73 में से अध्याय 18

आने वाली घटनाएँ और वर्तमान कर्तव्य (जारी)

यह हिन्दी संस्करण अंग्रेज़ी मूल से पूर्ण रूप से, अनुच्छेद-दर-अनुच्छेद, कृत्रिम बुद्धि (AI) की सहायता से अनुवादित है; मानवीय समीक्षा जारी है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

आने वाली घटनाएँ और वर्तमान कर्तव्य (जारी)

4. तुम पर उन सब विश्वासियों का कर्तव्य है जो समय को पहचानते हैं। उन्हें चाहिए कि अन्धकार के कामों को उतार फेंकें और ज्योति के हथियार बाँध लें।

इन चारों बातों में से हर एक पर मुझे कुछ कहना है।

सबसे पहले, आइए हम संसार की वर्तमान दशा पर विचार करें। प्रेरित पौलुस इसे "रात" कहता है। वह कहता है, "रात बहुत बीत गई है।" मुझे कोई सन्देह नहीं कि यह शब्द कुछ लोगों को अटपटा लगता है। उन्हें यह आश्चर्य की बात लगती है कि हमारे इस समय को "रात" कहा जाए। वे विद्या, विज्ञान, सभ्यता, व्यापार, स्वतन्त्रता और ज्ञान के दिनों में जी रहे हैं। वे अपने चारों ओर ऐसी वस्तुएँ देखते हैं जिनकी कल्पना उनके पूर्वजों ने कभी नहीं की थी — रेलगाड़ियाँ, कारखाने, गैस, बिजली, भाप के इंजन, सबके लिए शिक्षा और सस्ती पुस्तकें। मैं यह सब जानता हूँ, और इसके लिए धन्यवादी हूँ।

फिर भी मैं कहता हूँ कि परमेश्वर की बातों में संसार अब भी "रात" की दशा में है। मैं विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर हमारे इस भूमण्डल को, जो सूर्य के चारों ओर घूमता है, ऊपर से देखता है, और इसे देखकर वह कहता है, "बहुत अन्धकार है!" मैं विश्वास करता हूँ कि स्वर्गदूत आते-जाते हैं और जो कुछ वे हमारी पृथ्वी पर देखते हैं उसकी सूचना देते हैं, और उनकी निरन्तर सूचना यही है, "बहुत अन्धकार है!" और मुझे निश्चय है कि हर देश में प्रभु यीशु के विश्वासी इस विषय में एकमत हैं। वे अपने चारों ओर देखे जानेवाले घिनौने कामों के कारण पुकारते और आहें भरते हैं। उन्हें संसार "बहुत अन्धकारमय" दिखाई देता है!

क्या अन्यजातियों के देशों में अन्धकार नहीं है? सारे संसार का दो-तिहाई भाग परमेश्वर और उसके मसीह के विरुद्ध खुला विद्रोह कर रहा है। पृथ्वी के हर तीन निवासियों में से दो के पास न बाइबल है, न सुसमाचार, न ज्ञान, न विश्वास, न आशा! वे क्रूर, छली, अनैतिक, सांसारिक, इन्द्रियलोलुप, शैतानी, मूर्तिपूजक और अन्धविश्वासी हैं! निश्चय ही यह रात है!

क्या अनेक ऐसे देशों में भी अन्धकार नहीं है जो अपने आपको मसीही कहते हैं? पृथ्वी के सब मसीही कहलानेवालों में से दो-तिहाई विश्वास में भ्रष्ट हैं। उनका धर्म पवित्रशास्त्र के अनुसार है ही नहीं। उन्होंने उसमें बहुत सी ऐसी बातें जोड़ ली हैं जो बाइबल में कहीं नहीं मिलतीं। उन्होंने उसमें से बहुत सी ऐसी बातें निकाल दी हैं जिनकी आज्ञा बाइबल ने स्पष्ट रूप से दी है। लाखों लोग मसीह के स्थान पर कुँवारी मरियम और मृत सन्तों का आदर करते हैं। लाखों बपतिस्मा पाए हुए लोग बाइबल के विषय में कुछ नहीं जानते, और सुसमाचार में निहित उद्धार का उन्हें तनिक भी बोध नहीं। निश्चय ही यह रात है!

