यह हिन्दी संस्करण UECF.NET के लिए AI-सहायता से किए गए पूर्ण अनुवाद और सम्पादकीय गुणवत्ता-समीक्षा के द्वारा तैयार किया गया है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
यिर्मयाह 20–52 का कैल्विन-कृत अनुवाद
ऐतिहासिक पवित्रशास्त्र
अनुवाद
अनुवाद: यिर्मयाह
1 तब इम्मेर का पुत्र पशहूर जो याजक था (और वह यहोवा के मन्दिर में प्रधान अधिकारी था), उसने यिर्मयाह को ये वचन भविष्यद्वाणी करते सुना: 2 और पशहूर ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को मारा, और उसे उस बन्दीगृह में डाल दिया जो बिन्यामीन के ऊपरी फाटक में, यहोवा के भवन के सामने था।
3 और दूसरे दिन ऐसा हुआ कि पशहूर ने यिर्मयाह को बन्दीगृह से निकाला; तब यिर्मयाह ने उससे कहा,— यहोवा ने तेरा नाम पशहूर नहीं रखा, परन्तु चारों ओर भय: 4 क्योंकि यहोवा यों कहता है,— देख, मैं तुझे तेरे लिये भय का कारण बनाऊँगा, तेरे लिये और तेरे सब मित्रों के लिये; और वे तेरे शत्रुओं की तलवार से गिरेंगे, और तू अपनी आँखों से यह देखता रहेगा; और मैं सारे यहूदा को बाबुल के राजा के हाथ में कर दूँगा; और वह उन्हें बन्दी बनाकर बाबुल को ले जाएगा, और तलवार से मार डालेगा: 5 और मैं इस नगर का सारा बल, और उसका सारा परिश्रम और उसकी सब अनमोल वस्तुएँ, और यहूदा के राजाओं का सारा खज़ाना उनके शत्रुओं के हाथ में कर दूँगा; और वे उन्हें लूटकर ले जाएँगे, और उन्हें बाबुल को पहुँचा देंगे।
6 और हे पशहूर, तू और तेरे घर के सब रहनेवाले बँधुआई में जाओगे; तू बाबुल में पहुँचेगा, और वहीं मरेगा, और वहीं तुझे और तेरे उन मित्रों को भी मिट्टी दी जाएगी, जिनसे तू ने झूठी भविष्यद्वाणी की है।
7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं धोखा खा गया; तू ने मुझे विवश किया और प्रबल हुआ; दिन भर मेरी हँसी होती है, सब कोई मेरा ठट्ठा करते हैं; 8 क्योंकि जब से मैं बोलने लगा, तब से उपद्रव के विरुद्ध ऊँचे शब्द से पुकारता आया हूँ, और विनाश का प्रचार करता आया हूँ: क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठे का कारण हुआ, 9 इसलिये मैं ने कहा, मैं उसकी चर्चा न करूँगा, और न उसके नाम से फिर बोलूँगा: परन्तु वह मेरे हृदय में मानो धधकती आग हो गया, जो मेरी हड्डियों में बन्द थी; और मैं रोकते-रोकते थक गया, और मुझ से रहा न गया।
10 क्योंकि मैं ने बहुतों की निन्दा सुनी, चारों ओर भय ही भय, “उसकी चुगली करो, और हम भी उसकी चुगली करेंगे:” मेरे सब मित्र मेरे लड़खड़ाने की बाट जोहते हैं —“कदाचित् वह भटक जाए, तब हम उस पर प्रबल होंगे, और उससे अपना पलटा लेंगे।”
11 परन्तु यहोवा भयंकर वीर के समान मेरे संग है; इस कारण मेरे सतानेवाले ठोकर खाकर गिरेंगे और प्रबल न होंगे; वे बहुत लज्जित होंगे, क्योंकि वे सफल न होंगे; उनकी नामधराई सदा बनी रहेगी, जो कभी भुलाई न जाएगी।
12 परन्तु हे सेनाओं के यहोवा, तू ही धर्मी को परखनेवाला है, जो मन और हृदय को देखता है; मैं उन पर तेरा पलटा देखूँगा, क्योंकि मैं ने अपना मुकद्दमा तेरे ही सामने खोल दिया है।
13 यहोवा के लिये गाओ, यहोवा की स्तुति करो, क्योंकि उसने दु:खी के प्राण को दुष्टों के हाथ से छुड़ाया है।
14 शापित हो वह दिन जिसमें मैं उत्पन्न हुआ; जिस दिन मेरी माता ने मुझे जन्म दिया, वह धन्य न हो: 15 शापित हो वह मनुष्य जिसने मेरे पिता को यह समाचार देकर कहा, “तेरे लड़का उत्पन्न हुआ है,” और उसको बड़े आनन्द से आनन्दित किया;
16 और वह मनुष्य उन नगरों के समान हो जाए, जिन्हें यहोवा ने नाश किया और फिर न पछताया; और वह भोर को चिल्लाहट और दोपहर को कोलाहल सुने।
17 तू ने मुझे गर्भ ही में क्यों न मार डाला? कि मेरी माता ही मेरी कब्र होती, या उसका गर्भ सदा भरा ही रहता?
18 मैं क्यों गर्भ से निकला, कि कष्ट और शोक देखूँ; और अपने दिन नामधराई में काटूँ!
अनुवाद: यिर्मयाह 21
1 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुँचा, जब सिदकिय्याह राजा ने उसके पास मल्किय्याह के पुत्र पशहूर और मासेयाह याजक के पुत्र सपन्याह को यह कहने के लिये भेजा, 2 हमारे लिये यहोवा से पूछ, क्योंकि बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर हम से युद्ध करता है; कदाचित् यहोवा हम से अपने सब आश्चर्यकर्मों के अनुसार व्यवहार करे, कि वह हमारे पास से चला जाए।
3 तब यिर्मयाह ने उनसे कहा, तुम सिदकिय्याह से यों कहो,—
4 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है,— देखो, युद्ध के जो हथियार तुम्हारे हाथों में हैं, जिनसे तुम बाबुल के राजा और उन कसदियों से लड़ते हो जो शहरपनाह के बाहर तुम्हें घेरे हुए हैं, उन्हें मैं रोक दूँगा; और मैं उनको इस नगर के बीच में इकट्ठा करूँगा: 5 और मैं आप ही बढ़ाए हुए हाथ और बलवन्त भुजा से, हाँ, क्रोध और जलजलाहट और बड़े रोष में आकर तुम से लड़ूँगा; 6 और मैं इस नगर के रहनेवालों को, क्या मनुष्य क्या पशु, सब को मार डालूँगा; वे बड़ी मरी से मरेंगे।
7 और उसके बाद, यहोवा ने कहा,— मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह को, उसके कर्मचारियों और प्रजा को भी, अर्थात् उन्हें जो इस नगर में मरी, तलवार और अकाल से बचे रहेंगे, बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में, और उनके शत्रुओं के हाथ में, और उनके प्राण के खोजियों के हाथ में कर दूँगा; और वह उन्हें तलवार की धार से मार डालेगा; वह उन पर न तरस खाएगा, न उन्हें क्षमा करेगा, न दया करेगा।
8 और इस प्रजा से भी तू कहना,— यहोवा यों कहता है,— देखो, मैं तुम्हारे सामने जीवन का मार्ग और मृत्यु का मार्ग रखता हूँ: 9 जो कोई इस नगर में रहेगा वह तलवार, अकाल या मरी से मरेगा; परन्तु जो कोई निकलकर उन कसदियों के पास जो तुम को घेरे हुए हैं रहे, वह जीवित रहेगा, और उसका प्राण लूट के समान उसको मिलेगा: 10 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं ने इस नगर की ओर अपना मुख भलाई के लिये नहीं, वरन् बुराई ही के लिये किया है; वह बाबुल के राजा के हाथ में पड़ जाएगा, और वह उसे आग लगाकर फूँक देगा।
11 और यहूदा के राजा के घराने के विषय में, यहोवा का वचन सुनो; 12 हे दाऊद के घराने, यहोवा यों कहता है,— भोर को न्याय चुकाओ, और लुटे हुए को अन्धेर करनेवाले के हाथ से छुड़ाओ, ऐसा न हो कि मेरी जलजलाहट आग के समान भड़के, और ऐसी जले कि कोई उसे बुझा न सके,— उनके बुरे कामों के कारण।
13 हे तराई में रहनेवाली, हे समथर भूमि की चट्टान, यहोवा की यह वाणी है, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ — तुम जो कहते हो, “हम पर कौन चढ़ाई करेगा? और हमारे वासस्थानों में कौन प्रवेश करेगा?”
14 यहोवा की यह वाणी है, मैं तुम्हारे कामों के फल के अनुसार तुम्हें दण्ड दूँगा; और मैं उसके वन में आग लगाऊँगा, और वह उसके चारों ओर सब कुछ भस्म कर देगी।
अनुवाद: यिर्मयाह 22
1 यहोवा यों कहता है, यहूदा के राजा के भवन में उतरकर वहाँ यह वचन कह, 2 और कह,— हे दाऊद की गद्दी पर विराजमान यहूदा के राजा, तू अपने कर्मचारियों और अपनी प्रजा समेत जो इन फाटकों से प्रवेश करते हैं, यहोवा का वचन सुन: 3 यहोवा यों कहता है, न्याय और धर्म के काम करो, और लुटे हुए को अन्धेर करनेवाले के हाथ से छुड़ाओ; परदेशी, अनाथ और विधवा पर अन्याय न करो; उपद्रव न करो, और इस स्थान में निर्दोषों का लहू न बहाओ।
4 क्योंकि यदि तुम इस वचन का ठीक-ठीक पालन करो, तो इस भवन के फाटकों से दाऊद की गद्दी पर विराजनेवाले राजा, रथों और घोड़ों पर चढ़े हुए प्रवेश किया करेंगे,— वह आप, और उसके कर्मचारी, और उसकी प्रजा: 5 परन्तु यदि तुम इन वचनों को न मानो, तो यहोवा की यह वाणी है, मैं अपनी ही शपथ खाकर कहता हूँ कि यह भवन उजाड़ हो जाएगा।
6 क्योंकि यहोवा यहूदा के राजा के घराने के विषय में यों कहता है, तू मेरे लिये गिलाद, और लबानोन की चोटी है; तौभी निश्चय मैं तुझे जंगल, और ऐसे नगरों के समान बनाऊँगा जो बसे न हों: 7 और मैं तेरे विरुद्ध नाश करनेवालों को तैयार करूँगा, हर एक अपने हथियार लिए हुए; और वे तेरे उत्तम-उत्तम देवदारों को काटकर आग में झोंक देंगे।
8 और बहुत सी जातियों के लोग इस नगर के पास से निकलेंगे, और एक दूसरे से पूछेंगे, “यहोवा ने इस बड़े नगर की ऐसी दशा क्यों की है?”
9 तब लोग कहेंगे, “इसलिये कि उन्होंने अपने परमेश्वर यहोवा की वाचा को त्यागकर पराए देवताओं को दण्डवत् की और उनकी उपासना की।”
10 मरे हुए के लिये मत रोओ, न उसके लिये विलाप करो; उसी के लिये फूट-फूटकर रोओ जो परदेश चला जाता है, क्योंकि वह लौटकर अपनी जन्मभूमि फिर कभी देखने न पाएगा: 11 क्योंकि यहूदा के राजा योशिय्याह का पुत्र शल्लूम, जो अपने पिता योशिय्याह के स्थान पर राज्य करता है, उसके विषय में यहोवा यों कहता है,— जब वह इस स्थान से निकल जाएगा, तब फिर यहाँ लौटकर न आएगा:
12 क्योंकि जिस देश में वे उसे बन्दी बनाकर ले जाएँगे वहीं वह मर जाएगा, और इस देश को फिर कभी देखने न पाएगा।
13 हाय उस पर जो अपने घर को अधर्म से और अपनी अटारियों को अन्याय से बनवाता है; जो अपने पड़ोसी से बेगार में काम कराता है, और उसकी मजदूरी नहीं देता; 14 जो कहता है, “मैं अपने लिये लम्बा-चौड़ा घर और हवादार अटारियाँ बनवाऊँगा;” और वह अपने लिये खिड़कियाँ बनवाता है, और वह देवदार की लकड़ी से पाटा जाता है, और सिन्दूरी रंग से रंगा जाता है।
15 क्या तू इसलिये राज्य करेगा कि तू अपने को देवदार में घेरे रहता है? क्या तेरा पिता खाता-पीता न था? जब वह न्याय और धर्म के काम करता था, तब उसका भला होता था: 16 वह दीन और दरिद्र का न्याय चुकाता था, तब उसका भला होता था; यहोवा की यह वाणी है, क्या यही मुझे जानना नहीं है? 17 परन्तु तेरी आँखें और तेरा मन केवल तेरे लोभ पर, और निर्दोष का लहू बहाने पर, और लूट और अन्धेर करने पर ही लगे हैं।
18 इसलिये यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के विषय में यहोवा यों कहता है, लोग उसके लिये यह कहकर विलाप न करेंगे,— “हाय मेरे भाई! हाय मेरी बहिन!” वे उसके लिये यह कहकर विलाप न करेंगे,— “हाय प्रभु! हाय उसका वैभव!”
19 उसको गदहे के समान मिट्टी दी जाएगी, वह घसीटकर यरूशलेम के फाटकों के बाहर फेंक दिया जाएगा।
20 लबानोन पर चढ़कर चिल्ला, और बाशान पर ऊँचे स्वर से पुकार, और चारों ओर चिल्ला, क्योंकि तेरे सब यार नष्ट हो गए हैं।
21 तेरे सुख के समय मैं ने तुझ से कहा था, परन्तु तू ने कहा, “मैं न सुनूँगा:” तेरी बचपन ही से यह चाल है कि तू मेरी बात नहीं सुनती।
22 तेरे सब चरवाहे वायु से उड़ाए जाएँगे, और तेरे यार बँधुआई में चले जाएँगे: निश्चय तब तू लज्जित होगी, और अपनी सारी बुराई के कारण तेरा मुँह काला होगा।
23 हे लबानोन पर अपना आसन जमानेवाली, हे देवदारों के बीच अपना घोंसला बनानेवाली, जब तुझ पर पीड़ाएँ आएँगी, और जच्चा की सी वेदना उठेगी, तब तू कैसी दयनीय दिखाई देगी!
24 यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की शपथ; चाहे यहूदा के राजा यहोयाकीम का पुत्र कोन्याह मेरे दाहिने हाथ की अँगूठी भी होता, तौभी मैं तुझे वहाँ से उतार फेंकता: 25 और मैं तुझे तेरे प्राण के खोजियों के हाथ में, और जिनसे तू डरता है उनके हाथ में, अर्थात् बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में, और कसदियों के हाथ में कर दूँगा: 26 और मैं तुझे और तेरी जननी को जिसने तुझे जन्म दिया, एक पराए देश में जहाँ तुम उत्पन्न नहीं हुए फेंक दूँगा, और वहीं तुम मर जाओगे; 27 और जिस देश में लौटने की वे बड़ी लालसा करते हैं, वहाँ वे कभी लौटने न पाएँगे।
28 क्या यह पुरुष कोन्याह तुच्छ और टूटी हुई मूर्ति है? क्या वह ऐसा पात्र है जिससे कोई प्रसन्न नहीं होता? फिर वह और उसका वंश क्यों निकालकर फेंक दिए गए, और ऐसे देश में क्यों डाल दिए गए जिसे वे नहीं जानते?
29 हे पृथ्वी, हे पृथ्वी, हे पृथ्वी! यहोवा का वचन सुन,—
30 यहोवा यों कहता है, इस पुरुष को निर्वंश लिखो, ऐसा पुरुष जो अपने जीवन भर कभी सफल न होगा; वरन् उसके वंश में से कोई भी सफल न होगा, कि दाऊद की गद्दी पर विराजे, और फिर यहूदा पर प्रभुता करे।
अनुवाद: यिर्मयाह 23
1 यहोवा की यह वाणी है, हाय उन चरवाहों पर जो मेरी चराई की भेड़-बकरियों को नष्ट करते और तितर-बितर करते हैं!
2 इसलिये इस्राएल का परमेश्वर यहोवा अपनी प्रजा के चरानेवाले चरवाहों के विषय में यों कहता है,— तुम ने मेरी भेड़-बकरियों को तितर-बितर किया और हाँक दिया है, और उनकी सुधि नहीं ली; यहोवा की यह वाणी है, देखो, मैं तुम्हारे बुरे कामों का दण्ड तुम्हें दूँगा:
3 परन्तु मैं अपनी भेड़-बकरियों के बचे हुओं को उन सब देशों में से जिनमें मैं उन्हें बरबस भेजूँगा, इकट्ठा करूँगा, और उन्हें उनके अपने भेड़शालों में लौटा लाऊँगा, और वे फूलें-फलेंगी और बढ़ेंगी; 4 और मैं उनके ऊपर ऐसे चरवाहे ठहराऊँगा जो उन्हें चराएँगे; और वे फिर न तो डरेंगी, न घबराएँगी, और न उनमें से कोई खो जाएगी, यहोवा की यही वाणी है।
5 यहोवा की यह भी वाणी है, देख, ऐसे दिन आते हैं जब मैं दाऊद के लिये एक धर्मी अंकुर उगाऊँगा, और वह राजा बनकर राज्य करेगा, और बुद्धि से काम करेगा; वह देश में न्याय और धर्म करेगा।
6 उसके दिनों में यहूदा उद्धार पाएगा, और इस्राएल निडर बसा रहेगा: और उसका नाम जिससे वे उसे पुकारेंगे यह होगा, यहोवा हमारी धार्मिकता
7 इसलिये देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आएँगे जिनमें फिर यह न कहा जाएगा, “यहोवा के जीवन की शपथ,” जो इस्राएलियों को मिस्र देश से छुड़ा ले आया;
8 परन्तु यह कहा जाएगा, “यहोवा के जीवन की शपथ,” जो इस्राएल के घराने के वंश को उत्तर देश से और उन सब देशों से जिनमें मैं ने उन्हें बरबस निकाल दिया था, निकालकर ले आया और पहुँचा दिया; और वे अपने ही देश में बसे रहेंगे।
9 भविष्यद्वक्ताओं के कारण मेरा हृदय भीतर ही भीतर टूट गया है, मेरी सब हड्डियाँ उखड़ गई हैं; मैं ऐसे मनुष्य के समान हो गया हूँ जो मतवाला हो, जिसे दाखमधु ने जीत लिया हो, यहोवा के कारण, और उसके पवित्र वचनों के कारण; 10 क्योंकि देश व्यभिचारियों से भर गया है: क्योंकि झूठी शपथ के कारण देश विलाप करता है, जंगल की चराइयाँ सूख गई हैं; और उनकी दौड़ बुरी है, और उनका बल ठीक नहीं।
11 क्योंकि भविष्यद्वक्ता और याजक दोनों भक्तिहीन हो गए हैं; अपने भवन में भी मैं ने उनकी दुष्टता पाई है, यहोवा की यही वाणी है।
12 इस कारण उनका मार्ग उनके लिये फिसलनेवाला होगा; वे अन्धेरे में ठोकर खाकर उसमें गिर पड़ेंगे; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं उन पर विपत्ति डालूँगा, अर्थात् उनके दण्ड का वर्ष।
13 शोमरोन के भविष्यद्वक्ताओं में मैं ने मूर्खता देखी है, उन्होंने बाल के नाम से भविष्यद्वाणी की, और मेरी प्रजा इस्राएल को भटका दिया: 14 परन्तु यरूशलेम के भविष्यद्वक्ताओं में मैं ने घृणित दुष्टता देखी है; वे व्यभिचार करते और झूठ की चाल चलते हैं, वे कुकर्मियों के हाथों को भी दृढ़ करते हैं, ताकि वे अपनी-अपनी बुराई से न फिरें: वे सब के सब मेरी दृष्टि में सदोम के समान, और उसके निवासी अमोरा के समान हो गए हैं।
15 इस कारण सेनाओं का यहोवा इन भविष्यद्वक्ताओं के विषय में यों कहता है,— देख, मैं इनको प्राणघातक विष खिलाऊँगा, और पित्त का जल पिलाऊँगा; क्योंकि यरूशलेम के भविष्यद्वक्ताओं के कारण सारे देश में भक्तिहीनता फैल गई है।
16 सेनाओं का यहोवा यों कहता है,— इन भविष्यद्वक्ताओं की बातों की ओर जो तुम से भविष्यद्वाणी करते हैं कान मत लगाओ; वे तुम को व्यर्थ बातें सिखाते हैं; वे यहोवा के मुख की नहीं, अपने ही मन का दर्शन बोलते हैं; 17 जो लोग मेरा तिरस्कार करते हैं उनसे वे कहते हैं, यहोवा कहता है, “तुम्हारा कल्याण होगा;” और जितने लोग अपने हठीले मन की दुष्टता पर चलते हैं, उनसे वे कहते हैं, “तुम पर कोई विपत्ति न पड़ेगी; 18 क्योंकि कौन यहोवा की गुप्त सभा में खड़ा हुआ, और उसका वचन देखा और सुना है? किसने उसके वचन पर ध्यान देकर उसे सुना है?”
19 देखो, यहोवा की बवण्डर! वह जलजलाहट के साथ निकली है; हाँ, वह आनेवाली बवण्डर; वह दुष्टों के सिर पर टूट पड़ेगी: 20 जब तक यहोवा अपने मन की युक्तियों को पूरी करके उन्हें दृढ़ न कर ले, तब तक उसका क्रोध शान्त न होगा: अन्त के दिनों में तुम इस बात को भली भाँति समझोगे।
21 ये भविष्यद्वक्ता बिना मेरे भेजे दौड़ जाते हैं; मैं ने उनसे बात न की, तौभी वे भविष्यद्वाणी करने लगते हैं।
22 परन्तु यदि ये मेरी गुप्त सभा में खड़े होते, तो निश्चय मेरी प्रजा के लोगों को मेरे वचन सुनाते, और उन्हें उनके बुरे मार्ग से, और उनके बुरे कामों से फेर देते?
23 यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ जो निकट ही रहता हूँ, और दूर का परमेश्वर नहीं?
24 फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है कि मैं उसे न देख सकूँ? यहोवा की यह वाणी है, क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?
25 मैं ने इन भविष्यद्वक्ताओं की बातें भी सुनी हैं जो मेरे नाम से झूठी भविष्यद्वाणी करके कहते हैं, “मैं ने स्वप्न देखा है, स्वप्न देखा है।”
26 जो भविष्यद्वक्ता झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं, यह बात कब तक उनके मन में समाई रहेगी, हाँ, उन भविष्यद्वक्ताओं के मन में जो अपने ही मन के छल के भविष्यद्वक्ता हैं!
27 वे सोचते हैं कि अपने उन स्वप्नों के द्वारा जो वे एक दूसरे से कहते हैं, मेरी प्रजा को मेरा नाम भुला दें, जैसे उनके पुरखा बाल के कारण मेरा नाम भूल गए थे।
28 जिस भविष्यद्वक्ता ने स्वप्न देखा हो, वह स्वप्न ही कहे; और जिसके पास मेरा वचन हो, वह मेरा सत्य वचन कहे: यहोवा की यह वाणी है, कहाँ भूसा और कहाँ गेहूँ?
29 यहोवा की यह वाणी है, क्या मेरा वचन आग के समान नहीं है? और ऐसे हथौड़े के समान नहीं जो पत्थर को फोड़ डाले?
30 इसलिये यहोवा की यह वाणी है, देखो, जो भविष्यद्वक्ता मेरे वचन दूसरों से चुरा-चुराकर बोलते हैं, मैं उनके विरुद्ध हूँ: 31 फिर यहोवा की यह वाणी है, देखो, जो भविष्यद्वक्ता अपनी ही जीभ ऊँची करके कहते हैं, “यह उसकी वाणी है,” मैं उनके भी विरुद्ध हूँ:
32 यहोवा की यह वाणी है, देखो, जो बिना मेरे भेजे या बिना मेरी आज्ञा पाए झूठे स्वप्न देखकर भविष्यद्वाणी करते हैं, और उनका वर्णन करके मेरी प्रजा को झूठे घमण्ड और ओछेपन से भरमाते हैं, मैं उनके भी विरुद्ध हूँ: और यहोवा की यह वाणी है, उनसे इस प्रजा का कुछ लाभ न होगा।
33 परन्तु यदि यह प्रजा, या कोई भविष्यद्वक्ता, या याजक तुझ से पूछे, “यहोवा का भारी वचन क्या है?” तो तू उनसे कहना, “कौन सा भारी वचन?— यहोवा की यह वाणी है, मैं तुम को त्याग दूँगा।”
34 और जो भविष्यद्वक्ता, या याजक, या प्रजा का कोई जन, “यहोवा का भारी वचन” कहे, उस मनुष्य को घराने समेत मैं दण्ड दूँगा।
35 तुम लोग एक दूसरे से और अपने-अपने भाई से यों पूछना, “यहोवा ने क्या उत्तर दिया है?” या “यहोवा ने क्या कहा है?”
36 परन्तु यहोवा का भारी वचन फिर कभी चर्चा में न लाना; क्योंकि हर एक मनुष्य का अपना ही वचन उसके लिये भारी होगा: क्योंकि तुम ने हमारे परमेश्वर, सेनाओं के यहोवा, जीवते परमेश्वर के वचन बिगाड़ दिए हैं।
37 तू भविष्यद्वक्ता से यों पूछना,— “यहोवा ने तुझे क्या उत्तर दिया?” या “यहोवा ने क्या कहा है?”
