहाँ विलियम ब्रैमा के यहाँ आने के समय से एक आशीषमय कार्य बढ़ता ही गया है।
" क्या परमेश्वर ने जगत के निर्बुद्धि कामों को इसलिए नहीं चुना कि ज्ञानियों को लज्जित करे?"
रवि. 8.—लगभग एक बजे मैंने बर्स्टाल में अपना स्थान लिया: हज़ारों-हज़ार लोग घाटी और पहाड़ी की ढलान में भर गए; और मैंने पाया कि सब सुन सकते थे।
सन्ध्या को हडर्सफ़ील्ड के निकट वैसी ही एक और भीड़ एकत्र हुई।
इनमें से बहुतों ने पहले कभी किसी मेथोडिस्ट प्रचारक को नहीं सुना था; फिर भी सबने अच्छा व्यवहार किया।
सोम. 9.—मैंने ओटली में एक घण्टा और बिताया।
Spectaculum Deo dignum![लैटिन: परमेश्वर के योग्य दृश्य!]* मैंने विश्वास की सामर्थ्य का ऐसा विजयी उदाहरण पहले नहीं देखा।
निरन्तर पीड़ा में रहते हुए भी उसे कोई शिकायत नहीं: परमेश्वर की महिमा उस पर ऐसी छाया करती है और उसकी इच्छा को अपनी इच्छा में ऐसा समा लेती है!
वह सचमुच सर्वथा स्तुति, सर्वथा नम्रता और सर्वथा प्रेम है।
बुध. 11.—मैंने कोल्न के नए प्रचार-भवन में प्रचार करना ठहराया था।
यह मानकर कि वह भली-भाँति भर जाएगा, मैं समय से कुछ पहले गया; इसलिए जब मैं मंच पर आया तब दीर्घाएँ आधी ही भरी थीं।
दो मिनट बाद, बायीं ओर की पूरी दीर्घा एक साथ गिर पड़ी, उसमें एक सौ पचास या दो सौ व्यक्ति थे।
ऊँचाई और लोगों के भार को देखते हुए कोई सोचता कि बहुत-सी जानें गई होंगी।
पर मैंने एक की भी बात नहीं सुनी।
क्या परमेश्वर अपने स्वर्गदूतों को उन पर आज्ञा नहीं देता जो उससे डरते हैं?
जब हड़बड़ी कुछ थमी, तो मैं पास के घास के मैदान में गया, और शान्ति से परमेश्वर की सारी योजना सुनाई।
बृहस्पतिवार और शुक्रवार को मैंने हैलिफ़ैक्स, डॉ-ग्रीका, * परमेश्वर के ही योग्य एक दृश्य।—सम्पादक।
रेव. जे. वेस्ली का
(जून, 1777.
हॉरबरी और वेकफ़ील्ड में प्रचार किया।
शनिवार को मैंने "परमेश्वर की प्रभुता पर विचार" लिखा।
मेरे विचार में शान्त चित्त वाले मनुष्य को पूरा विषय एक ही बिन्दु पर टिका दिखाई देगा :—सृष्टिकर्ता के रूप में वह अपनी ही सर्वोच्च इच्छा के अनुसार कार्य करने के सिवा कुछ कर ही नहीं सकता था: पर शासक के रूप में वह केवल एक प्रभुसत्ताधारी की तरह नहीं, वरन् न्याय और दया के अनुसार कार्य करता है।
सोम. 16.—मैं रॉथवेल में बच्चों के वर्ग से मिला।
पिछले वर्ष इसमें ग्यारह युवा कन्याएँ थीं। अब वे बढ़कर बीस हो गई हैं।
मेरे विचार में उनमें से सत्रह या अठारह अब परमेश्वर के प्रेम में आनन्दित हैं।
और उनका सारा व्यवहार भी उसके अनुकूल है, जो हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर के उपदेश को सुशोभित करता है।