क्या आज हमारे अपने देश में भी अन्धकार नहीं है? प्रोटेस्टेंट ब्रिटेन में पाप कितना है — और परमेश्वर कितना कम! खुला अविश्वास, अन्यजातियों जैसा अज्ञान, मतवालापन, गाली-गलौज, छल, झूठ, लोभ — कितना कुछ हर सप्ताह सर्वशक्तिमान प्रभु के सामने हमारे विरुद्ध पुकार रहा है! ग्रेट ब्रिटेन में कितने लोग किसी आराधना-स्थल में जाते ही नहीं! कितने लोग केवल औपचारिकता के लिए कलीसिया और गिरजे में जाते हैं! अपनी आत्माओं के उद्धार के विषय में कितने थोड़े लोग सचमुच गम्भीर हैं! कितने थोड़े हैं जिनके पास मसीह में उद्धार देनेवाले विश्वास और अपने हृदयों में पवित्र आत्मा के सच्चे कार्य का कोई प्रमाण है! निश्चय ही हमारे बीच भी रात है।

क्या हर सच्चे विश्वासी की आँखों के सामने बहुत अन्धकार नहीं है? इसी क्षण हमारे देश के सबसे भक्त, शान्त और व्यवस्थित गाँव में जाइए। उसमें रहनेवाले किसी जानकार परमेश्वर की सन्तान से पूछिए कि उसमें कितने सच्चे मसीही हैं, और मन फिराए हुओं का अनुपात मन न फिरानेवालों की तुलना में क्या है। वह जो उत्तर देगा उस पर भली-भाँति ध्यान दीजिए। मुझे सन्देह है कि आपको ग्रेट ब्रिटेन में कोई ऐसा गाँव मिलेगा जहाँ एक तिहाई लोग भी मन फिराए हुए हों! और जब हरे वृक्ष जैसे गाँवों का यह हाल है, तो सूखे वृक्षों जैसे गाँवों की दशा क्या होगी? निश्चय ही यह रात है!

पाठक, इन बातों का इनकार करना व्यर्थ है। मानव स्वभाव के घमण्ड को चाहे यह कितना ही नीचा दिखाए, प्रेरित का वचन पूरी तरह सत्य है — वर्तमान समय रात है! जिसका मन नहीं फिरा वह इसे शायद न देख पाए। अनुग्रह से रहित मनुष्य इसे शायद न समझ पाए। अन्धी आँख को दोपहर और आधी रात में कोई अन्तर नहीं दिखता। बहरे कान को कर्कश स्वर और मधुर संगीत में कोई भेद नहीं सुनाई देता। मरे हुए अंग को न गर्मी का बोध होता है न ठण्ड का।

परन्तु मैं विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर की सन्तान इस कथन का अर्थ समझ सकती है। प्रभु यीशु मसीह के लोग अनुभव से जानते हैं कि यह रात है।

विश्वासियों के लिए यह ठण्डा समय है। उन्हें बहुत सी ऐसी बातें मिलती हैं जो उनके उत्साह को ठण्डा और मन्द कर देती हैं — और उनके हृदयों को प्रसन्न और गर्म करनेवाली बातें थोड़ी हैं। उन्हें अनेक क्रूसों और निराशाओं को सहना पड़ता है। वे अधर्म को बढ़ते देखते हैं, और उनका अपना प्रेम भी ठण्डा पड़ने लगता है। और क्यों? यह रात है!

विश्वासियों के लिए यह अकेलेपन का समय है। स्वर्ग को जानेवाले मार्ग पर उन्हें थोड़े ही साथी मिलते हैं। कहीं-कहीं कोई मिल जाता है जो प्रभु यीशु से प्रेम रखता और विश्वास से जीता है। परमेश्वर की कुछ सन्तानें एक नगर में मिलती हैं और कुछ दूसरे में। परन्तु कुल मिलाकर संसार की सन्तानें उस अरामी सेना के समान दिखती हैं जिसने सारा देश भर दिया था — और परमेश्वर की सन्तानें जंगल में बिखरी हुई कुछ भेड़ों के समान हैं! और क्यों? यह रात है।

विश्वासियों के लिए यह जोखिम का समय है। वे प्रायः ठोकर खाते हैं और मुश्किल से अपना मार्ग पहचान पाते हैं। वे प्रायः सन्देह में खड़े रहते हैं और नहीं जानते कि किधर मुड़ें। कभी-कभी वे अपने चिह्नों को देख नहीं पाते और अपनी पहचान की निशानियाँ खो बैठते हैं। अधिक से अधिक वे शत्रुओं के निरन्तर भय में आगे बढ़ते हैं। और क्यों? यह रात है।