38 परन्तु यदि तुम “यहोवा का भारी वचन” कहोगे, तो यहोवा यों कहता है,— इसलिये कि तुम “यहोवा का भारी वचन” कहते हो, यद्यपि मैं ने तुम्हारे पास कहला भेजा था कि तुम “यहोवा का भारी वचन” न कहना।
39 इस कारण देखो, मैं तुम को बिलकुल उठा ले जाऊँगा, और तुम को और इस नगर को जिसे मैं ने तुम्हारे पुरखाओं को और तुम को दिया था, अपने सामने से दूर फेंक दूँगा; और मैं तुम पर ऐसी सदा की नामधराई और सदा का अपमान डालूँगा, जो कभी भुलाया न जाएगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 24
1 जब बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर, यहोयाकीम के पुत्र यहूदा के राजा यकोन्याह को, और यहूदा के हाकिमों को, और कारीगरों और नक्काशों को यरूशलेम से बँधुआ करके बाबुल को ले गया, उसके बाद यहोवा ने मुझे एक दर्शन दिखाया, और देखो, यहोवा के मन्दिर के सामने अंजीरों की दो टोकरियाँ रखी हुई हैं: 2 एक टोकरी में बहुत अच्छे अंजीर थे, जैसे पहले पके अंजीर होते हैं, और दूसरी टोकरी में बहुत बुरे अंजीर थे, जो इतने बुरे थे कि खाए नहीं जा सकते थे।
3 तब यहोवा ने मुझ से पूछा, “हे यिर्मयाह, तुझे क्या देख पड़ता है?” मैं ने कहा, “अंजीर; अच्छे अंजीर, जो बहुत ही अच्छे हैं; और बुरे, जो बहुत ही बुरे हैं, ऐसे बुरे कि खाए नहीं जा सकते।”
4 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा, 5 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जैसे ये अच्छे अंजीर हैं, वैसे ही मैं यहूदी बँधुओं को जिन्हें मैं ने इस स्थान से कसदियों के देश में भेज दिया है, भलाई के लिये मान लूँगा: 6 और मैं उन पर भलाई के लिये कृपादृष्टि रखूँगा, और उन्हें इस देश में लौटा ले आऊँगा; और मैं उन्हें बनाऊँगा, ढाऊँगा नहीं; मैं उन्हें रोपूँगा, उखाड़ूँगा नहीं; 7 और मैं उन्हें ऐसा मन दूँगा कि वे मुझे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा, क्योंकि वे मेरी ओर अपने सारे मन से फिरेंगे।
8 परन्तु बुरे अंजीरों के विषय में जो ऐसे बुरे हैं कि खाए नहीं जा सकते, निश्चय यहोवा यों कहता है, वैसे ही मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह, और उसके हाकिमों, और यरूशलेम के बचे हुओं को, जो इस देश में रह गए हैं और जो मिस्र देश में रहते हैं, कर दूँगा; 9 और मैं उन्हें पृथ्वी के सब राज्यों के लिये मारा-मारा फिरने का और विपत्ति का कारण बनाऊँगा, और उन सब स्थानों में जहाँ मैं उन्हें बरबस निकाल दूँगा, वे नामधराई, भय, दृष्टान्त और शाप का विषय होंगे; 10 और मैं उनमें तलवार चलाऊँगा, और अकाल और मरी फैलाऊँगा, और अन्त में उस देश में से जो मैं ने उनको और उनके पुरखाओं को दिया था, वे मिट जाएँगे।
अनुवाद: यिर्मयाह 25
1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में (वह बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के राज्य का पहला वर्ष था), यहूदा के सब लोगों के विषय में जो वचन यिर्मयाह के द्वारा पहुँचा, 2 वह वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने यहूदा के सब लोगों से, और यरूशलेम के सब निवासियों से कहा,—
3 आमोन के पुत्र यहूदा के राजा योशिय्याह के राज्य के तेरहवें वर्ष से लेकर आज के दिन तक (यह तेईसवाँ वर्ष है), यहोवा मुझ से बोलता आया है, और मैं तुम से बड़े यत्न से कहता आया हूँ, परन्तु तुम ने नहीं सुना: 4 और यहोवा तुम्हारे पास अपने सब दास भविष्यद्वक्ताओं को भी बड़े यत्न से भेजता आया है (परन्तु तुम ने न सुना, और न सुनने के लिये कान लगाया),
5 और उनके द्वारा कहता आया है,— अपनी-अपनी बुरी चाल और अपने-अपने बुरे कामों से फिरो, और उस देश में बसे रहो जिसे यहोवा ने प्राचीनकाल से तुम्हारे पुरखाओं को और तुम को भी सदा के लिये दिया है: 6 और पराए देवताओं के पीछे होकर उनकी उपासना और उनको दण्डवत् मत करो; और अपनी बनाई हुई वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस न दिलाओ, तब मैं तुम्हारी कुछ हानि न करूँगा।
7 यहोवा की यह वाणी है, परन्तु तुम ने मेरी नहीं सुनी; वरन् अपनी बनाई हुई वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस दिलाई, जिससे तुम्हारी ही हानि हुई।
8 इसलिये सेनाओं का यहोवा यों कहता है,— तुम ने जो मेरे वचन नहीं माने, 9 इसलिये सुनो, यहोवा की यह वाणी है, मैं उत्तर में रहनेवाले सब कुलों को, और अपने दास बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर को बुलवा भेजूँगा; और उनको इस देश और इसके निवासियों के विरुद्ध, और इसके आस-पास की सब जातियों के विरुद्ध भी ले आऊँगा; और मैं इन सब देशों का सत्यानाश करके उन्हें चकित होने का, और सीटी बजाने का विषय बनाऊँगा, और सदा उजाड़ ही उजाड़ कर दूँगा; 10 और मैं उनमें से हर्ष का शब्द और आनन्द का शब्द, दुल्हे का शब्द और दुल्हिन का शब्द, चक्की का शब्द और दीपक का उजियाला मिटा दूँगा।
11 और यह सारा देश उजाड़ ही उजाड़ और विस्मय का कारण हो जाएगा; और ये जातियाँ सत्तर वर्ष तक बाबुल के राजा के अधीन रहेंगी।
12 और जब सत्तर वर्ष बीत चुकें, तब, यहोवा की यह वाणी है, मैं बाबुल के राजा और उसकी प्रजा को उनके अधर्म का दण्ड दूँगा,— और कसदियों के देश को भी, और उसे सदा के लिये उजाड़ दूँगा: 13 और मैं उस देश पर अपने वे सब वचन पूरे करूँगा जो मैं ने उसके विषय में कहे हैं, अर्थात् वे सब जो इस पुस्तक में लिखे हैं, जिन्हें यिर्मयाह ने जातियों के विषय में भविष्यद्वाणी करके कहा है: 14 क्योंकि वे सामर्थी जातियों और बड़े-बड़े राजाओं पर प्रभुता करते हैं; और मैं इनको इनकी करनी के अनुसार, और इनके हाथों के कामों के अनुसार बदला दूँगा।
15 क्योंकि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने मुझ से यों कहा, मेरे हाथ से इस जलजलाहट के दाखमधु का कटोरा लेकर उन सब जातियों को पिला दे, जिनके पास मैं तुझे भेजूँगा, 16 कि वे उसे पीकर उस तलवार के कारण जो मैं उनके बीच चलाऊँगा, क्रोधित हों और बावले हो जाएँ।
17 तब मैं ने यहोवा के हाथ से वह कटोरा लेकर उन सब जातियों को पिला दिया, जिनके पास यहोवा ने मुझे भेजा था,—
18 अर्थात् यरूशलेम और यहूदा के नगरों को, और उसके राजाओं और हाकिमों को, कि उनका देश उजाड़ हो जाए और लोग उसे देखकर चकित हों, और सीटी बजाएँ और उसकी उपमा देकर शाप दिया करें, जैसा आजकल होता है, 19 और मिस्र के राजा फ़िरौन, और उसके कर्मचारियों, हाकिमों और उसकी सारी प्रजा को, 20 और सब मिली-जुली भीड़ को, और ऊस देश के सब राजाओं को, और पलिश्तियों के देश के सब राजाओं को, और अश्कलोन, अज्जा और एक्रोन को, और अश्दोद के बचे हुए लोगों को,—
21 और एदोम, मोआब और अम्मोनियों को, 22 और सोर के सब राजाओं को, और सीदोन के सब राजाओं को, और समुद्र पार के द्वीप के सब राजाओं को, 23 और ददान, तेमा और बूज को, और कोने में रहनेवाले सब दूर-दूर के लोगों को, 24 और अरब के सब राजाओं को, और जंगल में रहनेवाली मिली-जुली जातियों के सब राजाओं को, 25 और जिम्री, एलाम और मादै के सब राजाओं को, 26 और उत्तर के सब राजाओं को, चाहे निकट के हों चाहे दूर के, हर एक अपने भाई के विरुद्ध होगा,— और पृथ्वी भर के उन सब राज्यों को जो धरती पर हैं; और इन सब के बाद शेशक का राजा भी पीएगा।
27 और तू उनसे यह कहना, इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, पीओ और मतवाले हो, और उलटी करो और गिर पड़ो, और उस तलवार के कारण जो मैं तुम्हारे बीच चलाऊँगा फिर कभी न उठो।
28 और यदि वे तेरे हाथ से यह कटोरा लेकर पीने से इन्कार करें, तो तू उनसे कहना, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, तुम को निश्चय पीना पड़ेगा; 29 क्योंकि देखो, जो नगर मेरा कहलाता है, उसी पर मैं विपत्ति डालने लगा हूँ, फिर क्या तुम निर्दोष ठहरोगे? तुम निर्दोष न ठहरोगे; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं पृथ्वी के सब रहनेवालों पर तलवार चलाने के लिये उसे बुला रहा हूँ।
30 तू उनसे ये सब वचन भविष्यद्वाणी करके कह भी, और उनसे कह,— यहोवा ऊपर से गरजेगा, और अपने पवित्र धाम में से अपना शब्द सुनाएगा; वह अपने निवासस्थान के विरुद्ध बड़े ज़ोर से गरजेगा, दाख रौंदनेवालों की सी ललकार वह पृथ्वी के सब रहनेवालों के विरुद्ध सुनाएगा: 31 उसका कोलाहल पृथ्वी की छोर तक पहुँचेगा, क्योंकि यहोवा का जाति-जाति से मुकद्दमा है, वह सब मनुष्यों से वादविवाद करता है; वह दुष्टों को तलवार के वश में कर देगा, यहोवा की यही वाणी है।
32 सेनाओं का यहोवा यों कहता है,— देखो, विपत्ति एक जाति से दूसरी जाति में फैलेगी, और पृथ्वी की छोर से बड़ी आँधी उठेगी; 33 और उस समय यहोवा के मारे हुओं की लोथें पृथ्वी की एक छोर से दूसरी छोर तक पड़ी रहेंगी: उनके लिये कोई विलाप न करेगा, और उनकी लोथें न तो बटोरी जाएँगी और न कब्रों में रखी जाएँगी; वे भूमि के ऊपर खाद के समान पड़ी रहेंगी।
34 हे चरवाहो, हाय-हाय करो और चिल्लाओ, हे भेड़-बकरियों के श्रेष्ठ अगुवो, [धूल में] लोटो; क्योंकि तुम्हारे घात होने और तुम्हारे चकनाचूर होने के दिन पूरे हो गए हैं; और तुम मनभावने बर्तन के समान गिर पड़ोगे: 35 और चरवाहों के भागने का कोई मार्ग न रहेगा, और न भेड़-बकरियों के श्रेष्ठ अगुवों के बचने का कोई उपाय।
36 चरवाहों की चिल्लाहट का शब्द! और भेड़-बकरियों के श्रेष्ठ अगुवों का हाहाकार! क्योंकि यहोवा ने उनकी चराई को नाश कर दिया है; 37 और यहोवा के क्रोध के भड़कने के कारण शान्ति के डेरे भी मिट गए हैं।
38 वह जवान सिंह के समान अपने ठौर को छोड़कर निकला है; क्योंकि अन्धेर करनेवाले के क्रोध के कारण, और उसके भड़के हुए कोप के कारण उनका देश उजाड़ हो गया है।
अनुवाद: यिर्मयाह 26
1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के आरम्भ में यहोवा की ओर से यह वचन पहुँचा, 2 यहोवा यों कहता है, यहोवा के भवन के आँगन में खड़ा होकर, यहूदा के उन सब नगरों के लोगों से जो यहोवा के मन्दिर में दण्डवत् करने को आते हैं, ये सब वचन कह जिनके कहने की आज्ञा मैं ने तुझे दी है; उनमें से कोई वचन मत घटा: 3 सम्भव है कि वे सुनकर अपनी-अपनी बुरी चाल से फिरें, तब मैं उस विपत्ति के विषय में जो मैं उनके बुरे कामों के कारण उन पर डालने की सोच रहा हूँ, पछताऊँगा।
4 तब तू उनसे कहना, यहोवा यों कहता है, यदि तुम मेरी व्यवस्था के अनुसार जो मैं ने तुम को सुनवा दी है न चलो, और मेरी न सुनो, 5 और मेरे दास भविष्यद्वक्ताओं के वचनों पर कान न लगाओ, जिन्हें मैं तुम्हारे पास बड़े यत्न से भेजता आया हूँ, 6 (परन्तु तुम ने उनकी नहीं सुनी,) तो मैं इस भवन को शीलो के समान उजाड़ दूँगा, और इस नगर को पृथ्वी की सब जातियों के लिये शाप का विषय बना दूँगा।
7 जब यिर्मयाह ये वचन यहोवा के भवन में कह रहा था, तब याजक और भविष्यद्वक्ता और सब साधारण लोग सुन रहे थे।
8 और जब यिर्मयाह सब कुछ जिसे सारी प्रजा से कहने की आज्ञा यहोवा ने दी थी कह चुका, तब याजकों और भविष्यद्वक्ताओं और सब साधारण लोगों ने यह कहकर उसको पकड़ लिया, “निश्चय तू मार डाला जाएगा; 9 तू ने क्यों यहोवा के नाम से यह भविष्यद्वाणी की, कि ‘यह भवन शीलो के समान उजड़ जाएगा, और यह नगर ऐसा उजड़ेगा कि उसमें कोई न रह जाएगा’?” (और सब लोग यहोवा के मन्दिर में यिर्मयाह के विरुद्ध इकट्ठे हुए।)
10 तब यहूदा के हाकिम ये बातें सुनकर राजा के भवन से यहोवा के भवन में चढ़ आए, और यहोवा के मन्दिर के नये फाटक के द्वार पर बैठ गए।
11 तब याजकों और भविष्यद्वक्ताओं ने हाकिमों और सब लोगों से कहा, “यह मनुष्य प्राणदण्ड के योग्य है; क्योंकि इसने इस नगर के विरुद्ध ऐसी भविष्यद्वाणी की है जिसे तुम भी अपने कानों से सुन चुके हो।”
12 तब यिर्मयाह ने सब हाकिमों और सब लोगों से कहा,— जो वचन तुम ने सुने हैं, उन्हें यहोवा ही ने मुझे इस भवन और इस नगर के विरुद्ध भविष्यद्वाणी करने के लिये भेजा है: 13 इसलिये अब अपना चालचलन और अपने काम सुधारो, और अपने परमेश्वर यहोवा की बात मानो; तब यहोवा उस विपत्ति के विषय में जिसकी चर्चा उसने तुम से की है पछताएगा।
14 देखो, मैं तुम्हारे वश में हूँ; जो कुछ तुम्हारी दृष्टि में भला और ठीक हो वही मेरे साथ करो: 15 पर यह निश्चय जानो, कि यदि तुम मुझे मार डालोगे, तो अपने ऊपर और इस नगर और इसके निवासियों के ऊपर निर्दोष के लहू का दोष लाओगे; क्योंकि सचमुच यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास यह सब वचन तुम्हारे कानों में कहने के लिये भेजा है।
16 तब हाकिमों और सब लोगों ने याजकों और भविष्यद्वक्ताओं से कहा, “यह मनुष्य प्राणदण्ड के योग्य नहीं है; क्योंकि इसने हमारे परमेश्वर यहोवा के नाम से हम से कहा है।”
17 तब देश के पुरनियों में से कुछ लोग उठकर प्रजा की सारी मण्डली से कहने लगे,—
18 यहूदा के राजा हिजकिय्याह के दिनों में मोरेशेती मीका भविष्यद्वाणी करता था, और उसने यहूदा के सारे लोगों से कहा,— “सेनाओं का यहोवा यों कहता है,— सिय्योन जोतकर खेत बनाया जाएगा, और यरूशलेम खण्डहर हो जाएगा, और भवन का पर्वत जंगल के ऊँचे स्थानों के समान हो जाएगा।”
19 क्या यहूदा के राजा हिजकिय्याह ने या किसी यहूदी ने उसको कहीं मरवा डाला? क्या उस राजा ने यहोवा का भय न माना? और क्या उसने यहोवा से विनती न की? तब यहोवा ने जो विपत्ति उनके विरुद्ध कही थी, उसके विषय में वह पछताया: परन्तु हम अपने ही प्राणों की बड़ी हानि करते हैं।
20 फिर शमायाह का पुत्र ऊरिय्याह नामक किर्यत्यारीम का एक पुरुष भी था जो यहोवा के नाम से भविष्यद्वाणी करता था; और उसने भी इस नगर और इस देश के विरुद्ध ठीक वैसी ही भविष्यद्वाणी की जैसी यिर्मयाह ने की थी: 21 जब यहोयाकीम राजा और उसके सब वीरों और सब हाकिमों ने उसके वचन सुने, तब राजा ने उसे मरवा डालने का यत्न किया; परन्तु ऊरिय्याह यह सुनकर डर गया, और भागकर मिस्र में पहुँचा।
22 तब यहोयाकीम राजा ने मिस्र को लोग भेजे, अर्थात् अकबोर के पुत्र एलनातान को, और उसके संग और कितने पुरुषों को मिस्र में भेजा: 23 और वे ऊरिय्याह को मिस्र से निकालकर यहोयाकीम राजा के पास ले आए; और उसने उसे तलवार से मरवाकर उसकी लोथ को साधारण लोगों की कब्रों में फिंकवा दिया।
24 परन्तु शापान का पुत्र अहीकाम यिर्मयाह की सहायता करता रहा, और वह लोगों के वश में मार डालने के लिये नहीं दिया गया।
अनुवाद: यिर्मयाह 27
1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के आरम्भ में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,—
2 यहोवा ने मुझ से यों कहा, बन्धन और जूए बनवाकर अपनी गर्दन पर रख; 3 तब उन्हें एदोम, मोआब, अम्मोन, सोर और सीदोन के राजाओं के पास उन दूतों के हाथ भेजना जो यहूदा के राजा सिदकिय्याह के पास यरूशलेम में आएँगे: 4 और उनको उनके स्वामियों के लिये यह कहकर आज्ञा देना,— इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, अपने-अपने स्वामी से यों कहो,—
5 पृथ्वी को, और पृथ्वी पर के मनुष्यों और पशुओं को भी, अपनी बड़ी शक्ति और बढ़ाई हुई भुजा के द्वारा मैं ने बनाया; और जिस किसी को मैं चाहता हूँ उसी को मैं उसे दे देता हूँ: 6 और अब मैं ने ये सब देश अपने दास बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ही के हाथ में कर दिए हैं; और मैदान के जीवजन्तुओं को भी मैं ने उसे दिया है कि वे उसके अधीन रहें: 7 और सब जातियाँ उसके, और उसके पुत्र और पोते के अधीन रहेंगी, जब तक उसके भी देश का दिन न आए, और उसका भी; हाँ, बहुत सी जातियाँ और बड़े-बड़े राजा उसके अधीन हो जाएँगे।
8 और जो जाति या राज्य उस, अर्थात् बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के अधीन न हो, और अपनी गर्दन बाबुल के राजा के जूए के नीचे न रखे, उस जाति को मैं तलवार, अकाल और मरी का दण्ड दूँगा, यहोवा की यही वाणी है, जब तक कि मैं उसके हाथ से उनको मिटा न दूँ।
9 इसलिये तुम लोग अपने भविष्यद्वक्ताओं, और भावी कहनेवालों, और स्वप्न देखनेवालों, और शुभ-अशुभ बतानेवालों, और टोन्हों की ओर चित्त मत लगाओ, जो तुम से कहते हैं,— “तुम को बाबुल के राजा के अधीन नहीं होना पड़ेगा;”
10 क्योंकि वे तुम से झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं, जिससे तुम अपने देश से दूर हो जाओ, और मैं आप तुम को दूर करके नष्ट कर दूँ: 11 परन्तु जो जाति बाबुल के राजा के जूए के नीचे अपनी गर्दन झुकाकर उसके अधीन रहेगी, उसको मैं उसी के देश में रहने दूँगा, यहोवा की यही वाणी है; और वह उसमें खेती करती हुई बसी रहेगी।
12 और यहूदा के राजा सिदकिय्याह से भी मैं ने ये सब बातें कहीं,— अपनी गर्दन बाबुल के राजा के जूए के नीचे करो, और उसके और उसकी प्रजा के अधीन रहो, तब तुम जीवित रहोगे।
13 जब यहोवा ने उस जाति के विषय में जो बाबुल के राजा के अधीन न हो, ऐसा कहा है, तो फिर तू क्यों अपनी प्रजा समेत तलवार, अकाल और मरी से मरना चाहता है?
14 और जो भविष्यद्वक्ता तुम से कहते हैं,— “तुम को बाबुल के राजा के अधीन नहीं होना पड़ेगा,” उनकी बातों की ओर कान मत लगाओ; क्योंकि वे तुम से झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं; 15 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं ने उन्हें नहीं भेजा, वे मेरे नाम से झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं; जिससे मैं तुम को देश से निकाल दूँ, और तुम नष्ट हो जाओ, तुम भी और वे भविष्यद्वक्ता भी जो तुम से भविष्यद्वाणी करते हैं।
16 फिर याजकों और साधारण लोगों से भी मैं ने कहा,— यहोवा यों कहता है,— तुम्हारे जो भविष्यद्वक्ता तुम से यह भविष्यद्वाणी करते हैं, कि “देखो, यहोवा के भवन के पात्र अब शीघ्र ही बाबुल से लौटा दिए जाएँगे,” उनकी बातों की ओर कान मत लगाओ; क्योंकि वे तुम से झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं:
17 उनकी मत सुनो; बाबुल के राजा के अधीन होकर जीवित रहो; यह नगर क्यों उजाड़ हो जाए?
18 परन्तु यदि वे भविष्यद्वक्ता हों, और यदि यहोवा का वचन उनके पास हो, तो वे अब सेनाओं के यहोवा से विनती करें, कि जो पात्र यहोवा के भवन में और यहूदा के राजा के भवन में और यरूशलेम में रह गए हैं, वे बाबुल न ले जाए जाएँ।
19 क्योंकि सेनाओं का यहोवा उन खम्भों, और उस हौद, और उन कुर्सियों, और उन बचे हुए पात्रों के विषय में जो इस नगर में रह गए हैं, यों कहता है, 20 जिन्हें बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर उस समय न ले गया जब वह यहूदा के राजा यकोन्याह को और यहूदा और यरूशलेम के सब कुलीनों को बँधुआ करके यरूशलेम से बाबुल को ले गया;
21 हाँ, सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, उन पात्रों के विषय में जो यहोवा के भवन में और राजा के भवन में और यरूशलेम में रह गए हैं, यों कहता है; 22 वे बाबुल को पहुँचाए जाएँगे, और जिस दिन तक मैं उनकी सुधि न लूँ तब तक वहीं रहेंगे, यहोवा की यही वाणी है; तब मैं उन्हें ऊपर ले आकर इस स्थान में फिर रख दूँगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 28
1 उसी वर्ष, यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के आरम्भ में, अर्थात् चौथे वर्ष के पाँचवें महीने में, अज्जूर का पुत्र हनन्याह नबी, जो गिबोन का था, उसने यहोवा के भवन में याजकों और सब लोगों के सामने मुझसे कहा, 2 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है, मैंने बाबुल के राजा का जूआ तोड़ डाला है।
3 फिर दो वर्ष बीतने पर मैं यहोवा के भवन के वे सब पात्र, जिन्हें बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर इस स्थान से उठाकर बाबुल ले गया है, इसी स्थान में फिर ले आऊँगा; 4 और यहूदा के राजा यहोयाकीम का पुत्र यकोन्याह और यहूदा के सब बँधुए जो बाबुल को गए हैं, उनको भी मैं इस स्थान में फिर ले आऊँगा, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैंने बाबुल के राजा का जूआ तोड़ डाला है।
5 तब यिर्मयाह नबी ने याजकों के सामने और उन सब लोगों के सामने जो यहोवा के भवन में खड़े थे, हनन्याह नबी से कहा;
6 हाँ, यिर्मयाह नबी ने कहा, आमीन! यहोवा ऐसा ही करे; जो बातें तूने भविष्यद्वाणी करके कही हैं, अर्थात् मन्दिर के पात्रों और सब बँधुओं के बाबुल से इस स्थान में लौट आने के विषय में, उन्हें यहोवा पूरी करे।
7 तौभी मेरा यह वचन सुन, जो मैं तुझे और सब लोगों को सुनाकर कहता हूँ; 8 जो भविष्यद्वक्ता मुझसे और तुझसे पहले प्राचीनकाल से होते आए थे, उन्होंने बहुत से देशों और बड़े-बड़े राज्यों के विरुद्ध युद्ध और विपत्ति और मरी की भविष्यद्वाणी की थी; 9 जो भविष्यद्वक्ता शान्ति की भविष्यद्वाणी करता है, जब उसका वचन पूरा हो जाए, तब ही वह भविष्यद्वक्ता पहचाना जाएगा कि यहोवा ने सचमुच उसे भेजा है।
10 तब हनन्याह नबी ने यिर्मयाह नबी की गर्दन पर से वह बन्धन उतारकर तोड़ दिया;
11 और हनन्याह ने सब लोगों के सामने कहा,— यहोवा यों कहता है, इसी प्रकार मैं बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर का जूआ सब जातियों की गर्दन पर से तोड़ डालूँगा। तब यिर्मयाह नबी अपना मार्ग लेकर चला गया।
12 जब हनन्याह नबी ने यिर्मयाह नबी की गर्दन पर से जूआ तोड़ दिया, उसके बाद यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,—
13 जाकर हनन्याह से यह कह, यहोवा यों कहता है, तूने काठ के बन्धन तो तोड़ दिए, परन्तु उनके बदले अपने लिए लोहे के बन्धन बना ले; 14 क्योंकि सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है, मैंने इन सब जातियों की गर्दन पर लोहे का जूआ रखा है, कि वे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के अधीन रहें, और वे उसके अधीन रहेंगे; और मैंने मैदान के जीव-जन्तु भी उसके वश में कर दिए हैं।
15 यिर्मयाह नबी ने हनन्याह नबी से यह भी कहा, हे हनन्याह, सुन ले; यहोवा ने तुझे नहीं भेजा, और तूने इन लोगों को झूठ पर भरोसा करवाया है; 16 इसलिए यहोवा यों कहता है, देख, मैं तुझे पृथ्वी के ऊपर से फेंक दूँगा; इसी वर्ष तू मरेगा, क्योंकि तूने यहोवा के विरुद्ध बलवा करने की बातें कही हैं।
17 और हनन्याह नबी उसी वर्ष के सातवें महीने में मर गया।
अनुवाद: यिर्मयाह 29
1 यिर्मयाह नबी ने जो पत्री यरूशलेम से बँधुआई के बचे हुए पुरनियों और याजकों और भविष्यद्वक्ताओं और उन सब लोगों के पास भेजी, जिन्हें नबूकदनेस्सर यरूशलेम से बँधुआ करके बाबुल ले गया था, उसकी बातें ये हैं; 2 यह उस समय की बात है जब यकोन्याह राजा और राजमाता, और प्रधान लोग, अर्थात् यहूदा और यरूशलेम के हाकिम, और कारीगर और नक्काश भी यरूशलेम से निकल चुके थे,—
3 यह पत्री शापान के पुत्र एलासा और हिल्किय्याह के पुत्र गमर्याह के हाथ भेजी गई (जिन्हें यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के पास बाबुल को भेजा था,) उसमें यह लिखा था,—
4 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, उस सारी बँधुआई से जिसे मैंने यरूशलेम से बँधुआ करके बाबुल पहुँचाया है, यों कहता है,—
5 “घर बनाकर उनमें बस जाओ; बारियाँ लगाकर उनके फल खाओ; 6 ब्याह करके बेटे-बेटियाँ जन्माओ; अपने बेटों के लिए भी स्त्रियाँ लो, और अपनी बेटियाँ पुरुषों को ब्याह दो, कि उनसे भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हों; और वहाँ बढ़ते जाओ, घटो नहीं: 7 और जिस नगर में मैंने तुम को बँधुआ कराके भेज दिया है, उसके कुशल का यत्न करो; और उसके लिए यहोवा से प्रार्थना करो, क्योंकि उसके कुशल से तुम्हारा भी कुशल होगा।”
8 क्योंकि सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है,— तुम्हारे जो भविष्यद्वक्ता तुम्हारे बीच में हैं, और तुम्हारे भावी कहनेवाले, वे तुम को बहकाने न पाएँ; और जो स्वप्न तुम देखते हो, उन पर ध्यान न दो: 9 क्योंकि वे मेरे नाम से तुम को झूठी भविष्यद्वाणी सुनाते हैं; मैंने उन्हें नहीं भेजा, यहोवा की यही वाणी है।
10 क्योंकि यहोवा यों कहता है,— जब बाबुल में सत्तर वर्ष पूरे हो जाएँगे, तब मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना वह मनभावना वचन तुम्हारे लिए जगा दूँगा, कि तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँ:
11 क्योंकि जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, यहोवा की यही वाणी है,— वे हानि की नहीं, वरन् शान्ति ही की कल्पनाएँ हैं, कि मैं तुम्हें अन्त और आशा दूँ।
12 तब तुम मुझ को पुकारोगे और आगे बढ़ोगे; और मुझसे प्रार्थना करोगे, और मैं तुम्हारी सुनूँगा: 13 तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मुझे ढूँढ़ोगे।
14 और मैं तुम्हें मिलूँगा, यहोवा की यही वाणी है, और तुम्हारी बँधुआई को लौटा दूँगा, और तुम को उन सब जातियों और स्थानों में से, जिनमें मैंने तुम को बरबस निकाल दिया है, इकट्ठा करूँगा, यहोवा की यही वाणी है; और जिस स्थान से मैंने तुम्हें निकाल दिया था, वहीं मैं तुम्हें लौटा ले आऊँगा।
15 तुम जो कहते हो, “यहोवा ने बाबुल में हमारे लिए भविष्यद्वक्ता उत्पन्न किए हैं;”
16 इसलिए यहोवा उस राजा से जो दाऊद की गद्दी पर विराजमान है, और उन सब लोगों से जो इस नगर में रहते हैं, अर्थात् तुम्हारे उन भाइयों से जो तुम्हारे संग बँधुआई में नहीं गए, यों कहता है,— सेनाओं का यहोवा यों कहता है,—
17 देखो, मैं उन पर तलवार, अकाल और मरी भेजूँगा, और उन्हें ऐसे निकम्मे अंजीरों के समान करूँगा, जो इतने बुरे हैं कि खाए नहीं जा सकते: 18 हाँ, मैं तलवार, अकाल और मरी लिए हुए उनका पीछा करूँगा, और उन्हें पृथ्वी के सब राज्यों के लिए उथल-पुथल का कारण ठहराऊँगा, और उन सब जातियों में जिनके बीच मैं उन्हें हाँक दूँगा, वे शाप और चकित होने का और सीटी बजाने का और निन्दा का कारण होंगे; 19 क्योंकि उन्होंने मेरे वचन नहीं सुने, यहोवा की यही वाणी है, जो मैंने अपने दास भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बड़ा यत्न करके उनके पास भेजे; परन्तु तुम ने नहीं सुना, यहोवा की यही वाणी है।
20 इसलिए हे सारी बँधुआई के लोगो, जिन्हें मैंने यरूशलेम से बाबुल को भेजा है, तुम भी यहोवा का वचन सुनो;
21 कोलायाह के पुत्र अहाब और मासेयाह के पुत्र सिदकिय्याह के विषय में, जो मेरे नाम से तुम को झूठी भविष्यद्वाणी सुनाते हैं, सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है,— देखो, मैं उनको बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दूँगा, और वह उनको तुम्हारी आँखों के सामने मार डालेगा: 22 और बाबुल में रहनेवाले यहूदा के सब बँधुए उनकी चर्चा करके यह शाप दिया करेंगे,— “यहोवा तुझे सिदकिय्याह और अहाब के समान करे, जिन्हें बाबुल के राजा ने आग में भून डाला:”
23 क्योंकि उन्होंने इस्राएल में मूढ़ता के काम किए, अर्थात् अपने मित्रों की स्त्रियों के साथ व्यभिचार किया, और मेरे नाम से झूठा वचन कहा, जिसकी आज्ञा मैंने उन्हें नहीं दी थी; परन्तु मैं जानता हूँ, और मैं साक्षी हूँ, यहोवा की यही वाणी है।
24 और नेहेलामी शमायाह से तू यों कह,—
25 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है,— इसलिए कि तूने यरूशलेम में रहनेवाले सब लोगों के पास, और मासेयाह के पुत्र सपन्याह याजक के पास, और सब याजकों के पास मेरे नाम से पत्रियाँ भेजीं, जिनमें यह लिखा था,—
26 यहोवा ने यहोयादा याजक के स्थान पर तुझे याजक ठहराया है, कि तुम यहोवा के भवन में हर एक पागल और भविष्यद्वाणी करनेवाले पर अधिकारी हो, और तू उसे काठ में और बेड़ियों में जकड़ दे: 27 तो फिर तूने अनातोती यिर्मयाह को, जो तुम्हारे बीच भविष्यद्वाणी करता है, क्यों नहीं घुड़का?
