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शीर्षक पृष्ठ और विषय-सूची
कैल्विन का कैल्विनवाद
"परमेश्वर की अनन्त पूर्वनियति"
और
"परमेश्वर का गुप्त विधान"
— जॉन कैल्विन द्वारा
हेनरी कोल द्वारा अनूदित
विषय-सूची
परमेश्वर की अनन्त पूर्वनियति
अनुवादक की प्रस्तावना
सहमति-पत्र
समर्पण-प्रस्तावना
खण्ड I अनन्त पूर्वनियति।
खण्ड II अनन्त पूर्वनियति।
खण्ड III अनन्त पूर्वनियति।
खण्ड IV अनन्त पूर्वनियति।
खण्ड V अनन्त पूर्वनियति।
खण्ड VI अनन्त पूर्वनियति।
खण्ड VII. "एक संक्षिप्त उत्तर.. ."
परमेश्वर के गुप्त विधान का समर्थन
अनुवादक की प्रस्तावना
जॉन कैल्विन की भूमिका
निन्दक की प्रस्तावना
निन्दक की प्रस्तावना का जॉन कैल्विन द्वारा उत्तर
भाग I "परमेश्वर ने संसार के अधिकांश भाग को विनाश के लिए रचा।"
भाग II परमेश्वर ने आदम को भी केवल दण्ड के लिए ही पूर्वनिर्धारित नहीं किया, वरन् उस दण्ड के कारणों के लिए भी।
भाग III जो पाप किए जाते हैं, वे केवल परमेश्वर की अनुमति से ही नहीं, वरन् उसकी इच्छा से भी किए जाते हैं।
भाग IV किसी भी मनुष्य द्वारा किए जानेवाले सब अपराध....
भाग V परमेश्वर की इच्छा के हस्तक्षेप के बिना न कोई व्यभिचार, न चोरी और न हत्या होती है।
भाग VI पवित्रशास्त्र खुले रूप से गवाही देता है कि बुरे कार्य केवल इच्छा से ही नहीं, वरन् नियत भी किए जाते हैं।
भाग VII दुष्ट लोग अपनी दुष्टता के कार्यों से अपना नहीं, वरन् परमेश्वर का ही कार्य अधिक करते हैं।
भाग VIII फिरौन का कठोर किया जाना ... परमेश्वर का कार्य था।
भाग IX मनुष्यों के मन की सारी कठोरता का सर्वोच्च कारण परमेश्वर की इच्छा है।
भाग X शैतान परमेश्वर की आज्ञा से झूठा आत्मा बनता है।
भाग XI जो बुराई करते हैं, उन्हें परमेश्वर ही इच्छा देता है।
भाग XII दुष्ट लोग अपनी दुष्टता के कार्यों से अपना नहीं, वरन् परमेश्वर का ही कार्य अधिक करते हैं।
भाग XIII हम (परमेश्वर के सम्बन्ध में) अनिवार्यता से पाप करते हैं।