पाठक, मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि इन बातों पर मनन कीजिए। यदि वर्तमान समय रात है, तो जब हम सेवक मसीहियों को जागते रहने और प्रार्थना करने की चेतावनी देते हैं, तो आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिए। यदि हम आपसे कहें कि शत्रु के देश में सैनिकों की तरह जीओ और सदा चौकस रहो, तो आप इसे कोई अनोखी बात न समझें।

पाठक, बैठकर अपने आप से पूछिए कि जिस संसार में आप रहते हैं वह आपको रात लगता है या दिन। क्या वर्तमान समय आपके लिए संघर्ष का समय है — या आराम का? क्या आप अनुभव करते हैं कि आपकी सर्वोत्तम वस्तुएँ इसी जीवन में हैं — या आपकी सर्वोत्तम वस्तुएँ अभी आनेवाली हैं? मैं ये प्रश्न आपके सामने आपकी आत्मिक दशा की कसौटी के रूप में रखता हूँ। मैं इन्हें आपके सामने आपकी आत्मा की दशा की माप और मानदण्ड के रूप में रखता हूँ। मैं आपसे साफ़ कहता हूँ, यदि आपने इस संसार को कभी जंगल और अन्धकार का स्थान नहीं पाया, तो यह परमेश्वर की दृष्टि में आपकी दशा के विषय में बुरा चिह्न है!

सच्चा विश्वासी अपने क्रूसित प्रभु के इन वचनों को अक्षरशः सत्य पाएगा, "संसार में तुम्हें क्लेश होगा" (यूहन्ना 16:33)। सच्चा विश्वासी, अपने प्रभु और स्वामी के समान, "दुःखों के द्वारा सिद्ध" किया जाएगा। सच्चा विश्वासी उस संसार के लिये शोक करेगा जिसमें वह रहता है, क्योंकि वह अपने सच्चे राजा के विरुद्ध विद्रोह करनेवाला संसार है। पाप उसे दुःखी करेगा। अभक्ति उसके मन को भारी कर देगी। सदोम में लूत के समान, उसकी धर्मी आत्मा उन बहुत सी बातों से, जो वह देखता और सुनता है, प्रतिदिन खेदित होती रहेगी। वह उस समय की लालसा करेगा जब दिन निकलेगा और छाया भाग जाएगी। वर्तमान में वह अनुभव करेगा कि अभी रात है।

पाठक, क्या यह आपकी रात है या दिन?

आइए, दूसरे स्थान पर उस संसार की दशा पर विचार करें जो अभी आनेवाला है। प्रेरित पौलुस उसे "दिन" कहता है। "दिन निकट है।" यहाँ जिस समय की बात कही गई है, वही वह समय है जिसकी ओर प्रत्येक सच्चे मसीही को आशा के साथ देखना चाहिए; यह वह समय है जब प्रभु यीशु मसीह फिर आएगा। मसीह की कलीसिया की वर्तमान दशा में एक महान परिवर्तन होगा, इतना बड़ा परिवर्तन कि वह रात के दिन में बदल जाने के समान होगा।

जिस संसार में हम रहते हैं, वह सदा ऐसा ही नहीं चलता रहेगा। पाप, अज्ञान और अन्धविश्वास का अन्धकार सदा पृथ्वी को ढके न रहेगा। धार्मिकता का सूर्य एक दिन अपनी किरणों में आरोग्यता लिये हुए उदय होगा। प्रभु यीशु सामर्थ्य और बड़े प्रताप के साथ फिर आएगा। वह बिना बादलों की भोर के समान लौटेगा, और तब "दिन" होगा। एक ऐसा समय आनेवाला है जब शैतान बाँधा जाएगा और इस संसार पर फिर राज्य न करेगा (प्रकाशितवाक्य 20:1, आदि)। पाप और उसके सब परिणाम निकाल दिए जाएँगे। कराहती हुई सृष्टि को अन्ततः विश्राम मिलेगा (प्रेरितों के काम 3:19)। दुष्ट सदा के लिये अपने ही स्थान, नरक में बन्द कर दिए जाएँगे। परमप्रधान के पवित्र लोग अन्ततः स्वर्ग के अधिकारी होंगे। एक नया आकाश और नई पृथ्वी होगी, जिसमें धार्मिकता वास करेगी। निश्चय ही वह "दिन" होगा।

एक ऐसा समय आनेवाला है जब विश्वासियों को आनन्द और हर्ष मिलेगा, और शोक तथा आहें दूर भाग जाएँगी। हर आँसू पोंछ दिया जाएगा, हर क्रूस उतार दिया जाएगा, हर चिन्ता दूर कर दी जाएगी, हर कड़वा प्याला हटा लिया जाएगा!