28 उसने तो बाबुल में हमारे पास यह कहला भेजा है,— “बँधुआई का समय लम्बा है, इसलिए घर बनाकर उनमें बस जाओ;
29 बारियाँ लगाकर उनके फल खाओ।” (और सपन्याह याजक ने यह पत्री यिर्मयाह नबी को पढ़कर सुनाई थी:)
30 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,—
31 सब बँधुओं के पास यह कहला भेज,— यहोवा नेहेलामी शमायाह के विषय में यों कहता है; इसलिए कि शमायाह ने, मेरे बिना भेजे, तुम से भविष्यद्वाणी की, और तुम को झूठ पर भरोसा कराया है; 32 इस कारण यहोवा यों कहता है,— देखो, मैं उस नेहेलामी शमायाह और उसके वंश को दण्ड दूँगा; उसके घर में से कोई पुरुष न बचेगा जो इन लोगों के बीच में रहने पाए; और जो भलाई मैं अपनी प्रजा की करूँगा, उसे वह देखने न पाएगा, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध बलवे की बातें कही हैं।
अनुवाद: यिर्मयाह 30
1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,—
2 यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, तुझ से यों कहता है,— जो वचन मैंने तुझ से कहे हैं, उन सभों को पुस्तक में लिख ले; 3 क्योंकि देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं कि मैं अपनी इस्राएली और यहूदी प्रजा को बँधुआई से लौटा लाऊँगा, यहोवा का यही वचन है; और जो देश मैंने उनके पितरों को दिया था, उसमें उन्हें लौटा ले आऊँगा, और वे फिर उसके अधिकारी होंगे।
4 जो वचन यहोवा ने इस्राएलियों और यहूदियों के विषय में कहे थे, वे ये हैं,—
5 निश्चय यहोवा यों कहता है,— थरथरा देनेवाला शब्द हमने सुना है, भय का, शान्ति का नहीं।
6 पूछो तो, और देखो, क्या पुरुष को भी कहीं जनने की पीड़ा उठती है? फिर क्या कारण है कि मैंने सब पुरुषों को जच्चा स्त्री के समान अपनी कमर अपने हाथों से दबाए हुए देखा है? और सब के मुख फीके पड़ गए हैं।
7 हाय! वह दिन क्या ही भारी होगा, उसके समान और कोई दिन नहीं; वह याकूब के संकट का समय होगा; तौभी वह उससे छुड़ाया जाएगा: 8 और सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि उस दिन मैं उसका रखा हुआ जूआ तेरी गर्दन पर से तोड़ दूँगा, और तेरे बन्धनों को टुकड़े-टुकड़े कर डालूँगा; और परदेशी फिर तुझसे अपनी सेवा न कराने पाएँगे; 9 परन्तु वे अपने परमेश्वर यहोवा की, और अपने राजा दाऊद की सेवा करेंगे, जिसको मैं उनके लिए खड़ा करूँगा।
10 इसलिए हे मेरे दास याकूब, तू मत डर, यहोवा की यह वाणी है; हे इस्राएल, विस्मित न हो; क्योंकि देख, मैं दूर देश से तुझे और तेरे वंश को बँधुआई के देश से छुड़ा ले आऊँगा; और याकूब लौटकर बसेगा, और चैन से और निश्चिन्त रहेगा, और कोई उसको डराने न पाएगा: 11 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, तेरा उद्धार करने के लिए मैं तेरे संग हूँ; इसलिए मैं उन सब जातियों का अन्त कर डालूँगा, जिनमें मैंने तुझे तितर-बितर किया है; परन्तु तेरा अन्त न करूँगा: तेरी ताड़ना मैं विचार करके करूँगा, और न तुझे पूरी रीति से नष्ट करूँगा।
12 क्योंकि यहोवा यों कहता है, तेरा घाव असाध्य है, तेरी चोट गहरी है!
13 तेरा मुकद्दमा लड़ने के लिए कोई नहीं; तेरे घाव के लिए न तो औषधि है और न चंगाई।
14 तेरे सब मित्र तुझे भूल गए; वे तेरी सुधि नहीं लेते; क्योंकि मैंने शत्रु के समान तुझे मारा है, और क्रूर की सी ताड़ना दी है, तेरे बड़े अधर्म के कारण, क्योंकि तेरे पाप प्रबल हो गए हैं।
15 तू अपने घाव के कारण क्यों चिल्लाती है? तेरी पीड़ा भारी है: तेरे बड़े अधर्म के कारण, और इसलिए कि तेरे पाप प्रबल हो गए हैं, मैंने तुझसे ऐसा व्यवहार किया है।
16 इस कारण जितने तुझे अब खाए लेते हैं, वे आप ही खाए जाएँगे, और तेरे सब शत्रु बँधुआई में जाएँगे; और तेरे लूटनेवाले आप लुटेंगे, और जितने तेरा धन छीनते हैं, वे आप छीने जाएँगे: 17 क्योंकि मैं तेरी चंगाई करूँगा, और तेरे घावों को अच्छा करूँगा, यहोवा की यह वाणी है; क्योंकि उन्होंने तुझे, हे सिय्योन, ठुकराई हुई कहा है, जिसकी चिन्ता कोई नहीं करता।
18 यहोवा यों कहता है,— देखो, मैं याकूब के तम्बुओं को बँधुआई से लौटाता हूँ, और उसके घरों पर दया करूँगा; और नगर अपने ही खण्डहर पर फिर बसेगा, और राजभवन अपने ही स्थान पर स्थिर रहेगा: 19 तब उनमें से धन्यवाद और आनन्द करनेवालों का शब्द निकलेगा; और मैं उनको बढ़ाऊँगा, और वे घटेंगे नहीं; मैं उनकी महिमा बढ़ाऊँगा, और वे छोटे न होंगे; 20 उसके लड़के-बाले प्राचीनकाल के समान होंगे, और उसकी मण्डली मेरे सामने स्थिर रहेगी; और जितने उस पर अंधेर करते हैं, उन सभों को मैं दण्ड दूँगा: 21 उसका वीर पुरुष उसी में से होगा, और उसका प्रभुता करनेवाला उसी के बीच में से उत्पन्न होगा; मैं उसे अपने निकट बुलाऊँगा, और वह मेरे समीप आएगा; क्योंकि कौन है जो अपना मन तैयार करे कि मेरे समीप आए? यहोवा की यही वाणी है।
22 और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूँगा।
23 देखो, यहोवा का कोप आँधी के समान निकलेगा, वह घेरनेवाली आँधी के समान है; वह दुष्टों के सिर पर ठहर जाएगा: 24 जब तक यहोवा अपना काम न कर चुके, और अपने मन की कल्पनाओं को पूरी न कर चुके, तब तक उसका भड़का हुआ कोप शान्त न होगा; अन्त के दिनों में तुम इस बात को समझोगे।
अनुवाद: यिर्मयाह 31
1 यहोवा की यह वाणी है, उस समय मैं सारे इस्राएली कुलों का परमेश्वर ठहरूँगा; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे।
2 यहोवा यों कहता है,— जो प्रजा तलवार से बच निकली, उस पर जंगल में अनुग्रह हुआ, जब वह आगे बढ़ती गई जब तक कि उसने इस्राएल को विश्राम न दिया।
3 प्राचीनकाल से यहोवा ने मुझे दर्शन दिया: हाँ, मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैंने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है।
4 हे इस्राएली कुमारी! मैं तुझे फिर बसाऊँगा, और तू बसाई जाएगी; तू फिर अपने डफ बजाकर सिंगार करेगी, और बजानेवालों की मण्डली में नाचती हुई निकलेगी; 5 तू शोमरोन के पहाड़ों पर फिर दाख की बारियाँ लगाएगी; और जो उन्हें लगाएँगे, वे उनके फल भी खाने पाएँगे।
6 क्योंकि ऐसा दिन आएगा, जिसमें एप्रैम के पहाड़ी देश के पहरुए पुकारेंगे,— “उठो, चलो, हम सिय्योन को, अपने परमेश्वर यहोवा के पास चलें।”
7 क्योंकि यहोवा यों कहता है,— याकूब के कारण आनन्द से जयजयकार करो, जातियों में जो श्रेष्ठ है उसके लिए ऊँचे शब्द से ललकारो; सुनाओ, स्तुति करो, और कहो, “हे यहोवा, अपनी प्रजा, इस्राएल के बचे हुओं का उद्धार कर।”
8 देखो, मैं उनको उत्तर देश से ले आऊँगा, और पृथ्वी के कोने-कोने से इकट्ठा करूँगा; उनके बीच अंधे, लँगड़े, गर्भवती, और जच्चा स्त्रियाँ भी होंगी; एक बड़ी मण्डली वहाँ लौट आएगी।
9 वे रोते हुए आएँगे, और करुणा के साथ मैं उनकी अगुवाई करूँगा; मैं उन्हें जल की नदियों के पास, सीधे मार्ग से ले चलूँगा, जिस पर वे ठोकर न खाएँगे: क्योंकि मैं इस्राएल का पिता हूँ, और एप्रैम मेरा जेठा है।
10 हे जाति-जाति के लोगो, यहोवा का वचन सुनो, और दूर-दूर के द्वीपों में भी इसका प्रचार करो, और कहो,— “जिसने इस्राएलियों को तितर-बितर किया था, वही उन्हें इकट्ठे भी करेगा, और उनकी ऐसी रक्षा करेगा जैसी चरवाहा अपने झुण्ड की करता है:”
11 क्योंकि यहोवा ने याकूब को छुड़ा लिया, और उस शत्रु के पंजे से जो उससे अधिक बलवन्त है, उसे छुटकारा दिया है;
12 इसलिए वे सिय्योन की चोटी पर आकर जयजयकार करेंगे, और यहोवा की भलाई के कारण, अर्थात् अनाज और नये दाखमधु और टटके तेल और भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के बच्चों के कारण, धारा की नाईं एकत्र होकर बहते आएँगे; और उनका प्राण सींची हुई बारी के समान होगा, और वे फिर कभी उदास न होंगे।
13 उस समय उनकी कुमारियाँ नाचती हुई हर्ष करेंगी, और जवान और बूढ़े एक संग आनन्द करेंगे; क्योंकि मैं उनके शोक को दूर करके उन्हें आनन्दित करूँगा, और उनके दुःख के बदले उन्हें शान्ति दूँगा और हर्षित करूँगा; 14 और मैं याजकों के प्राण को चिकनी वस्तुओं से तृप्त करूँगा, और मेरी प्रजा मेरी भलाई से सन्तुष्ट होगी, यहोवा की यही वाणी है।
15 यहोवा यों कहता है,— ऊँचे स्थान में एक शब्द सुनाई देता है, विलाप और बिलक-बिलककर रोने का शब्द; राहेल अपने बालकों के लिए रो रही है; और अपने बालकों के कारण शान्त नहीं होती, क्योंकि वे नहीं रहे, 16 यहोवा यों कहता है, रोने-पीटने और आँसू बहाने से रुक जा; क्योंकि तेरे परिश्रम का फल मिलनेवाला है, यहोवा की यही वाणी है, और वे शत्रुओं के देश से लौट आएँगे: 17 हाँ, अन्त में तेरी आशा पूरी होगी, यहोवा की यह वाणी है; क्योंकि तेरे बालक अपने देश में लौट आएँगे।
18 निश्चय मैंने एप्रैम को बँधुआई में ये बातें कहकर विलाप करते सुना है,— “तूने मेरी ताड़ना की, और मैंने शिक्षा पाई, मैं उस बछड़े के समान था जो सिखाया न गया हो; तू मुझे फेर, तब मैं फिरूँगा, क्योंकि तू ही, हे यहोवा, मेरा परमेश्वर है।
19 निश्चय, जब तूने मुझे फेरा, तब मैंने पश्चात्ताप किया; और जब मैंने अपने आप को पहचाना, तब मैंने छाती पीटी; मैं लज्जित हुआ और मेरा मुँह काला भी हुआ, क्योंकि मैं अपनी जवानी की नामधराई सहता रहा।”
20 क्या एप्रैम मेरा प्रिय पुत्र है,— क्या वह मेरा दुलारा लड़का है, जब से मैंने उससे बातें कीं? मैं उसे अब तक स्मरण करता ही रहूँगा; इसलिए मेरा मन उसके कारण भर आता है; मैं निश्चय उस पर दया करूँगा, यहोवा की यही वाणी है।
21 अपने लिए मार्ग-चिह्न खड़े कर, अपने लिए खम्भे गाड़; मार्ग पर, अर्थात् जिस मार्ग से तू चली थी, उस पर अपना मन लगा; हे इस्राएली कुमारी, लौट आ, अपने इन नगरों में लौट आ।
22 हे भटकनेवाली, हे विद्रोही बेटी, तू कब तक इधर-उधर फिरती रहेगी! क्योंकि यहोवा ने पृथ्वी पर एक नई बात उत्पन्न की है,— स्त्री पुरुष की रक्षा करेगी।
23 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है,— जब मैं यहूदियों को उनकी बँधुआई से लौटाऊँगा, तब उन्हें यहूदा देश और उसके नगरों में यह आशीर्वाद फिर दिया जाएगा,— “हे धर्मभरे वासस्थान, हे पवित्र पर्वत, यहोवा तुझे आशीष दे।”
24 और यहूदा और उसके सब नगरों के लोग, और किसान, और चरवाहे भी जो भेड़-बकरियाँ लिए हुए घूमते हैं, उसमें एक संग बसेंगे: 25 क्योंकि मैंने थके हुए लोगों का प्राण तृप्त किया है, और जितने लोग भूखे थे उन सभों का प्राण मैं भर दूँगा।
26 इस पर मैं जाग उठा, और देखा, और मेरी नींद मुझे मीठी लगी थी।
27 देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं कि मैं इस्राएल और यहूदा के घरानों के बीच मनुष्य और पशु दोनों का बीज बोऊँगा: 28 और जिस प्रकार मैं उन पर ध्यान रखकर उनको उखाड़ता और ढाता, तोड़ता, नाश करता और दुःख देता था, उसी प्रकार मैं उन पर ध्यान रखकर उनको बनाऊँगा और रोपूँगा, यहोवा की यही वाणी है।
29 उन दिनों में वे फिर न कहेंगे,— पुरखाओं ने तो खट्टे अंगूर खाए, परन्तु उनके वंश के दाँत खट्टे हो गए हैं;
30 परन्तु हर एक मनुष्य अपने ही अधर्म के कारण मारा जाएगा; जो कोई खट्टे अंगूर खाए, उसी के दाँत खट्टे हो जाएँगे।
31 फिर यहोवा की यह भी वाणी है, सुन, ऐसे दिन आनेवाले हैं जब मैं इस्राएल और यहूदा के घरानों से नई वाचा बाँधूँगा: 32 वह उस वाचा के समान न होगी जो मैंने उनके पुरखाओं से उस समय बाँधी थी जब मैं उनका हाथ पकड़कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया; क्योंकि उन्होंने वह वाचा तोड़ डाली, यद्यपि मैं उन पर प्रभुता करता था, यहोवा की यही वाणी है।
33 परन्तु जो वाचा मैं उन दिनों के बाद इस्राएल के घराने से बाँधूँगा, वह यह है, यहोवा की यह वाणी है,— मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में समवाऊँगा, और उसे उनके हृदय पर लिखूँगा; और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे: 34 और तब उन्हें फिर एक दूसरे से और अपने-अपने भाई से यह न कहना पड़ेगा,— “यहोवा को जानो;” क्योंकि, यहोवा की यह वाणी है, छोटे से लेकर बड़े तक, सब के सब मेरा ज्ञान रखेंगे; क्योंकि मैं उनका पाप क्षमा करूँगा, और उनके अधर्म के कामों को फिर स्मरण न करूँगा।
35 जिसने दिन को प्रकाश देने के लिए सूर्य को, और रात को प्रकाश देने के लिए चन्द्रमा और तारागण के नियम ठहराए हैं, जो समुद्र को उछालता है जिससे उसकी लहरें गरजती हैं,— सेनाओं का यहोवा उसका नाम है; वही यहोवा यों कहता है:
36 यदि ये नियम मेरे सामने से टल जाएँ, यहोवा की यह वाणी है, तो ही इस्राएल का वंश भी मेरी दृष्टि में सदा के लिए एक जाति ठहरने से मिट जाएगा: 37 यहोवा यों कहता है,— यदि ऊपर आकाश मापा जा सके, और नीचे पृथ्वी की नींव खोदकर पता लगाया जा सके, तो ही मैं इस्राएल के सारे वंश को उनके सब कामों के कारण त्याग दूँगा, यहोवा की यही वाणी है।
38 देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं कि यह नगर हननेल के गुम्मट से लेकर कोनेवाले फाटक तक यहोवा के लिए बनाया जाएगा; 39 और मापने की डोरी उसके सामने से आगे बढ़कर गारेब पहाड़ी तक पहुँचेगी, और गोआ को घेर लेगी, 40 और शवों और राख की सारी तराई, और किद्रोन नाले तक जितने खेत हैं, पूर्व की ओर घोड़ों के फाटक के कोने तक, सब यहोवा के लिए पवित्र ठहरेंगे; वह नगर फिर कभी न तो काटा जाएगा और न फिर कभी ढाया जाएगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 32
1 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के दसवें वर्ष में, जो नबूकदनेस्सर के राज्य का अठारहवाँ वर्ष था, यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा: 2 उस समय बाबुल के राजा की सेना ने यरूशलेम को घेर लिया था, और यिर्मयाह नबी यहूदा के राजा के भवन के पहरे के आँगन में बन्द था; 3 क्योंकि यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने यह कहकर उसे बन्द किया था, कि तू ऐसी भविष्यद्वाणी क्यों करता है,— “यहोवा यों कहता है, देखो, मैं यह नगर बाबुल के राजा के वश में कर दूँगा, और वह इसको ले लेगा: 4 और यहूदा का राजा सिदकिय्याह कसदियों के हाथ से न बचेगा; वरन् वह बाबुल के राजा के वश में अवश्य ही पड़ेगा, और वह और बाबुल का राजा आपस में आमने-सामने बातें करेंगे, और अपनी-अपनी आँखों से एक दूसरे को देखेंगे; 5 और वह सिदकिय्याह को बाबुल में ले जाएगा, और जब तक मैं उसकी सुधि न लूँ, तब तक वह वहीं रहेगा, यहोवा की यही वाणी है: चाहे तुम लोग कसदियों से लड़ो भी, तौभी तुम्हारे लड़ने से कुछ बन न पड़ेगा।”
6 तब यिर्मयाह ने कहा, यहोवा का वचन मेरे पास पहुँचा,—
7 देख, तेरे चाचा शल्लूम का पुत्र हनमेल तेरे पास यह कहने को आने पर है, “मेरा खेत जो अनातोत में है उसे मोल ले, क्योंकि उसे मोल लेकर छुड़ाने का अधिकार तेरा ही है।”
8 अतः यहोवा के वचन के अनुसार मेरे चाचा का बेटा हनमेल पहरे के आँगन में मेरे पास आकर कहने लगा, “मेरा जो खेत बिन्यामीन देश के अनातोत में है उसे मोल ले, क्योंकि उसके स्वामी होने और उसके छुड़ा लेने का अधिकार तेरा ही है; इसलिए तू उसे अपने लिए मोल ले।” तब मैंने जान लिया कि वह यहोवा का वचन था; 9 इसलिए मैंने उस अनातोत के खेत को अपने चाचा के बेटे हनमेल से मोल ले लिया, और उसका दाम चाँदी के सात शेकेल और दस टुकड़े तौलकर दे दिए: 10 और मैंने दस्तावेज में दस्तखत और मुहर हो जाने पर, गवाहों के सामने वह चाँदी काँटे में तौलकर उसे दे दी; 11 तब मैंने मोल लेने की वे दोनों दस्तावेजें ली, एक जो व्यवस्था और नियम के अनुसार मुहर करके बन्द की गई थी, और दूसरी जो खुली थी;
12 और मैंने मोल लेने की दस्तावेज को अपने चाचा के बेटे हनमेल के सामने, और उन गवाहों के सामने जिन्होंने दस्तावेज में दस्तखत किए थे, और उन सब यहूदियों के सामने भी जो पहरे के आँगन में बैठे हुए थे, नेरिय्याह के पुत्र बारूक को, जो महसेयाह का पोता था, सौंप दिया; 13 तब मैंने उनके सामने बारूक को यह आज्ञा दी, 14 कि सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है, इन मोल लेने की दस्तावेजों को, अर्थात् मुहर की हुई और खुली हुई दोनों दस्तावेजों को लेकर मिट्टी के बर्तन में रख, ताकि ये बहुत दिनों तक रहें; 15 क्योंकि सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, यों कहता है, इस देश में घर और खेत और दाख की बारियाँ फिर मोल ली जाएँगी।
16 जब मैंने मोल लेने की वह दस्तावेज नेरिय्याह के पुत्र बारूक के हाथ में दी, तब मैंने यहोवा से यह प्रार्थना की,—
17 “हाय प्रभु यहोवा! तूने बड़े सामर्थ्य और बढ़ाई हुई भुजा से आकाश और पृथ्वी को बनाया है; 18 तेरे लिए कोई काम कठिन नहीं है: तू हजारों पर करुणा करता रहता, परन्तु पूर्वजों के अधर्म का बदला उनके बाद उनके वंश के लोगों को भी देता है: 19 हे महान् और पराक्रमी परमेश्वर! सेनाओं का यहोवा उसका नाम है; तू बड़ी युक्ति करनेवाला और सामर्थ्य के काम करनेवाला है, तेरी दृष्टि मनुष्यों के सारे चालचलन पर लगी रहती है, और तू हर एक को उसके चालचलन और कर्म का फल भुगताता है; 20 तूने मिस्र देश में चिह्न और चमत्कार किए, और आज तक इस्राएलियों वरन् सब मनुष्यों के बीच वैसा करता आया है, और इस प्रकार तूने अपना ऐसा नाम किया है जो आज के दिन तक बना है; 21 तू अपनी प्रजा इस्राएल को मिस्र देश में से चिह्नों और चमत्कारों और सामर्थी हाथ और बढ़ाई हुई भुजा के द्वारा, और बड़े भयानक कामों के साथ निकाल लाया; 22 फिर तूने उन्हें यह देश दिया जिसके देने की शपथ तूने उनके पूर्वजों से खाई थी, अर्थात् वह देश जिसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं; 23 और वे इसमें आकर इसके अधिकारी हुए, परन्तु उन्होंने तेरी नहीं मानी, और न तेरी व्यवस्था पर चले; जो कुछ तूने उनको करने की आज्ञा दी थी, उसमें से उन्होंने कुछ भी नहीं किया; इस कारण तूने उन पर यह सब विपत्ति डाली है।
24 “देख, नगर को ले लेने के लिए दमदमे बाँधे गए हैं, और नगर तलवार, अकाल और मरी के कारण इन चढ़े हुए कसदियों के वश में किया गया है; जो तूने कहा था वह अब पूरा हुआ है, और तू इसको देखता भी है।
25 तौभी, हे प्रभु यहोवा, तूने मुझसे कहा है, कि गवाह बुलाकर उस खेत को मोल ले, यद्यपि नगर कसदियों के वश में कर दिया गया है।”
26 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,—
27 देख, मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिए कोई भी काम कठिन है?
