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यिर्मयाह 52
अन्तिम अध्याय की व्याख्या पवित्र कैल्विन ने अपने व्याख्यानों में नहीं की, क्योंकि वह ऐतिहासिक है और उसके सब भागों पर अन्यत्र विचार किया जा चुका है; ऐसा उन्होंने इसलिए किया कि सुननेवालों पर अनावश्यक दोहरावों का बोझ न पड़े। तौभी पुस्तक को पूर्ण बनाने के लिए हम उसे यहाँ जोड़ देते हैं।
यिर्मयाह 52:1-34
1. जब सिदकिय्याह राज्य करने लगा, तब वह इक्कीस वर्ष का था; और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम हमूतल था, जो लिब्नावासी यिर्मयाह की बेटी थी।
1. Viginti et unius anni erat Sedechias quando regnavit, et undecim annis regnavit in Jerusalem, et nomen matris ejus Hamutal filia Jeremiae de Libnah.
2. और उसने यहोयाकीम के सब कामों के अनुसार वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।
2. Et fecit malum in oculis Jehovae, secundum omnia quae fecerat Jehoiakim:
3. क्योंकि यहोवा के कोप के कारण यरूशलेम और यहूदा की ऐसी दशा हुई कि अन्त में उसने उनको अपने सामने से दूर कर दिया; और सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा से बलवा किया।
3. Nempe propter furorem Jehovae qui fuit contra Jerusalem et Jehudah, donec projiceret eos a facie sua, rebellavit Sedechias contra regem Babylonis. 475
4. और उसके राज्य के नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन को बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी सारी सेना लेकर यरूशलेम पर चढ़ाई की, और उसके पास छावनी करके उसके चारों ओर क़िला बनाया।
4. Fuit autem anno nono regni ejus, mense decimo, decima mensis, venit
Nabuchadrezer rex Babylonis, ipse et universus exercitus ejus adversus Jerusalem, et castrametati sunt contra eam, et aedificaverunt contra earn munitionem undique.
475 इस पद का सबसे उत्तम अनुवाद वेनेमा का है, — इसलिए यहोवा के कोप की पराकाष्ठा (अर्थात् यहोवा का अत्यन्त कोप) यरूशलेम और यहूदा पर रही, यहाँ तक कि उसने उनको अपने सामने से निकाल दिया; और सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा से बलवा किया। 2 राजा 24:20 में आए इन्हीं शब्दों का अनुवाद भी इसी प्रकार किया जाना चाहिए। — सं.
5. इस प्रकार नगर सिदकिय्याह राजा के ग्यारहवें वर्ष तक घिरा रहा।
5. Venitque civitas in obsidionem usque ad undecimum annum regis Sedechiae.
6. चौथे महीने के नौवें दिन से नगर में अकाल यहाँ तक बढ़ गया कि देश के लोगों के लिए कुछ रोटी न रही।
6. Mense quarto, nona mensis, invaluit fames in urbe, (adeo) ut non esset panis populo terrae.
7. तब नगर की शहरपनाह में दरार की गई, और सब योद्धा भागे; और रात ही रात दोनों दीवारों के बीच के फाटक के मार्ग से, जो राजा की बारी के पास था, नगर से निकल गए (उस समय कसदी नगर को चारों ओर से घेरे हुए थे), और वे अराबा के मार्ग से चल दिए।
7. Et dirupta fuit urbs, et omnes viri bellatores fugerunt, exieruntque de urbe noete per viam portae (quoe erat) inter duos muros, qui (erant) juxta hortum regis (Chaldaei autem erant juxta urbem per circuitum) abieruntque per viam solitudinis.
8. परन्तु कसदियों की सेना ने राजा का पीछा किया, और उसको यरीहो के पास के अराबा में जा पकड़ा; और उसकी सारी सेना उसके पास से तितर-बितर हो गई।
8. Persecutus vero est exereitus Chaldaeorum regem, apprehenderuntque
Sedechiam in desertis Jericho; quia omnis exercitus ejus dispersus est ab eo.
9. तब वे राजा को पकड़कर हमात देश के रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गए, और वहाँ उसने उसके विषय में दण्ड की आज्ञा दी।
9. Comprehenderunt igitur regem, et duxerunt eum ad regem Babylonis in Riblatah, in terram Chamath, qui disceptavit cure eo judiciis.
10. और बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह के पुत्रों को उसकी आँखों के सामने घात किया, और यहूदा के सब हाकिमों को भी रिबला में घात किया।
10. Et jugulavit rex Babylonis filios Sedechiam in oculis ejus, et etiam omnes principes Jehudah jugulavit in Riblatah:
11. फिर उसने सिदकिय्याह की आँखें फोड़ डालीं; और बाबुल के राजा ने उसको बेड़ियों से जकड़ा, और उसे बाबुल तक ले गया, और उसकी मृत्यु के दिन तक उसको बन्दीगृह में रखा।
11. Oculos autem Sedechiae excaecavit, et vinxit catenis, adducique fecit eum rex Babylonis, Babylonem, et posuit eum in domo carceris 476 usque ad diem quo mortuus est.