सताव, परीक्षा, रोग, शोक, बिछोह, वियोग और मृत्यु का अन्त हो जाएगा! निश्चय ही वह धूप का समय होगा। वह "दिन" होगा।

एक ऐसा समय आनेवाला है जब मसीह का सारा परिवार एक साथ इकट्ठा किया जाएगा। वे अपनी तंग शय्याओं से उठेंगे और प्रत्येक एक महिमामय देह धारण करेगा। वे अपनी लम्बी नींद से तरोताज़ा, बलवन्त और लेटने के समय से कहीं अधिक सुन्दर होकर जागेंगे। वे अपनी कब्रों में हर अपूर्णता को पीछे छोड़ देंगे, और निष्कलंक तथा निर्मल होकर मिलेंगे, फिर कभी अलग न होने के लिये। निश्चय ही वह एक आनन्दमय भोर होगी। वह "दिन" होगा।

एक ऐसा समय आनेवाला है जब विश्वासी फिर धुँधले दर्पण में नहीं, वरन् आमने-सामने देखेंगे। वे वैसा ही देखेंगे जैसा उन्हें देखा गया है, और वैसा ही जानेंगे जैसा वे जाने गए हैं। वे बाहरी बातों पर झगड़ना और विवाद करना छोड़ देंगे, और अनन्त वास्तविकताओं के सिवा किसी और बात का विचार न करेंगे। वे अपने क्रूसित प्रभु और उद्धारकर्ता को आँखों से देखेंगे, और फिर विश्वास के द्वारा उसका अनुसरण न करेंगे। वे एक दूसरे को सब भ्रष्टता से मुक्त देखेंगे, और फिर कभी एक दूसरे के उद्देश्यों और आचरण को गलत न समझेंगे। निश्चय ही वह "दिन" होगा।

मैं यहाँ मसीह के हर उस विश्वासी के लिये, जो इन पृष्ठों को पढ़ता है, बड़ी शान्ति देखता हूँ। आपके सामने एक दिन है, एक महिमामय दिन। कभी-कभी आप अभी ऐसा अनुभव करते हैं मानो आप अन्धकार में चल रहे हों और आपके पास कोई ज्योति न हो। आपको संसार, शरीर और शैतान से प्रायः कठिन युद्ध लड़ना पड़ता है। कभी-कभी आप सोचते हैं कि आप कभी घर तक न पहुँच पाएँगे और मार्ग में ही थककर गिर पड़ेंगे। आपका शरीर और हृदय क्षीण होने को हैं। आपको हार मान लेने और निराश होकर बैठ जाने की बड़ी परीक्षा होती है। परन्तु आनेवाली बातों के विचार से शान्ति पाइए। आपके सामने एक अच्छा समय है। आपका दिन अभी उदय होना बाकी है।

मैं यहाँ इस बात का भी बड़ा कारण देखता हूँ कि बहुत से मसीही कहलानेवाले लोगों को थरथराना और डरना चाहिए। बहुत से हैं, मुझे भय है कि बहुत अधिक, जिनके लिये आनेवाला समय दिन के सिवा और सब कुछ होगा। बहुत से ऐसे हैं . . . जिनका सुख स्पष्टतः सब नीचे ही है, जिनका धन सब पृथ्वी पर है, जिनका सबसे उज्ज्वल समय अभी है, और जिनकी सबसे अन्धकारमय संभावनाएँ आगे हैं।

वे जितना आगे की ओर देखते हैं, सब कुछ उतना ही अधिक अन्धकारमय दिखाई देता है! बुढ़ापा अन्धकारमय दिखता है; रोग उससे भी अधिक अन्धकारमय; और मृत्यु तथा न्याय सबसे अधिक अन्धकारमय!