28 इसलिए यहोवा यों कहता है, देख, मैं यह नगर कसदियों और बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के वश में कर देने पर हूँ, और वह इसको ले लेगा; 29 और जो कसदी इस नगर से युद्ध कर रहे हैं, वे आकर इसमें आग लगाकर फूँक देंगे, और जिन घरों की छतों पर उन्होंने बाल के लिए धूप जलाकर और पराए देवताओं को तपावन देकर मुझे रिस दिलाई है, वे घर भी जला दिए जाएँगे।
30 क्योंकि इस्राएल और यहूदा के लोग, जो काम मेरी दृष्टि में बुरा है, वही लड़कपन से करते आए हैं; इस्राएल के लोग अपनी बनाई हुई वस्तुओं से मुझ को रिस ही रिस दिलाते आए हैं, यहोवा की यही वाणी है।
31 क्योंकि यह नगर, जब से बसा है तब से आज के दिन तक मेरे क्रोध और जलजलाहट भड़काने का कारण बना रहा है, यहाँ तक कि मुझे इसे अपने सामने से हटाना पड़ेगा, 32 क्योंकि इस्राएल और यहूदा के लोगों ने, अर्थात् उन्होंने, उनके राजाओं, हाकिमों, याजकों और भविष्यद्वक्ताओं ने, और यहूदा देश के लोगों और यरूशलेम के निवासियों ने, जो-जो बुराई करके मुझे रिस दिलाई है,— उसके कारण ऐसा होगा।
33 उन्होंने मेरी ओर मुँह नहीं वरन् पीठ ही फेर दी है; और यद्यपि मैं उन्हें बड़े यत्न से सिखाता आया हूँ, तौभी उन्होंने मेरी शिक्षा को नहीं माना, कि ताड़ना ग्रहण करें: 34 वरन् जो भवन मेरा कहलाता है, उसमें भी उन्होंने अपनी घृणित वस्तुएँ स्थापित करके उसे अशुद्ध किया है; 35 और उन्होंने हिन्नोमियों की तराई में बाल के ऊँचे-ऊँचे स्थान बनाकर अपने बेटे-बेटियों को मोलेक के लिए होम करके चढ़ाया, जिसकी आज्ञा मैंने कभी नहीं दी, और न यह बात कभी मेरे मन में आई कि ऐसा घृणित काम किया जाए और जिससे यहूदी लोग पाप में फँसें।
36 परन्तु अब इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इस नगर के विषय में, जिसके विषय में तुम लोग कहते हो, “यह तो तलवार, अकाल और मरी के द्वारा बाबुल के राजा के वश में पड़ा हुआ है;” यों कहता है,
37 देखो, मैं उनको उन सब देशों से जिनमें मैंने क्रोध और जलजलाहट और बड़े क्रोध में आकर उन्हें बरबस निकाल दिया होगा, इकट्ठा करूँगा, और इसी देश में लौटा ले आकर निडर बसा दूँगा; 38 और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा।
39 और मैं उनको एक ही मन और एक ही चाल कर दूँगा कि वे सदा मेरा भय मानते रहें, जिससे उनका और उनके बाद उनके वंश का भी भला हो; 40 और मैं उनसे यह सदा की वाचा बाँधूँगा, कि मैं कभी उनका संग छोड़कर उनका भला करना न छोड़ूँगा; और अपना भय मैं उनके मन में ऐसा उपजाऊँगा कि वे कभी मुझ से अलग होना न चाहेंगे; 41 मैं बड़ी प्रसन्नता के साथ उनका भला करता रहूँगा, और सचमुच उन्हें इस देश में अपने सारे मन और प्राण से बसा दूँगा।
42 क्योंकि यहोवा यों कहता है, कि जैसे मैंने अपनी इस प्रजा पर यह सब बड़ी विपत्ति डाल दी, वैसे ही निश्चय इनसे वह सब भलाई भी करूँगा जिसके करने का वचन मैंने दिया है: 43 और यह देश जिसके विषय तुम लोग कहते हो, “यह उजाड़ हो गया है, इसमें न तो मनुष्य रह गए हैं और न पशु, यह तो कसदियों के वश में पड़ चुका है,” इसी में फिर से खेत मोल लिए जाएँगे।
44 बिन्यामीन के क्षेत्र में, यरूशलेम के आस-पास, और यहूदा देश के नगरों में, पहाड़ी देश के नगरों में, नीचे देश के नगरों में, और दक्षिण देश के नगरों में लोग गवाह बुलाकर खेत मोल लेंगे, और दस्तावेज में दस्तखत और मुहर करेंगे; क्योंकि मैं उनकी बँधुआई को लौटा दूँगा, यहोवा की यही वाणी है।
अनुवाद: यिर्मयाह 33
1 जिस समय यिर्मयाह पहरे के आँगन में बन्द था, उस समय यहोवा का वचन दूसरी बार उसके पास पहुँचा,—
2 यहोवा जो इसे करता है, यहोवा जो इसे स्थिर करने के लिए रचता है, जिसका नाम यहोवा है, वह यों कहता है,—
3 मुझे पुकार और मैं तुझे उत्तर दूँगा, और तुझे बड़ी-बड़ी और गुप्त बातें बताऊँगा जिन्हें तू नहीं जानता, 4 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है,— इस नगर के घरों और यहूदा के राजाओं के भवनों के विषय में, जो युद्ध के यन्त्रों और तलवार के कारण ढा दिए गए हैं; 5 वे कसदियों से युद्ध करने को आते हैं, कि उन (घरों) को उन मनुष्यों की लोथों से भर दें जिन्हें मैंने अपने कोप और जलजलाहट में मार डाला है। और इसलिए कि मैंने इस नगर की सारी बुराई के कारण अपना मुख इससे छिपा लिया है,—
6 देख, मैं इसका इलाज करके इसे चंगा करूँगा; मैं उनको चंगा करूँगा और उन पर पूरी शान्ति और सच्चाई प्रगट करूँगा; 7 और मैं यहूदा और इस्राएल के बँधुओं को लौटा ले आऊँगा, और उन्हें पहले के समान बसाऊँगा; 8 और मैं उनको उनके सारे अधर्म और पाप के काम से, जो उन्होंने मेरे विरुद्ध किए हैं, शुद्ध करूँगा, और जितने अधर्म और अपराध के काम उन्होंने मेरे विरुद्ध किए हैं, उन सब को मैं क्षमा करूँगा: 9 और यह नगर पृथ्वी की उन सब जातियों के बीच मेरे लिए आनन्द का नाम, स्तुति और शोभा का कारण होगा, जो उस सारी भलाई का समाचार सुनेंगी जो मैं इसके लिए करूँगा; और वे उस सब भलाई और उस सारी शान्ति के कारण जो मैं इसको दूँगा, डरेंगी और थरथराएँगी।
10 यहोवा यों कहता है,— यह स्थान जिसके विषय में तुम लोग कहते हो,— “यह तो उजाड़ हो गया है, इसमें न तो मनुष्य रह गया है और न पशु,” अर्थात् यहूदा देश के नगरों और यरूशलेम की उन सड़कों में जो ऐसी सुनसान पड़ी हैं कि उनमें न तो कोई मनुष्य रहता है, न कोई निवासी और न कोई पशु,—
11 इन्हीं में फिर से हर्ष और आनन्द का शब्द, दुल्हे-दुल्हिन का शब्द, और उनका शब्द सुनाई पड़ेगा जो कहते हैं, “सेनाओं के यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि यहोवा भला है, और उसकी करुणा सदा की है,”— और उनका भी जो यहोवा के भवन में धन्यवाद-बलि लाएँगे; क्योंकि मैं इस देश की दशा पहले के समान ज्यों की त्यों कर दूँगा, यहोवा का यही वचन है।
12 सेनाओं का यहोवा कहता है,— सब गाँवों समेत यह स्थान जो ऐसा उजाड़ है कि इसमें न तो मनुष्य रह गया है और न पशु, इसी में भेड़-बकरियाँ बैठानेवाले चरवाहे फिर बसेंगे: 13 पहाड़ी देश में और नीचे के देश में, दक्षिण देश के नगरों में, बिन्यामीन देश में, और यरूशलेम के आस-पास, और यहूदा देश के नगरों में, भेड़-बकरियाँ फिर गिननेवाले के हाथ के नीचे से होकर चलेंगी, यहोवा का यही वचन है।
14 यहोवा की यह भी वाणी है, देख, ऐसे दिन आनेवाले हैं कि जो भलाई का वचन मैंने इस्राएल और यहूदा के घरानों के विषय में कहा है, उसे पूरा करूँगा: 15 उन दिनों में और उन समयों में, मैं दाऊद के वंश में धार्मिकता की एक डाल उगाऊँगा; और वह इस देश में न्याय और धार्मिकता के काम करेगा।
16 उन दिनों में यहूदा बचा रहेगा, और यरूशलेम निडर बसा रहेगा; और जिस नाम से वह कहलाएगी वह यह है, अर्थात् यहोवा हमारी धार्मिकता।
17 क्योंकि यहोवा यों कहता है,— दाऊद के कुल में इस्राएल के घराने की गद्दी पर विराजनेवाले सदैव बने रहेंगे; 18 और लेवीय याजकों के कुलों में मेरे लिए होमबलि चढ़ानेवाले, अन्नबलि जलानेवाले, और नित्य मेलबलि चढ़ानेवाले सदैव बने रहेंगे।
19 फिर यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,—
20 यहोवा यों कहता है, यदि तुम दिन और रात के विषय में मेरी वाचा को ऐसा तोड़ सको कि दिन और रात अपने-अपने समय में न हों; 21 तो जो वाचा मैंने अपने दास दाऊद के संग बाँधी है कि उसकी गद्दी पर राज्य करनेवाला उसका कोई पुत्र न रहे, वह भी टूट जाएगी, और जो वाचा मैंने अपनी सेवा टहल करनेवाले लेवीय याजकों के संग बाँधी है, वह भी टूट जाएगी।
22 जैसा आकाश की सेना की गिनती और समुद्र की बालू के किनकों का परिमाण नहीं हो सकता, वैसा ही मैं अपने दास दाऊद के वंश और अपने सेवक लेवियों को बढ़ाकर अनगिनत कर दूँगा।
23 फिर यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा,— क्या तूने नहीं देखा कि ये लोग क्या कहते हैं,— “जो दो कुल यहोवा ने चुन लिए थे, उन दोनों से उसने अब हाथ उठाया है;”
24 और इस प्रकार उन्होंने मेरी प्रजा को तुच्छ जाना है, यहाँ तक कि उन्हें अब एक जाति ही नहीं समझते।
25 यहोवा यों कहता है, यदि मैंने दिन और रात के विषय अपनी वाचा, और आकाश और पृथ्वी के नियम स्थिर न किए हों, तो मैं याकूब के वंश को और अपने दास दाऊद के वंश को भी त्याग दूँगा, और उसके वंश में से किसी को अब्राहम, इसहाक और याकूब के वंश पर प्रभुता करने के लिए न ठहराऊँगा: क्योंकि मैं उनकी बँधुआई को लौटा ले आऊँगा, और उन पर दया करूँगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 34
1 जब बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर और उसकी सारी सेना, और पृथ्वी के जितने राज्य उसके अधिकार में थे, और सब जातियाँ, यरूशलेम और उसके सब नगरों से युद्ध कर रही थीं, तब यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, ---
2 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, जाकर यहूदा के राजा सिदकिय्याह से कह, हाँ, उससे कह, यहोवा यों कहता है, देख, मैं इस नगर को बाबुल के राजा के हाथ में कर देता हूँ, और वह इसे आग से फुँकवा देगा; 3 और तू उसके हाथ से न बचेगा, क्योंकि तू निश्चय पकड़ा जाएगा और उसके हाथ में कर दिया जाएगा; और तेरी आँखें बाबुल के राजा की आँखों को देखेंगी, और उसका मुँह तेरे मुँह से बातें करेगा, और तू बाबुल को जाएगा।
4 तौभी हे यहूदा के राजा सिदकिय्याह, यहोवा का वचन सुन; यहोवा तेरे विषय में यों कहता है, तू तलवार से न मरेगा; 5 तू शान्ति के साथ मरेगा, और जैसे तेरे पितरों के लिये, अर्थात् तुझसे पहिले के राजाओं के लिये सुगन्ध-द्रव्य जलाए गए, वैसे ही तेरे लिये भी जलाएँगे, और "हाय मेरे प्रभु!" कहकर वे तेरे लिये विलाप करेंगे; क्योंकि यह वचन मैं ही ने कहा है, यहोवा की यही वाणी है।
6 तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने यहूदा के राजा सिदकिय्याह से यरूशलेम में ये सब वचन कहे,
7 जब बाबुल के राजा की सेनाएँ यरूशलेम से और यहूदा के जितने नगर बचे थे उनसे, अर्थात् लाकीश और अजेका से लड़ रही थीं; क्योंकि यहूदा के नगरों में से केवल ये ही गढ़वाले नगर बच गए थे।
8 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास उस समय पहुँचा, जब सिदकिय्याह राजा ने यरूशलेम में रहनेवाले सब लोगों से यह वाचा बाँधी कि उनमें स्वतन्त्रता का प्रचार किया जाए, ---
9 कि हर एक अपने दास और हर एक अपनी दासी को, चाहे वह इब्री हो चाहे इब्रिन, स्वतन्त्र करके जाने दे, ताकि यहूदियों में से कोई अपने भाई से दासत्व न कराए।
10 और सब हाकिमों और सारी प्रजा ने, जो इस वाचा में सम्मिलित हुए थे कि हर एक अपने दास और अपनी दासी को स्वतन्त्र करके जाने दे, ताकि उनसे फिर दासत्व न कराया जाए, यह बात सुनी; और उन्होंने मान लिया और उन्हें छोड़ दिया।
11 परन्तु इसके बाद वे फिर गए, और जिन दास-दासियों को उन्होंने स्वतन्त्र करके छोड़ दिया था उन्हें लौटा लाए, और उन्हें फिर दास-दासियाँ बनने के लिये विवश किया।
12 तब यहोवा की ओर से यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, ---
13 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, --- जिस दिन मैं तुम्हारे पितरों को मिस्र देश अर्थात् दासत्व के घर से निकाल लाया, उसी दिन मैंने उनसे यह कहकर वाचा बाँधी थी, ---
14 सात वर्ष के बीतने पर तुम हर एक अपने भाई को, अर्थात् उस इब्री को जो तेरे हाथ बेचा गया हो और छः वर्ष तक तेरी सेवा कर चुका हो, स्वतन्त्र कर देना; हाँ, तू उसको स्वतन्त्र करके अपने पास से जाने देना; परन्तु तुम्हारे पितरों ने मेरी न सुनी, न मेरी ओर कान लगाया।
15 परन्तु तुम आज के दिन फिरे थे, और हर एक ने अपने पड़ोसी को स्वतन्त्र कर देने का प्रचार करके वह काम किया जो मेरी दृष्टि में ठीक है; और जो भवन मेरा कहलाता है उसमें मेरे सामने वाचा भी बाँधी थी।
16 परन्तु तुम फिर गए और मेरा नाम अपवित्र किया; और हर एक ने अपने दास और अपनी दासी को, जिन्हें तुम स्वतन्त्र करके उनकी इच्छा पर छोड़ चुके थे, फिर लौटा लिया, और उन्हें फिर दास-दासियाँ बनने के लिये विवश किया।
17 इस कारण यहोवा यों कहता है, तुमने हर एक अपने भाई और हर एक अपने पड़ोसी को स्वतन्त्र करने का प्रचार करके मेरी आज्ञा नहीं मानी; इसलिये यहोवा की यह वाणी है, देखो, मैं तुम्हारे विषय में स्वतन्त्रता का प्रचार करता हूँ, अर्थात् तलवार, मरी और अकाल के लिये स्वतन्त्रता; और मैं तुम्हें पृथ्वी के सब राज्यों के लिये मारे-मारे फिरने और डरने का कारण बना दूँगा; 18 हाँ, जिन मनुष्यों ने मेरी वाचा का उल्लंघन किया, और जो वाचा उन्होंने मेरे सामने उस बछड़े के द्वारा बाँधी थी जिसे उन्होंने दो भाग करके काटा और उसके भागों के बीच से होकर निकले, उसकी बातों को पूरा न किया, 19 अर्थात् यहूदा देश के हाकिम और यरूशलेम के हाकिम, प्रधान और याजक और सब साधारण लोग जो बछड़े के भागों के बीच से होकर निकले थे, 20 हाँ, उनको मैं उनके शत्रुओं के हाथ और उनके प्राण के खोजियों के हाथ में कर दूँगा; और उनकी लोथें आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के पशुओं का आहार हो जाएँगी; 21 और मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह और उसके हाकिमों को उनके शत्रुओं और उनके प्राण के खोजियों के हाथ में, अर्थात् बाबुल के राजा की उस सेना के हाथ में कर दूँगा जो तुम्हारे पास से चली गई है।
22 देखो, यहोवा की यह वाणी है, मैं आज्ञा दूँगा और उन्हें इस नगर की ओर लौटा ले आऊँगा; और वे इससे लड़कर इसे ले लेंगे और आग से फूँक देंगे; और मैं यहूदा के नगरों को ऐसा उजाड़ कर दूँगा कि उनमें कोई निवासी न रहेगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 35
1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के दिनों में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, ---
2 रेकाबियों के घराने के पास जाकर उनसे बातें कर, और उन्हें यहोवा के भवन की एक कोठरी में ले जाकर दाखमधु पिला।
3 तब मैंने याजन्याह को, जो यिर्मयाह का पुत्र और हबस्सिन्याह का पोता था, और उसके भाइयों और सब पुत्रों को, अर्थात् रेकाबियों के सारे घराने को साथ लिया; 4 और मैं उनको यहोवा के भवन में, यिग्दल्याह के पुत्र परमेश्वर के जन हानान के पुत्रों की कोठरी में ले आया, जो हाकिमों की कोठरी के पास और शल्लूम के पुत्र मासेयाह की, जो भण्डार का रखवाला था, कोठरी के ऊपर थी; 5 और मैंने रेकाबियों के घराने के पुत्रों के सामने दाखमधु से भरे हण्डे और कटोरे रखकर उनसे कहा, दाखमधु पीओ।
6 परन्तु उन्होंने कहा, हम दाखमधु न पीएँगे, क्योंकि रेकाब के पुत्र योनादाब ने, जो हमारा पुरखा था, हमको यह आज्ञा दी थी, तुम कभी दाखमधु न पीना, न तुम, न तुम्हारे पुत्र; 7 न घर बनाना, न बीज बोना, न दाख की बारी लगाना, न ऐसी कोई वस्तु रखना; परन्तु जीवन भर तम्बुओं ही में रहना, जिससे जिस देश में तुम परदेशी होकर रहते हो उसमें बहुत दिन तक जीते रहो।
8 इसलिये हमने अपने पुरखा रेकाब के पुत्र योनादाब की बात मानी है, उन सब बातों में जिनकी उसने हमें आज्ञा दी, कि हम जीवन भर दाखमधु न पीएँ, न हम, न हमारी स्त्रियाँ, न हमारे पुत्र, न हमारी पुत्रियाँ; 9 और न रहने के लिये घर बनाएँ, और न दाख की बारी, न खेत, न बीज रखें; 10 परन्तु हम तम्बुओं ही में रहते आए हैं, और जो कुछ हमारे पुरखा योनादाब ने हमें आज्ञा दी थी, उसे मानकर उसी के अनुसार किया है।
11 परन्तु जब बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर इस देश पर चढ़ आया, तब हमने कहा, चलो, कसदियों की सेना और अरामियों की सेना के डर के मारे यरूशलेम में जाएँ; इस कारण हम यरूशलेम में रहते हैं।
12 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, ---
13 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, जाकर यहूदा के मनुष्यों और यरूशलेम के निवासियों से कह, यहोवा की यह वाणी है, क्या तुम शिक्षा मानकर मेरी बातें न सुनोगे? 14 रेकाब के पुत्र योनादाब ने जो आज्ञा अपने वंश को दी थी कि तुम दाखमधु न पीना, उसकी वे बातें तो पूरी की गईं, क्योंकि आज के दिन तक वे कुछ नहीं पीते, वरन् अपने पुरखा की आज्ञा मानते हैं; परन्तु मैंने तुमसे बड़े यत्न से सबेरे उठकर बातें कीं, तौभी तुमने मेरी नहीं मानी; 15 और मैंने अपने सब दास भविष्यद्वक्ताओं को बड़े यत्न से सबेरे उठकर तुम्हारे पास यह कहने को भेजा, अपनी-अपनी बुरी चाल से फिरो, और अपने काम सुधारो, और दूसरे देवताओं के पीछे जाकर उनकी उपासना मत करो, तब तुम उस देश में बसे रहोगे जो मैंने तुम्हारे पितरों को और तुमको भी दिया है; परन्तु तुमने न मेरी ओर कान लगाया, न मेरी सुनी।
16 क्योंकि रेकाब के पुत्र योनादाब के वंश ने तो अपने पुरखा की वह आज्ञा मानी जो उसने उन्हें दी थी, परन्तु इन लोगों ने मेरी नहीं मानी, ---
17 इसलिये सेनाओं का परमेश्वर यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, देखो, यहूदा और यरूशलेम के सब निवासियों पर जितनी विपत्ति डालने की मैंने चर्चा की है वह मैं उन पर डालता हूँ; क्योंकि मैंने उनसे बातें कीं, परन्तु उन्होंने नहीं सुनीं; मैंने उन्हें बुलाया, परन्तु उन्होंने उत्तर न दिया।
18 और यिर्मयाह ने रेकाबियों के घराने से कहा, सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, इसलिये कि तुमने अपने पुरखा योनादाब की आज्ञा मानी, और उसकी सब आज्ञाओं का पालन किया, और जो कुछ उसने तुमको आज्ञा दी थी उसी के अनुसार काम किया है; 19 इसलिये सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, रेकाब के पुत्र योनादाब के वंश में सदा ऐसा जन पाया जाएगा जो मेरे सम्मुख खड़ा रहे।
अनुवाद: यिर्मयाह 36
1 फिर यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के चौथे वर्ष में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, ---
2 एक पुस्तक लेकर जितने वचन मैंने तुझसे इस्राएल और यहूदा और सब जातियों के विषय में कहे हैं, जिस दिन से मैं तुझसे बातें करने लगा, अर्थात् योशिय्याह के दिनों से लेकर आज के दिन तक, सब को उसमें लिख।
3 क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुनकर जो मैं उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ, ध्यान दे और हर एक अपनी बुरी चाल से फिरे, और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूँ।
4 तब यिर्मयाह ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को बुलाया; और बारूक ने यहोवा के वे सब वचन जो उसने यिर्मयाह से कहे थे, उसके मुख से सुनकर पुस्तक में लिख दिए।
5 फिर यिर्मयाह ने बारूक को आज्ञा दी, मैं तो बन्द हूँ, मैं यहोवा के भवन में नहीं जा सकता; 6 इसलिये तू जाकर यहोवा के जो वचन तूने मेरे मुख से सुनकर लिखे हैं, उन्हें उपवास के दिन यहोवा के भवन में लोगों को पुस्तक में से पढ़कर सुना; और जितने यहूदी अपने-अपने नगरों से आएँ, उनको भी पढ़कर सुनाना।
7 क्या जाने वे यहोवा के सामने गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करें और हर एक अपनी बुरी चाल से फिरे; क्योंकि जो क्रोध और जलजलाहट यहोवा ने इन लोगों पर भड़काने को कहा है, वह बड़ा है।
8 तब नेरिय्याह के पुत्र बारूक ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता की सब आज्ञाओं के अनुसार यहोवा के भवन में उस पुस्तक में से यहोवा के वचन पढ़कर सुनाए।
9 फिर यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के पाँचवें वर्ष के नौवें महीने में, यरूशलेम में जितने लोग थे, और यहूदा के नगरों से जितने लोग यरूशलेम में आए थे, उन सबके लिये यहोवा के सामने उपवास करने का प्रचार किया गया।
10 तब बारूक ने यहोवा के भवन में सब लोगों को, शापान के पुत्र गमर्याह जो प्रधान था उसकी कोठरी में, जो ऊपरवाले आँगन में यहोवा के भवन के नये फाटक के पास थी, पुस्तक में से यिर्मयाह के वचन पढ़कर सुनाए।
11 तब शापान के पोते गमर्याह के पुत्र मीकायाह ने यहोवा के सारे वचन पुस्तक में से सुने; 12 और वह राजभवन के प्रधान की कोठरी में उतर गया; और क्या देखा कि वहाँ सब हाकिम बैठे हैं, अर्थात् एलीशामा प्रधान और शमायाह का पुत्र दलायाह, और अकबोर का पुत्र एलनातान, और शापान का पुत्र गमर्याह, और हनन्याह का पुत्र सिदकिय्याह, और सब हाकिम।
13 और जितने वचन मीकायाह ने उस समय सुने थे जब बारूक ने लोगों को पुस्तक में से पढ़कर सुनाया, वे सब उसने उनसे वर्णन किए।
14 तब सब हाकिमों ने यहूदी को, जो नतन्याह का पुत्र, शेलेम्याह का पोता और कूशी का परपोता था, बारूक के पास यह कहने को भेजा, जिस पुस्तक में से तूने सब लोगों को पढ़कर सुनाया है, उसे अपने हाथ में लेता आ; और नेरिय्याह का पुत्र बारूक वह पुस्तक हाथ में लिये हुए उनके पास आया।
15 तब उन्होंने उससे कहा, अब बैठ जा और हमें यह पढ़कर सुना।
16 जब उन्होंने वे सब वचन सुने, तब वे थरथराते हुए एक दूसरे को देखने लगे, और बारूक से कहा, हम निश्चय राजा से ये सब वचन कह देंगे।
17 फिर उन्होंने बारूक से पूछा, हमसे कह, क्या तूने ये सब वचन उसके मुख से सुनकर लिखे?