12. फिर पाँचवें महीने के दसवें दिन को, जो बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के राज्य का उन्नीसवाँ वर्ष था, अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान, जो बाबुल के राजा की सेवा में रहता था, यरूशलेम में आया,
12. Mense autem quinto, decima mensis 477 (is annus erat decimus nonus annus regis Nabuchadrezer regis Babylonis) venit Nebuzaradan princeps militum, qui stabat 478 coram rege Babylonis, in Jerusalem,
13. और उसने यहोवा के भवन और राजभवन और यरूशलेम के सब घरों को, अर्थात् हर एक बड़े घर को आग लगाकर फुँकवा दिया।
13. Et incendit domurn Jehovae et domum regis, atque cunctas domos Jerusalem, 476 शब्दशः, "दण्डों के घर में," अर्थात् सज़ाओं के घर में। — सं. 477 2 राजा 25:8 में यह "सातवाँ" है। ब्लेनी तथा अन्य विद्वान इस असंगति का कारण यह मानकर बताते हैं कि अंक लिखने में छपाई की भूल हुई, अर्थात् {,{זसात के स्थान पर ,{}יदस, या इसके विपरीत, रख दिया गया। — सं.
478 2 राजा 25:8 में यह {,{`` עבדसेवा करता था,'' है; परन्तु अर्थ एक ही है। किसी के सामने खड़ा रहना एक ऐसा मुहावरा है जो सेवा करनेवाले के पद को सूचित करता है। देखें लूका 1:29। पद के इस भाग का अनुवाद करते समय अच्छा होगा कि क्रिया "आना" का स्थान बदल दिया जाए, — ``अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान, जो बाबुल के राजा के सामने खड़ा रहता था, यरूशलेम में आया।'' — सं.
et omnem domum magnam combussit igni: 479
14. और कसदियों की सारी सेना ने, जो अंगरक्षकों के प्रधान के संग थी, यरूशलेम के चारों ओर की सब शहरपनाह को ढा दिया।
14. Onmesque muros Jerusalem undique destruxerunt totus exercitus Chaledaeorum, qui erat cum magistro militum.
15. और अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान प्रजा के कंगालों में से कितनों को, और जो लोग नगर में बचे रह गए थे, और जो लोग उसका साथ छोड़कर बाबुल के राजा के पास भाग गए थे, और भीड़ के शेष लोगों को बँधुआ करके ले गया।
15. De pauperibus autem populi, et de reliquo populo qui remanserant in urbe, et de transfugis qui transfugerunt ad regem Babylonis, et de reliquiis multitudinis transmigrare fecit Nebuzaradan nmgister militum. 480
16. परन्तु अंगरक्षकों के प्रधान नबूजरदान ने देश के कंगालों में से कितनों को दाख की बारियों की सेवा और किसानी करने के लिए छोड़ दिया।
16. De pauperibus vero terrae reliquit Nebuzaradan magister militurn vinitores et agricolas.
17. और यहोवा के भवन में जो पीतल के खम्भे थे, और कुर्सियाँ और पीतल का हौद जो यहोवा के भवन में था, उन सभी को कसदी तोड़कर उनका सारा पीतल बाबुल को ले गए।
17. Et columnas aereas quae erant in domo Jehovae, et bases et mare aereum quod erat in domo Jehovae confregerunt Chaldaei, et detulerunt omne aes eorum
Babylonem.
18. और हँडियों, फावड़ियों, कैंचियों, कटोरों, धूपदानों और पीतल के सब पात्रों को, जिनसे लोग सेवा टहल करते थे, वे ले गए।
18. Lebetes quoque et scopas et psalteria et pelves et cochlearia et omnia vasa aerea quibus ministrabant, tulerunt.
19. और तसलों, करछों, कटोरों, हँडियों, दीवटों, धूपदानों और कटोरियों में से जो कुछ सोने का था उसके सोने को, और जो कुछ चाँदी का था उसकी चाँदी को भी अंगरक्षकों का प्रधान ले गया।
19. Et hydrias et thuribula et pelves et ollas et candelabra, et mortariola et cyathos, quae aurea, aurea, et quae argentea, argentea, 481 tulit magister militum.