प्रिय पाठक, यदि यही आपकी दशा है, तो मैं आपको साफ़-साफ़ चेतावनी देता हूँ कि परिवर्तन अवश्य होना चाहिए। आपके विचार, आपकी रुचियाँ, आपकी प्रवृत्तियाँ, आपके प्रेम, सब नए और रूपान्तरित किए जाने चाहिए। आपको इस वर्तमान संसार और आनेवाले संसार को एक बहुत भिन्न ज्योति में देखना सीखना चाहिए। जाकर यीशु के चरणों में बैठिए, और उससे यह पाठ सिखाने के लिये प्रार्थना कीजिए। ज्योतिर्मय करनेवाले आत्मा से माँगिए कि वह आपकी आँखों का अभिषेक करे ताकि आप देख सकें। माँगिए कि परदा हटा दिया जाए, ताकि आप हर बात को उसके सच्चे रंगों में देख सकें।

मैं भली-भाँति जानता हूँ कि शैतान इस बात को रोकने के लिये कठिन परिश्रम करता है कि मनुष्य उस संसार से उत्तम संसार का विचार करें जिसमें हम अब रहते हैं। वह उनकी आँखों को आनेवाले दिन से फेरने का यत्न करता है। वह उन्हें सहर्ष समझाना चाहेगा कि इस जीवन में अपना कर्तव्य निभाना और साथ ही ऊपर की वस्तुओं पर मन लगाना असम्भव है। वह लोगों के कान में कहता है कि हम सेवक उन्हें उदास संन्यासी या मानवजाति से घृणा करनेवाले कट्टरपंथी बनाना चाहते हैं, और यदि वे हमारी सुनेंगे तो जीवन के सब सम्बन्धों के अयोग्य हो जाएँगे। शैतान के सब सुझावों के विरुद्ध मैं प्रत्येक पाठक को चेतावनी देता हूँ कि वह सावधान रहे। मैं किसी से यह नहीं कहता कि वह अपनी स्थिति के कर्तव्यों की उपेक्षा करे, या उस स्थान को छोड़ दे जिसे भरने के लिये परमेश्वर ने उसे बुलाया है। मैं किसी को चिड़चिड़ेपन और रूखेपन में प्रोत्साहित नहीं करता, मानो इस संसार में धन्यवाद करने के लिये कुछ भी न हो। मैं उस व्यक्ति की प्रशंसा नहीं करता जो उन लोगों से अपना स्नेह रोक लेता है जिनसे वह प्रेम, मित्रता और सम्बन्ध के द्वारा जुड़ा है।

मैं केवल इतना माँगता हूँ कि नए नियम का विश्वासी नए नियम के स्तर के अनुसार जीवन बिताए, कि वह परमेश्वर के दिन के आने की बाट जोहे, और स्वर्ग से परमेश्वर के पुत्र की प्रतीक्षा करे, और अपने प्रभु के प्रकट होने से प्रेम रखे।

पाठक, मैं आनेवाली बातों के विषय में सब अति और धर्मोन्माद से घृणा करता हूँ। जो धर्म मनुष्य से उसके काम-काज की उपेक्षा करवाए, या पत्नी, बच्चों, सम्बन्धियों और मित्रों से प्रेम करना छुड़वा दे, उसके विषय में मेरी कोई अच्छी धारणा नहीं है। मैं केवल इतना माँगता हूँ कि हम बातों को वैसा ही देखें जैसा पवित्रशास्त्र उन्हें दिखाता है — वे जैसी अभी हैं और जैसी आगे होंगी। मैं माँगता हूँ कि हम अपनी वर्तमान बुराइयों को देखें — और उन पर शोक करें; कि हम अपनी भावी भलाइयों को देखें — और उनकी लालसा करें। आओ, हम सच्चाई से मान लें कि पाप हमारे चारों ओर है — और उसकी उपस्थिति से छुटकारा पाने की लालसा करें। आओ, हम सच्चाई से मान लें कि पवित्रता एक दिन पृथ्वी पर फैलेगी — और उसके आने की लालसा करें। हम यह मानने में कभी लज्जित न हों कि अभी "रात" है और हम चाहते हैं कि "दिन" हो।

मुझे बताओ, क्या वह मनुष्य सचमुच पाप से घृणा कर सकता है — जो उसे पृथ्वी पर से मिटा दिए जाते देखने की इच्छा नहीं रखता? क्या वह मनुष्य पवित्रता से प्रेम कर सकता है — जो उस समय की लालसा नहीं करता जब सब लोग प्रभु को जानेंगे? क्या वह मनुष्य विश्वास के द्वारा सचमुच मसीह से जुड़ा हो सकता है — जो मसीह को देखना और उसके साथ रहना नहीं चाहता? क्या वह मनुष्य सन्त हो सकता है — जो सिद्ध किए गए धर्मियों की शुद्ध संगति का प्यासा नहीं है? क्या वह मनुष्य सच्चे मन का हो सकता है जो प्रतिदिन प्रार्थना करता है "तेरा राज्य आए" — और फिर भी इससे सन्तुष्ट है कि संसार बिना किसी परिवर्तन के जैसा है वैसा ही चलता रहे? अरे, नहीं! नहीं! ये बातें असम्भव हैं! परमेश्वर की सच्ची सन्तानें घर पहुँचना चाहेंगी। वे उस दिन की आस लगाएँगी।

