अध्याय 13

निन्दक की प्रस्तावना

Calvin's Calvinism · John Calvin

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निन्दक की प्रस्तावना

नि न्द क की

प्रस्तावना,

कुछ अनुच्छेदों (अर्थात् निन्दाओं) की,

जो कथित रूप से

जॉन कैल्विन की रचनाओं से उद्धृत हैं।

जॉन कैल्विन, आप एक ऐसे मनुष्य हैं जो अब लगभग सारे संसार में जाने जाते हैं। आपके सिद्धान्त के अनेक समर्थक और पक्षधर हैं, परन्तु अनेक शत्रु और विरोधी भी हैं। मैं स्वयं उन लोगों में से हूँ जो हार्दिक इच्छा रखते हैं कि एक ही सिद्धान्त हो, जैसे सत्य एक ही है, और जो बहुत चाहते हैं कि यदि सम्भव हो तो सब मनुष्य उसी एक सिद्धान्त में एकमत हों; इसलिए मैंने सोचा कि जो बातें आपके सिद्धान्त के विरुद्ध सर्वत्र कही जा रही हैं, उनकी सूचना आपको मित्रभाव से दी जानी चाहिए; ताकि यदि वे झूठी हों तो आप उनका खण्डन कर सकें और अपना खण्डन मेरे पास भेजने का अवसर पा सकें; जिससे मैं आपके विरोधियों के सामने खड़ा हो सकूँ। और मैं आग्रह करता हूँ कि आप ऐसे तर्कों का अपना खण्डन ऐसी रीति से तैयार करें जो साधारण लोगों को स्पष्ट समझ में आ सके।

निस्सन्देह ऐसे अनेक लोग हैं जो आपसे मतभेद रखते हैं, और वह भी अनेक बातों में। फिर भी इस समय मैं अन्य सब प्रश्नों को दूसरे समयों के लिए छोड़ता हूँ, और उस एक महान विषय पर आपसे बात करूँगा: भाग्य या पूर्वनियति का सिद्धान्त। क्योंकि यही एक प्रश्न कलीसिया में भारी उथल-पुथल मचा रहा है, और मैं उस सबको शान्त होते देखकर प्रसन्न होऊँगा; और इस महान विषय पर आपके विरोधियों के तर्क इतने सबल हैं कि आपकी अब तक प्रकाशित किसी भी पुस्तक के आधार पर उनका खण्डन नहीं किया जा सकता।

इस विशाल प्रश्न से सम्बन्धित कुछ अनुच्छेद आपकी पुस्तकों से निकाले गए हैं और चारों ओर फैलाए गए हैं। इन अनुच्छेदों को मैं अब बिना किसी क्रम के आपके सामने रखूँगा, और प्रत्येक अनुच्छेद के नीचे वे तर्क जोड़ूँगा जो आपके विरोधी उसके विरुद्ध देते हैं। इस व्यवस्था से आप तुरन्त देख लेंगे कि आपसे कैसे उत्तर की अपेक्षा की जाती है।

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