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शैतान परमेश्वर की आज्ञा से झूठा है
अनुच्छेद X।
(अर्थात् निन्दा X।)
शैतान परमेश्वर की आज्ञा से झूठा है।
हे कैल्विन, इस दसवें अनुच्छेद के विरुद्ध, जो तेरी शिक्षा का एक भाग है, तेरे विरोधी यों तर्क करते हैं: यदि शैतान परमेश्वर की आज्ञा से झूठा है, तो झूठा होना न्यायसंगत है, और इसलिए शैतान न्यायी है। क्योंकि यदि झूठ की आज्ञा देना न्यायसंगत है (और यदि कैल्विन सच कहता है, तो है), तो झूठ का पालन करना भी आज्ञा के न्याय के कारण न्यायसंगत माना जाना चाहिए। और फिर, जैसे अन्यायपूर्ण आज्ञा का पालन करना अन्याय है, वैसे ही न्यायपूर्ण आज्ञा का पालन करना न्याय है। यदि इस पर कैल्विन उत्तर दे कि शैतान आज्ञाकारी होकर झूठा नहीं है—अर्थात् केवल परमेश्वर की आज्ञाकारिता के कारण नहीं—तो हम कैल्विन के अपने ही विचारों के अनुसार उत्तर देते हैं कि शैतान का झूठा होना, पर परमेश्वर की आज्ञाकारिता के कारण नहीं, यह भी परमेश्वर की आज्ञा से ही है।
अनुच्छेद X पर जॉन कैल्विन का उत्तर
और उस पर निन्दक के अवलोकनों, आदि पर।
अब ज़रा विचार तो करो कि तुम किस प्रकार के मनुष्य पर अपने बाण चला रहे हो! क्योंकि जिस कथन पर तुम अपना शस्त्र साधते हो वह मेरा नहीं; वह स्वयं परमेश्वर के आत्मा से निकला है। पवित्रशास्त्र के शब्द ये ही हैं, "मैं किसको भेजूँ, और हमारी ओर से कौन जाएगा?" इसके तुरन्त बाद परमेश्वर शैतान को बुलाता है; और उसे आज्ञा देता है कि वह जाए और सब भविष्यद्वक्ताओं के मुँह में झूठ बोलनेवाली आत्मा बने, ताकि वह अहाब को धोखा दे (1 राजा 22:2-22)। तो अब, कुत्ते जैसे हो, जितने ऊँचे स्वर से चाहो भौंको। तुम अपनी गालियों से परमेश्वर की महिमा को उतना ही धुँधला नहीं कर सकोगे जितना सूर्य के जलते मुख पर थूककर उसके तेज को धुँधला नहीं कर सकते। परन्तु यहाँ फिर मैं अपने शब्दों के बदले अगस्तीन के शब्द काम में लेता हूँ, "जब परमेश्वर साक्षी देता है कि झूठे भविष्यद्वक्ता उसकी ओर से भेजे जाते हैं, और कि उन पर उसका हाथ है, ताकि वे मनुष्यों या राजाओं को धोखा दें, तो यह उसकी केवल सहनशीलता या अनुमति का कार्य नहीं, वरन् उसकी प्रभावकारी सामर्थ्य का प्रयोग है।" जहाँ तक तेरी इस बकबक का सम्बन्ध है कि शैतान परमेश्वर की आज्ञा से, उस आज्ञा की आज्ञाकारिता के कारण झूठा नहीं है, यह कोई आश्चर्य नहीं कि तू अपने आप को असंख्य गाँठों और जालों में उलझाता है, जब तू यह मानने से इनकार करता है कि परमेश्वर शैतान के कार्यों को अपनी सर्वोच्च इच्छा के अनुसार अकथनीय रीति से काम में लाता है, ताकि उनके द्वारा अपने परम शासन का न्याय और धार्मिकता प्रकट करे। फिर भी वह उन दुष्ट साधनों को, जिन्हें वह काम में लाता है, उस पाप और दोष से, जो उन्हीं का है, कभी मुक्त नहीं करता; ऐसे साधन जिन्हें उसकी सामर्थ्य अपनी आज्ञाओं को पूरा करने के लिए विवश करती है, और किसी अर्थ में उनकी अपनी इच्छाओं के भी विरुद्ध। इसलिए यद्यपि तेरा कड़वा द्वेष सौ बार चिल्लाए, तो भी जो मैं कहता हूँ वह कैल्विन की वाणी नहीं, वरन् परमेश्वर की वाणी है, जो कहता है, "मैंने अपने पवित्र लोगों को आज्ञा दी है।" इसलिए यदि तू कल्पना करता है कि परमेश्वर अपने ऊपर उससे अधिक लेता है जितना उसे लेना चाहिए, तो वह देर-सवेर अपने आप को तेरे जैसे सब आरोपों से निर्दोष और सही ठहराने, और तेरे जैसे सब आरोप लगानेवालों से पलटा लेने का उपाय निकाल लेगा।