इसके बाद मैं रॉदरहैम गया, और यह देखकर प्रसन्न हुआ कि उस भले मनुष्य विलियम ग्रीन की मृत्यु से सोसाइटी हताश नहीं हुई है, जो आरम्भ से उनके लिए पिता के समान थे।
वे परिश्रम या दुःख से कभी नहीं घबराए; बल्कि शान्त और स्थिर बने रहे, अपने आपको और अपने आठ बच्चों को परमेश्वर के भरोसे सौंपे हुए, तब भी जब सब लहरें और आँधियाँ उन पर से गुज़र रही थीं।
वे जैसे जिए, वैसे ही विश्वास के पूर्ण निश्चय में मरे, अपनी अन्तिम साँस तक परमेश्वर की स्तुति करते हुए।
मंगल. 17.—मैंने चेस्टरफ़ील्ड के बाज़ार-स्थल में इस पर प्रचार किया, "मनुष्यों के लिए एक बार मरना नियुक्त है।"
यद्यपि मण्डली बहुत बड़ी थी, फिर भी मैंने कोई सुनने वाला हँसी-ठट्ठा करता या असावधान नहीं देखा।
सन्ध्या को मैंने डर्बी में प्रचार किया।
अनुमान था कि लोग आने से डरेंगे, क्योंकि हाल ही में छत का एक भाग गिर गया था।
(वास्तव में वह मण्डली के जुटने से एक घण्टा पहले गिरा था:
नहीं तो बहुत-से लोग घायल होते।) पर वे डरे नहीं: भवन भली-भाँति भर गया: और धनी लोग भी गम्भीरता से उपस्थित हुए।
बुध. 18.—मैंने नॉटिंघम में एक गम्भीर, प्रेमी मण्डली को प्रचार किया।
'इस नगर के लोगों में कुछ ऐसा है जिसे मैं बहुत सराहे बिना नहीं रह सकता; यद्यपि हमारी सोसाइटी के अधिकांश लोग निम्न वर्ग के हैं, जो मुख्यतः मोज़े बनाने के काम में लगे हैं, फिर भी उनके स्वभाव में सामान्यतः एक असाधारण कोमलता और मधुरता है, और उनके व्यवहार में कुछ शिष्टता है, जो ठोस, जीवित धर्म के साथ मिलकर उन्हें अपने पेशे का आभूषण बना देती है।
बृहस्पति. 19.—मैं लीसेस्टर तब पहुँचा जब मण्डली कुछ समय से प्रतीक्षा कर रही थी: इसलिए मैंने तुरन्त ज़ोर देकर कहना आरम्भ किया,
"प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू उद्धार पाएगा।"
मेरी योजना थी कि यहाँ बिलकुल न रुकूँ, यह मानकर कि परिश्रम व्यर्थ जाएगा। पर पूरी मण्डली के व्यवहार ने मुझे विश्वास दिला दिया
July, 1777.) जर्नल।
कि मेरा निर्णय गलत था।
उन्होंने सुबह पाँच बजे भवन भर दिया, और मानो "परमेश्वर के उस वरदान को जो उनमें है, प्रज्वलित करने" को दृढ़ निश्चयी दिखाई दिए। शनिवार, 21. मैं लंदन लौट आया।
बुध. 23.—मैंने डॉ. डॉड को अन्तिम बार देखा।
वे ठीक वैसी ही मनोदशा में थे जैसी मैं चाहता था।
उन्होंने किसी समय भी किसी के प्रति कुड़कुड़ाहट या रोष प्रकट नहीं किया; बल्कि पूरी तरह और शान्ति से अपने आपको परमेश्वर की इच्छा को सौंप दिया।
ऐसा बन्दी मैंने शायद ही पहले कभी देखा हो, ऐसा दण्डित अपराधी तो और भी कम।
मेरे विचार में कोई उनसे बात करके यह स्वीकार किए बिना नहीं रह सकता कि परमेश्वर उनके साथ है।
बृहस्पति. 26.—मैंने श्री रोलैंड हिल की सचमुच अद्भुत रचना पढ़ी।
मैं चकित खड़ा रह गया!