18 बारूक ने उनसे कहा, वह ये सब वचन अपने मुख से मुझे सुनाता गया और मैं इन्हें पुस्तक में स्याही से लिखता गया।
19 तब हाकिमों ने बारूक से कहा, जा, तू अपने आपको और यिर्मयाह को भी छिपा, और कोई न जानने पाए कि तुम कहाँ हो।
20 तब वे पुस्तक को एलीशामा प्रधान की कोठरी में रखकर राजा के पास आँगन में आए; और राजा को वे सब वचन कह सुनाए; 21 तब राजा ने यहूदी को पुस्तक ले आने के लिये भेजा, और उसने उसे एलीशामा प्रधान की कोठरी में से निकालकर लिया; और यहूदी ने राजा को और जो हाकिम राजा के आस-पास खड़े थे उनको भी वह पढ़कर सुनाई।
22 राजा नौवें महीने में शीतकालवाले भवन में बैठा हुआ था, और उसके सामने अँगीठी में आग जल रही थी; 23 और जब यहूदी तीन चार पृष्ठ पढ़ चुका, तब राजा ने उसे चाकू से काटा और जो आग अँगीठी में थी उसमें फेंक दिया; और अँगीठी की आग में पूरी पुस्तक जलकर भस्म हो गई।
24 परन्तु न कोई डरा और न किसी ने अपने कपड़े फाड़े, न तो राजा ने और न उसके कर्मचारियों में से किसी ने, जब उन्होंने ये सब वचन सुने।
25 तौभी एलनातान, और दलायाह, और गमर्याह ने राजा से विनती की थी कि वह पुस्तक को न जलाए; परन्तु उसने उनकी एक न सुनी।
26 और राजा ने राजपुत्र यरहमेल को और अज्रीएल के पुत्र सरायाह को और अब्देल के पुत्र शेलेम्याह को आज्ञा दी कि बारूक लेखक और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को पकड़ लें; परन्तु यहोवा ने उनको छिपा रखा।
27 जब राजा ने उन वचनों की पुस्तक को जो बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर लिखी थी, जला दिया, तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, ---
28 फिर एक और पुस्तक लेकर उसमें यहूदा के राजा यहोयाकीम की जलाई हुई पहली पुस्तक के सब वचन लिख दे।
29 और यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में कह, यहोवा यों कहता है, तूने उस पुस्तक को यह कहकर जला दिया है कि तूने उसमें यह क्यों लिखा है कि बाबुल का राजा निश्चय आकर इस देश को नष्ट करेगा, और उसमें न तो मनुष्य को रहने देगा और न पशु को?
30 इसलिये यहोवा यहूदा के राजा यहोयाकीम के विषय में यों कहता है, उसका कोई दाऊद की गद्दी पर विराजमान न रहेगा; और उसकी लोथ ऐसी फेंक दी जाएगी कि दिन को धूप में और रात को पाले में पड़ी रहेगी; 31 और मैं उसको और उसके वंश और कर्मचारियों को उनके अधर्म का दण्ड दूँगा; और जितनी विपत्ति मैंने उन पर और यरूशलेम के निवासियों और यहूदा के सब लोगों पर डालने को कहा है, उस सबको मैं उन पर डालूँगा; परन्तु उन्होंने मेरी नहीं सुनी।
32 तब यिर्मयाह ने दूसरी पुस्तक लेकर नेरिय्याह के पुत्र बारूक लेखक को दी, और जो पुस्तक यहूदा के राजा यहोयाकीम ने आग में जला दी थी, उसमें के सब वचनों को बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर उसमें लिख दिया; और उन वचनों में उनके समान और भी बहुत से वचन बढ़ा दिए गए।
अनुवाद: यिर्मयाह 37
1 और योशिय्याह का पुत्र सिदकिय्याह, जिसको बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा देश में राजा ठहराया था, वह यहोयाकीम के पुत्र कोन्याह के स्थान पर राज्य करने लगा।
2 परन्तु न तो उसने, न उसके कर्मचारियों ने, और न साधारण लोगों ने यहोवा के वचनों को माना जो उसने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहे थे।
3 सिदकिय्याह राजा ने शेलेम्याह के पुत्र यहूकल और मासेयाह याजक के पुत्र सपन्याह को यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास यह कहला भेजा, हमारे निमित्त हमारे परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर।
4 उस समय यिर्मयाह लोगों के बीच आया-जाया करता था, क्योंकि तब तक उन्होंने उसको बन्दीगृह में नहीं डाला था; 5 और फ़िरौन की सेना मिस्र से निकली थी; और कसदी जो यरूशलेम को घेरे हुए थे, उसका समाचार सुनकर यरूशलेम के पास से चले गए थे।
6 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुँचा, ---
7 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, यहूदा के जिस राजा ने तुमको मुझसे पूछने के लिये मेरे पास भेजा है, उससे यों कहो, देख, फ़िरौन की जो सेना तुम्हारी सहायता के लिये निकली है, वह अपने देश मिस्र में लौट जाएगी; 8 और कसदी फिर लौटकर इस नगर से लड़ेंगे, और इसको ले लेंगे और आग से फूँक देंगे।
9 यहोवा यों कहता है, तुम यह कहकर अपने आपको धोखा न दो कि कसदी हमारे पास से निश्चय चले जाएँगे; क्योंकि वे नहीं चले जाएँगे।
10 क्योंकि यदि तुमने कसदियों की सारी सेना को जो तुमसे लड़ती है, ऐसा मार भी लिया होता कि उनमें से केवल घायल लोग रह जाते, तौभी वे अपने-अपने तम्बू में से उठकर इस नगर को फूँक देते।
11 जब कसदियों की सेना फ़िरौन की सेना के डर के मारे यरूशलेम के पास से चली गई, 12 तब यिर्मयाह यरूशलेम से निकलकर बिन्यामीन देश की ओर इसलिये जा रहा था कि वहाँ से लोगों के बीच में से अलग हो जाए।
13 जब वह बिन्यामीन के फाटक में पहुँचा, तब वहाँ पहरुओं का सरदार था, जिसका नाम यिरियाह था, जो शेलेम्याह का पुत्र और हनन्याह का पोता था, और उसने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को यह कहकर पकड़ लिया, तू कसदियों के पास भागा जाता है: 14 तब यिर्मयाह ने कहा, यह झूठ है; मैं कसदियों के पास नहीं भागा जाता हूँ; परन्तु उसने उसकी एक न मानी। और यिरियाह यिर्मयाह को पकड़कर हाकिमों के पास ले गया।
15 तब हाकिमों ने यिर्मयाह से क्रोधित होकर उसे पिटवाया, और योनातान प्रधान के घर में बन्दी करके डलवा दिया; क्योंकि उन्होंने उसी को बन्दीगृह बना रखा था।
16 जब यिर्मयाह उस तलघर में, और उसकी कोठरियों में पहुँचा, और वहाँ बहुत दिन रहा, 17 तब सिदकिय्याह राजा ने उसको बुलवा भेजा और निकलवा लिया; और राजा ने उससे एकान्त में यह प्रश्न किया, क्या यहोवा की ओर से कोई वचन पहुँचा है? यिर्मयाह ने कहा, हाँ, पहुँचा है; और उसने कहा है, तू बाबुल के राजा के हाथ में कर दिया जाएगा।
18 फिर यिर्मयाह ने सिदकिय्याह राजा से कहा, मैंने तेरा, तेरे कर्मचारियों का, और इन लोगों का क्या अपराध किया है कि तुमने मुझे बन्दीगृह में डलवाया है?
19 और तुम्हारे जो भविष्यद्वक्ता तुमसे भविष्यद्वाणी करके कहा करते थे कि बाबुल का राजा न तुम पर और न इस देश पर चढ़ाई करेगा, वे अब कहाँ हैं?
20 अब, हे मेरे प्रभु, हे राजा, मेरी सुन, मेरी दीन विनती तुझे ग्रहणयोग्य लगे; और मुझे योनातान प्रधान के घर में फिर न भेज, नहीं तो मैं वहाँ मर जाऊँगा।
21 तब सिदकिय्याह राजा की आज्ञा से वे यिर्मयाह को पहरे के आँगन में रखने लगे, और जब तक नगर की सब रोटी न चुक गई, तब तक उसको रोटीवालों की गली में से प्रतिदिन एक टुकड़ा रोटी दी जाती थी। और यिर्मयाह पहरे के आँगन में रहने लगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 38
1 फिर जो वचन यिर्मयाह सब लोगों से कहता था, उनको मत्तान के पुत्र शपत्याह, पशहूर के पुत्र गदल्याह, शेलेम्याह के पुत्र यूकल और मल्किय्याह के पुत्र पशहूर ने सुना, अर्थात् यह कि, ---
2 यहोवा यों कहता है, जो कोई इस नगर में रहेगा वह तलवार, अकाल या मरी से मरेगा; परन्तु जो कोई कसदियों के पास निकल भागे वह जीवित रहेगा; उसका प्राण लूट के समान उसके हाथ में रहेगा, और वह जीवित रहेगा।
3 यहोवा यों कहता है, देखो, यह नगर बाबुल के राजा की सेना के वश में निश्चय कर दिया जाएगा, और वे इसको ले लेंगे।
4 तब हाकिमों ने राजा से कहा, हम तुझसे विनती करते हैं कि उस मनुष्य को मरवा डाल, क्योंकि जो योद्धा इस नगर में रह गए हैं, और अन्य सब लोग भी, उनसे ऐसे-ऐसे वचन कहकर वह उनके हाथ ढीले कर देता है; क्योंकि वह मनुष्य इस प्रजा के लोगों की भलाई नहीं वरन् बुराई ही चाहता है।
5 सिदकिय्याह राजा ने उनसे कहा, सुनो, वह तो तुम्हारे वश में है; क्योंकि ऐसा नहीं हो सकता कि राजा तुम्हारे विरुद्ध कुछ कर सके।
6 तब उन्होंने यिर्मयाह को लेकर राजपुत्र मल्किय्याह के उस गड्ढे में जो पहरे के आँगन में था, रस्सियों से उतारकर डाल दिया; और उस गड्ढे में पानी नहीं केवल दलदल था, और यिर्मयाह कीचड़ में धँस गया।
7 उस समय राजा बिन्यामीन के फाटक के पास बैठा था, सो जब एबेदमेलेक कूशी ने जो राजभवन में एक खोजा था, सुना कि उन्होंने यिर्मयाह को गड्ढे में डाल दिया है, 8 तब एबेदमेलेक राजभवन से निकलकर राजा से ऐसा कहने लगा, 9 हे मेरे स्वामी, हे राजा, उन लोगों ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से जो कुछ किया है वह बुरा किया है, क्योंकि उन्होंने उसको गड्ढे में डाल दिया है, जहाँ यदि वह यों ही छोड़ दिया जाए तो भूख से मर जाएगा; क्योंकि नगर में कुछ रोटी नहीं रही।
10 तब राजा ने एबेदमेलेक कूशी को यह आज्ञा दी, यहाँ से तीस पुरुष साथ लेकर यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को मरने से पहिले गड्ढे में से निकाल ले।
11 सो एबेदमेलेक उतने पुरुषों को साथ लेकर राजभवन के भण्डार के तलघर में गया; और वहाँ से फटे-पुराने और गले हुए चिथड़े लेकर यिर्मयाह के पास उस गड्ढे में रस्सियों से उतार दिए।
12 तब एबेदमेलेक कूशी ने यिर्मयाह से कहा, ये फटे-पुराने और गले हुए चिथड़े अपनी कांखों में रस्सियों के नीचे रख ले। यिर्मयाह ने वैसा ही किया।
13 तब उन्होंने यिर्मयाह को रस्सियों से खींचकर गड्ढे में से निकाला; और यिर्मयाह पहरे के आँगन में रहने लगा।
14 सिदकिय्याह राजा ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को यहोवा के भवन के तीसरे द्वार में अपने पास बुलवा भेजा। और राजा ने यिर्मयाह से कहा, "मैं तुझसे एक बात पूछता हूँ; मुझसे कोई बात न छिपा।"
15 यिर्मयाह ने सिदकिय्याह से कहा, यदि मैं तुझे बताऊँ, तो क्या तू मुझे निश्चय मरवा न डालेगा? और चाहे मैं तुझे सम्मति भी दूँ, तौभी तू मेरी न मानेगा।
16 तब सिदकिय्याह राजा ने अकेले में यिर्मयाह से शपथ खाकर कहा, यहोवा जिसने हमारा यह जीव रचा है, उसके जीवन की सौगन्ध, न तो मैं तुझे मरवा डालूँगा, और न उन मनुष्यों के वश में कर दूँगा जो तेरे प्राण के खोजी हैं।
17 तब यिर्मयाह ने सिदकिय्याह से कहा, सेनाओं का परमेश्वर यहोवा जो इस्राएल का परमेश्वर है, यों कहता है, यदि तू बाबुल के राजा के हाकिमों के पास सचमुच निकल जाए, तब तो तेरा प्राण जीवित रहेगा, और यह नगर फूँका न जाएगा, और तू अपने घराने समेत जीवित रहेगा; 18 परन्तु यदि तू बाबुल के राजा के हाकिमों के पास न निकल जाए, तो यह नगर कसदियों के वश में कर दिया जाएगा, और वे इसे फूँक देंगे, और तू उनके हाथ से बच न सकेगा।
19 सिदकिय्याह ने यिर्मयाह से कहा, जो यहूदी लोग कसदियों के पास भाग गए हैं, मैं उनसे डरता हूँ, ऐसा न हो कि मैं उनके वश में कर दिया जाऊँ और वे मेरी निन्दा करें।
20 यिर्मयाह ने कहा, वे तुझे उनके वश में न करेंगे; जो कुछ मैं तुझसे कहता हूँ उसमें यहोवा की बात मान ले, तब तेरा भला होगा, और तेरा प्राण जीवित रहेगा। 21 और यदि तू निकल जाना स्वीकार न करे, तो जो वचन यहोवा ने मुझे दर्शन के द्वारा बताया है, वह यह है: 22 देख, यहूदा के राजा के रनवास में जितनी स्त्रियाँ रह गई हैं, वे सब बाबुल के राजा के हाकिमों के पास निकालकर पहुँचाई जाएँगी, और देख, वे तुझसे कहेंगी, "तेरे मित्रों ने तुझे बहकाया, और तुझ पर प्रबल हो गए; तेरे पाँव कीचड़ में धँस गए, और वे पीछे फिर गए।"
23 तेरी सब स्त्रियाँ और बाल-बच्चे कसदियों के पास निकालकर पहुँचाए जाएँगे; और तू भी उनके हाथ से न बचेगा, वरन् तू पकड़कर बाबुल के राजा के वश में कर दिया जाएगा; और इस नगर को तू ही आग से फुँकवाएगा।
24 तब सिदकिय्याह ने यिर्मयाह से कहा, इन बातों को कोई न जानने पाए, तो तू मारा न जाएगा। 25 और यदि हाकिम लोग यह सुनकर कि मैंने तुझसे बातचीत की है, तेरे पास आकर कहने लगें, हमें बता कि तूने राजा से क्या कहा, हमसे कोई बात न छिपा, तो हम तुझे न मरवा डालेंगे; और यह भी बता कि राजा ने तुझसे क्या कहा; 26 तो तू उनसे कहना, मैंने राजा से गिड़गिड़ाकर विनती की थी कि मुझे योनातान के घर में फिर न भेज, नहीं तो मैं वहाँ मर जाऊँगा।
27 फिर सब हाकिमों ने यिर्मयाह के पास आकर पूछा, और जैसा राजा ने उसको आज्ञा दी थी, ठीक वैसा ही उसने उनको उत्तर दिया; सो वे उससे और कुछ न बोले, क्योंकि वह बातचीत किसी ने सुनी न थी।
28 इस प्रकार जिस दिन यरूशलेम ले लिया गया उस दिन तक यिर्मयाह पहरे के आँगन ही में रहा; और जैसा उसने कहा था वैसा ही हुआ कि यरूशलेम ले लिया गया।
अनुवाद: यिर्मयाह 39
1 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के नौवें वर्ष के दसवें महीने में बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर और 2 उसकी सारी सेना यरूशलेम पर चढ़ आई, और उसे घेर लिया; सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष के चौथे महीने के नौवें दिन को उस नगर की शहरपनाह तोड़ी गई; 3 और बाबुल के राजा के सब हाकिम भीतर जाकर बीच के फाटक में बैठ गए, अर्थात् नेर्गलसरेसेर, समगर्नबो, सर्सकीम, रबसारीस, नेर्गलसरेसेर, रबमाग, और बाबुल के राजा के और सब हाकिम।
4 जब यहूदा के राजा सिदकिय्याह और सब योद्धाओं ने उन्हें देखा, तब वे भागे और रात ही को राजा की बारी के मार्ग से दोनों दीवारों के बीच के फाटक से होकर नगर से निकल चले और जंगल का मार्ग लिया।
5 परन्तु कसदियों की सेना ने उनका पीछा किया, और सिदकिय्याह को यरीहो के जंगल में जा पकड़ा; और उसको हमात देश के रिबला नगर में बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के पास ले गए; और उसने वहाँ उसके दण्ड की आज्ञा दी।
6 तब बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह के पुत्रों को उसकी आँखों के सामने रिबला में घात किया; और बाबुल के राजा ने यहूदा के सब कुलीन लोगों को भी घात किया; 7 और उसने सिदकिय्याह की आँखों को फुड़वा डाला और उसको बाबुल ले जाने के लिये बेड़ियों से जकड़वा रखा।
8 और कसदियों ने राजभवन और प्रजा के घरों को आग लगाकर फूँक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को ढा दिया। 9 तब अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान प्रजा के बचे हुओं को जो नगर में रह गए थे, और जो लोग उसके पास भाग आए थे, अर्थात् प्रजा में से जितने रह गए थे उन सबको बँधुआ करके बाबुल को ले गया।
10 परन्तु प्रजा में से जो ऐसे कंगाल थे जिनके पास कुछ न था, उनको अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान यहूदा देश में छोड़ गया, और जाते समय उनको दाख की बारियाँ और खेत दे दिए।
11 बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने अंगरक्षकों के प्रधान नबूजरदान के द्वारा यिर्मयाह के विषय में यह आज्ञा दी थी, 12 उसको लेकर उस पर कृपादृष्टि बनाए रखना और उसकी कुछ हानि न करना; जैसा वह तुझसे कहे वैसा ही उससे व्यवहार करना।
13 सो अंगरक्षकों के प्रधान नबूजरदान और नबूशज्बान जो रबसारीस था, और नेर्गलसरेसेर जो रबमाग था, और बाबुल के राजा के सब प्रधानों ने भेजा; 14 हाँ, उन्होंने लोगों को भेजकर यिर्मयाह को पहरे के आँगन में से बुलवा लिया और गदल्याह को जो अहीकाम का पुत्र और शापान का पोता था सौंप दिया कि वह उसे घर पहुँचाए। तब से वह लोगों के साथ रहने लगा।
15 जब यिर्मयाह पहरे के आँगन में बन्द था, तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुँचा, 16 जाकर एबेदमेलेक कूशी से कह, सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर तुझसे यों कहता है, देख, मैं अपने वे वचन जो मैंने इस नगर के विषय में कहे हैं इस प्रकार पूरा करूँगा कि इसकी भलाई न होगी, हानि ही होगी, और उस समय उनका पूरा होना तुझे दिखाई पड़ेगा। 17 परन्तु यहोवा की यह वाणी है कि उस समय मैं तुझे बचाऊँगा, और जिन मनुष्यों से तू भय खाता है, तू उनके वश में नहीं किया जाएगा। 18 क्योंकि मैं तुझे निश्चय बचाऊँगा, और तू तलवार से न मरेगा, तेरा प्राण लूट के समान तेरे हाथ में रहेगा, क्योंकि तूने मुझ पर भरोसा रखा है, यहोवा की यही वाणी है।
अनुवाद: यिर्मयाह 40
1 जब अंगरक्षकों के प्रधान नबूजरदान ने यिर्मयाह को रामा से छुड़ा लिया, जब उसने उसे ले लिया था (क्योंकि वह यरूशलेम और यहूदा के उन सब बँधुओं के बीच हथकड़ियों से बँधा हुआ था जो बाबुल को ले जाए जा रहे थे), उसके पश्चात् यहोवा का यह वचन उसके पास पहुँचा।
2 परन्तु अंगरक्षकों के प्रधान ने यिर्मयाह को ले लिया और उससे कहा, ---
3 तेरे परमेश्वर यहोवा ने इस स्थान पर यह विपत्ति डालने की बात कही थी; और यहोवा ने अपने कहने के अनुसार इसे ले आकर पूरा भी किया है, क्योंकि तुम लोगों ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया और उसकी बात नहीं मानी; इस कारण तुम्हारी यह दशा हुई है।
4 अब देख, मैं तेरी इन हथकड़ियों को आज काट देता हूँ जो तेरे हाथों में हैं; यदि मेरे संग बाबुल में जाना तुझे अच्छा लगे, तो चल, वहाँ मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा; परन्तु यदि मेरे संग बाबुल जाना तुझे बुरा लगे, तो रहने दे; देख, सारा देश तेरे सामने पड़ा है; जिधर जाना तुझे अच्छा और ठीक लगे उधर ही चला जा।
5 (वह अभी लौटा भी न था,) तो गदल्याह जो अहीकाम का पुत्र और शापान का पोता है, जिसको बाबुल के राजा ने यहूदा के नगरों पर अधिकारी ठहराया है, उसके पास लौटकर उसके संग लोगों के बीच रह, या जहाँ कहीं तुझे जाना ठीक जान पड़े वहीं चला जा। सो अंगरक्षकों के प्रधान ने उसको भोजन-सामग्री और कुछ भेंट भी देकर विदा किया। 6 तब यिर्मयाह अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास मिस्पा को गया, और वहाँ उन लोगों के बीच रहने लगा जो देश में रह गए थे।
7 योद्धाओं के जो दल मैदान में थे, जब उनके सब प्रधानों ने अपने जनों समेत सुना कि बाबुल के राजा ने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को देश का अधिकारी ठहराया है, और देश के जिन कंगाल लोगों को वह बँधुआ करके बाबुल को नहीं ले गया, क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या बाल-बच्चे, उन सबको उसे सौंप दिया है, 8 तब नतन्याह का पुत्र इश्माएल, कारेह के पुत्र योहानान और योनातान, तन्हूमेत का पुत्र सरायाह, एपै नतोपाई के पुत्र, और किसी माकाई का पुत्र याजन्याह अपने जनों समेत गदल्याह के पास मिस्पा में आए।
9 और गदल्याह जो शापान का पोता था, उसने उनसे और उनके जनों से शपथ खाकर कहा, कसदियों की सेवा करने से मत डरो; अधीन होकर देश में रहते हुए बाबुल के राजा की सेवा करो तो तुम्हारा भला होगा। 10 और मैं तो इसलिये मिस्पा में रहता हूँ कि जो कसदी हमारे यहाँ आएँ, उनके सामने हाजिर हुआ करूँ; परन्तु तुम दाखमधु और धूपकाल के फल और तेल को बटोरकर अपने बरतनों में रखो और अपने लिये हुए नगरों में बसे रहो।
11 फिर जब मोआबियों, अम्मोनियों, एदोमियों और अन्य सब देशों में रहनेवाले सब यहूदियों ने सुना कि बाबुल के राजा ने यहूदियों में से कुछ लोगों को बचा रहने दिया है, और उन पर गदल्याह को जो अहीकाम का पुत्र और शापान का पोता है, अधिकारी नियुक्त किया है;
12 तब सब यहूदी जिन-जिन स्थानों में तितर-बितर हो गए थे, वहाँ से लौटकर यहूदा देश में मिस्पा के पास गदल्याह के पास आए; और बहुत दाखमधु और धूपकाल के फल बटोरने लगे।
13 तब कारेह का पुत्र योहानान और मैदान में रहनेवाले दलों के सब प्रधान मिस्पा में गदल्याह के पास आकर कहने लगे, 14 "क्या तू सचमुच जानता है कि अम्मोनियों के राजा बालीस ने नतन्याह के पुत्र इश्माएल को तेरे प्राण लेने के लिये भेजा है?" परन्तु अहीकाम के पुत्र गदल्याह ने उनकी प्रतीति न की।
15 फिर कारेह के पुत्र योहानान ने गदल्याह से मिस्पा में छिपकर कहा, मुझे जाकर नतन्याह के पुत्र इश्माएल को मार डालने दे, और कोई इसे न जानेगा; वह क्यों तेरा प्राण ले, और जितने यहूदी लोग तेरे पास इकट्ठे हुए हैं वे क्यों तितर-बितर हो जाएँ और बचे हुए यहूदी क्यों नष्ट हों?
