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दोपहर को; और सन्ध्या को व्हिटबी में।
रेव. जे. वेस्ली का
[जून, 1784।
तब एक अधिक सुगम घोड़ा पाकर मैं बड़े पहाड़ को पार करके वियरडेल पहुँचा। परन्तु मुझे अपना पुराना आतिथेय न मिला: भला
स्टीफ़न वॉटसन इब्राहीम की गोद में उठा लिया गया था।
इस्राएल की वह माता, जेन नैटर्स (सॉल्केल्ड से पहले की), भी वैसे ही चली गई थी, जो बच्चों के बीच उस अद्भुत कार्य का बड़ा साधन थी। परन्तु परमेश्वर अब भी उनके साथ है: अधिकतर अगुवे और बहुत से लोग परमेश्वर के लिए बहुत जीवन्त हैं; जैसा हमने सन्ध्या को देखा, जब अनुग्रह की ऐसी वर्षा हुई जैसी मैंने कम ही देखी है।
शुक्र. 11।—लगभग दस बजे, मिडलटन नामक एक गाँव से होकर जाते हुए, मुझसे वहाँ प्रचार करने का अनुरोध किया गया।
इसलिए मैंने बिना देर किए गली में आरम्भ कर दिया।
बहुत से लोग इकट्ठे हो गए, और उन्होंने वचन को आनन्द के साथ ग्रहण किया। इसके बाद हम आराम से घोड़े पर बर्नार्ड-कैसल गए; और शनिवार, 12 को डार्लिंगटन।
रवि. 13।—गिरजे में हमने एक खरा, लाभदायक उपदेश सुना।
आठ बजे मैंने अपने ही कमरे में प्रचार किया, और दोपहर बाद खुले में प्रचार करने का विचार था; परन्तु वर्षा ने रोक दिया।
सोमवार, 14। लगभग दोपहर को मैंने नॉर्थएलर्टन में प्रचार किया; और मेरा विश्वास है कि परमेश्वर ने बहुतों के हृदय को छुआ: वैसे ही थर्स्क में भी, जहाँ मैंने सन्ध्या को ध्यान से सुननेवाली सभा को प्रचार किया।
मंगल. 15।—मैंने ओस्मदरली में अपने पुराने मित्रों को एक बार फिर प्रचार किया।
लगभग दोपहर को मैंने पॉटो में प्रचार किया; और सन्ध्या को हटन-रडबी में, जहाँ हमें एक महिमामय अवसर मिला: वहाँ उपस्थित कुछ बड़े लोग प्रभावित जान पड़े, और मसीही होने के लगभग कायल हो गए।
बुधवार, 16। मैंने लगभग आठ बजे स्टोक्सली में प्रचार किया; दोपहर को गिसबरो में; और सन्ध्या को व्हिटबी में।
प्रातः की सभा से भवन भर गया।
सचमुच यहाँ की सोसाइटी इंग्लैंड में सब के लिए एक आदर्श हो सकती है। वे भले कामों और नम्र तथा शान्त आत्मा के सिवा सब आभूषणों को तुच्छ जानते हैं।
मैंने उनके बीच न कोई झालर देखी, न कोई फ़ैशनदार टोपी; यद्यपि उनमें से बहुत से सम्पन्न दशा में हैं।
मैंने सन्ध्या को बाज़ार के स्थान में प्रचार किया, जहाँ भवन की क्षमता से कम से कम तीन गुना लोग थे।
शनि. 19।—मैं एक ऐसी चुनी हुई सोसाइटी से मिला जैसी लंदन छोड़ने के बाद से नहीं देखी।
वे लगभग चालीस थे, जिनमें से मैंने एक भी ऐसा नहीं पाया जिसे भीतर बसे पाप से बचाए जाने की स्पष्ट गवाही न हो। उनमें से कई ने इसे कुछ समय के लिए खो दिया था, परन्तु जब तक उसे फिर न पा लिया, उन्हें चैन न मिला।
और उनमें से हर एक अब परमेश्वर के मुख के पूरे प्रकाश में चलता जान पड़ता था।
