भजन संहिता पर टीका — खण्ड 1
Commentary on Psalms Volume 1 John Calvin
जॉन कैल्विन

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इस पुस्तक के बारे में
कैल्विन की सभी टीकाओं में यह सबसे प्रिय है; उन्होंने भजन संहिता को "आत्मा के सब अंगों का शरीर-रचना-शास्त्र" कहा। इस पहले खण्ड में कैल्विन की प्रसिद्ध प्रस्तावना है — जिसमें वे स्वयं अपने अचानक मन-परिवर्तन और परमेश्वर द्वारा सेवकाई के लिए बुलाए जाने का वर्णन करते हैं — और उसके बाद भजन 1 से 35 तक की पद-पद व्याख्या है। दाऊद के अनुभवों से कैल्विन कलीसिया को प्रार्थना, विश्वास, क्लेश में सान्त्वना और परमेश्वर की देखभाल पर भरोसे की शिक्षा देते हैं।
स्रोत: Commentary on the Book of Psalms, vol. 1, by John Calvin, tr. James Anderson (Calvin Translation Society, Edinburgh, 1845; डिजिटल पाठ: Monergism Books) — मूल पाठ सार्वजनिक (पब्लिक डोमेन)। मुद्रित पुस्तक की अनुक्रमणिकाएँ (Indexes) केवल अंग्रेज़ी संस्करण में हैं।
अध्याय
- मुखपृष्ठ, प्रस्तावनाएँ और समर्पण≈ 102 मिनट
- भजन 1≈ 20 मिनट
- भजन 2≈ 52 मिनट
- भजन 3≈ 26 मिनट
- भजन 4≈ 40 मिनट
- भजन 5≈ 37 मिनट
- भजन 6≈ 29 मिनट
- भजन 7≈ 51 मिनट
- भजन 8≈ 45 मिनट
- भजन 9≈ 68 मिनट
- भजन 10≈ 70 मिनट
- भजन 11≈ 34 मिनट
- भजन 12≈ 32 मिनट
- भजन 13≈ 20 मिनट
- भजन 14≈ 43 मिनट
- भजन 15≈ 33 मिनट
- भजन 16≈ 56 मिनट
- भजन 17≈ 64 मिनट
- भजन 18≈ 141 मिनट
- भजन 19≈ 71 मिनट
- भजन 20≈ 27 मिनट
- भजन 21≈ 36 मिनट
- भजन 22≈ 95 मिनट
- भजन 23≈ 29 मिनट
- भजन 24≈ 35 मिनट
- भजन 25≈ 65 मिनट
- भजन 26≈ 36 मिनट
- भजन 27≈ 45 मिनट
- भजन 28≈ 27 मिनट
- भजन 29≈ 28 मिनट
- भजन 30≈ 40 मिनट
- भजन 31≈ 67 मिनट
- भजन 32≈ 46 मिनट
- भजन 33≈ 50 मिनट
- भजन 34≈ 54 मिनट
- भजन 35≈ 65 मिनट