20. दोनों खम्भे, एक हौद और पीतल के वे बारह बैल जो कुर्सियों के नीचे थे, जिनको सुलैमान राजा ने यहोवा के भवन के लिए बनवाया था, इन सब वस्तुओं का पीतल तौल से बाहर था।
20. Columnas duas, mare unum, et boves duodecim aereos, qui erant sub basibus quas fecerat rex Solomo in domo Jehovae, non erat pondus, aeris eorum omnium
479 शाब्दिक अनुवाद यह है, "अर्थात् हर एक बड़े घर को उसने आग से जला दिया।" यह वाक्यांश पहले वाले वाक्यांश को सीमित करता है। — सं.
480 यद्यपि यिर्मयाह 39:9 और 2 राजा 25:11 के समानान्तर स्थलों में "प्रजा के कंगालों में से कितने" ये शब्द नहीं मिलते, तौभी Vulg., Syr. और Targ. यहाँ उन्हें बनाए रखते हैं, और एक को छोड़ सब हस्तलिपियों में वे पाए जाते हैं। स्पष्ट है कि देश के कंगालों में से कुछ के समान नगर के कंगालों में से भी कुछ छोड़ दिए गए थे। आगे के शब्दों में अधिकतर Vulg. का अनुसरण किया गया है, जो ठीक नहीं है: शब्द ये होने चाहिए, "et reliquum populum," और "et reliquias multitudinis." और अन्तिम शब्द ये होने चाहिए, "अर्थात् भीड़ का बचा हुआ भाग (या शेष)," अर्थात् उन लोगों का जो पहले नगर में बसे हुए थे। देखें यिर्मयाह 39:9। — सं.
481 "जो सोना, सोना, और जो चाँदी, चाँदी:" {,{`` אשרजो,'' जो दोहराया गया है, यहाँ ``कुछ'' अनुवादित किया जा सकता है; और ``सोना'' तथा ``चाँदी'' का दोहराव यह कहने के समान है कि कुछ पात्र शुद्ध सोने के थे और कुछ शुद्ध चाँदी के: तब अनुवाद यह होगा, ``कुछ सोने का सोना,'' अर्थात् शुद्ध सोना, ``और कुछ चाँदी की चाँदी,'' अर्थात् शुद्ध चाँदी, दोनों में से किसी में कोई मिलावट न थी। — सं.
(nempe) vasorum istorum.
21. और खम्भों के विषय में यह है: एक एक खम्भे की ऊँचाई अठारह हाथ थी, और बारह हाथ का सूत उसके चारों ओर पहुँचता था; और उसकी मोटाई चार अंगुल की थी; वह खोखला था।
21. Quod ad columnas, octodecim cubitorum erat altitudo columnae unius, et filum duodecim cubitortum circuibat eam, cujus crassitudo (quoe) erat quatuor digitorum; (erat) vacua.
22. और उसके ऊपर पीतल की कँगनी थी; और एक एक कँगनी की ऊँचाई पाँच हाथ की थी, और कँगनियों के चारों ओर जाली और अनार बने थे, सब पीतल के थे।
दूसरे खम्भे के और उसके अनारों के भी यही नमूने थे।
22. Capitellum autem quod erat super earn aereum; altitudo vero capitelli unius, quinque cubitorum erat, et reticulum, et malogranata super capitellum per circuiturn, omnia aerea et similia erant columnae secundae et malogranata.
23. और कँगनियों के एक एक ओर छियानबे अनार थे; और जाली के ऊपर चारों ओर सब मिलाकर एक सौ अनार थे।
23. Fuerunt autem malogranata nonaginta et sex ad plagam (unam) onmia malogranata, centum super reticulum per circuitum.
24. और अंगरक्षकों के प्रधान ने सरायाह महायाजक और उसके नीचे के याजक सपन्याह और तीनों द्वारपालों को पकड़ लिया;
24. Tulit quoque magister militurn Seraiah sacerdotem primum, et Sephaniah sacerdotem secundum, et tres custodes liminis.
25. और नगर में से उसने एक खोजा पकड़ा, जो योद्धाओं के ऊपर ठहराया हुआ था; और जो पुरुष राजा के सम्मुख रहा करते थे, उनमें से सात जन जो नगर में मिले; और सेनापति का मुंशी, जो देश के लोगों को सेना में भरती करता था; और देश के लोगों में से साठ पुरुष जो नगर में मिले।
25. Et de urbe tulit eunuchum unum, qui erat praepositus super viros bellatores, et septem viros ex iis qui videbant faciem regis, qui inventi sunt in urbe, et scribam principem militiae, qui colligebat ad militiam populum terrae, et sexaginta viros de populo terrae, qui inventi sunt in medio urbis.