16 अहीकाम के पुत्र गदल्याह ने कारेह के पुत्र योहानान से कहा, ऐसा काम कदापि न कर, क्योंकि तू इश्माएल के विषय में झूठ बोलता है।
अनुवाद: यिर्मयाह 41
1 और सातवें महीने में ऐसा हुआ कि इश्माएल जो नतन्याह का पुत्र और एलीशामा का पोता और राजवंश का था, और राजा के प्रधान, अर्थात् दस पुरुष, उसके साथ मिस्पा में अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास आए, और वहाँ मिस्पा में उन्होंने एक संग भोजन किया।
2 तब नतन्याह का पुत्र इश्माएल और उसके संग के वे दस पुरुष उठे, और गदल्याह को, जो अहीकाम का पुत्र और शापान का पोता था, तलवार से मार डाला; हाँ, उन्होंने उसे घात किया जिसे बाबुल के राजा ने देश पर अधिकारी ठहराया था: 3 और जो यहूदी उसके साथ, अर्थात् गदल्याह के साथ मिस्पा में थे, और जो कसदी योद्धा वहाँ मिले, उन सब को इश्माएल ने मार डाला।
4 और गदल्याह को मार डालने के दूसरे दिन, जब कोई यह बात न जानता था, 5 तब शकेम और शीलो और शोमरोन से अस्सी पुरुष आए, जो अपने सिर मुँड़ाए, वस्त्र फाड़े और अपने शरीर चीरे हुए थे, और यहोवा के भवन में चढ़ाने के लिए अन्नबलि और धूप लिए हुए थे।
6 तब नतन्याह का पुत्र इश्माएल उनसे मिलने को मिस्पा से निकला, और चलते-चलते रोता जाता था; और जब वह उनसे मिला तो उनसे कहा, अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास चलो।
7 और जब वे नगर के बीच पहुँचे, तब नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने, उसने और उसके संग के पुरुषों ने, उन्हें घात करके गड़हे के बीच के निकट डाल दिया।
8 परन्तु उनमें से दस पुरुष ऐसे मिले जिन्होंने इश्माएल से कहा, हमें न मार; क्योंकि हमारे पास मैदान में छिपाया हुआ भण्डार है, अर्थात् गेहूँ, जौ, तेल और मधु; सो वह रुक गया, और उन्हें उनके भाइयों के बीच घात न किया।
9 जिस गड़हे में इश्माएल ने उन पुरुषों की सब लोथें फेंक दी थीं जिन्हें उसने गदल्याह के साथ मारा था, वह वही था जिसे राजा आसा ने इस्राएल के राजा बाशा के कारण बनवाया था; उसी को नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने मारे हुओं से भर दिया।
10 तब इश्माएल उन सब बचे हुए लोगों को जो मिस्पा में थे बन्दी बनाकर ले गया, अर्थात् राजकुमारियों को और उन सब लोगों को जो मिस्पा में छोड़े गए थे, जिन्हें जल्लादों के प्रधान नबूजरदान ने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को सौंप दिया था; हाँ, नतन्याह का पुत्र इश्माएल उन्हें लेकर चल दिया, कि अम्मोनियों के पास पार चला जाए।
11 परन्तु जब कारेह के पुत्र योहानान ने और दलों के उन सब प्रधानों ने जो उसके संग थे, उस सारी बुराई का समाचार सुना जो नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने की थी, 12 तब वे सब पुरुषों को लेकर नतन्याह के पुत्र इश्माएल से लड़ने को निकले, और उसे गिबोन के बड़े जलाशय के पास पाया।
13 और जब इश्माएल के साथ के सब लोगों ने कारेह के पुत्र योहानान को और दलों के उन सब प्रधानों को जो उसके संग थे देखा, तब वे आनन्दित हुए: 14 और जितने लोगों को इश्माएल मिस्पा से बन्दी बनाकर ले गया था, वे सब मुड़कर लौट आए और कारेह के पुत्र योहानान के पास चले गए; 15 परन्तु नतन्याह का पुत्र इश्माएल आठ पुरुषों समेत योहानान के हाथ से बच निकला और अम्मोनियों के पास चला गया।
16 तब कारेह के पुत्र योहानान ने और दलों के उन सब प्रधानों ने जो उसके संग थे, उन सब बचे हुए लोगों को ले लिया जिन्हें उसने नतन्याह के पुत्र इश्माएल से मिस्पा से छुड़ाया था, जब उसने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को मार डाला था—अर्थात् बलवान पुरुषों, योद्धाओं, स्त्रियों, बालकों और खोजों को, जिन्हें उसने गिबोन से छुड़ा लिया था; 17 और वे जाकर गेरूत-किम्हाम में, जो बैतलहम के निकट है, रहने लगे, कि आगे बढ़कर मिस्र में प्रवेश करें, 18 कसदियों के कारण, क्योंकि वे उनसे डरते थे, इसलिए कि नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने गदल्याह को मार डाला था, जिसे बाबुल के राजा ने देश पर अधिकारी ठहराया था।
अनुवाद: यिर्मयाह 42
1 तब दलों के सब प्रधान, और कारेह का पुत्र योहानान, और होशायाह का पुत्र याजन्याह, और छोटे से लेकर बड़े तक सब लोग निकट आए, 2 और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से कहा—हमारी विनती तुझे ग्रहणयोग्य हो; अब हमारे लिए, इन सब बचे हुओं के निमित्त, अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर, क्योंकि हम बहुतों में से थोड़े ही बचे हैं, जैसा तू अपनी आँखों से हमें देख रहा है; 3 और तेरा परमेश्वर यहोवा हमें वह मार्ग बताए जिस पर हम चलें, और वह काम जो हम करें।
4 तब यिर्मयाह ने उनसे कहा, मैंने सुन लिया है; देखो, मैं तुम्हारे वचनों के अनुसार तुम्हारे परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना करूँगा; और जो कुछ उत्तर यहोवा तुम्हें देगा, वह मैं तुम को बताऊँगा; मैं तुम से कुछ भी न छिपाऊँगा।
5 तब उन्होंने यिर्मयाह से कहा, यदि तेरा परमेश्वर यहोवा जो कुछ वचन हमारे पास भेजे उसके अनुसार हम न करें, तो यहोवा हमारे बीच सच्चा और विश्वासयोग्य साक्षी ठहरे: 6 चाहे वह भला हो चाहे बुरा, हम अपने परमेश्वर यहोवा की बात, जिसके पास हम तुझे भेजते हैं, मानेंगे; क्योंकि जब हम अपने परमेश्वर यहोवा की बात मानेंगे तब हमारा भला होगा।
7 और दस दिन के बीतने पर यहोवा का वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा; 8 तब उसने कारेह के पुत्र योहानान को, और दलों के सब प्रधानों को जो उसके संग थे, और छोटे से लेकर बड़े तक सब लोगों को बुलाया; 9 और उनसे कहा—इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसके पास तुम ने मुझे इसलिए भेजा कि मैं नम्रता से तुम्हारी विनती उसके सम्मुख रखूँ, यों कहता है, 10 यदि तुम इसी देश में निश्चय बने रहोगे, तो मैं तुम को बनाऊँगा और ढाऊँगा नहीं, और रोपूँगा और उखाड़ूँगा नहीं; क्योंकि जो विपत्ति मैं तुम पर लाया हूँ उससे मैं पछताता हूँ।
11 बाबुल के राजा से, जिससे तुम डरते हो, मत डरो; यहोवा की यह वाणी है, उससे मत डरो, क्योंकि मैं तुम्हें बचाने और उसके हाथ से छुड़ाने के लिए तुम्हारे साथ हूँ;
12 और मैं तुम पर दया करूँगा, और वह भी तुम पर दया करके तुम्हें तुम्हारे निज देश में बसा देगा।
13 परन्तु यदि तुम कहो, हम इस देश में न रहेंगे, और अपने परमेश्वर यहोवा की बात न मानेंगे,
14 और कहो, नहीं, हम तो मिस्र देश जाएँगे, जहाँ न युद्ध देखेंगे, न नरसिंगे का शब्द सुनेंगे, और न भोजन के लिए भूखे रहेंगे, और वहीं हम रहेंगे।
15 तो अब, हे यहूदा के बचे हुए लोगो, यहोवा का वचन सुनो; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, यदि तुम सचमुच मिस्र में जाने का मुँह करो, और वहाँ परदेशी होकर रहने जाओ, 16 तो ऐसा होगा कि जिस तलवार से तुम डरते हो, वही वहाँ मिस्र देश में तुम्हें जा पकड़ेगी, और जिस अकाल से तुम भय खाते हो, वह वहाँ मिस्र देश में तुम्हें आ घेरेगा, और वहीं तुम मरोगे: 17 और जितने पुरुष मिस्र में परदेशी होकर रहने के लिए जाने का मुँह किए हुए हैं, वे सब तलवार, अकाल या मरी से मरेंगे; और जो विपत्ति मैं उन पर डालूँगा, उससे उनमें से एक भी न बचेगा और न छूटेगा।
18 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, जिस प्रकार मेरा क्रोध और मेरी जलजलाहट यरूशलेम के निवासियों पर भड़क उठी थी, उसी प्रकार जब तुम मिस्र में जाओगे, तब मेरी जलजलाहट तुम पर भी भड़क उठेगी: और तुम शाप और विस्मय और कोसने और निन्दा का कारण बनोगे; और इस स्थान को फिर न देखने पाओगे।
19 हे यहूदा के बचे हुए लोगो, यहोवा ने तुम्हारे विषय में कहा है: मिस्र में मत जाओ; निश्चय जान रखो कि आज मैंने तुम्हें चिताकर साक्षी दी है।
20 क्योंकि जब तुम ने मुझे अपने परमेश्वर यहोवा के पास यह कहकर भेजा, कि हमारे लिए हमारे परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर, और जो कुछ हमारा परमेश्वर यहोवा कहे उसी के अनुसार हमें बता और हम वैसा ही करेंगे, तब तुम ने अपने ही प्राणों को धोखा दिया।
21 और मैंने आज तुम्हें बता दिया है, परन्तु तुम ने अपने परमेश्वर यहोवा की बात नहीं मानी, और न उन सब बातों के अनुसार किया जिनके लिए उसने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।
22 और अब निश्चय जान रखो कि जिस स्थान में तुम परदेशी होकर रहने की इच्छा से जाना चाहते हो, उसी में तुम तलवार, अकाल और मरी से मरोगे।
अनुवाद: यिर्मयाह 43
1 और जब यिर्मयाह सब लोगों से उनके परमेश्वर यहोवा के वे सब वचन कह चुका, जिनके लिए उनके परमेश्वर यहोवा ने उसे उन सब के पास भेजा था, अर्थात् ये ही सब वचन, 2 तब होशायाह के पुत्र अजर्याह ने, और कारेह के पुत्र योहानान ने, और सब अभिमानी पुरुषों ने यिर्मयाह से कहा, तू झूठ बोलता है; हमारे परमेश्वर यहोवा ने तुझे यह कहने को नहीं भेजा कि मिस्र में परदेशी होकर रहने को मत जाओ; 3 परन्तु नेरिय्याह का पुत्र बारूक तुझे हमारे विरुद्ध उभारता है, कि हमें कसदियों के हाथ में कर दे, जिससे वे हमें मार डालें और बन्दी बनाकर बाबुल ले जाएँ।
4 अतः कारेह के पुत्र योहानान ने और दलों के सब प्रधानों ने और सारी प्रजा ने यहोवा की यह बात न मानी कि यहूदा देश में ही रहें: 5 परन्तु कारेह के पुत्र योहानान ने और दलों के सब प्रधानों ने यहूदा के उन बचे हुए लोगों को ले लिया, जो उन सब जातियों में से, जिनमें वे तितर-बितर कर दिए गए थे, यहूदा देश में रहने के लिए लौट आए थे, 6 अर्थात् पुरुषों, स्त्रियों, बालकों और राजकुमारियों को, और उन सब प्राणियों को जिन्हें जल्लादों के प्रधान नबूजरदान ने गदल्याह के पास, जो अहीकाम का पुत्र और शापान का पोता था, छोड़ दिया था, और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को, और नेरिय्याह के पुत्र बारूक को भी; 7 और वे मिस्र देश में चले गए, क्योंकि उन्होंने यहोवा की बात न मानी; और वे तहपन्हेस तक आ पहुँचे।
8 तब तहपन्हेस में यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा—
9 अपने हाथ में बड़े-बड़े पत्थर ले, और उन्हें तहपन्हेस में फ़िरौन के भवन के फाटक के पास जो ईंट का भट्ठा है, उसकी गारे में यहूदी पुरुषों के देखते छिपा दे;
10 और उनसे कह, इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, देखो, मैं अपने दास बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर को बुलवा भेजूँगा, और उसका सिंहासन इन पत्थरों के ऊपर जो मैंने छिपाए हैं रखूँगा, और वह अपना तम्बू इनके ऊपर तानेगा;
11 और वह आकर मिस्र देश को मारेगा; जो मरने के लिए हैं वे मृत्यु के वश में, जो बँधुआई के लिए हैं वे बँधुआई में, और जो तलवार के लिए हैं वे तलवार के वश में कर दिए जाएँगे; 12 और मैं मिस्र के देवताओं के भवनों में आग लगाऊँगा, और वह उन्हें फूँक देगा और उन्हें बन्दी बनाकर ले जाएगा; और जैसे चरवाहा अपना वस्त्र लपेट लेता है, वैसे ही वह मिस्र देश को लपेट लेगा; और वह वहाँ से कुशल से चला जाएगा: 13 और वह बेतशेमेश की मूरतों को, जो मिस्र देश में है, तोड़ डालेगा; और मिस्र के देवताओं के भवनों को आग में फूँक देगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 44
1 जितने यहूदी मिस्र देश में रहते थे, अर्थात् मिग्दोल, तहपन्हेस और नोप में, और पत्रोस देश में रहते थे, उन सब के विषय में यिर्मयाह के पास यह वचन पहुँचा—
2 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, जो विपत्ति मैं यरूशलेम और यहूदा के सब नगरों पर लाया हूँ, वह सब तुम ने देखी है; और देखो, वे आज के दिन उजाड़ पड़े हैं, और उनमें कोई नहीं बसता, 3 उस दुष्टता के कारण जो उन्होंने मुझे रिस दिलाने के लिए की थी, कि वे जाकर पराए देवताओं के लिए धूप जलाते और उनकी उपासना करते थे, जिन्हें न तो वे, न उनके पुरखा जानते थे: 4 और मैं अपने सब दास भविष्यद्वक्ताओं को उनके पास बड़े यत्न से बार-बार यह कहने को भेजता रहा, कि यह घृणित काम, जिससे मैं घृणा करता हूँ, मत करो; 5 परन्तु उन्होंने न सुना, न कान लगाया कि अपनी दुष्टता से फिरें और पराए देवताओं के लिए धूप न जलाएँ।
6 इस कारण मेरी जलजलाहट और मेरा क्रोध उन पर उण्डेला गया, और यहूदा के नगरों और यरूशलेम की सड़कों पर भड़क उठा; और वे उजाड़ हो गए, जैसे आज के दिन हैं।
7 और अब इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, तुम क्यों अपने ही प्राणों के विरुद्ध यह बड़ी बुराई करते हो, कि यहूदा के बीच में से क्या पुरुष, क्या स्त्री, क्या बालक, क्या दूधपीता बच्चा, सब को नाश कर दो, और तुम्हारा कोई भी बचा न रहे, 8 कि तुम अपने हाथों के कामों के द्वारा, अर्थात् इस मिस्र देश में जहाँ तुम रहने को आए हो पराए देवताओं के लिए धूप जलाकर, मुझे रिस दिलाते हो, जिससे तुम नाश हो जाओ, और पृथ्वी की सब जातियों के बीच शाप और नामधराई का कारण बनो?
9 क्या तुम अपने पुरखाओं की बुराइयाँ, और यहूदा के राजाओं की बुराइयाँ, और उनकी पत्नियों की बुराइयाँ, और अपनी बुराइयाँ, और अपनी पत्नियों की बुराइयाँ भूल गए हो, जो उन्होंने यहूदा देश में और यरूशलेम की सड़कों में की थीं: 10 और आज के दिन तक उन्होंने न अपने को नम्र किया, न भय माना, और न मेरी उस व्यवस्था और उन विधियों पर चले, जिन्हें मैंने तुम्हारे और तुम्हारे पुरखाओं के सामने रखा था।
11 इस कारण इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, देखो, मैं तुम्हारे विरुद्ध हानि के लिए अपना मुख किए हूँ, कि सारे यहूदा का अन्त कर दूँ; 12 और यहूदा के जो बचे हुए लोग मिस्र देश में परदेशी होकर रहने के लिए जाने का मुँह किए हुए हैं, उनको मैं ले लूँगा, और वे सब मिस्र देश में मिट जाएँगे; वे तलवार से गिरेंगे, अकाल से मिट जाएँगे, छोटे से लेकर बड़े तक; वे तलवार और अकाल से मरेंगे, और शाप और विस्मय और कोसने और निन्दा का कारण बनेंगे: 13 और जैसे मैंने यरूशलेम को तलवार, अकाल और मरी के द्वारा दण्ड दिया, वैसे ही मैं मिस्र में रहनेवालों को भी दण्ड दूँगा।
14 और यहूदा के जो बचे हुए लोग यहाँ मिस्र देश में परदेशी होकर रहने आए हैं, उनमें से कोई न बचेगा कि यहूदा देश में लौट जाए, जिसमें लौटकर बसने की वे लालसा रखते हैं; क्योंकि भागे हुओं को छोड़ और कोई लौटने न पाएगा।
15 तब जितने पुरुष जानते थे कि उनकी पत्नियाँ पराए देवताओं के लिए धूप जलाती हैं, और जितनी स्त्रियाँ पास खड़ी थीं, एक बड़ी मण्डली, और मिस्र देश के पत्रोस में रहनेवाले सब लोग, उन सब ने यिर्मयाह को यह उत्तर दिया—
16 जो वचन तू ने यहोवा के नाम से हम से कहा है, उसको हम नहीं सुनेंगे; 17 परन्तु जो कुछ हमारे मुँह से निकलता है, उसे हम निश्चय करेंगे, अर्थात् आकाश के ढाँचे के लिए धूप जलाएँगे और उसके लिए तपावन देंगे, जैसे हम और हमारे पुरखा, हमारे राजा और हमारे हाकिम यहूदा के नगरों में और यरूशलेम की सड़कों में करते थे; क्योंकि तब हम पेट भर रोटी खाते, और भले-चंगे रहते, और किसी विपत्ति में न पड़ते थे: 18 परन्तु जब से हमने आकाश के ढाँचे के लिए धूप जलाना और उसके लिए तपावन देना छोड़ दिया, तब से हमें सब वस्तुओं की घटी है, और हम तलवार और अकाल के द्वारा मिटते जा रहे हैं।
19 और जब हम आकाश के ढाँचे के लिए धूप जलाती और उसके लिए तपावन देती थीं, तब क्या हमने अपने पतियों के बिना उसकी उपासना के लिए उसकी टिकियाएँ बनाईं और उसके लिए तपावन दिए?
20 तब यिर्मयाह ने उन सब लोगों से, अर्थात् पुरुषों और स्त्रियों से, उन सब लोगों से जिन्होंने उसको यह उत्तर दिया था, कहा—
21 जो धूप तुम और तुम्हारे पुरखा, तुम्हारे राजा और हाकिम, और देश के सब लोग यहूदा के नगरों और यरूशलेम की सड़कों में जलाते थे, क्या उसको यहोवा ने स्मरण नहीं किया?
22 और क्या वह उसके मन में नहीं आया? वरन् तुम्हारे बुरे कामों की दुष्टता और तुम्हारे किए हुए घृणित कामों के कारण यहोवा तुम को और अधिक न सह सका; इसलिए तुम्हारा देश उजाड़ कर दिया गया, और विस्मय और शाप का कारण बन गया है, जैसा आज के दिन प्रकट है: 23 क्योंकि तुम धूप जलाकर यहोवा के विरुद्ध पाप करते रहे, और यहोवा की बात नहीं मानी, और न उसकी व्यवस्था और विधियों और चितौनियों पर चले, इसी कारण यह विपत्ति तुम पर आ पड़ी है, जैसा आज के दिन प्रकट है।
24 फिर यिर्मयाह ने उन सब लोगों से और उन सब स्त्रियों से कहा—हे मिस्र देश में रहनेवाले सब यहूदियो, यहोवा का वचन सुनो—
25 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, कि तुम ने और तुम्हारी पत्नियों ने अपने मुँह से कहा और अपने हाथों से पूरा भी किया, कि जो मन्नतें हमने आकाश के ढाँचे के लिए धूप जलाने और तपावन देने की मानी हैं, उन्हें हम निश्चय पूरी करेंगी: तुम अपनी मन्नतें निश्चय दृढ़ करोगी, और अपनी मन्नतें निश्चय पूरी करोगी।
26 इसलिए हे मिस्र देश में रहनेवाले सब यहूदियो, यहोवा का वचन सुनो, देखो, यहोवा की यह वाणी है, मैंने अपने बड़े नाम की शपथ खाई है, कि सारे मिस्र देश में कोई यहूदी मनुष्य मेरा नाम लेकर फिर कभी यह न कहने पाएगा, कि “प्रभु यहोवा के जीवन की सौगन्ध।”
27 देखो, मैं उन पर भलाई के लिए नहीं, हानि ही के लिए चौकसी करूँगा; और मिस्र देश में रहनेवाले सब यहूदी पुरुष तलवार और अकाल के द्वारा मिटते जाएँगे, जब तक उनका अन्त न हो जाए: 28 और जो तलवार से बचकर मिस्र देश से यहूदा देश में लौटेंगे, वे थोड़े ही होंगे; और यहूदा के जो बचे हुए लोग मिस्र देश में रहने के लिए आए हैं, वे सब जान लेंगे कि किसका वचन पूरा होता है, मेरा या उनका।
29 और यहोवा की यह वाणी है, कि तुम्हारे लिए इस बात का यह चिह्न होगा कि मैं इसी स्थान में तुम्हें दण्ड दूँगा, जिससे तुम जान लो कि मेरे वचन तुम्हारी हानि के लिए निश्चय पूरे होंगे—
30 यहोवा यों कहता है, देखो, जैसे मैंने यहूदा के राजा सिदकिय्याह को उसके शत्रु और उसके प्राण के खोजी बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दिया, वैसे ही मैं मिस्र के राजा फ़िरौन होप्रा को भी उसके शत्रुओं के और उसके प्राण के खोजियों के हाथ में कर दूँगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 45
1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में, जब नेरिय्याह का पुत्र बारूक यिर्मयाह के मुख से ये वचन पुस्तक में लिख रहा था, तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने उससे यह वचन कहा—
2 हे बारूक, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा तेरे विषय में यों कहता है: 3 तू ने कहा, हाय मुझ पर! क्योंकि यहोवा ने मेरे दुःख पर शोक और बढ़ा दिया है; मैं कराहते-कराहते थक गया हूँ, और मुझे कुछ विश्राम नहीं मिलता।
4 तू उससे यों कह, यहोवा यों कहता है, देख, जो मैंने बनाया उसे मैं ढा देता हूँ, और जो मैंने रोपा उसे उखाड़ देता हूँ, अर्थात् यह सारा देश; 5 और क्या तू अपने लिए बड़ी-बड़ी बातें खोज रहा है? उन्हें मत खोज; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, देख, मैं सारे प्राणियों पर विपत्ति डालने पर हूँ; परन्तु जहाँ कहीं तू जाएगा वहाँ मैं तेरा प्राण बचाकर तुझे लूट के समान दूँगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 46
1 यहोवा का वह वचन जो जाति-जाति के विषय में यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुँचा: 2 मिस्र के विषय में, अर्थात् मिस्र के राजा फ़िरौन नको की उस सेना के विषय में जो फरात महानद के तट पर कर्कमीश में थी, और जिसे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष में मार लिया: 3 ढालें और फरियाँ तैयार करो, और लड़ने को आगे बढ़ो; 4 घोड़ों को जोतो, और हे सवारो, चढ़ो; टोप पहनकर खड़े हो जाओ, भालों को चमकाओ, झिलम पहन लो।
5 मैं क्यों उनको टूटा हुआ और पीछे हटा हुआ देखता हूँ! उनके शूरवीर भी मारे गए हैं, और वे उतावली से भाग गए और पीछे फिरकर नहीं देखते; यहोवा की यह वाणी है, चारों ओर भय ही भय है; 6 न वेग चलनेवाला भागने पाए, न शूरवीर बचने पाए: उत्तर दिशा में फरात महानद के तट पर वे ठोकर खाकर गिरेंगे।
7 यह कौन है जो नील नदी के समान चढ़ा आता है, जिसका जल महानदों के समान उमड़ता है!
8 मिस्र नील नदी के समान चढ़ा आता है, और उसका जल महानदों के समान उमड़ता है; क्योंकि वह कहता है, मैं चढ़कर पृथ्वी को ढाँप लूँगा, मैं नगर को उसके निवासियों समेत नाश कर दूँगा।
9 हे घोड़ो, चढ़ जाओ; हे रथो, उछलो; हे शूरवीरो, निकल आओ; हे ढाल पकड़नेवाले कूशियो और पूतियो, और हे धनुष पकड़कर चढ़ानेवाले लूदियो।
10 परन्तु यह दिन प्रभु सेनाओं के यहोवा का दिन है, पलटा लेने का दिन, कि वह अपने द्रोहियों से पलटा ले; और तलवार खाकर तृप्त होगी, और उनका लहू पीकर छक जाएगी; क्योंकि उत्तर के देश में फरात महानद के तट पर प्रभु सेनाओं के यहोवा का एक यज्ञ है।
11 हे मिस्र की कुमारी कन्या! गिलाद को जाकर बलसान ले; व्यर्थ ही तू बहुत सी औषधियाँ बढ़ाती है; तेरे लिए चंगाई नहीं है।
12 जाति-जाति ने तेरी अपकीर्ति सुनी है, और पृथ्वी तेरी चिल्लाहट से भर गई है; क्योंकि शूरवीर शूरवीर से ठोकर खाकर गिरा, और दोनों एक संग गिर पड़े हैं।
13 यहोवा ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के आने और मिस्र देश को मार लेने के विषय में यह वचन कहा: 14 मिस्र में बताओ, और मिग्दोल में सुनाओ, नोप में सुनाओ, और तहपन्हेस में कहो—खड़ा हो और अपने को तैयार कर, क्योंकि तलवार तेरे चारों ओर के लोगों को खा गई है।
15 तेरे शूरवीर कैसे तितर-बितर हो गए हैं! वे खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा ने उन्हें धकेल दिया है।
16 उसने बहुतों को ठोकर खिलाई; हाँ, वे एक दूसरे पर गिर पड़े: और उन्होंने कहा, “उठो, चलो, हम उस नाश करनेवाली तलवार के सामने से अपने लोगों के पास और अपनी जन्मभूमि को लौट जाएँ।
17 वहाँ वे पुकार उठे, मिस्र का राजा फ़िरौन संकट का राजा है; उसने ठहराया हुआ समय बीत जाने दिया।
18 वह राजा, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है, यों कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध; जैसे ताबोर पहाड़ों में और कर्मेल समुद्र के तट पर है, वैसे ही वह आएगा।
19 हे मिस्र की रहनेवाली, बँधुआई में जाने का सामान तैयार कर; क्योंकि नोप उजाड़ हो जाएगा, हाँ, वह ऐसा उजड़ेगा कि उसमें कोई न रहेगा।
20 मिस्र एक सुन्दर बछिया है; परन्तु उत्तर दिशा से संकट आता है, वह आ ही रहा है।
21 उसके बीच में जो भाड़े के सिपाही हैं, वे भी पाले-पोसे बछड़ों के समान हैं; क्योंकि वे भी पीठ फेरकर एक संग भागेंगे, वे खड़े न रहेंगे; क्योंकि उनकी विपत्ति का दिन, उनके दण्ड पाने का समय, उन पर आ पहुँचा है।
22 उसका शब्द सर्प के समान होगा; क्योंकि वे बल के साथ आएँगे, और लकड़हारों के समान कुल्हाड़ियाँ लिए हुए उसके विरुद्ध आएँगे।
23 यहोवा की यह वाणी है, वे तेरे वन को काट डालेंगे, यहाँ तक कि उसका पता न लगे; क्योंकि वे टिड्डियों से भी अधिक हैं, और अनगिनित हैं।
24 मिस्र की पुत्री लज्जित हुई है, वह उत्तर दिशा के लोगों के हाथ में कर दी गई है।
25 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा कहता है, देखो, मैं नो नगर की भीड़ को, और फ़िरौन को भी, और मिस्र को, और उसके देवताओं और राजाओं को, अर्थात् फ़िरौन को और उन सब को जो उस पर भरोसा रखते हैं, दण्ड दूँगा; 26 और मैं उनको उनके प्राण के खोजियों के हाथ में, और बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में, और उसके कर्मचारियों के हाथ में कर दूँगा: परन्तु उसके बाद वह प्राचीनकाल के समान फिर बसाया जाएगा, यहोवा की यही वाणी है।
27 परन्तु हे मेरे दास याकूब, तू मत डर, और हे इस्राएल, तेरा मन न टूटे; क्योंकि देख, मैं तुझे दूर देश से, और तेरे वंश को उनकी बँधुआई के देश से छुड़ा लाऊँगा: हाँ, याकूब लौटकर चैन से रहेगा, और निश्चिन्त रहेगा, और कोई उसे डराने न पाएगा।
28 हे मेरे दास याकूब, यहोवा की यह वाणी है, तू मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूँ; क्योंकि जिन सब जातियों में मैंने तुझे बरबस निकाल दिया है, उन सब का तो मैं अन्त कर डालूँगा; परन्तु तेरा अन्त न करूँगा: तौभी मैं तेरी ताड़ना संयम से करूँगा, और तुझे सर्वथा नाश न करूँगा।
अनुवाद: यिर्मयाह 47
1 फ़िरौन के अज्जा को मार लेने से पहले यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पलिश्तियों के विषय में यहोवा का यह वचन पहुँचा: 2 यहोवा यों कहता है—देखो, उत्तर दिशा से जल चढ़ा आता है, और वह उमड़नेवाली धारा बन जाएगा, और देश को और जो कुछ उसमें है, नगर को और उसके निवासियों को डुबा लेगा; और सब मनुष्य चिल्लाएँगे, और देश के सब रहनेवाले हाय-हाय करेंगे।
3 उसके बलवन्त घोड़ों की टापों की धमक के कारण, उसके रथों की खलबली के कारण, उसके पहियों की गड़गड़ाहट के कारण, पिता अपने हाथों की निर्बलता के मारे अपने बच्चों की ओर मुँह फेरकर भी न देखेंगे; 4 उस दिन के कारण जो आ पहुँचा है, कि सब पलिश्तियों को नाश करे, और सोर और सीदोन के सब बचे हुए सहायकों को मिटा डाले; क्योंकि यहोवा पलिश्तियों को, कप्तोर नाम द्वीप के बचे हुओं को, उजाड़ता है।
5 अज्जा पर गंजापन आ गया है, अश्कलोन नाश हुआ है; हे उनकी तराई के बचे हुए लोगो!