उनकी तुलना में तो श्री टॉपलेडी स्वयं एक अति शिष्ट, मृदुभाषी सज्जन हैं!
शुक्रवार, 27. मैंने उसका उत्तर लिखा: "बुराई के बदले बुराई नहीं ;" (मैंने मसीह को ऐसा नहीं सीखा;) परन्तु "प्रेम में सत्य बोलते हुए।"
शनि. 28.—मैंने अब अपने चौहत्तरवें वर्ष को पूरा कर लिया है; और परमेश्वर की विशेष कृपा से मैं अपने स्वास्थ्य, बल और शरीर तथा मन की सब क्षमताओं को ठीक वैसा ही पाता हूँ जैसा चौबीस वर्ष की अवस्था में था।
सोम. 30.—मैं नॉर्थैम्प्टनशायर के लिए निकला, और सन्ध्या को स्टोनी-स्ट्रैटफ़ोर्ड में प्रचार किया।
श्री कैनहम ने एक बड़ा और सुविधाजनक स्थान तैयार किया था; पर वह मण्डली को समा न सका।
फिर भी, एक सजीली महिला को छोड़, भीतर और बाहर सब लोग गम्भीर और ध्यानपूर्वक थे।
मंगल.
जुलाई 1.—सन्ध्या को मैंने बकिंघम के निकट मार्टन में प्रचार किया; भारी वर्षा के साथ गरज हमारी पूरी मण्डली छीन लेने को थी।
हमने परमेश्वर को पुकारा।
गरज और वर्षा थम गई, और हमें एक साफ़, धूप भरी सन्ध्या मिली। लोगों की बड़ी संख्या एकत्र हुई, जिनमें से कुछ बारह या चौदह मील से आए थे: और उनका परिश्रम व्यर्थ नहीं गया; क्योंकि परमेश्वर ने अपने वचन के साथ अपनी आत्मा का प्रदर्शन भी किया।
बुध. 2.—भवन पाँच बजे भर से भी अधिक भर गया, और अधिकतर भद्र युवतियों से; जिनकी (मैंने जाना) इस गाँव में बड़ी संख्या है, जो समझ और गम्भीरता दोनों में उल्लेखनीय हैं।
भोजन के बाद हम ऑक्सफ़ोर्ड गए, जहाँ भी हमारी मण्डली बहुत गम्भीर थी।
इसलिए यहाँ बोया गया सारा बीज न पथरीली भूमि पर गिरा, न काँटों में।
दोपहर बाद मैं विटनी गया; और सन्ध्या साफ़ और सुहावनी थी, इसलिए वुड-ग्रीन पर प्रचार किया, ऐसी मण्डली को जो भवन में समा नहीं सकती थी। मैंने सन्ध्या का
104:
रेव.-जे. वेस्ली का
[July, 1777. शेष भाग धरती के कुछ उत्तम जनों के साथ लाभदायक और सुखद रीति से बिताया।
मैं कहने को तैयार था, "मेरे लिए यहाँ रहना भला है।"
नहीं!