26. इनको अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गया।
26. Tulit, inquam, cos Nebuzaradan magister militum, et deduxit eos ad regem
Babylonis in Riblatha:
27. तब बाबुल के राजा ने उन्हें हमात देश के रिबला में मार डाला। इस प्रकार यहूदी अपने देश से बँधुए होकर चले गए।
27. Et percussit eos rex Babylonis, et interfecit eos in Riblatha in terra Chamath; et translatus est Jehudah de terra sua.
28. जिन लोगों को नबूकदनेस्सर बँधुआ करके ले गया, वे ये हैं: अर्थात् उसके राज्य के सातवें वर्ष में तीन हज़ार तेईस यहूदी;
28. Iste est populus quem transferre fecit Nabuchadrezer, anno septimo, Judaeos tria millia et viginti tres.
29. फिर अपने राज्य के अठारहवें वर्ष में नबूकदनेस्सर यरूशलेम से आठ सौ बत्तीस प्राणियों को बँधुआ करके ले गया;
29. Anno decimo octavo Nabuchadrezer transferre fecit de Jerusalem animas octingentas triginta duas.
30. फिर नबूकदनेस्सर के राज्य के तेईसवें वर्ष में अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान सात सौ पैंतालीस यहूदी प्राणियों को बँधुआ करके ले गया; सब प्राणी मिलकर चार हज़ार छः सौ हुए।
30. Anno tertio et vigesimo Nabuchadrezer, transferre fecit Nelmzar-adan magister militum, Judaeorum animus septingentas quadraginta quinque; omnes animae quatuor millia et sexcentae. 482
31. फिर यहूदा के राजा यहोयाकीन की बँधुआई के सैंतीसवें वर्ष में, अर्थात् जिस वर्ष बाबुल का राजा एवील्मरोदक राजगद्दी पर विराजमान हुआ, उसी के बारहवें महीने के पच्चीसवें दिन को उसने यहूदा के राजा यहोयाकीन का सिर ऊँचा किया, और उसको बन्दीगृह से निकाला।
31. Fuit autem tricesimo septimo anno transmigrationis Jehoiakin regis Jehudah, duodecimo mense, vicesima quinta mensis, elevavit Evil-merodach rex Babylonis, anno regni sui, caput Jehoiakin regis Jehudah, et eduxit eum de domo carceris;
32. और उससे मधुर मधुर वचन कहकर, जो राजा उसके साथ बाबुल में बँधुए थे, उनके सिंहासनों से उसके सिंहासन को अधिक ऊँचा किया।
32. Loquutusque est eum eo bolla, et posuit thronum ejus super thronum regum, qui erant secum in Babylone;
33. और उसके बन्दीगृह के वस्त्र बदल दिए; और वह जीवन भर नित्य राजा के सम्मुख भोजन करता रहा।
33. Et mutavit vestimenta carceris ejus, et comedebat panem coram eo semper omnibus diebus vitae suae.
34. और प्रतिदिन के खर्च के लिए बाबुल के राजा के यहाँ से उसको नित्य कुछ मिलने का प्रबन्ध हुआ; यह प्रबन्ध उसकी मृत्यु के दिन तक, उसके जीवन भर लगातार बना रहा।
34. Et portio ejus, portio perpetua dabatur ei a rege Babylonis, per singulos dies ejus, usque ad diem quo mortuus est, omnibus diebus vitae ejus.
Laus Deo
482 यहाँ दी गई संख्या को केवल यहाँ बताए गए वर्षों तक सीमित समझना चाहिए, अर्थात् नबूकदनेस्सर के राज्य के सातवें, अठारहवें और तेईसवें वर्ष तक। हम अन्य बन्दियों के विषय में भी पढ़ते हैं; अर्थात् यहोयाकीम के राज्य के तीसरे वर्ष में, (दानिय्येल 1:1) जो नबूकदनेस्सर का पहला वर्ष था; और उसके राज्य के आठवें वर्ष में, (2 राजा 24:12) जब यहोयाकीन बन्दी बनाया गया, और उसके साथ कम से कम दस हज़ार लोग, (2 राजा 24:14)। पहली बँधुआई में, जब दानिय्येल बाबुल ले जाया गया, उनकी संख्या का हमें कोई विवरण नहीं मिलता। सबसे बड़ी संख्या नबूकदनेस्सर के राज्य के आठवें वर्ष की है, अर्थात् दस हज़ार। यहाँ उल्लिखित तीन बँधुआइयों का योग, जिनमें से अन्तिम अवश्य ही गदल्याह की हत्या के बाद हुई होगी, चार हज़ार छः सौ है। ये सब पुरुष और पूरी आयु के थे, इसलिए स्त्रियाँ और बच्चे भी बहुत रहे होंगे। ऐसा माना गया है कि इन सब अवसरों पर बन्दी बनाए गए लोग कुल मिलाकर पचास हज़ार से कम न रहे होंगे। — सं.