लगभग एक बजे मैंने रॉबिन हुड्स बे में साधारण लोगों की एक और सभा को प्रचार किया।
यहाँ पहली सोसाइटी थी
जून, 1784।] जर्नल।
इन सारे क्षेत्रों में, व्हिटबी में किसी के होने से कई वर्ष पहले।
परन्तु उनके आपस के निरन्तर झगड़ों ने उन्हें न अनुग्रह में बढ़ने दिया न संख्या में।
इस समय वे सब शान्ति में जान पड़ते हैं: इसलिए मुझे आशा है कि अब हम उनके विषय में आनन्द मनाएँगे।
सन्ध्या को मैंने स्कारबरो में एक बड़ी सभा को प्रचार किया।
रविवार, 20। नए विकर ने स्पष्ट दिखा दिया कि उसने उन लोगों को क्यों मना किया था जो मेरे लिए उसके गिरजे में प्रचार करने की अनुमति चाहते थे। इससे तीखा उपदेश मैंने कभी नहीं सुना।
इस प्रकार लोगों को गिरजे में आने के लिए मनाने का मेरा सारा काम एक ही बार में उलट गया! और जो भी इस प्रकार प्रचार करते हैं, वे मेरे सब प्रयत्नों के बावजूद मेथोडिस्टों को गिरजे से भगा देंगे।
मैंने सन्ध्या को 1 कुरिन्थियों 13:1, 2, 3 पर प्रचार किया; और परमेश्वर ने अपने वचन की सामर्थ्य से पुष्टि की, और उसे बहुत से सुननेवालों के हृदयों पर लगाया।
सोम. 21।—वर्षा ने हमें ब्रिडलिंगटन के भवन में पहुँचा दिया।
मंगलवार, 22। हम एक छोटे नगर में रुके, जहाँ श्री
ऑस्बाल्डेस्टन हाल ही में रहते थे, जो बड़ी सम्पत्ति के स्वामी थे, और जिनकी पत्नी किसी से भी अधिक रंगीली और फ़ैशनवाली थी; परन्तु अचानक वह एक छोर से दूसरे छोर पर दौड़ गई; उसने अपने सब कपड़े त्याग दिए, सेविका जैसा वेश धारण किया, और जीवन की आवश्यक वस्तुएँ भी स्वयं को मुश्किल से दीं।
परन्तु कौन उसे समझा सकता है कि वह बहुत आगे जा रही है? मुझे डर है कि सर्वशक्तिमान के सिवा कोई नहीं।
लगभग एक बजे मैंने बेवर्ली में एक बड़ी और विशेष रूप से गम्भीर सभा को प्रचार किया; लगभग छः बजे हल में।
इसके बाद मैं सोसाइटी से मिला, और उन्हें दृढ़ता से समझाया कि वे "अपने ऊँचे बुलावे के इनाम की ओर बढ़ते जाएँ।"
बृहस्पतिवार, 24। मैंने लगभग एक बजे पॉकलिंगटन में प्रचार किया; और सन्ध्या को यॉर्क में, जहाँ मैंने इस वचन पर बल दिया, "तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर, और केवल उसी की उपासना कर।"
शुक्रवार, 25। बहुत से लोग आँसू बहा रहे थे, और ऐसा जान पड़ा कि सारी सभा में आग-सी दौड़ गई, जब मैंने इस पद को खोला, "वे अपनी-अपनी खाटों पर विश्राम करेंगे, और हर एक अपनी सीधाई पर चलता रहेगा।"
सन्ध्या को हमें वैसा ही एक और अवसर मिला, जब मैं सूबेदार से कहे गए हमारे प्रभु के इन शब्दों को समझा रहा था, "जा; जैसा तू ने विश्वास किया, वैसा ही तेरे लिये हो।"
शनि. 26।—लगभग दो बजे मैंने थॉर्न में प्रचार किया, और पूछताछ की कि वहाँ परमेश्वर के उस महान कार्य का कितना फल बचा है।
मैंने पाया कि कुछ अपने पापों में लौट गए थे; परन्तु बहुतों ने जो पाया था उसे दृढ़ता से थामे रखा।