तू कब तक अपने को चीरता रहेगा?
6 हाय! यहोवा की तलवार! तू कब तक न थमेगी? अपनी म्यान में घुस जा, थम जा और चुपकी रह।
7 तू कैसे थम सकती है? क्योंकि यहोवा ने उसको अश्कलोन और समुद्र-तट के विरुद्ध आज्ञा दी है; वहीं उसने उसे ठहराया है।
अनुवाद: यिर्मयाह 48
1 मोआब के विषय में: इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है—नबो पर हाय! क्योंकि वह उजाड़ हो गया; किर्यातैम लज्जित हुआ और ले लिया गया; मिस्गाब लज्जित और विस्मित हुआ है।
2 हेशबोन के कारण मोआब की बड़ाई फिर न होगी; उन्होंने उसकी हानि की युक्ति की है—“आओ, हम उसको ऐसा नाश करें कि वह राज्य न रह जाए।” हे मदमेन, तू भी मिटाया जाएगा, तलवार तेरे पीछे पड़ेगी।
3 होरोनैम से चिल्लाहट का शब्द! उजाड़ और बड़ा विनाश!
4 मोआब संकट में पड़ा है; उसके नन्हे बच्चों की चिल्लाहट सुनाई पड़ी है।
5 क्योंकि लूहीत की चढ़ाई पर लोग रोते-रोते चढ़ेंगे; और होरोनैम की उतार पर शत्रु संकट की चिल्लाहट सुनेंगे: 6 भागो, अपने प्राण बचाओ; और तुम जंगल के अधमूए पेड़ के समान हो जाओगे, 7 इसलिए, क्योंकि तू ने अपने कामों और अपने धन पर भरोसा रखा था, तू भी पकड़ा जाएगा: और कमोश अपने याजकों और हाकिमों समेत बँधुआई में जाएगा।
8 और नाश करनेवाला हर एक नगर पर चढ़ाई करेगा, और कोई नगर न बचेगा; तराई भी नष्ट होगी, और समथर देश नाश किया जाएगा, जैसा यहोवा ने कहा है।
9 मोआब को पंख दो, क्योंकि वह उड़कर भाग जाएगी, और उसके नगर ऐसे उजाड़ हो जाएँगे कि उनमें कोई न बसेगा।
10 शापित है वह जो यहोवा का काम छल से करता है, और शापित है वह जो अपनी तलवार लहू बहाने से रोक रखता है।
11 मोआब बचपन ही से सुख से रहा है, और उसके नीचे तलछट जमी रही है, और वह एक बरतन से दूसरे बरतन में उण्डेला नहीं गया, और न बँधुआई में गया: इसलिए उसका स्वाद उसमें बना रहा, और उसकी गन्ध नहीं बदली।
12 इस कारण यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते हैं कि मैं उसके पास उण्डेलनेवालों को भेजूँगा, जो उसे निकाल देंगे; और वे उसके बरतनों को खाली करेंगे, और उसकी कुप्पियों को तितर-बितर कर देंगे:
13 और जैसे इस्राएल का घराना बेतेल से, जिस पर वह भरोसा रखता था, लज्जित हुआ, वैसे ही मोआब कमोश से लज्जित होगा।
14 तुम कैसे कहते हो, “हम शूरवीर और युद्ध के लिए बलवन्त पुरुष हैं:”
15 मोआब उजाड़ हो गया, और उसके नगरों से लोग लोप हो गए, और उसके चुने हुए जवान घात होने को उतर गए हैं, वह राजा कहता है जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है।
16 मोआब का विनाश निकट आ गया है, और उसकी विपत्ति बड़ी फुर्ती से चली आती है।
हे उसके आस-पास के सब रहनेवालो, उसके लिए विलाप करो, और हे उसकी कीर्ति के सब जाननेवालो, कहो—“हाय! वह दृढ़ सोंटा, वह सुन्दर छड़ी कैसे टूट गई!”
17 हे दीबोन की रहनेवाली पुत्री, अपनी महिमा से उतरकर प्यासी बैठी रह!
18 क्योंकि मोआब का नाश करनेवाला तेरे विरुद्ध चढ़ आया है, वह तेरे दृढ़ गढ़ों का नाश करनेवाला है।
19 हे अरोएर की रहनेवाली, मार्ग में खड़ी होकर ताकती रह। भागनेवाले से और बच निकलनेवाली से पूछ, “कह, क्या हुआ है?”
20 मोआब लज्जित हुआ, क्योंकि वह टूट गया। हाय-हाय करो और चिल्लाओ, और अर्नोन में यह बताओ कि मोआब उजाड़ हो गया है।
21 समथर देश पर भी न्याय आ पड़ेगा, होलोन पर, यहसा पर, और मेपात पर, 22 और दीबोन पर, नबो पर, और बेतदिबलातैम पर, 23 और किर्यातैम पर, बेतगामूल पर, और बेतमोन पर, 24 और करिय्योत पर, बोस्रा पर, और मोआब देश के क्या दूर क्या निकट के सब नगरों पर।
25 मोआब का सींग कट गया, और उसका बल टूट गया है, यहोवा की यही वाणी है।
26 उसको मतवाला करो, क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध बड़ाई मारी है; और मोआब अपनी छाँट में लोटेगा, और वह भी ठट्ठों में उड़ाया जाएगा; 27 क्योंकि क्या इस्राएल तेरे लिए ठट्ठे का कारण नहीं हुआ? क्या वह चोरों के बीच पकड़ा गया था?
क्योंकि जब से तू ने उसकी चर्चा की है, तब से तू उत्तेजित होता रहा है।
28 हे मोआब के रहनेवालो, नगरों को छोड़कर चट्टान में जा बसो: और वे उस कबूतरी के समान होंगे जो दरार के मुँह के उस पार की राहों में घोंसला बनाती है।
29 हमने मोआब के घमण्ड के विषय में सुना है; उसका अहंकार अति बड़ा है, और उसका गर्व और उसके मन की ऊँचाई भी।
30 यहोवा की यह वाणी है, मैं उसकी ढिठाई जानता हूँ, और उसकी बड़ी-बड़ी बातें स्थिर नहीं हैं, वे वैसा न कर सकेंगे। 31 इस कारण मैं मोआब के लिए हाय-हाय करूँगा, और सारे मोआब के लिए चिल्लाऊँगा; ठीकरों के नगर के लोगों के लिए मैं कराहता रहूँगा।
32 हे सिबमा की दाखलता, मैं याजेर के रोने से बढ़कर तेरे लिए रोऊँगा: तेरी डालियाँ समुद्र के पार तक फैल गईं, याजेर के समुद्र तक पहुँचीं: तेरे धूपकाल के फलों पर और तेरी तोड़ी हुई दाखों पर नाश करनेवाला आ पड़ा है।
33 और फलदायक खेत से, मोआब देश से, आनन्द और मगनता उठा ली जाएगी; और मैं दाखरस के कुण्डों में दाखमधु बन्द कर दूँगा: वह जयजयकार के साथ दाख न रौंदेगा; जयजयकार, जयजयकार न होगा।
34 हेशबोन की चिल्लाहट सुनकर लोग एलाले और यहस तक, और सोअर से होरोनैम तक अपना शब्द ऊँचा करेंगे; मोआब तीन वर्ष की बछिया है; निश्चय निम्रीम का जल भी सूख जाएगा।
35 और यहोवा की यह वाणी है, मैं मोआब में से उसको मिटा दूँगा जो ऊँचे स्थान पर चढ़ावा चढ़ाता और अपने देवताओं के लिए धूप जलाता है।
36 इस कारण मेरा मन मोआब के लिए बाँसुरी के समान शब्द करेगा, और ठीकरों के नगर के लोगों के लिए मेरा मन बाँसुरी के समान शब्द करेगा; क्योंकि जो धन उसने कमाया था वह नष्ट हो गया है।
37 क्योंकि हर एक का सिर मुँड़ाया जाएगा, और हर एक की दाढ़ी मूँड़ी जाएगी, और सब के हाथों पर चीरे और कमर में टाट होगा।
38 मोआब की सब छतों पर और उसकी सब सड़कों में सर्वत्र विलाप होगा; क्योंकि मैंने मोआब को ऐसे बरतन के समान तोड़ डाला है जिससे कोई प्रसन्न नहीं होता, यहोवा की यही वाणी है।
39 मोआब कैसे टूट गया! वे हाय-हाय करेंगे; उसने कैसे पीठ फेरी! वह लज्जित है: हाँ, मोआब अपने चारों ओर के सब लोगों के लिए ठट्ठे और भय का कारण हो गया है।
40 क्योंकि यहोवा यों कहता है—देखो, वह उकाब के समान उड़ेगा, और मोआब के ऊपर अपने पंख फैलाएगा: 41 नगर ले लिए गए, गढ़ पकड़े गए, और उस दिन मोआब के पुरुषों का मन जच्चा स्त्री का सा हो जाएगा।
42 और मोआब ऐसा टूटेगा कि वह जाति न रह जाएगा, क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध अपने को ऊँचा किया है।
43 हे मोआब के रहनेवाले, यहोवा की यह वाणी है, कि भय और गड़हा और फन्दा तुझ पर होंगे:
44 जो भय से भागे वह गड़हे में गिरेगा, और जो गड़हे में से निकले वह फन्दे में फँसेगा; क्योंकि मैं उस पर, अर्थात् मोआब पर, उनके दण्ड का वर्ष ले आऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।
45 जो उपद्रव से भागेंगे, वे हेशबोन की छाया में खड़े होंगे: परन्तु हेशबोन से आग और सीहोन के बीच से ज्वाला निकलेगी; और वह मोआब के कोने को और हुल्लड़ मचानेवालों के छोरों को भस्म कर देगी।
46 हे मोआब, तुझ पर हाय! कमोश की प्रजा नाश हो गई! क्योंकि तेरे बेटे बँधुआई में और तेरी बेटियाँ देश-निकाले में ले जाई गई हैं।
47 तौभी यहोवा की यह वाणी है, कि अन्त के दिनों में मैं मोआब को बँधुआई से लौटा ले आऊँगा। मोआब के दण्ड का वर्णन यहीं तक हुआ।
अनुवाद: यिर्मयाह 49
1 अम्मोनियों के विषय में यहोवा यों कहता है, — क्या इस्राएल के पुत्र नहीं हैं? क्या उसका कोई वारिस नहीं? फिर उनका राजा गाद का अधिकारी क्यों हुआ, और उसकी प्रजा उसके नगरों में क्यों बसी है?
2 इस कारण, देखो, यहोवा की यह वाणी है, वे दिन आते हैं कि मैं अम्मोनियों के रब्बा नगर में युद्ध की ललकार सुनवाऊँगा; और वह उजड़कर खण्डहर का ढेर हो जाएगा, और उसकी बस्तियाँ आग से जला दी जाएँगी; तब जिन्होंने इस्राएल का भाग ले लिया था, उनके भाग का अधिकारी इस्राएल होगा, यहोवा की यही वाणी है।
3 हे हेशबोन, हाय-हाय कर, क्योंकि ऐ उजाड़ दिया गया है; हे रब्बा की बेटियो, चिल्लाओ।
टाट कमर में कसो, विलाप करो, बाड़ों के बीच इधर-उधर दौड़ो; क्योंकि उनका राजा बन्धुआई में चला गया है, और उसके याजक और हाकिम भी उसके संग।
4 तू अपनी गहरी तराइयों पर क्यों घमण्ड करती है? हे भटकनेवाली बेटी, तेरी तराई तो बह गई! तू जो अपने छिपे स्थानों पर भरोसा रखती, और कहती थी, मेरे पास कौन आ सकता है?
5 देखो, प्रभु सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरे चारों ओर से तुझ पर भय डालूँगा; और तुम में से हर एक अपने आगे की ओर हाँक दिया जाएगा, और तितर-बितर हुओं को इकट्ठा करनेवाला कोई न रहेगा।
6 परन्तु उसके बाद मैं अम्मोनियों को बन्धुआई से लौटा लाऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।
7 एदोम के विषय में सेनाओं का यहोवा यों कहता है, — क्या तेमान में अब कुछ बुद्धि नहीं रही? क्या समझदारों की युक्ति नष्ट हो गई? उनकी बुद्धि उमड़कर बह गई है!
8 हे ददान के निवासियो, भागो, तुम जो लौटकर गहरे स्थानों में बसे हो; क्योंकि मैं एसाव पर उसके दण्ड के समय उसका विनाश ले आऊँगा।
9 यदि दाख तोड़नेवाले तेरे पास आते, तो क्या वे कुछ दाख न छोड़ जाते? यदि रात को चोर आते, तो क्या वे उतना ही नाश न करते जितना उनके लिए पर्याप्त होता?
10 परन्तु मैं एसाव को उघाड़ूँगा, मैं उसके छिपे स्थानों को प्रगट करूँगा, यहाँ तक कि वह छिप न सकेगा: उसका वंश लूट लिया जाएगा, और उसके भाई और उसके पड़ोसी भी; और वह न रहेगा।
11 अपने अनाथ बालकों को छोड़ दे, मैं उनका पालन करूँगा; और तेरी विधवाएँ मुझ पर भरोसा रखें।
12 क्योंकि यहोवा यों कहता है, — देखो, जिनका न्याय यह न था कि वे कटोरे में से पीएँ, वे तो निश्चय पीएँगे; फिर क्या तू बचा रहेगा? तू न बचेगा, तुझे अवश्य ही उसमें से पीना पड़ेगा।
13 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैंने अपनी ही शपथ खाई है कि बोस्रा उजाड़, निन्दा, निर्जन स्थान और शाप का कारण हो जाएगा; और उसके सब नगर सदा के लिए उजाड़ हो जाएँगे।
14 हमने यहोवा की ओर से समाचार सुना है, और जाति-जाति में एक दूत भेजा गया है, — “इकट्ठे होकर उस पर चढ़ आओ, और युद्ध के लिए उठो।”
15 क्योंकि देख, मैंने तुझे जातियों में छोटा, और मनुष्यों में तुच्छ कर दिया है: 16 तेरे भयानक रूप ने, अर्थात् तेरे मन के अभिमान ने तुझे धोखा दिया है; हे चट्टानों की दरारों में बसनेवाले, हे पहाड़ों की चोटियों पर अधिकार रखनेवाले: चाहे तू उकाब के समान अपना घोंसला ऊँचे पर बनाए, तौभी मैं वहाँ से तुझे उतार लाऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।
17 और एदोम उजाड़ हो जाएगा; जो कोई उसके पास से होकर जाएगा वह चकित होगा, और उसकी सब मारों के कारण ताली बजाएगा।
18 जैसे सदोम और अमोरा और उनके आसपास के नगरों के उलट जाने पर हुआ था, वैसे ही यहोवा की यह वाणी है, वहाँ न कोई मनुष्य रहेगा, और न कोई आदमी उसमें टिकेगा।
19 देखो, वह यरदन के चढ़ाव से निकले हुए सिंह के समान दृढ़ निवास-स्थान पर चढ़ेगा: उसे विश्राम देने के बाद मैं उसे उसके पास से भगा दूँगा; और वह चुना हुआ कौन है जिसे मैं उस पर ठहराऊँ? क्योंकि मेरे तुल्य कौन है? और कौन मेरे विरुद्ध मुकद्दमा उठाएगा? और वह चरवाहा कौन है जो मेरे सामने खड़ा रह सकेगा?
20 इस कारण यहोवा की वह युक्ति सुनो जो उसने एदोम के विरुद्ध की है, और उसकी वे कल्पनाएँ जो उसने तेमान के निवासियों के विरुद्ध की हैं; निश्चय झुण्ड के छोटे से छोटे उन्हें घसीट ले जाएँगे, निश्चय उनके निवास-स्थान उनके कारण उजाड़ हो जाएँगे।
21 उनके गिरने के शब्द से पृथ्वी काँप उठेगी, उनकी चिल्लाहट का शब्द लाल समुद्र तक सुनाई पड़ेगा।
22 देखो, वह उकाब के समान चढ़कर उड़ेगा, और बोस्रा पर अपने पंख फैलाएगा; और उस दिन एदोम के शूरवीरों का मन जच्चा स्त्री के मन के समान हो जाएगा।
23 दमिश्क के विषय में: हमात और अर्पाद लज्जित हुए हैं; क्योंकि उन्होंने बुरा समाचार सुना है, वे गल गए हैं, उस उथल-पुथल करनेवाले समुद्र के समान जो ठहर नहीं सकता।
24 दमिश्क निर्बल हो गया है, वह भागने को मुड़ता है, भय ने उसे पकड़ लिया है, जच्चा स्त्री की सी पीड़ा और वेदना ने उसे जकड़ लिया है।
25 हाय, वह प्रशंसा का नगर, — मेरे आनन्द का नगर — क्योंकर नहीं छोड़ा गया?
26 तौभी उसके जवान उसके चौकों में गिरेंगे, और सब योद्धा उस दिन नाश किए जाएँगे, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
27 क्योंकि मैं दमिश्क की शहरपनाह में आग लगाऊँगा, और वह बेन्हदद के राजभवनों को भस्म कर देगी।
28 केदार और हासोर के राज्यों के विषय में, जिन्हें बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने मार लिया था: यहोवा यों कहता है, — उठो, केदार पर चढ़ाई करो, और पूर्वियों का नाश करो।
29 वे उनके डेरे और भेड़-बकरियाँ ले जाएँगे, और उनके तम्बू और सब बरतन; वे उनके ऊँट भी अपने लिए ले लेंगे, और वे उनसे पुकारकर कहेंगे, “चारों ओर भय ही भय है।”
30 भागो, दूर चले जाओ, (यद्यपि हासोर के निवासियों को गहरे स्थानों में बसाया गया है, यहोवा की यही वाणी है;) क्योंकि बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने तुम्हारे विरुद्ध युक्ति की है, और तुम्हारे विरुद्ध एक कल्पना ठानी है।
31 उठो, उस निश्चिन्त जाति पर चढ़ाई करो जो निडर रहती है, यहोवा की यही वाणी है; उसके न फाटक हैं न बेंड़े, वह अकेली बसी हुई है।
32 और उनके ऊँट लूट में, और उनके पशुओं की बहुतायत अहेर में चली जाएगी; और मैं उन्हें हर एक दिशा की वायु में, अर्थात् दूर से दूर कोनों तक तितर-बितर करूँगा; और मैं चारों ओर से उन पर विनाश ले आऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।
33 और हासोर गीदड़ों का वासस्थान और सदा के लिए उजाड़ हो जाएगा; वहाँ न कोई मनुष्य रहेगा, और न कोई आदमी उसमें टिकेगा।
34 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के आरम्भ में यहोवा का यह वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास एलाम के विषय में पहुँचा: 35 सेनाओं का यहोवा यों कहता है, — देखो, मैं एलाम के धनुष को, जो उनके बल का मुख्य आधार है, तोड़ डालूँगा; 36 और मैं आकाश के चारों छोरों से एलाम पर चारों वायु बहाऊँगा; और मैं उन्हें इन चारों वायुओं की ओर तितर-बितर करूँगा, और ऐसी कोई जाति न रहेगी जिसमें एलाम से भागे हुए कुछ लोग न पहुँचें।
37 क्योंकि मैं एलाम को उनके शत्रुओं के सामने, और उनके प्राण के खोजियों के सामने घबरा दूँगा; और मैं उन पर अपने क्रोध की जलजलाहट की विपत्ति डालूँगा, यहोवा की यही वाणी है; और मैं उनके पीछे तलवार भेजूँगा, जब तक मैं उनका अन्त न कर डालूँ; 38 और मैं एलाम में अपना सिंहासन रखूँगा, और वहाँ से राजा और हाकिमों को नाश करूँगा, यहोवा की यही वाणी है।
39 परन्तु अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि मैं एलाम को बन्धुआई से लौटा लाऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।
अनुवाद: यिर्मयाह 50
1 जो वचन यहोवा ने बाबुल के विषय में, अर्थात् कसदियों के देश के विषय में, यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा: 2 जाति-जाति में बताओ, प्रचार करो, झण्डा भी खड़ा करो, प्रचार करो, मत छिपाओ; कहो, “बाबुल ले लिया गया, बेल लज्जित हुआ, मरोदक टूट गया, उसकी प्रतिमाएँ लज्जित हुईं, उसकी मूरतें टूट गईं।”
3 क्योंकि उत्तर दिशा से एक जाति उस पर चढ़ाई करेगी, जो उसके देश को उजाड़ कर देगी, यहाँ तक कि उसमें क्या मनुष्य क्या पशु कोई न रहेगा; वे भाग गए हैं, वे चले गए हैं।
4 यहोवा की यह वाणी है, उन दिनों में और उस समय इस्राएली और यहूदी एक संग आएँगे; वे रोते हुए चलेंगे और आएँगे, और अपने परमेश्वर यहोवा को ढूँढ़ेंगे।
5 वे सिय्योन का मार्ग पूछेंगे, इधर ही उनके मुख होंगे, — “आओ, हम सदा की वाचा के द्वारा, जो कभी भुलाई न जाएगी, यहोवा से मिल जाएँ।”
6 मेरी प्रजा खोई हुई भेड़ हो गई है; उनके चरवाहों ने उन्हें भटका दिया है; वे पहाड़ों पर भटकती फिरीं, पहाड़ से पहाड़ी पर गईं, वे अपने बैठने का स्थान भूल गईं।
7 जितने उन्हें पाते थे सब उन्हें खा जाते थे, और उनके द्रोहियों ने कहा, “हम कुछ पाप नहीं करते, क्योंकि उन्होंने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है, जो धर्म का निवास-स्थान है, और उनके पूर्वजों की आशा है, अर्थात् यहोवा।”
8 बाबुल के बीच में से भागो, और कसदियों के देश से निकल जाओ, और झुण्ड के आगे-आगे चलनेवाले बकरों के समान हो जाओ।
9 क्योंकि देखो, मैं उत्तर के देश से बड़ी-बड़ी जातियों की एक मण्डली को उभारकर बाबुल पर चढ़ा लाऊँगा, और वे उसके विरुद्ध पाँति बाँधेंगे; वहीं से वह ले ली जाएगी; उनके तीर किसी निपुण वीर के तीरों के समान होंगे, वे व्यर्थ न लौटेंगे।
10 और कसदियों का देश ऐसा लुटेगा कि सब लूटनेवाले तृप्त हो जाएँगे, यहोवा की यही वाणी है,
11 निश्चय तुम आनन्दित हुए और फूले न समाए, जब तुमने मेरे निज भाग को लूटा; तुम भली-भाँति खिलाई हुई कलोर के समान मोटे हो गए, और बलवन्त घोड़ों के समान हिनहिनाए।
12 तुम्हारी माता अत्यन्त लज्जित होगी, तुम्हारी जननी का मुँह काला होगा; देखो, वह जातियों में सबसे पिछली होगी, जंगल, उजाड़ और निर्जन स्थान!
13 यहोवा के क्रोध के कारण वह बसी न रहेगी, वरन् पूरी रीति से उजाड़ हो जाएगी; जो कोई बाबुल के पास से होकर जाएगा वह चकित होगा, और उसकी सब मारों के कारण ताली बजाएगा।
14 बाबुल के चारों ओर उसके विरुद्ध पाँति बाँधो; हे सब धनुर्धारियो, उस पर तीर चलाओ, तीरों को मत बचा रखो, क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।
15 चारों ओर से उसके विरुद्ध ललकारो; उसने हाथ दे दिया है, उसकी नेवें गिर गई हैं, उसकी शहरपनाह ढा दी गई है, क्योंकि यह यहोवा का पलटा है; उससे पलटा लो; जैसा उसने किया है, वैसा ही तुम भी उससे करो।
16 बाबुल में से बोनेवाले को, और कटनी के समय हँसिया चलानेवाले को भी नाश करो: नाश करनेवाली तलवार के सामने से हर एक अपने लोगों की ओर फिरेगा, हर एक अपने देश को भाग जाएगा।
17 इस्राएल तितर-बितर भेड़ों का झुण्ड रहा है, सिंहों ने उसे खदेड़ दिया है; पहले उसे खा जानेवाला अश्शूर का राजा था, और इस पिछले ने, अर्थात् बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने, उसकी हड्डियों को तोड़ दिया है।
18 इस कारण इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, — देखो, जैसे मैंने अश्शूर के राजा को दण्ड दिया था, वैसे ही अब देश समेत बाबुल के राजा को दण्ड दूँगा: 19 और मैं इस्राएल को उसकी चराइयों में लौटा लाऊँगा, और वह कर्मेल और बाशान में, और एप्रैम के पहाड़ और गिलाद में चरेगा; और उसका प्राण तृप्त होगा।
20 यहोवा की यह वाणी है, उन दिनों में और उस समय इस्राएल का अधर्म ढूँढ़ा जाएगा, परन्तु वह न रहेगा; और यहूदा के पाप ढूँढ़े जाएँगे, परन्तु न मिलेंगे: क्योंकि जिन्हें मैं बचा रखूँगा उन्हें मैं क्षमा कर दूँगा।
21 चिढ़ानेवालों के देश पर चढ़ाई करो, और दण्ड के योग्य निवासियों के विरुद्ध भी; उनके पीछे-पीछे मार डालो और नाश करो, यहोवा की यही वाणी है; और जो कुछ मैंने तुझे आज्ञा दी है, वह सब कर।
22 देश में युद्ध का शब्द और बड़ा विनाश!
23 सारी पृथ्वी का हथौड़ा अब कैसा काटा गया और चकनाचूर हो गया है!
बाबुल जातियों के बीच कैसा उजाड़ हो गया है!
