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यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
किस प्रकार, जब संत फ्रांसिस और भाई लियो मार्ग में जा रहे थे, संत फ्रांसिस ने उन्हें समझाया कि सिद्ध आनन्द किन बातों में है
एक दिन वसन्त ऋतु में जब संत फ्रांसिस भाई लियो के साथ पेरूजिया से स्वर्गदूतों की संत मरियम को जा रहे थे, और अति तीखी ठण्ड उन्हें बहुत कष्ट दे रही थी, तो उन्होंने भाई लियो को, जो आगे-आगे चल रहे थे, पुकारा और यों कहा: “भाई लियो, चाहे छोटे भाई (फ़्रायर माइनर) सारे संसार में पवित्रता और सच्ची उन्नति के बड़े आदर्श हों, तौभी यह लिख लो और यत्न से ध्यान रखो कि सिद्ध आनन्द उसमें नहीं है।” और थोड़ा आगे जाकर संत फ्रांसिस ने दूसरी बार पुकारा: “हे भाई लियो, चाहे छोटे भाई अन्धों को दृष्टि दें, टेढ़ों को सीधा करें, दुष्टात्माओं को निकालें, बहरों को सुनने, लँगड़ों को चलने और गूँगों को बोलने की शक्ति दें, और (इससे भी बड़ा) उन्हें जिला उठाएँ जो चार दिन से मरे हुए हों, तौभी लिखो कि सिद्ध आनन्द इसमें नहीं है।” और थोड़ा आगे जाकर उन्होंने ऊँचे शब्द से पुकारा: “हे भाई लियो, यदि छोटा भाई सब भाषाएँ और सब विद्याएँ और सारा पवित्रशास्त्र जानता हो, यहाँ तक कि वह भविष्यद्वाणी कर सके और न केवल आनेवाली बातें, वरन् विवेकों और आत्माओं के भेद भी प्रकट कर सके, तौभी लिखो कि सिद्ध आनन्द उसमें नहीं है।” और थोड़ा और आगे जाकर संत फ्रांसिस ने एक बार फिर ऊँचे शब्द से पुकारा: “हे भाई लियो, तू परमेश्वर की छोटी भेड़, चाहे छोटा भाई स्वर्गदूत की जीभ से बोले, और तारों की चाल और जड़ी-बूटियों के गुण जानता हो; और चाहे पृथ्वी का सारा खज़ाना उस पर प्रकट हो जाए और वह पक्षियों के, और मछलियों के, और सब पशुओं के, और मनुष्यों के, और पेड़ों के, और पत्थरों के, और जड़ों के, और जल के गुणों को समझता हो, तौभी लिखो कि सिद्ध आनन्द उसमें नहीं है।” और थोड़ा और आगे जाकर संत फ्रांसिस ने ऊँचे शब्द से पुकारा: “हे भाई लियो, चाहे छोटा भाई ऐसा अच्छा प्रचार कर सके कि सब अविश्वासियों को मसीह के विश्वास में ले आए, तौभी लिखो कि सिद्ध आनन्द उसमें नहीं है।” और जब बात करने की यह रीति पूरे दो मील तक चलती रही, तो भाई लियो ने बड़े अचम्भे के साथ उनसे विनती करके कहा: “हे पिता, मैं परमेश्वर के नाम से आपसे विनती करता हूँ कि मुझे बताइए कि सिद्ध आनन्द किसमें है।” और संत फ्रांसिस ने यों उत्तर दिया: “जब हम स्वर्गदूतों की संत मरियम में पहुँचें, और जैसे हम हैं वैसे ही वर्षा से पूरी तरह भीगे हुए, ठण्ड से ठिठुरे हुए, कीचड़ से सने हुए और भूख से पीड़ित हों, और घर के द्वार को खटखटाएँ; और द्वारपाल क्रोध में आकर कहे: ‘तुम कौन हो?’ और हम कहें: ‘हम तुम्हारे भाइयों में से दो हैं;’ और वह कहे: ‘तुम सच्चे मनुष्य नहीं हो; वरन् तुम दो ठग हो जो संसार को धोखा देते और कंगालों की भिक्षा लूटते हुए इधर-उधर मारे-मारे फिरते हो; चले जाओ यहाँ से;’ और इस पर वह द्वार बन्द कर दे और हमें रात होने तक बाहर बर्फ़ और वर्षा में, ठण्ड में और भूखे खड़े रहने दे; यदि उस समय हम ऐसे अन्याय, ऐसी क्रूरता और ऐसे तिरस्कार को बिना व्याकुल हुए और बिना उसके विरुद्ध कुड़कुड़ाए धीरज से सह लें; और दीनता और प्रेम के साथ यह सोचें कि यह द्वारपाल हमें भली-भाँति जानता है और परमेश्वर ही उससे हमारे विरुद्ध बुलवा रहा है; तो हे भाई लियो, लिखो कि सिद्ध आनन्द इसमें है। और यदि हम खटखटाते ही रहें और वह क्रोध से भरा हुआ बाहर निकल आए और हमें ढीठ बदमाश समझकर गालियों और घूँसों के साथ भगा दे और कहे: ‘यहाँ से चले जाओ, अति नीच चोरो, कंगालखाने को जाओ, क्योंकि यहाँ तुम्हें न भोजन मिलेगा न ठिकाना;’ यदि हम यह सब धीरज, आनन्द और प्रेम के साथ सह लें, तो हे भाई लियो, लिखो कि सिद्ध आनन्द इसमें है। और यदि हम भूख और ठण्ड और रात से विवश होकर फिर भी खटखटाएँ और पुकारें और बहुत रो-रोकर परमेश्वर के प्रेम के लिये उससे विनती करें कि वह केवल द्वार खोलकर हमें भीतर आने दे; और वह और भी अधिक क्रोधित होकर कहे: ‘ये ढीठ बदमाश हैं, मैं इन्हें जैसा ये योग्य हैं वैसा ही अच्छा बदला दूँगा,’ और एक गाँठदार लाठी लेकर बाहर झपटे और हमें टोप से पकड़कर भूमि पर पटक दे और बर्फ़ में लुढ़काए और उस लाठी की सब गाँठों से हमें मारे; यदि हम मसीह धन्य के दुःखों को सोचते हुए, जिन्हें उसके प्रेम के लिये हमें सहना चाहिए, इन सब बातों को धीरज और आनन्द के साथ सह लें; तो हे भाई लियो, लिखो कि यहाँ और इसी में सिद्ध आनन्द है; अब, भाई लियो, सारी बात का निष्कर्ष सुनो: पवित्र आत्मा के उन सब अनुग्रहों और वरदानों से बढ़कर, जो मसीह अपने प्रियों को देता है, यह है कि मनुष्य अपने आप पर जय पाए, और मसीह के प्रेम के लिये स्वेच्छा से दुःख, अपमान, लज्जा और अभाव सहे; क्योंकि परमेश्वर के अन्य सब वरदानों पर हम घमण्ड नहीं कर सकते, इसलिये कि वे हमारे नहीं, परमेश्वर के हैं; इसी कारण प्रेरित कहता है: तेरे पास क्या है जो तू ने परमेश्वर से नहीं पाया? और जब तू ने उसी से पाया है, तो ऐसा घमण्ड क्यों करता है, मानो वह तुझे अपने आप से मिला हो? परन्तु क्लेश और दुःख के क्रूस पर हम घमण्ड कर सकते हैं, क्योंकि यह हमारा है; और इसलिये प्रेरित कहता है, ऐसा न हो कि मैं हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस को छोड़ और किसी बात का घमण्ड करूँ।”