तू जा और सुसमाचार का प्रचार कर।
बृहस्पति. 3.—स्ट्राउड में एक उत्साही, गम्भीर, प्रेमी लोगों के बीच मुझे बड़ी शान्ति मिली।
शुक्रवार, 4. मैंने सुस्त ग्लॉस्टर में दस बजे प्रचार किया, और छः बजे टूक्सबरी के नए भवन में।
शनिवार, 5. मैंने अपनी घोड़ागाड़ी सीधे वॉर्सेस्टर भेज दी, और स्वयं घोड़े पर बेंजवर्थ के लिए चला:
गिरजा काफ़ी भरा हुआ था।
इसके बाद मैं श्री बील के साथ उनके घर गया; वही घर जिसमें श्री बेंजामिन सीवर्ड तीन-चार और चालीस वर्ष पहले रहते थे।
सन्ध्या को मैंने ब्रॉडमार्स्टन के छोटे उपासनालय में प्रचार किया।
रवि. 6.—मैंने पेबवर्थ के गिरजे में सुबह और दोपहर बाद प्रचार किया, और सन्ध्या को बेंजवर्थ में।
गिरजा, जितना बड़ा है, भली-भाँति भर गया; और बहुत-से लोग उस समय बहुत प्रभावित हुए।
मैंने वहाँ सुबह आठ बजे एक बार और प्रचार किया, फिर घोड़े पर वॉर्सेस्टर गया।
मंगलवार की सन्ध्या को उस पल्ली के रेक्टर प्रचार में उपस्थित थे; एक निष्पक्ष, समझदार मनुष्य।
वे बहुत चकित दिखाई दिए, क्योंकि उन्होंने पहले कभी सोचा तक नहीं था कि मेथोडिस्टों में सामान्य बुद्धि जैसी भी कोई चीज़ है!
यहाँ की सोसाइटी ने भलाई करने में धीरज से लगे रहकर बुराई को भलाई से पूरी तरह जीत लिया है; अब लोगों के हिंसक पशु भी शान्त हैं, और उनके विरुद्ध अपना मुँह नहीं खोलते।
जब लहरें और आँधियाँ उन पर से गुज़र रही थीं तब उन्हें बहुत लाभ हुआ: वे शान्ति से भी उतना ही लाभ उठाएँ!
बुध. 9.—मैं एक मनोहर घाटी में से होकर मालवर्न-वेल्स गया, जो एक ऊँचे पहाड़ की ढलान पर बसा है और संसार के सबसे सुन्दर दृश्यों में से एक को देखता है; ईवशम की पूरी घाटी।
यहाँ तक मार्ग बहुत अच्छे थे; पर मॉनमथ पहुँचने तक वे बद से बदतर होते गए।
यहाँ बहुत उपद्रव की आशंका थी; पर हमें कोई नहीं हुआ: सब गहरे ध्यान से सुन रहे थे।
बृहस्पतिवार, 10 को सन्ध्या लगभग छः बजे मैंने ब्रेकन के बुर्जों पर प्रचार किया।
शुक्रवार, 11. मैं श्री ग्विन के यहाँ गया, जो एक संकटपूर्ण रोग से अभी-अभी उबर रहे थे।
पर वे उस गम्भीरता से नहीं उबरे हैं जो उस रोग से उत्पन्न हुई।
यह स्थायी आशीष बने!
शनि. 12.—हमने लैंडीलो में भोजन किया; भोजन के बाद हम श्री रीस के उद्यान में टहले, जो मेरे देखे सबसे सुहावने उद्यानों में से एक है; उसे धीरे-धीरे उठती पहाड़ियों के बीच और चारों ओर बहती टेढ़ी-मेढ़ी नदी ऐसा सुन्दर सींचती है।
उसके एक किनारे के पास, एक ऊँचे टीले की चोटी पर, पुराना गढ़ है; एक आदरणीय भवन-समूह, कम से कम विजेता विलियम जितना पुराना, और "खण्डहर होकर भी भव्य।"
July, 1777.] जर्नल।
सन्ध्या को मैंने कार्मार्थन के बाज़ार-स्थल में एक बड़ी मण्डली को प्रचार किया।
बाद में मुझे बताया गया कि महापौर ने मुझे वहाँ प्रचार करने से रोकने के लिए दो सिपाही भेजे थे।