यहाँ से मैं एपवर्थ को गया, जिससे मैं अब भी संसार के अधिकतर स्थानों से बढ़कर प्रेम रखता हूँ।
सन्ध्या को मैंने उन सब से, जिन पर इतनी बड़ी कृपा हुई थी, विनती की कि वे "परमेश्वर का अनुग्रह व्यर्थ न पाएँ।"
रेव. जे. वेस्ली का
[जून, 1784।
रवि. 27।—मैंने आठ बजे मिस्टर्टन में प्रचार किया; और लगभग एक बजे ओवरथॉर्प में।
चार बजे मैंने एपवर्थ के बाज़ार-स्थान में अपना स्थान लिया, और उस दिन के सुसमाचार-पाठ के इन शब्दों पर प्रचार किया, "एक मन फिरानेवाले पापी के विषय में स्वर्ग में उन निन्यानबे धर्मियों से अधिक आनन्द होगा, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।"
ऐसा जान पड़ा कि वहाँ उपस्थित पापियों में बहुत कम, यदि कोई था भी, अप्रभावित रहा।
सोम. 28।—मैंने परमेश्वर के उस कार्य की दशा के विषय में पूछताछ की जो दो वर्ष पहले इतना उल्लेखनीय था।
वह अभी समाप्त नहीं हुआ है; परन्तु कई कारणों से एक शोचनीय पतन हुआ है: 1.
थॉमस टैटर्सल के बाद आनेवाले प्रचारक न उतने उत्साही थे न उतने परिश्रमी जितना वह था।
2. जिन दो अगुवों को जवान और लड़के सौंपे गए थे, वे इधर-उधर प्रचार करने चले गए, और इस प्रकार उन्हें बहुत कुछ अपने ही हाल पर छोड़ गए; या यों कहें कि संसार और शैतान के हाथ।
3. दो स्त्रियाँ, जो सबसे अधिक उपयोगी थीं, उन्हें छोड़ गईं: एक नगर छोड़कर, और दूसरी परमेश्वर को छोड़कर।
4. जिन कारख़ानों में इतने बच्चे काम करते थे वे विफल हो गए, इसलिए वे सब बिखर गए।
5. प्रचारकों द्वारा बच्चों की सभाएँ बन्द हो गईं; इसलिए उनका प्रेम शीघ्र ठण्डा पड़ गया; और जब वे बड़े होकर पुरुष और स्त्रियाँ बने, तो मूर्खता भरी अभिलाषाएँ भीतर आईं, और जो अनुग्रह उनमें बचा था उसे नष्ट कर दिया। फिर भी उनका बड़ा भाग दृढ़ बना रहा, विशेषकर युवतियाँ, और अब भी अपने अंगीकार को सुशोभित करती हैं।
आज मैं स्वयं बच्चों से मिला, और उनमें से कुछ को अब भी परमेश्वर के लिए जीवन्त पाया।
और मुझे सन्देह नहीं कि यदि प्रचारक उत्साही और सक्रिय रहें, तो जो बिखर गए हैं उनमें से अधिकतर को वे फिर पा लेंगे।
आज मैंने अपने बयासीवें वर्ष में प्रवेश किया, और स्वयं को परिश्रम करने में, तथा शरीर या मन के किसी भी व्यायाम के लिए, ठीक वैसा ही सशक्त और योग्य पाया जैसा चालीस वर्ष पहले था।
मैं इसका श्रेय गौण कारणों को नहीं, परन्तु सबके सर्वोच्च प्रभु को देता हूँ।
वही जीवन के सूर्य को आज्ञा देता है कि जब तक उसे भाए, ठहरा रहे।
इक्यासी वर्ष की आयु में मैं उतना ही सशक्त हूँ जितना इक्कीस में था; परन्तु कहीं अधिक स्वस्थ, क्योंकि सिरदर्द, दाँत-दर्द और अन्य शारीरिक रोगों से, जो मेरी जवानी में मुझे सताते थे, अब मेरा कोई वास्ता नहीं।
हम केवल यही कह सकते हैं, "प्रभु राज्य करता है!"
