यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
आग में से खींच निकालने और उन्हें मसीह के पास लाने में मिलता है। जब मैं कलीसिया से की जानेवाली ये अपीलें पढ़ता और सुनता हूँ कि वह और अधिक सांसारिक मनोरंजन खोजे, तो मैं विस्मय से भर जाता हूँ। परमेश्वर के साथ घनिष्ठ, गम्भीर और प्रेमपूर्ण चाल में, और आत्माओं को स्वर्ग के योग्य बनाने में उसके साथ सहयोग करने में जो सन्तोष मिलता है, क्या हमें उससे अधिक भरपूर और ऊँचे सन्तोष की आवश्यकता है, क्या वह हमें मिल भी सकता है?
परमेश्वर के लोगों को मनोरंजन खोजने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जो कुछ मैं कहा जाता सुनता हूँ, वह मुझे आत्मिक दशा के बजाय सांसारिक मनोदशा से निकला प्रतीत होता है। क्या यह सम्भव हो सकता है कि जो प्राण परमेश्वर के साथ संगति में है, और निस्सन्देह मरते हुए मनुष्यों के लिए करुणा से तड़पता है, और दिन-प्रतिदिन उनके उद्धार के लिए वेदनापूर्ण प्रार्थना में संघर्ष करता है, वह एक ओर हटकर मनोरंजन खोजने का विचार भी मन में लाए? क्या कोई पास्टर, जिसकी मण्डली में बहुत-से ऐसे प्राण हैं जिनका उद्धार नहीं हुआ, और जिसके सदस्यों में धर्म का अंगीकार करनेवाले बहुत-से सांसारिक मनवाले लोग हैं, एक ओर हटकर सांसारिक सुख पाने के लिए पीछे हटने के किसी आन्दोलन में अपनी कलीसिया की अगुवाई कर सकता है या उसका साथ दे सकता है? हर कलीसिया में ऐसे लोग सदा पर्याप्त संख्या में होते हैं जो उस दिशा में सहज ही भटक जाते हैं। पर वे कौन हैं जो ऐसे आन्दोलन में सबसे तत्परता से शामिल हो जाते हैं? जब कोई पिकनिक, सैर-सपाटे की यात्रा, सांसारिक पार्टी, या सुख की खोज के दूसरे आयोजन प्रस्तावित किए जाते हैं, तब आगे आने को कौन तैयार रहते हैं? क्या वे वास्तव में उस वर्ग के लोग होते हैं जो सदा प्रार्थना-सभाओं में आते हैं, जिनकी मनोदशा सदा जागृति की होती है? क्या वे उस वर्ग के होते हैं जिनके मुख दिन-प्रतिदिन उस परमेश्वर की शान्ति से चमकते हैं जो उनके प्राणों में व्याप्त है? क्या वे वे हारून और हूर हैं जो निरन्तर और प्रबल प्रार्थना से अपने पास्टर के हाथों को सम्भाले रहते हैं? क्या वे आत्मिक सदस्य हैं, जिनका स्वदेश स्वर्ग पर है और जो पृथ्वी की वस्तुओं पर मन नहीं लगाते? कौन नहीं जानता कि कलीसिया के सांसारिक सदस्य ही सांसारिक सुख या मनोरंजन की दिशा में उठनेवाले हर आन्दोलन के लिए सदा तैयार रहते हैं, और यह कि सचमुच आत्मिक, प्रार्थनाशील, स्वर्गीय मनवाले सदस्य ऐसे सब आन्दोलनों से कतराते हैं? बिना बहुत आग्रह के वे उनमें नहीं खिंचते, और जब वे अपने पास्टर को उस बात को प्रोत्साहन देते देखते हैं जो कलीसिया और संसार दोनों के लिए इतनी बड़ी ठोकर का कारण बनने की सम्भावना रखती है, तो वे गुप्त स्थानों में रोते हैं।
अध्यक्ष फ़िन्नी ने विलार्ड ट्रैक्ट रिपॉज़िटरी द्वारा प्रकाशन के लिए उपर्युक्त पुस्तिका का अपना संशोधित रूप भेजते समय उसके साथ डॉ. कलिस के नाम एक टिप्पणी भेजी, जिसमें उन्होंने कहा:
“पिछले पृष्ठों में उन तीन छोटे लेखों का संक्षिप्त रूप है जो मैंने इंडिपेंडेंट में प्रकाशित किए थे। मुझे याद है कि एडवांस के सम्पादक ने, और इंडिपेंडेंट के सम्पादकों में से एक ने—जिन दोनों ने मसीहियों के सांसारिक मनोरंजनों का समर्थन और अनुशंसा करते हुए ऐसे विचार प्रकाशित किए थे जिन्हें मैं बहुत ढीले-ढाले विचार मानता हूँ—उन लेखों की ऐसी कटुता से आलोचना की जिससे प्रतीत होता था कि वे उनसे चिढ़ गए थे। उन्होंने उन्हें यहाँ तक तोड़ा-मरोड़ा कि यह दावा किया कि वे वैराग्य की, और विश्राम, मनोविनोद और सब मनोरंजनों के निषेध की शिक्षा देते हैं। मैं इस पुस्तिका के सिद्धान्त को पूरी तरह बाइबल के अनुसार और सत्य मानता हूँ। पर ऐसे सब अन्यायपूर्ण निष्कर्षों और कुतर्कों से बचने के लिए, निम्नलिखित पंक्तियाँ जोड़ दीजिए।
“कोई यह न कहे कि इस पुस्तिका का सिद्धान्त सब प्रकार के विश्राम, मनोविनोद और मनोरंजन का पूर्ण निषेध करता है। वह ऐसा नहीं करता। वह ऐसे सब विश्राम, मनोविनोद और मनोरंजन को खुले मन से स्वीकार करता है जिसे उसका सहारा लेनेवाला व्यक्ति स्वास्थ्य और बल प्राप्त करने की शर्त और साधन समझता है—