पर यदि भेजे भी थे, तो उनका साहस छूट गया, क्योंकि उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा।
रवि. 13.—हमने पादरी से एक सीधा-सादा, उपयोगी उपदेश सुना, यद्यपि कुछ ने कहा, "उसने सुसमाचार का प्रचार नहीं किया।"
उसने वह प्रचार किया जिसे सुनना इन लोगों को बहुत आवश्यक है, ऐसा न हो कि वे अपने जीवन की भूल में मृत्यु को ढूँढ़ें।
सन्ध्या को मैंने एक विशाल मण्डली को समझाया कि वह कौन है जो अपना घर चट्टान पर बनाता है।
मेरा विश्वास है कि बहुतों के पास सुनने के कान थे, यहाँ तक कि युवाओं और रंगीन मिज़ाज वालों में भी; जिन पर मैंने विशेष रूप से इसे लागू किया।
सोम. 14.—मैं लगभग दोपहर को लिंग्वेयर पहुँचा।
सन्ध्या को श्री पग ने प्रार्थनाएँ पढ़ीं, और मैंने न्यूपोर्ट में प्रचार किया।
यह वेल्स का एकमात्र नगर है जिसे मैंने तब बढ़ता हुआ देखा था।
न्यूपोर्ट-खाड़ी के किनारे सवारी करते हुए मैंने भूमि पर बड़ी मात्रा में पीट के टुकड़े देखे।
ये ज्वार-रेखा से ऊपर की रेत हटाने पर मिलते हैं, जिसके नीचे पीट की एक अटूट परत है, जिसमें पेड़ों की जड़ें, पत्ते, मेवे और अनेक प्रकार की वनस्पतियाँ हैं।
इसलिए स्पष्ट है कि यहाँ समुद्र घुसपैठिया है, और अब उसे ढके हुए है जो कभी सूखी भूमि थी।
सम्भवतः कुछ शताब्दी पहले पूरी खाड़ी ऐसी ही थी।
बल्कि यह भी बिलकुल असम्भव नहीं कि पहले एबेरिस्टविथ से सेंट डेविड्स पॉइंट तक सूखी भूमि रही हो।
मंगल. 15.—श्री बोवेन मुझे अपनी घोड़ागाड़ी में कार्डिगन ले गए।
यह वेल्स का दूसरा नगर है जिसे मैंने देखा, जो निरन्तर भवनों और निवासियों की संख्या दोनों में बढ़ रहा है।
मैंने दोपहर को प्रचार किया; पाँच-छः पादरी एक बड़ी मण्डली के साथ उपस्थित थे; और इससे अधिक ध्यान देने वाली मण्डली मैंने नहीं देखी:
बहुत-से लोग गहरे प्रभावित भी दिखाई दिए।
यदि हमारे प्रचारक यहाँ नियमित रूप से आते रहें, तो मैं नहीं सोच सकता कि उनका परिश्रम व्यर्थ जाएगा।
बुध. 16.—लगभग नौ बजे मैंने न्यूपोर्ट के गिरजे में फिर प्रचार किया, और उस दीन, सरल लोगों के बीच बड़ी स्वतन्त्रता पाई।
हमने ट्रेकून में एडमिरल वॉन के साथ भोजन किया; जो कल्पना की जा सकने वाली सबसे मनोहर जगहों में से एक है।
वहाँ से हम हैवरफ़र्डवेस्ट गए; पर गर्मी और धूल मेरी सहनशक्ति के बराबर थी: मैं कुछ देर निढाल रहा: पर जैसे ही मैं मण्डली में आया, वह सब जाता रहा; और प्रचार करने तथा सोसाइटी से मिलने के बाद मैं ऐसा तरोताज़ा था जैसा सुबह छः बजे।
रेव. जे. वेस्ली का
[जुलाई, 1777.
बृहस्पति. 17.—मैंने रोच में प्रचार किया, और एक खड़ी चट्टान पर बने पुराने गढ़ को देखा।
एक सज्जन ने चतुराई से श्री
एस— से पूछा, "कृपया बताइए, यह प्राकृतिक है या कृत्रिम?"