जब तक हम जीवित हैं, हम उसी के लिए जीएँ।
दोपहर बाद मैं गेन्सबरो गया, और श्री डीन के चैपल का प्रस्ताव प्रसन्नता से स्वीकार किया।
श्रोता बहुत थे और बहुत प्रभावित जान पड़ते थे: सम्भव है गेन्सबरो में भी कुछ भलाई हो जाए! मंगलवार, 29। मैंने स्कॉटर की
जुलाई, 1784। | जर्नल।
गली में एक बड़ी और गहरे ध्यान से सुननेवाली सभा को प्रचार किया।
वह एक गम्भीर और सान्त्वनापूर्ण समय था।
सन्ध्या को मैंने ओवस्टोन के गिरजे में प्रार्थना-पाठ किया और प्रचार किया; और प्रातः फिर।
बुधवार, 30। सन्ध्या को मैंने एपवर्थ में प्रचार किया।
सप्ताह के शेष दिनों में मैंने पास के कई नगरों में प्रातः और सन्ध्या प्रचार किया।
रवि. जुलाई 4।—मैंने ओवस्टोन के गिरजे में प्रार्थना-पाठ किया और प्रचार किया, जो इतना भरा था जितना शायद पहले कभी न भरा होगा; और मेरा विश्वास है कि हर एक ने, जागृत हो या अजागृत, अनुभव किया कि परमेश्वर वहाँ है।
दोपहर बाद एपवर्थ के बाज़ार-स्थान में सभा पहले की किसी भी सभा से बड़ी मानी गई; और इस्राएल का पवित्र जन उनके बीच महान था।
सोम. 5।—बारह बजे मैंने डॉन्कास्टर के सुरुचिपूर्ण भवन में प्रचार किया, जो एक बार के लिए भली-भाँति भर गया; और मैं अपनी आदत से अधिक दृढ़ता से, बल्कि अधिक कठोरता से बोला।
जब हम रॉदरहैम गए तब उमस भरी गर्मी थी (जैसी एक-दो बार पहले भी रही है), जहाँ मैंने खुले में एक बड़ी सभा को प्रचार किया, जिसमें धनी और गरीब दोनों थे, एपवर्थ से भी बड़ी; और जो विश्वासी कहलाते हैं उन पर गम्भीरता से बल दिया, "उनके फलों से तुम उन्हें पहचानोगे।"
मंगल. 6।—मैं उस चुनी हुई सोसाइटी से फिर मिला, जो बिखर गई थी; और उनसे प्रार्थना की कि आगे को वे अधिक बुद्धिमान हों।
मैंने उस प्यारे वृद्ध पुरुष श्री स्पैरो के यहाँ नाश्ता किया; वे अपने उस जुड़वाँ-प्राण साथी के बड़े भाई हैं जिन्हें मैं वेस्टमिन्स्टर में जानता था।
वहाँ से मैं शेफ़ील्ड गया, जहाँ सोसाइटी बढ़कर लगभग सैकड़ों सदस्यों के निकट पहुँच गई है।
उन लोगों के बीच, जो माथे के पसीने की रोटी खाते हैं, परमेश्वर का कार्य कितनी तेज़ी से फैलता है!
