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कुलपतियों और भविष्यद्वक्ताओं के विषय में मृत्यु के; इसे ले जाओ। और बहुत से लोग इसे बिलकुल न्यायसंगत समझते हैं कि यशायाह इसी कारण मारा गया, क्योंकि वे यह सहन नहीं करते थे कि कोई कहे कि उसने मूसा से बड़े काम किए या देखे हैं।
एलिय्याह का इतिहास भयानक और लगभग अविश्वसनीय है। यह सचमुच प्रचण्ड क्रोध था कि ऐसा पवित्र जन प्रार्थना करे कि वर्षा न हो; परन्तु उसने देखा कि शिक्षक मारे गए थे, और भले और परमेश्वर का भय माननेवाले लोगों का पीछा करके उन्हें खदेड़ा और सताया जा रहा था। इसलिए उसने उनके विरुद्ध प्रार्थना की जिन पर वह वचनों और प्रचार से प्रबल न हो सका।
भविष्यद्वक्ता योना का प्रताप अनुपम है। उसकी पुस्तक में केवल चार अध्याय हैं, फिर भी उनसे उसने सारे राज्य को हिला दिया, यहाँ तक कि अपनी दुर्बलता में वह उचित ही प्रभु मसीह का प्रतिरूप और चिह्न था। सचमुच, यह आश्चर्य की बात है कि मसीह इसका केवल चार शब्दों में उल्लेख करे। मूसा भी थोड़े शब्दों में सृष्टि, अब्राहम का इतिहास और अन्य बड़े भेदों का वर्णन करता है; परन्तु तम्बू, बाहरी बलिदानों, गुर्दों इत्यादि का वर्णन करने में बहुत समय लगाता है; इसका कारण यह है कि उसने देखा कि संसार बाहरी बातों का बड़ा आदर करता है, जिन्हें वे अपनी शारीरिक आँखों से देखते हैं, परन्तु जो आत्मिक है उसे वे शीघ्र भूल जाते हैं।
भविष्यद्वक्ता योना का इतिहास लगभग अविश्वसनीय है, जो किसी भी कवि की कल्पित कथा से अधिक विचित्र लगता है; यदि यह बाइबल में न होता, तो मैं इसे झूठ समझता; क्योंकि सोचो, वह तीन दिन तक व्हेल के बड़े पेट में कैसे रहा, जबकि तीन घण्टों में ही वह पच कर उस राक्षस के स्वभाव, मांस और लहू में बदल सकता था; क्या इसे मृत्यु के बीच जीवित रहना नहीं कहा जा सकता? इस आश्चर्यकर्म की तुलना में लाल समुद्र से होकर अद्भुत पार उतरना कुछ भी न था।
परन्तु इससे भी अधिक विचित्र यह प्रतीत होता है कि छुटकारा पाने के बाद वह क्रोधित होने लगा, और एक तिनके भर के मूल्य की भी नहीं, ऐसी छोटी सी बात के विषय में अनुग्रहकारी परमेश्वर से वाद-विवाद करने लगा। यह एक बड़ा भेद है। मुझे इस भविष्यद्वक्ता पर अपनी व्याख्या से लज्जा आती है, क्योंकि मैंने इस अद्भुत आश्चर्यकर्म की मुख्य बात को इतनी कमज़ोरी से छुआ है।
भविष्यद्वक्ताओं के कठोर और तीखे वचन हृदय तक पहुँचते हैं, फिर भी जब वे कहते हैं: "यरूशलेम गिरेगा और नष्ट किया जाएगा," तो यहूदी ऐसे प्रचार को केवल विधर्म मानते थे, और उसे सहन नहीं करते थे।
ठीक इसी प्रकार मैं कहता हूँ: रोमी कलीसिया विफल होगी, और नष्ट की जाएगी; परन्तु पोप-पक्षी न तो इस पर विश्वास करेंगे और न इसे सहन करेंगे; वे कहते हैं, यह असम्भव है, क्योंकि विश्वास-वचन के सिद्धान्त में लिखा है: "मैं पवित्र मसीही कलीसिया पर विश्वास करता हूँ।" यरूशलेम के सामने बहुत से राजा नष्ट हुए, जैसे सन्हेरीब, आदि; जब भविष्यद्वक्ता यिर्मयाह ने कहा: "यरूशलेम नष्ट किया जाएगा," जो उसने पवित्र आत्मा के द्वारा कहा, तो वैसा ही हुआ।