उन्होंने गम्भीरता से उत्तर दिया, "कृत्रिम, निश्चय ही; मैंने इसे आयरलैंड के उत्तर से मँगवाया है।"
शुक्र. 18.—हैवरफ़र्ड की सोसाइटी से मैं जितनी अधिक बात करता हूँ, उतना ही उनसे जुड़ता जाता हूँ।
शनिवार, 19. लगभग ग्यारह बजे मैंने हाउटन में प्रचार किया, जो घाट से दो मील पहले है।
उन सरल हृदय लोगों के बीच असाधारण आशीष थी। सन्ध्या को पेम्ब्रोक में हमें वेल्स आने के बाद से देखी सबसे शिष्ट मण्डली मिली।
उनमें से कुछ नाचते और हँसते हुए आए, मानो किसी रंगशाला में; पर उनकी मनोदशा शीघ्र बदल गई, और कुछ ही मिनटों में वे मेरे विषय—मृत्यु—जितने गम्भीर हो गए।
मुझे विश्वास है कि यदि वे बड़ी सावधानी न रखें, तो उसे याद रखेंगे—एक सप्ताह तक!
रवि. 20.—सेंट डैनियल्स की मण्डली गिरजे में समाने से अधिक थी।
प्रार्थनाएँ पढ़ने के बाद मैंने एक घण्टा प्रचार किया, (मेरे लिए एक असाधारण बात,) इस पर, "जो मुझ से, हे प्रभु! हे प्रभु! कहते हैं, उनमें से हर एक नहीं।"
बहुत-से लोग हृदय में बिंध गए; और प्रभु-भोज में बहुत-से घायल हुए और बहुत-से चंगे हुए।
निश्चय ही अब कम से कम, यदि वे अपने हृदय कठोर न करें, तो ये सब अपने पर आई भेंट का दिन पहचान लेंगे।
सोम. 21.—जैटरसन में प्रचार करने का मुझसे बहुत आग्रह किया गया था, जो पेम्ब्रोक से छः-सात मील दूर एक कोयले की खान है; मैंने सात बजे के कुछ बाद आरम्भ किया।
भवन तुरन्त भर गया, और द्वारों तथा खिड़कियों के आसपास की सारी जगह भी; और उन दीन लोगों ने एक-एक शब्द को पी लिया।
मैं अपना उपदेश समाप्त कर चुका था, तभी एक सज्जन ज़बरदस्ती भीतर घुसते हुए लोगों से बोले कि घर जाओ और अपना काम देखो।
चूँकि उन्होंने कुछ बुरे शब्द कहे, मेरे गाड़ीवान ने उनसे बात की।
उन्होंने क्रोध से कहा, "क्या तुम समझते हो कि मुझे एक गाड़ी के छोकरे से सीखने की ज़रूरत है?"
लड़के के यह उत्तर देने पर, "सचमुच, महोदय, मैं ऐसा ही समझता हूँ," बात समाप्त हो गई।
सन्ध्या को मैंने कार्मार्थन के बाज़ार-स्थल में वैसी ही एक और मण्डली को प्रचार किया जैसी वहाँ पहले मिली थी: और मेरा हृदय उनके प्रति इतना खुल गया कि मैं पूरे एक घण्टे प्रचार करता रहा।
मंगलवार, 22. मैंने लगभग एक बजे लैनेली में और सन्ध्या को स्वानसी में प्रचार किया।
बुध. 23.—मैंने पाँच बजे स्वानसी में प्रचार किया; नीथ में आठ और नौ के बीच; और लगभग एक बजे मार्गम में।
इसके और ब्रिज-एंड के बीच के मार्ग में हमें यूरोप में अपने स्मरण की सबसे भारी वर्षा मिली: और उसने जॉन
प्रिकर्ड के प्राण बचा लिए; क्योंकि तुरन्त मनुष्य और पशु दोनों ढँक गए
Aug. 1777.] जर्नल।
बिजली की एक चादर से; पर वह पूरी तरह भीगा हुआ था, इसलिए उसे कोई हानि नहीं हुई।
सन्ध्या को मैंने ब्रिज-एंड के निकट ओल्डकैसल के गिरजे में प्रचार किया।