बुध. 7।—अनुमान था कि प्रातः पाँच बजे एक हज़ार लोग उपस्थित थे।
नाश्ते पर एक युवती हमारे साथ थी, जो विलाप कर रही थी और सान्त्वना लेने से इनकार करती थी।
हमने विश्वास से उसके लिए प्रार्थना की, और कुछ ही घण्टों में वह अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर में आनन्द करने के योग्य हुई।
दोपहर बाद गर्मी मुश्किल से सही जाती थी, और हर घण्टे बढ़ती जान पड़ती थी; परन्तु बृहस्पतिवार, 8 की भोर में दो और तीन बजे के बीच एक भयंकर आँधी आई, जिसके पीछे असाधारण गरज और मूसलाधार वर्षा आई, जो लगभग तीन घण्टे चली; इससे हवा पूरी तरह ठण्डी हो गई, और ठीक जब हम चले तब थम गई, और हमें वेकफ़ील्ड तक सुखद यात्रा मिली।
मैंने यहाँ की सभा को (और बाद में बहुत से अन्य स्थानों में) हॉलैंड के लोगों का उदाहरण अपनाने की सलाह दी,
(कम से कम जहाँ-जहाँ मैं गया हूँ,) जो सार्वजनिक उपासना के स्थान में न तो सेवा से पहले, न बाद में कभी बातचीत करते हैं
रेव. जे. वेस्ली का
[जुलाई, 1784। । उन्होंने मेरी सलाह मान ली।
किसी ने सिर नहीं झुकाया, न अभिवादन किया, न किसी से बोला; परन्तु वे उतने ही शिष्ट ढंग से और उतनी ही गहरी चुप्पी में बाहर गए जैसी मैंने रॉटरडैम या उट्रेक्ट में देखी थी।
शुक्र. 9।—मैंने प्रातः हडर्सफ़ील्ड में प्रचार किया; दोपहर को लॉन्गवुड-हाउस में; और सन्ध्या को हैलिफ़ैक्स में।
रविवार, 11। मैंने प्रातः ग्रीटलैंड-हाउस में प्रचार किया; एक बजे, और सन्ध्या को, हैलिफ़ैक्स में।
भवन लोगों को किसी प्रकार नहीं समा सका; फिर भी हवा इतनी तेज़ थी कि मैं खुले में प्रचार नहीं कर सका।
सोम. 12।—श्री सटक्लिफ़ ने प्रार्थना-पाठ किया, और मैंने हेप्टनस्टॉल में प्रचार किया, जहाँ बहुत सी दीन आत्माएँ तरोताज़ा हुईं।
एक और दो बजे के बीच मैंने टॉडमॉर्डन के गिरजे में प्रचार किया; और पाँच बजे हमारे अपने प्रचार-भवन में, जो एक ऊँचे पहाड़ की खड़ी चढ़ाई पर साहसपूर्वक बसा है।
मंगल. 13।—मैं बर्नली गया, एक ऐसा स्थान जिसे कई वर्षों से आज़माया गया था, परन्तु बिना फल के।
जान पड़ता है कि अब समय आ गया था।
ऊँचे और नीचे, धनी और गरीब, अब चारों ओर से इकट्ठे हो आए; और सब सुनने को उत्सुक थे, केवल एक मनुष्य को छोड़कर, जो नगर का ढिंढोरिया था।
वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, जब तक उसकी पत्नी उसके पास दौड़ी न आई और सचमुच उसका शोर बन्द न कर दिया: उसने एक हाथ से उसे पकड़ा और दूसरा उसके मुँह पर रख दिया, कि वह एक शब्द भी न निकाल सका।
तब परमेश्वर ने एक ऐसा कार्य आरम्भ किया, जिसके विषय में मुझे विश्वास है कि वह शीघ्र समाप्त नहीं होगा।
बुधवार, 14। मैंने कोल्न में प्रचार किया।
बृहस्पतिवार, 15। मैं ऑटले चला गया, और दो दिन विश्राम किया।
रविवार, 18।
मैंने प्रातः और दोपहर बाद बिंगली के गिरजे में प्रचार किया; परन्तु वह सभा को समाने के निकट भी नहीं था।
सेवा से पहले मैं रविवार-पाठशाला में गया, जिसमें दो सौ चालीस बच्चे हैं, जिन्हें हर रविवार कई शिक्षक पढ़ाते हैं, और जिनकी देखरेख क्यूरेट करता है।
इस प्रकार एक ही धर्मपीठ के इतने बच्चे खुले पाप से रोके जाते हैं, और कम से कम थोड़ी शिष्टता सिखाई जाती है, साथ ही बाइबल पढ़ना भी।
मैं जहाँ-जहाँ जाता हूँ वहाँ ये पाठशालाएँ उठती देखता हूँ।
सम्भव है इसमें परमेश्वर का उद्देश्य उससे गहरा हो जितना मनुष्य जानते हैं।
कौन जाने इनमें से कुछ पाठशालाएँ मसीहियों की नर्सरी बन जाएँ?