पाठक, यदि तू उद्धार पाना चाहता है, तो तुझे वर्तमान समय को "रात" और आनेवाले समय को "दिन" समझना सीखना होगा। तुझे मृत्यु के उस पार को अपनी आत्मा का घर, और इस पार को मरुभूमि समझना सीखना होगा। वर्तमान समय तेरा जंगल, तेरा रणक्षेत्र और तेरी परीक्षा का स्थान होना चाहिए। आनेवाला समय तेरा कनान, तेरा विश्राम और तेरे पिता का घर होना चाहिए — नहीं तो तेरे लिए यही अच्छा था कि तू जन्म ही न लेता।

तीसरी बात, आओ हम उन विशेष समयों पर विचार करें जिनमें हमारा भाग्य ठहराया गया है। प्रेरित पौलुस हमें यह बताता है, जब वह कहता है, "रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है।" मेरा विश्वास है कि इन शब्दों का अर्थ यह है कि अन्तिम व्यवस्था आ पहुँची है — कलीसिया के इतिहास की अन्तिम अवस्था आ गई है। व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं ने अपना काम पूरा कर लिया है। पतन के समय जिस मसीहा की प्रतिज्ञा की गई थी, वह प्रकट हो चुका और उसने सम्पूर्ण उद्धार का प्रबन्ध कर दिया है। परमेश्वर की इच्छा का अन्तिम प्रकाशन हो चुका है। जीवन का मार्ग सारी मानवजाति के लिए खोल दिया गया है। अन्त से पहले स्वर्ग से पृथ्वी के लिए किसी और सन्देश की आशा नहीं की जानी चाहिए। पवित्रशास्त्र की कोई और पुस्तक नहीं लिखी जानी है। हम रात के अन्तिम पहर में आ पहुँचे हैं। अब हमारे लिए सूर्योदय और सवेरे के सिवा और कुछ प्रतीक्षा करने को नहीं है!

पाठक, ये शब्द, जो अठारह सौ वर्ष पहले सत्य थे, यदि सम्भव हो तो आज और भी अधिक सत्य हैं। ये ऐसे शब्द हैं जो मसीह की कलीसिया के हृदय में हर वर्ष बढ़ती हुई शक्ति के साथ उतरने चाहिए। "रात बहुत बीत गई है — दिन निकलने पर है।"

मैं उन लोगों में से हूँ जो सोचते हैं कि "वह दिन" उतना दूर नहीं जितना कुछ लोग मान बैठे हैं। मैं प्रभु के महिमा सहित लौट आने के विचार को यह कहकर अलग नहीं कर सकता कि यह घटना "निश्चय ही" हमारे समय में नहीं हो सकती, जैसा कि कुछ लोग कहते हैं। मुझे तो ऐसा लगता है कि सूर्य के क्षितिज के निकट होने के चिन्ह दिखाई दे रहे हैं। किसी भी दशा में, मैं याकूब के इन शब्दों को विशेष रूप से स्मरण रखना चाहता हूँ, "देख, न्यायी द्वार पर खड़ा है!" "प्रभु का आगमन निकट है!" और पतरस के इन शब्दों को, "सब बातों का अन्त निकट है!" (याकूब 5:8,9; 1 पतरस 4:7)।

मैं भविष्यद्वक्ता नहीं हूँ, और सहज ही भूल कर सकता हूँ। हो सकता है कि मैं मर जाऊँ, और तू भी मर जाए, इससे पहले कि मसीह आए और दिन निकले। परन्तु मैं हर विचारशील मनुष्य से पूछता हूँ कि क्या ऐसे "समय के चिन्ह" नहीं हैं जो गम्भीर ध्यान के योग्य हैं। मैं उससे कहता हूँ कि संसार में जो बातें हो रही हैं उन पर ध्यान दे, और भली-भाँति सोचे कि वे क्या सिखाने के लिए ठहराई गई हैं।

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