बृहस्पति. 24.—मैंने काउब्रिज के नगर-भवन में एक बड़ी और गम्भीर मण्डली को प्रचार किया।
शुक्रवार, 25. लगभग ग्यारह बजे मैंने प्रार्थनाएँ पढ़ीं, और लैंटविट के गिरजे में एक बहुत बड़ी मण्डली को प्रचार किया।
इंग्लैंड छोड़ने के बाद से मैंने न इतना बड़ा, न इतना सुन्दर गिरजा देखा है।
वह साठ गज़ लम्बा था; पर उसका एक सिरा अब खण्डहर है।
मेरा अनुमान है कि वह वेल्स का सबसे सुन्दर, और साथ ही सबसे विशाल गिरजा रहा होगा।
सन्ध्या को मैंने फ़ॉन्टेगैरी में श्रीमती जोन्स के घर प्रचार किया।
इस समय तो शिष्ट श्रोता भी प्रभावित दिखाई दिए; और परमेश्वर उस प्रभाव को बनाए रखने में समर्थ है।
शनि. 26.—मैंने फ़ॉनमॉन कैसल में नाश्ता किया, और बीते समय की स्मृति में उदास सुख पाया।
लगभग दोपहर को मैंने पेनमार्क में प्रचार किया, और सन्ध्या को कार्डिफ़ के उस यादगार पुराने गढ़ में।
रवि. 27.—मैंने नगर-भवन में प्रचार किया; और दोपहर बाद फिर, एक भरे हुए श्रोता-समूह को, केयरफ़िली के एक छोटे गिरजे में प्रचार करने के बाद।
सन्ध्या को मैंने श्री
एम— के लैंडाफ़ के सभा-कक्ष में प्रचार किया; और परमेश्वर ने अपना वचन (मेरे विचार में) हर हृदय पर लागू किया।
सोमवार, 28. मैंने न्यूपोर्ट में प्रचार किया, और सन्ध्या को ब्रिस्टल पहुँचा।
बुध. 30.—मैंने श्री फ़्लेचर के साथ एक-दो घण्टे बिताए, जो अनेक प्रार्थनाओं के उत्तर में जीवन में लौटा दिए गए हैं।
उनकी बीमारी से कितने ही विधाता-निर्धारित उद्देश्य पूरे हुए हैं!
और सम्भवतः उनके स्वस्थ होने से और भी बड़े पूरे होंगे।
शुक्र. अगस्त 1.—मैंने चाहा कि जितने हो सकें, उपवास और प्रार्थना में एक हों, कि परमेश्वर अमेरिका के उन बेचारे भ्रमित विद्रोहियों को प्रेम और स्वस्थ मन की आत्मा फिर लौटा दे।
सन्ध्या को हमारी किंग्सवुड में जागरण-सभा थी; और मुझे सुखद आश्चर्य हुआ कि पूरी सेवा समाप्त होने तक शायद ही कोई गया।
मंगल. 5.—हमारा वार्षिक सम्मेलन आरम्भ हुआ।
अब मैंने विशेष रूप से (क्योंकि वह अफ़वाह दूर-दूर तक फैल चुकी थी) हर सहायक से पूछा, "क्या तुम्हारे पास अपने निरीक्षण से यह विश्वास करने का कारण है कि मेथोडिस्ट एक गिरे हुए लोग हैं?
जहाँ तुम रहे हो वहाँ परमेश्वर के कार्य में ह्रास है या वृद्धि? क्या सोसाइटियाँ सामान्यतः कुछ वर्ष पहले की तुलना में परमेश्वर के लिए अधिक मृतप्राय हैं, या अधिक जीवित?"
लगभग
रेव. जे. वेस्ली का
(Aug. 1777. सर्वसम्मत उत्तर यह था, "यदि हमें 'उनके फलों से उन्हें पहचानना' है, तो सामान्यतः लोगों के बीच परमेश्वर के कार्य में कोई ह्रास नहीं है। सोसाइटियाँ परमेश्वर के लिए मृतप्राय नहीं हैं: वे उतनी ही जीवित हैं जितनी कई वर्षों से रही हैं।
और हम इस अफ़वाह को शैतान की केवल एक चाल मानते हैं, ताकि हमारे हाथ ढीले पड़ जाएँ।"
" परन्तु इस प्रश्न का निर्णय कैसे हो सकता है?"