यदि पोप मेरे विरुद्ध केवल एक ऐसा तर्क ले आए जैसा यहूदियों के पास यिर्मयाह और अन्य भविष्यद्वक्ताओं के विरुद्ध था, तो मेरा टिके रहना सम्भव न होता। परन्तु पोप मुझसे विवाद
कुलपतियों और भविष्यद्वक्ताओं के विषय में न्याय और औचित्य के अनुसार नहीं, वरन् तलवार और अपनी शक्ति से करता है। वह किसी लिखित नियम का नहीं, वरन् लाठी के नियम का प्रयोग करता है। यदि पोप के विरुद्ध मेरे पास de facto (वास्तविक बल) के सिवा कोई और तर्क न होता, तो मैं तुरन्त अपने आप को फाँसी लगा लेता, परन्तु मेरा विवाद न्यायसंगत है।
एक सीधा मसीही योना के समान है, जिसे समुद्र में, अर्थात् नरक में, फेंक दिया गया। उसने उस राक्षस का मुँह अपने को निगलने के लिए खुला देखा, और तीन दिन उसके अन्धेरे पेट में बिना नष्ट हुए पड़ा रहा। यह इतिहास हमारे लिए सबसे बड़ी सान्त्वनाओं में से एक, और मृतकों में से पुनरुत्थान का एक प्रत्यक्ष चिह्न होना चाहिए।
इसी प्रकार परमेश्वर अपने लोगों को दीन करता है। परन्तु बाद में, योना बहुत आगे बढ़ गया; उसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर को आज्ञा देने का दुस्साहस किया, और एक बड़ा नर-संहारक और हत्यारा बन गया, क्योंकि वह चाहता था कि एक बड़ा नगर और बहुत से लोग पूरी तरह नष्ट कर दिए जाएँ, यद्यपि परमेश्वर ने उन्हें छोड़ देना चाहा। यह एक विचित्र सन्त था।
भविष्यद्वक्ताओं का इब्रानी भाषा से भली-भाँति अनुवाद करना एक बहुमूल्य, महान और गौरवपूर्ण कार्य है; मुझसे पहले कोई भी इसमें भली-भाँति सफल नहीं हुआ, और मेरे लिए यह कठिन काम है; एक बार मैं इससे छूट जाऊँ, तो यह विश्राम पाएगा।
यह सहज ही समझ में आता है कि दाऊद ने ऊरिय्याह की पत्नी बतशेबा को न ठुकरा कर, वरन् उससे विवाह करके, सीधाई और पश्चाताप से काम किया। क्योंकि उसने उसे लज्जित किया था, इसलिए यह उचित था कि वह उसका सम्मान लौटाए। परमेश्वर भी उस सम्बन्ध से प्रसन्न था; फिर भी, व्यभिचार के दण्ड के रूप में, परमेश्वर ने उससे उत्पन्न पुत्र को शीघ्र ही मर जाने दिया।
प्रेरितों के समय से किसी भी मनुष्य ने अब्राहम की कथा को ठीक-ठीक नहीं समझा। स्वयं प्रेरितों ने भी अब्राहम के विश्वास की, उसके मूल्य और महानता के अनुसार, पर्याप्त प्रशंसा या व्याख्या नहीं की। मुझे बड़ा अचम्भा होता है कि मूसा उसका इतना संक्षिप्त स्मरण करता है।
अय्यूब ने एक ही समय में दस सन्तानें, और अपने सब पशु खो दिए; उसे देह और सम्पत्ति दोनों में दण्ड मिला, फिर भी यह दाऊद के संकटों की तुलना में कुछ भी न था, क्योंकि यद्यपि दाऊद के पास वह प्रतिज्ञा थी जो न तो विफल हो सकती थी और न धोखा दे सकती थी—अर्थात् जहाँ परमेश्वर कहता है: "तू राजा होगा," फिर भी परमेश्वर ने उसके राज्य को उसके स्वाद के लिए भरपूर नमक-मिर्च लगा कर कड़वा कर दिया; कोई भी दुखी मनुष्य कभी दाऊद से बढ़कर न हुआ।
आदम की उन तीन से अधिक सन्तानें थीं जिनका उल्लेख बाइबल में है। सेत का विशेष उल्लेख इसलिए किया गया है क्योंकि वह हमारे प्रभु मसीह की वंशावली है, जो उसके वं-