मंगल. 20।—यद्यपि दिन भर वर्षा होती रही, फिर भी प्रातः पाँच बजे हमारी अच्छी सभा हुई।
बुधवार, 21। मैं सोसाइटी से मिला, और केवल एक या दो मूल सदस्य पाए, क्योंकि अधिकतर इब्राहीम की गोद में जा चुके थे। मुझे कुछ आश्चर्य हुआ कि शेष में से केवल दो-तीन ही स्थिर रहे थे
अग. 1784।] जर्नल।
उस महिमामय स्वतन्त्रता में।
परन्तु सचमुच उनमें से अधिकतर ने चार वर्ष पहले अपनी हानि पूरी कर ली।
बृह. 22।—यद्यपि वर्षा हो रही थी, फिर भी मैं प्रातः सभा से मिला, और उनमें से अधिकतर पूर्ण उद्धार के प्यासे थे।
शुक्रवार, 23। प्रातः पाँच बजे बहुत से लोग उपस्थित थे, और बच्चों की ऐसी टोली थी जैसी मैंने इंग्लैंड में कम ही देखी है।
शनि. 24।—सन्ध्या को मैं हैंगिंग-हीटन गया, जो ड्यूज़बरी के पास एक छोटा गाँव है।
कुछ महीने पहले यहाँ परमेश्वर का एक असाधारण कार्य फूट पड़ा था;—सारा नगर आग में था।
अब सोसाइटी में लगभग दो सौ हैं, और बहुत कम हैं जो परमेश्वर को नहीं जानते।
मुझे खुले में प्रचार करना पड़ा, क्योंकि भीड़ उमड़ आई थी; और उनमें से बहुतों ने जाना कि परमेश्वर वहाँ था, जिससे उन्हें अकथनीय सान्त्वना मिली।
रवि. 25।—मैंने बर्स्टल में कई हज़ार लोगों को प्रचार किया, और लीड्स में कम से कम उतनों को।
मंगलवार, 27। हमारा सम्मेलन आरम्भ हुआ; जिसमें हमारे चार भाइयों ने, लम्बे वाद-विवाद के बाद (जिसमें श्री फ्लेचर ने बहुत परिश्रम किया), अपना दोष स्वीकार किया, और जो कुछ बीत चुका था वह सब भुला दिया गया।
बृहस्पतिवार, 29, जो सार्वजनिक धन्यवाद का दिन था, चूँकि पुराने गिरजे में हमारे लिए स्थान नहीं था, मैंने अपने कमरे में प्रार्थना-पाठ भी किया और प्रचार भी।
मैंने उस दिन की सारी सेवा की सराहना की।
प्रार्थनाएँ, पवित्रशास्त्र-पाठ, और उसका हर भाग, एक ही बात की ओर संकेत करता था: "हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हमें भी एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।" पाँच पादरी मेरी सहायता के लिए थे, और हमने प्रभु भोज, जैसा अनुमान था, सोलह-सत्रह सौ लोगों को दिया।
रवि. अगस्त 1।—पुराने गिरजे में हम पन्द्रह पादरी थे।
मंगल. 3।—हमारा सम्मेलन बड़े प्रेम के साथ समाप्त हुआ, जिससे सब को बड़ी निराशा हुई।
आज सन्ध्या मैं हैलिफ़ैक्स तक गया, और अगले दिन मैनचेस्टर।
बृहस्पतिवार, 5। हम सवेरे चले, परन्तु घूमकर जाना पड़ने के कारण साढ़े सात बजे से पहले श्रूज़बरी न पहुँच सके।
मैंने तुरन्त प्रचार आरम्भ किया, भले जॉन ऐपलटन की स्मृति में, जिन्हें हाल ही में उठा लिया गया, इस वचन पर, "जो कुछ तेरे हाथ से बन पड़े उसे अपनी शक्ति भर करना; क्योंकि अधोलोक में, जहाँ तू जानेवाला है, न काम है, न युक्ति, न ज्ञान, न बुद्धि।"
शुक्रवार, 6। मैंने बर्मिंघम में प्रचार किया; और शनिवार, 7 को वूस्टर में।