24 हे बाबुल, मैंने तेरे लिए फन्दा लगाया, इसलिए तू अनजाने में ही पकड़ा गया: तू पाया गया, और इसी कारण पकड़ा गया, क्योंकि तूने यहोवा से झगड़ा किया।
25 यहोवा ने अपना भण्डार खोलकर अपने क्रोध के हथियार निकाले हैं; क्योंकि कसदियों के देश में प्रभु सेनाओं के यहोवा को एक काम करना है।
26 छोर से उस पर चढ़ आओ, उसके भण्डारों को खोलो, उसे ढेरों के समान रौंद डालो, उसका पूरी रीति से सत्यानाश करो, कि उसका कुछ भी न बचे।
27 उसके सब बैलों को मार डालो, वे घात होने के स्थान में उतर जाएँ; उन पर हाय! क्योंकि उनका दिन आ पहुँचा है, उनके दण्ड का समय।
28 बाबुल के देश से भागनेवालों और बच निकलनेवालों का शब्द! कि वे सिय्योन में हमारे परमेश्वर यहोवा के पलटा लेने का, अर्थात् उसके मन्दिर के पलटे का समाचार दें।
29 बाबुल के विरुद्ध शूरवीरों को, अर्थात् सब धनुर्धारियों को बुलाओ; उसे चारों ओर से घेर लो, कि कोई बचकर न निकले; उसके काम के अनुसार उसे बदला दो; जैसा उसने किया है, ठीक वैसा ही तुम भी उससे करो; क्योंकि उसने यहोवा के, अर्थात् इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध अभिमान किया है।
30 इस कारण उसके जवान उसके चौकों में गिरेंगे, और उसके सब योद्धा उस दिन नाश किए जाएँगे, यहोवा की यही वाणी है।
31 प्रभु सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, हे अभिमानी, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ; क्योंकि तेरा दिन, अर्थात् तेरे दण्ड का समय आ पहुँचा है।
32 और अभिमानी ठोकर खाकर गिरेगा, और उसे कोई फिर न उठाएगा; और मैं उसके नगरों में आग लगाऊँगा, और वह उसके चारों ओर सब कुछ भस्म कर देगी।
33 सेनाओं का यहोवा यों कहता है, — इस्राएली और यहूदी दोनों एक संग पिसे हुए हैं; और जितनों ने उन्हें बन्धुआ बनाया वे उन पर प्रबल हुए हैं, वे उन्हें छोड़ने से इनकार करते हैं।
34 उनका छुड़ानेवाला सामर्थी है, सेनाओं का यहोवा उसका नाम है, वह निश्चय उनका मुकद्दमा लड़ेगा, कि वह देश को नाश करे, और बाबुल के निवासियों को कँपा दे।
35 यहोवा की यह वाणी है, कसदियों पर तलवार! और बाबुल के सब निवासियों पर! और उसके हाकिमों और पण्डितों पर!
36 उसके भावी कहनेवालों पर तलवार! और वे मूर्ख बनेंगे; उसके शूरवीरों पर तलवार! और वे विस्मित हो जाएँगे; 37 उसके घोड़ों पर तलवार! और उसके रथों पर! और उसके बीच की मिली-जुली भीड़ पर! और वे स्त्रियों के समान हो जाएँगे; उसके भण्डारों पर तलवार! और वे लुट जाएँगे; 38 उसके जलाशयों पर सूखा! और वे सूख जाएँगे: क्योंकि वह खुदी हुई मूरतों से भरा हुआ देश है, और वे अपनी मूरतों पर घमण्ड करते हैं।
39 इसलिए वहाँ जंगली पक्षी जंगली पशुओं के संग बसेंगे, और शुतुर्मुर्ग की बच्चियाँ उसमें बसेंगी; और वह फिर सदा तक बसाया न जाएगा; पीढ़ी-पीढ़ी तक उसमें कोई वास न करेगा।
40 जैसे परमेश्वर ने सदोम और अमोरा और उनके आसपास के नगरों को उलट दिया था, वैसे ही यहोवा की यह वाणी है, वहाँ न कोई मनुष्य रहेगा, और न कोई आदमी उसमें टिकेगा।
41 देखो, उत्तर दिशा से एक प्रजा आती है, वरन् एक बड़ी जाति, और बहुत से राजा पृथ्वी की छोर से उभारे जाएँगे।
42 वे धनुष और ढाल पकड़े रहेंगे, वे क्रूर होंगे, और दया न करेंगे; उनका शब्द समुद्र के समान गरजेगा, और वे घोड़ों पर चढ़े हुए, हे बाबुल की बेटी, तेरे विरुद्ध युद्ध के लिए योद्धा के समान पाँति बाँधे हुए होंगे।
43 बाबुल के राजा ने उनका समाचार सुना है, और उसके हाथ ढीले पड़ गए हैं; व्याकुलता ने उसे पकड़ लिया है, और जच्चा स्त्री की सी पीड़ा ने।
44 देखो, वह यरदन के चढ़ाव से निकले हुए सिंह के समान दृढ़ निवास-स्थान पर चढ़ेगा: उसे विश्राम देने के बाद मैं उसे उसके पास से भगा दूँगा; और वह चुना हुआ कौन है जिसे मैं उस पर ठहराऊँ? क्योंकि मेरे तुल्य कौन है? और कौन मेरे विरुद्ध मुकद्दमा उठाएगा? और वह चरवाहा कौन है जो मेरे सामने खड़ा रह सकेगा?
45 इसलिए यहोवा की वह युक्ति सुनो जो उसने बाबुल के विरुद्ध की है, और उसकी वे कल्पनाएँ जो उसने कसदियों के देश के विरुद्ध की हैं: निश्चय झुण्ड के छोटे से छोटे उन्हें घसीट ले जाएँगे, निश्चय उनके निवास-स्थान उनके कारण उजाड़ हो जाएँगे।
46 बाबुल के ले लिए जाने के शब्द से पृथ्वी काँप उठेगी, और उसकी चिल्लाहट जातियों में सुनाई पड़ेगी।
अनुवाद: यिर्मयाह 51
1 यहोवा यों कहता है, — देखो, मैं बाबुल के विरुद्ध, और बुद्धि की डींग मारनेवाले अपने द्रोहियों के विरुद्ध एक नाश करनेवाली वायु चलाऊँगा; 2 और मैं बाबुल के पास ऐसे लोगों को भेजूँगा जो उसको फटकें, और वे उसको फटककर उसके देश को खाली करेंगे; क्योंकि विपत्ति के दिन वे चारों ओर से उसके विरुद्ध होंगे।
3 जो धनुष चढ़ाता है, और जो अपना झिलम पहनकर उठ खड़ा होता है, उसके विषय में, — उसके जवानों को मत छोड़ो, उसकी सारी सेना का सत्यानाश करो
4 और वे उसके देश में घायल होकर, और उसकी सड़कों में छिदे हुए गिरेंगे।
5 क्योंकि इस्राएल और यहूदा अपने परमेश्वर, सेनाओं के यहोवा की ओर से विधवा नहीं किए गए: वरन् इस्राएल के पवित्र के कारण उनका देश पाप से भरा हुआ है।
6 बाबुल के बीच में से भागो, और हर एक अपना-अपना प्राण बचाओ, ऐसा न हो कि तुम उसके अधर्म में नाश हो जाओ; क्योंकि यह यहोवा के पलटा लेने का समय है, वह उसको बदला देगा 7 बाबुल यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा रहा है, जो सारी पृथ्वी को मतवाला करता था; जाति-जाति ने उसके दाखमधु में से पिया है, इस कारण जाति-जाति बावली हो गई हैं।
8 बाबुल अचानक गिर गया, और नाश हो गया है; उसके लिए हाय-हाय करो, उसके घाव के लिए बलसान लाओ, क्या जाने वह चंगा हो सके!
9 हमने बाबुल को चंगा करना चाहा, परन्तु वह चंगा न हुआ; उसको छोड़ दो, आओ, हम अपने-अपने देश को चले जाएँ; क्योंकि उसका न्याय आकाश तक पहुँच गया है, और बादलों तक ऊँचा उठ गया है।
10 यहोवा ने हमारे धर्म को प्रगट किया है; आओ, हम सिय्योन में अपने परमेश्वर यहोवा के काम का वर्णन करें।
11 तीरों को चमकाओ, ढालें तैयार करो, यहोवा मादी राजाओं के मन को उभारेगा; क्योंकि बाबुल के विषय में उसकी कल्पना उसे नाश करने की है। क्योंकि यह यहोवा का पलटा, अर्थात् उसके मन्दिर का पलटा है।
12 बाबुल की शहरपनाह पर झण्डा खड़ा करो, पहरा बढ़ाओ, पहरुए बैठाओ, घात लगानेवालों को पाँति में रखो: क्योंकि जैसा यहोवा ने सोचा है, वैसा ही वह करेगा, अर्थात् जो कुछ उसने बाबुल के निवासियों के विषय में कहा है।
13 हे बहुत जलाशयों के बीच बसी हुई, हे धन-भण्डारों से भरपूर, तेरा अन्त आ गया है, तेरे लोभ का माप पूरा हुआ।
14 यहोवा ने अपनी ही शपथ खाई है, — निश्चय मैं तुझे टिड्डियों के समान मनुष्यों से भर दूँगा, जो तुझ पर दाख रौंदनेवालों की सी ललकार मारेंगे, —
15 (वही) जिसने पृथ्वी को अपनी सामर्थ्य से बनाया, जिसने जगत को अपनी बुद्धि से स्थिर किया, और अपनी समझ से आकाश को ताना है, 16 जिसके शब्द से आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, जो पृथ्वी की छोर से कुहरा उठाता है, जो बिजली को वर्षा के लिए बनाता है, और अपने भण्डार में से पवन निकालता है।
17 हर मनुष्य अपने ज्ञान से पशु सरीखा बन गया है, हर एक ढालनेवाला अपनी खुदी हुई मूरत के कारण लज्जित होगा, क्योंकि उसकी ढाली हुई मूरत झूठी है, और उनमें साँस ही नहीं: 18 वे व्यर्थ और ठट्ठे ही के योग्य हैं, भ्रम की रचना हैं; उनके दण्ड के समय वे नाश हो जाएँगी।
19 याकूब का भाग उनके समान नहीं; क्योंकि वह सब का बनानेवाला है, और इस्राएल उसके निज भाग का गोत्र है; सेनाओं का यहोवा उसका नाम है।
20 तू मेरे लिए हथौड़ा और युद्ध के हथियार रहा है; तेरे द्वारा मैंने जाति-जाति को चकनाचूर किया, और तेरे द्वारा राज्य-राज्य को नाश किया: 21 हाँ, तेरे द्वारा मैंने घोड़ों और उनके सवारों को चकनाचूर किया, और तेरे द्वारा मैंने रथों और उनके सवारों को चकनाचूर किया
22 और तेरे द्वारा मैंने पुरुषों और स्त्रियों को चकनाचूर किया, और तेरे द्वारा मैंने बूढ़ों और लड़कों को चकनाचूर किया, और तेरे द्वारा मैंने जवानों और कुमारियों को चकनाचूर किया, 23 और तेरे द्वारा मैंने चरवाहों और उनके झुण्डों को चकनाचूर किया, और तेरे द्वारा मैंने किसानों और उनके जोड़ी-बैलों को चकनाचूर किया, और तेरे द्वारा मैंने अधिपतियों और हाकिमों को चकनाचूर किया।
24 परन्तु मैं बाबुल को और कसदियों के देश के सब निवासियों को, उन सब बुराइयों का जो उन्होंने सिय्योन में की हैं, तुम्हारी आँखों के सामने बदला दूँगा, यहोवा की यही वाणी है।
25 यहोवा की यह वाणी है, हे नाश करनेवाले पहाड़, जो सारी पृथ्वी का नाश करता है, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ; और मैं अपना हाथ तुझ पर बढ़ाकर तुझे चट्टानों पर से लुढ़का दूँगा, और तुझे जला हुआ पहाड़ बनाऊँगा: 26 और लोग तुझ से न तो कोने के लिए पत्थर, और न नेव के लिए पत्थर लेंगे; क्योंकि तू सदा उजाड़ रहेगा, यहोवा की यही वाणी है।
27 देश में झण्डा खड़ा करो, जाति-जाति में नरसिंगा फूँको, उसके विरुद्ध जाति-जाति को तैयार करो, अरारात, मिन्नी और अश्कनज के राज्यों को उसके विरुद्ध बुलाओ; उसके विरुद्ध एक सेनापति ठहराओ, घोड़ों को भयानक टिड्डियों के समान चढ़ा ले आओ; 28 उसके विरुद्ध जातियों को, मादी राजाओं को, उसके अधिपतियों और हाकिमों को, और उसके राज्य के सारे देश को तैयार करो।
29 और देश काँप उठेगा और पीड़ित होगा, क्योंकि बाबुल के विषय में यहोवा की कल्पनाएँ स्थिर ठहरेंगी: कि वह बाबुल के देश को ऐसा उजाड़ कर दे कि उसमें कोई निवासी न रहे।
30 बाबुल के शूरवीर लड़ने से रुक गए हैं, वे अपने गढ़ों में बैठ गए; उनकी वीरता जाती रही, वे स्त्रियाँ बन गए; उसके निवास-स्थान जला दिए गए, उसके बेंड़े तोड़ दिए गए।
31 एक हरकारा दूसरे हरकारे से मिलने को दौड़ा, और एक समाचार देनेवाला दूसरे समाचार देनेवाले से मिलने को, कि बाबुल के राजा को समाचार दे कि उसका नगर छोर तक ले लिया गया है; 32 और घाट शत्रुओं के वश में हो गए, और ताल आग से जला दिए गए, और योद्धा चकनाचूर कर दिए गए।
33 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, — बाबुल की बेटी दाँवते समय के खलिहान के समान होगी, उसे रौंदने का समय (आ जाएगा); थोड़े ही दिनों में उसकी कटनी का समय आ पहुँचेगा।
34 बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने मुझे खा लिया, मुझे चकनाचूर कर दिया है; उसने मुझे खाली बरतन के समान कर दिया है, उसने मगरमच्छ के समान मुझे निगल लिया है, उसने मेरे स्वादिष्ट भोजनवस्तुओं से अपना पेट भरा है, उसने मुझे निकाल फेंका है।
35 सिय्योन की रहनेवाली कहेगी, जो उपद्रव मुझ पर और मेरे शरीर पर हुआ है, वह बाबुल पर पलट जाए; यरूशलेम कहेगी, मेरा खून कसदियों के देश के रहनेवालों पर हो।
36 इसलिए यहोवा यों कहता है, — देख, मैं तेरा मुकद्दमा लड़ूँगा, और तेरा पलटा लूँगा, क्योंकि मैं उसके समुद्र को सुखा दूँगा, और उसके सोते को सुखा डालूँगा: 37 और बाबुल खण्डहर, गीदड़ों का वासस्थान, विस्मय और ताली बजाने का कारण, और निर्जन हो जाएगा।
38 वे सिंहों के समान गरजेंगे, वे सिंह के बच्चों के समान गुर्राएँगे।
39 उनके गर्म होने पर मैं उनके लिए भोज तैयार करूँगा, और उन्हें ऐसा मतवाला करूँगा कि वे हुलसकर सदा की नींद में पड़ें, और कभी न जागें, यहोवा की यही वाणी है।
40 मैं उनको भेड़ों के बच्चों, और मेढ़ों और बकरों के समान घात होने को उतार दूँगा।
41 शेशक कैसे ले लिया गया है! और सारी पृथ्वी की प्रशंसा कैसे पकड़ी गई है!
बाबुल जातियों के बीच कैसा उजाड़ हो गया है!
42 समुद्र बाबुल पर चढ़ आया है, वह उसकी बहुत सी लहरों में डूब गया है।
43 उसके नगर उजड़ गए, उसका देश निर्जल और निर्जन देश हो जाएगा, उसमें से होकर कोई मनुष्य न चलेगा, और न कोई आदमी उसमें बसेगा।
44 और मैं बाबुल में बेल को दण्ड दूँगा; और उसने जो कुछ निगल लिया है, वह उसके मुँह से उगलवाऊँगा: और जातियों के लोग फिर उसकी ओर ताँता बाँधे न चलेंगे: बाबुल की शहरपनाह भी गिर गई है।
45 हे मेरी प्रजा, उसमें से निकल आओ, और हर एक अपने-अपने प्राण को यहोवा के भड़के हुए कोप से बचाओ।
46 और तुम्हारा मन न घबराए, और जो समाचार देश में सुना जाएगा, उससे तुम न डरना; एक वर्ष में एक समाचार आएगा, और उसके बाद दूसरे वर्ष में एक और समाचार; — और देश में उपद्रव होगा, और हाकिम के पीछे हाकिम उठेगा।
47 इसलिए देखो, वे दिन आते हैं कि मैं बाबुल की मूरतों को दण्ड दूँगा; और उसका सारा देश लज्जित होगा, और उसके सब मारे हुए उसी के बीच पड़े रहेंगे।
48 और आकाश और पृथ्वी, और जो कुछ उनमें है, सब बाबुल पर जयजयकार करेंगे; जब उत्तर दिशा से नाश करनेवाले उस पर चढ़ आएँगे, यहोवा की यही वाणी है।
49 जैसे बाबुल ने इस्राएल के मारे हुओं को गिराया, वैसे ही बाबुल के कारण सारे देश के मारे हुए गिरेंगे।
50 हे तलवार से बचे हुओ, चले जाओ, खड़े मत रहो; दूर से यहोवा को स्मरण करो, और यरूशलेम की भी सुधि लो।
51 हम लज्जित हैं, क्योंकि हमने अपनी नामधराई सुनी है; हमारे मुँह लज्जा से ढँपे हैं, क्योंकि यहोवा के भवन के पवित्र स्थानों में विदेशी घुस आए हैं।
52 इसलिए देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आनेवाले हैं कि मैं उसकी खुदी हुई मूरतों को दण्ड दूँगा, और उसके सारे देश में लोग घायल होकर कराहते रहेंगे।
53 चाहे बाबुल आकाश पर चढ़ जाए, और चाहे वह अपने ऊँचे गढ़ को और भी दृढ़ करे, तौभी मेरी ओर से नाश करनेवाले उसके पास पहुँचेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
54 बाबुल से चिल्लाहट का शब्द! और कसदियों के देश से बड़े विनाश का शब्द!
55 क्योंकि यहोवा बाबुल को उजाड़ेगा, और उसके बड़े कोलाहल को नष्ट करेगा: और उनकी लहरें बहुत से जल की सी गरजेंगी, उनके शब्द का कोलाहल फैल जाएगा।
56 क्योंकि बाबुल पर भी नाश करनेवाला चढ़ आया है, और उसके शूरवीर पकड़े गए हैं, उनके धनुष तोड़ डाले गए हैं; क्योंकि यहोवा बदला देनेवाला परमेश्वर है, वह अवश्य ही बदला लेगा।
57 और मैं उसके हाकिमों, पण्डितों, अधिपतियों, रईसों और शूरवीरों को ऐसा मतवाला करूँगा कि वे सदा की नींद में पड़ेंगे और फिर न जागेंगे, उस राजा की यही वाणी है, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है।
58 सेनाओं का यहोवा यों कहता है, — बाबुल की शहरपनाह, चाहे चौड़ी हो, तौभी निश्चय ढा दी जाएगी; और उसके फाटक, चाहे ऊँचे हों, तौभी आग से भस्म किए जाएँगे: इस प्रकार देश-देश के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ठहरेगा, और जातियों का परिश्रम आग का कौर होगा, और वे थक जाएँगे।
59 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के चौथे वर्ष में जब महसेयाह का पोता, नेरिय्याह का पुत्र सरायाह, सिदकिय्याह की ओर से बाबुल को गया, तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने उसे यह वचन आज्ञा देकर कहा; और सरायाह एक शान्त स्वभाव का हाकिम था: 60 और यिर्मयाह ने उन सब विपत्तियों को जो बाबुल पर पड़नेवाली थीं, एक पुस्तक में लिख दिया, अर्थात् 61 ये सब वचन जो बाबुल के विरुद्ध लिखे गए हैं; और यिर्मयाह ने सरायाह से कहा, — “जब तू बाबुल में पहुँचे और उसे देखे, तब 62 ये सब वचन पढ़ना, और यह कहना, — ‘हे यहोवा, तूने इस स्थान के विषय में यह कहा है कि मैं इसे ऐसा मिटा दूँगा कि इसमें क्या मनुष्य, क्या पशु, कोई भी न रहेगा, वरन् यह सदा उजाड़ पड़ा रहेगा।’
63 और जब तू इस पुस्तक को पढ़ चुके, तब इसे एक पत्थर के साथ 64 बाँधकर फरात महानद के बीच में फेंक देना, और यह कहना, — ‘यों ही बाबुल डूब जाएगा, और मैं उस पर जो विपत्ति डालूँगा, उसके कारण वह फिर कभी न उठेगा, चाहे वे कितना ही परिश्रम करके थक जाएँ।’” यहाँ तक यिर्मयाह के वचन हैं।
अनुवाद: यिर्मयाह 52
1 जब सिदकिय्याह राज्य करने लगा, तब वह इक्कीस वर्ष का था; और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य करता रहा; और उसकी माता का नाम हमूतल था, जो लिब्नावासी यिर्मयाह की बेटी थी।
2 और उसने यहोयाकीम के सब कामों के अनुसार वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है: 3 और यरूशलेम और यहूदा के विरुद्ध यहोवा के कोप के कारण, यहाँ तक कि उसने उन्हें अपने सामने से दूर कर दिया, सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा से बलवा किया।
4 और उसके राज्य के नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन को बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी सारी सेना लेकर यरूशलेम पर चढ़ाई की, और उसके विरुद्ध छावनी डालकर उसके चारों ओर गढ़ बनाया।
5 और नगर सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष तक घिरा रहा।
6 चौथे महीने के नौवें दिन को नगर में अकाल ऐसा बढ़ गया कि देश के लोगों के लिए रोटी न रही: 7 तब नगर की शहरपनाह में दरार की गई, और सब योद्धा भागे, और रात ही रात दोनों दीवारों के बीच के फाटक के मार्ग से, जो राजा की बारी के निकट था, नगर से निकल गए; (उस समय कसदी नगर को चारों ओर से घेरे हुए थे:) और वे जंगल के मार्ग से चल दिए।
8 तब कसदियों की सेना ने राजा का पीछा किया, और यरीहो के जंगल में सिदकिय्याह को जा पकड़ा; क्योंकि उसकी सारी सेना उसके पास से तितर-बितर हो गई थी।
9 तब वे राजा को पकड़कर हमात देश के रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गए; और उसने उसके विषय में दण्ड की आज्ञा दी।
10 और बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह के पुत्रों को उसके सामने घात किया; और यहूदा के सब हाकिमों को भी रिबला में घात किया: 11 फिर उसने सिदकिय्याह की आँखें फोड़ डालीं, और उसे साँकलों से जकड़ दिया; और बाबुल का राजा उसे बाबुल तक ले गया, और उसके मरने के दिन तक उसे बन्दीगृह में डाल रखा।
12 फिर पाँचवें महीने के दसवें दिन को, (उस वर्ष बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर का उन्नीसवाँ वर्ष था,) अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान, जो बाबुल के राजा के सम्मुख खड़ा रहता था, यरूशलेम में आया, 13 और उसने यहोवा के भवन और राजभवन और यरूशलेम के सब घरों को, अर्थात् हर एक बड़े घर को आग लगाकर फूँक दिया: 14 और कसदियों की सारी सेना ने, जो अंगरक्षकों के प्रधान के संग थी, यरूशलेम के चारों ओर की सब शहरपनाह को ढा दिया।
15 और अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान प्रजा के कुछ कंगालों को, और जो लोग नगर में रह गए थे, और जो लोग भागकर बाबुल के राजा के पास चले गए थे, और बची हुई भीड़ को बन्धुआ करके ले गया।
16 परन्तु अंगरक्षकों के प्रधान नबूजरदान ने देश के कुछ कंगाल लोगों को दाख की बारियों की सेवा और किसानी करने को छोड़ दिया।
17 और यहोवा के भवन में जो पीतल के खम्भे थे, और कुर्सियाँ, और पीतल का हौद जो यहोवा के भवन में था, उन्हें कसदी तोड़कर उनका सब पीतल बाबुल को ले गए।
18 और हण्डे, फावड़ियाँ, कैंचियाँ, कटोरे, धूपदान, और पीतल के और सब पात्र जिनसे सेवा टहल होती थी, वे उन्हें ले गए।
19 और तसले, करछे, कटोरे, हण्डे, दीवट, धूपदान और कटोरियाँ, जिनमें से कुछ सब सोने के और कुछ सब चाँदी के थे, उन्हें भी अंगरक्षकों का प्रधान ले गया।
20 दोनों खम्भे, एक हौद, और पीतल के बारह बैल जो कुर्सियों के नीचे थे, जिन्हें सुलैमान ने यहोवा के भवन के लिए बनवाया था, इन सब पात्रों का पीतल तौल से बाहर था।
21 खम्भों के विषय में यह है, कि एक-एक खम्भे की ऊँचाई अठारह हाथ थी, और बारह हाथ का सूत उसके चारों ओर लिपटा था, और उसकी मोटाई चार अंगुल थी; वह खोखला था।
22 और उसके ऊपर की कंगनी पीतल की थी, और एक-एक कंगनी की ऊँचाई पाँच हाथ थी, और कंगनी के चारों ओर जाली और अनार बने थे; ये सब पीतल के थे; और दूसरे खम्भे और उसके अनार भी इन्हीं के समान थे।
23 और एक ओर छियानवे अनार थे; और जाली के चारों ओर सब अनार गिनती में एक सौ थे।
24 और अंगरक्षकों के प्रधान ने सरायाह महायाजक, और उसके नीचे के याजक सपन्याह, और तीनों द्वारपालों को भी पकड़ लिया: 25 और नगर में से उसने एक खोजा पकड़ा, जो योद्धाओं के ऊपर ठहराया गया था; और जो पुरुष राजा के सम्मुख रहा करते थे, उनमें से सात जन जो नगर में मिले, और सेनापति का मुंशी, जो देश के लोगों को सेना में भरती करता था, और देश के लोगों में से साठ पुरुष जो नगर के बीच में मिले।
26 इनको अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गया: 27 तब बाबुल के राजा ने उन्हें हमात देश के रिबला में मारकर घात किया; और यहूदा अपने देश से बन्धुआ होकर निकाल दिया गया।
28 जिन लोगों को नबूकदनेस्सर बन्धुआ करके ले गया, वे ये हैं: सातवें वर्ष में तीन हज़ार तेईस यहूदी;
29 नबूकदनेस्सर के अठारहवें वर्ष में वह यरूशलेम से आठ सौ बत्तीस प्राणियों को बन्धुआ करके ले गया; 30 नबूकदनेस्सर के तेईसवें वर्ष में अंगरक्षकों का प्रधान नबूजरदान सात सौ पैंतालीस यहूदी प्राणियों को बन्धुआ करके ले गया; — सब प्राणी मिलकर चार हज़ार छः सौ हुए।
31 फिर यहूदा के राजा यहोयाकीन के सैंतीसवें वर्ष में, अर्थात् जिस वर्ष बाबुल का राजा एवील्मरोदक राजगद्दी पर बैठा, उसी के बारहवें महीने के पच्चीसवें दिन को उसने यहूदा के राजा यहोयाकीन का सिर ऊँचा किया, और उसे बन्दीगृह से निकाला; 32 और उससे मधुर-मधुर वचन कहकर, जो राजा उसके साथ बाबुल में थे, उनके सिंहासनों से उसके सिंहासन को अधिक ऊँचा किया; 33 और उसके बन्दीगृह के वस्त्र बदल दिए, और वह जीवन भर नित्य उसके सम्मुख भोजन करता रहा।
34 और प्रतिदिन के खर्च के लिए बाबुल के राजा की ओर से उसको नित्य कुछ मिलने का प्रबन्ध हुआ, अर्थात् उसकी मृत्यु के दिन तक, जीवन भर।
परमेश्वर की स्तुति हो।