तुम, और तुम, उतना ही निर्णय कर सकते हो जितना देखते हो।
तुम एक भाग को देखकर दूसरे के विषय में निर्णय नहीं कर सकते; जैसे, मान लो, लंदन के लोगों को ब्रिस्टल के लोगों से।
और मेरे सिवा किसी को तीनों राज्यों में उन्हें देखने का अवसर नहीं मिलता।
परन्तु संक्षेप में निपटाने के लिए। अधिकतर स्थानों में मेथोडिस्ट अब भी एक दीन, तुच्छ जाने जाने वाले लोग हैं, जो निन्दा और अनेक असुविधाओं में परिश्रम करते हैं; इसलिए जहाँ कहीं परमेश्वर की सामर्थ्य नहीं है, वहाँ वे घटते हैं।
इससे तुम निश्चित निर्णय बना सकते हो।
क्या मेथोडिस्ट सामान्यतः संख्या में घट रहे हैं?
तो वे अनुग्रह में घट रहे हैं; वे गिरे हुए, या कम से कम गिरते हुए लोग हैं।
पर वे संख्या में घटते नहीं; वे निरन्तर बढ़ते हैं: इसलिए वे गिरे हुए लोग नहीं हैं।
सम्मेलन शुक्रवार को वैसे ही समाप्त हुआ जैसे आरम्भ हुआ था, बहुत प्रेम के साथ।
पर एक बेसुरा तार था: जॉन हिल्टन ने हमसे कहा कि उन्हें हमारे संघ से अलग होना पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने देखा कि मेथोडिस्ट गिरे हुए लोग हैं।
कुछ उनसे तर्क करना चाहते थे, पर वह व्यर्थ परिश्रम था; इसलिए हमने उन्हें शान्ति से जाने दिया।
सोम. 11.—मैं लंदन लौट आया।
बृहस्पतिवार, 14. मैंने "आर्मीनियन मैगज़ीन" के लिए प्रस्ताव तैयार किए।
शुक्रवार, 15. भवन-निर्माण समिति की बैठक हुई, जो अब छत के लिए तैयार है।
अब तक परमेश्वर ने हमारी सहायता की है!
रवि. 17.—शान्त, साफ़ सन्ध्या में मैंने अवसर पाकर मूरफ़ील्ड्स में प्रचार किया।
मण्डली कम से कम उतनी बड़ी थी जितनी मैंने वहाँ कभी देखी।
अब तक मुझे इंग्लैंड में परमेश्वर के कार्य के ह्रास का कोई चिह्न दिखाई नहीं देता।
सोम. 18.—मैं फिर ब्रिस्टल गया, और मार्ग में डॉ. मैकब्राइड की "चिकित्सा का व्यवहार" पढ़ी।
निस्सन्देह यह एक चतुराई-भरी पुस्तक है; फिर भी वह मेरी अपेक्षा पर खरी नहीं उतरी।
कई बातों का मैं अपने अनुभव से खण्डन कर सकता हूँ; जैसे, वे कहते हैं, "सब ज्वरों के साथ प्यास और अनिद्रा (Vigilia) होती है,"
बल्कि दो तीव्र ज्वरों में मुझे बिलकुल प्यास नहीं लगी, और मैं स्वस्थ दिनों से कुछ अधिक ही सोया।
मंगल. 19.—मैं डॉ. कोक के साथ टॉन्टन आगे गया, जिन्होंने अपनी पादरी-पदवी से हटाए जाने पर अपने सम्मानित नाम को विदा कह दिया है, और अपना भाग्य इनके साथ जोड़ने का निश्चय किया है