रवि. 8।—मैंने दोपहर बाद सेंट एंड्रयूज़ के गिरजे में प्रचार किया, और यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि सभा गहरे ध्यान से सुन रही थी, जब मैंने धनवान और लाज़र की कथा को लागू किया।
रेव. जे. वेस्ली का
[अग. 1784।
सोम. 9।—मैं मालवर्न की पहाड़ियों पर से, जो राज्य के सबसे सुन्दर दृश्यों में से एक देती हैं, लेडबरी गया; फिर दयनीय सड़कों से होकर रॉस।
सन्ध्या को मैंने मॉनमाउथ में एक बहुत शान्त और शिष्ट सभा को प्रचार किया।
अब उपद्रव समाप्त हो चुके थे, क्योंकि मैं एक ऐसे सज्जन के घर ठहरा था जिसका विरोध करना कोई नहीं चाहता था; और प्रातः भी हमारी बड़ी सभा हुई, जिसमें धनी और गरीब दोनों थे।
मंगल. 10।—मैं उस स्थान तक टहलने गया जिसे बोलिंग-ग्रीन हाउस कहते हैं, जो नगर से एक मील से कम दूर है। मैंने ऐसा स्थान शायद ही पहले देखा हो।
एक बजरी का मार्ग सबसे सुन्दर घास के मैदानों से होकर जाता है, जो चारों ओर फलवन्त पहाड़ियों से घिरे हैं, और एक धीरे-धीरे उठती भूमि तक पहुँचता है, जिसकी चोटी पर एक चिकना हरा मैदान है, जहाँ नगर के कुलीन लोग प्रायः सन्ध्या नाचने में बिताते हैं। यहाँ से फूलों की किनारी वाले अनेक मार्ग फैलते हैं; उनमें से एक नदी तक उतरता है, जिसके पीछे एक और मार्ग चलता है, जिसकी सहज छाया में सूर्य नहीं पैठता। ये अपनी तरह में उतने ही सुन्दर हैं जितने ब्रेकनॉक के लटकते वन भी।
बुधवार, 11। इन स्नेही लोगों से अलग होना कुछ कठिन रहा, और मैं एक अत्यन्त मनोहर देहात से होकर ब्रेकन गया।
बृह. 12।—मैंने छोटे झुण्ड को बड़ी शान्ति में पाया, और संख्या के साथ-साथ बल में भी बढ़ता हुआ।
मैंने टाउन-हॉल में प्रचार किया।
मैंने ब्रेकनॉक में पहले कभी ऐसी सभा नहीं देखी; नहीं, तब भी नहीं जब मैंने खुले में प्रचार किया।
और मैंने परमेश्वर की सामर्थ्य को शायद ही कभी इतना उपस्थित पाया। ऐसा जान पड़ा कि छोटे से बड़े तक हर एक प्रभु को जान लेगा।
शुक्र. 13।—हम कारमार्थन गए।
प्रचार के बाद मैंने सारे श्रोताओं को सलाह दी कि सार्वजनिक उपासना में और उसके बाद वे हॉलैंड के लोगों के शिष्ट व्यवहार का अनुकरण करें। उन सब ने मेरी सलाह मानी; खुली हवा में पहुँचने तक किसी ने होंठ नहीं खोले,
शनिवार, 14, इस ग्रीष्म का सबसे गर्म दिन था।
हम एक बजे के कुछ ही बाद टेनबी पहुँचे।
भोजन के बाद हम नगर में टहलने गए।
मेरा विचार है कि इंग्लैंड में ऐसा कोई नगर नहीं। यह ग्रेट ब्रिटेन का किलमैलॉक है। प्राचीन नगर का दो-तिहाई भाग या तो खण्डहर है, या लुप्त हो गया है। सन्ध्या को मैंने गली में धनी और गरीब की एक बड़ी सभा को प्रचार किया, जो सब शान्त और ध्यानपूर्वक थे।
मैं यह सोचे बिना नहीं रह सकता कि उद्धार अन्त में इस नगर में भी आ पहुँचा है। मैंने रविवार, 15 को प्रातः फिर प्रचार किया, और वचन सुननेवालों के हृदयों में बैठता जान पड़ा। वहाँ से हम पेम्ब्रोक होते हुए सेंट डैनियल्स गए।
यह सान्त्वना का समय था।
हमें ऐसा
