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यहोशू 13
यहोशू 13:1-14
1. यहोशू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया था; और यहोवा ने उससे कहा, तू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया है, और बहुत सा देश रह गया है जिसे अधिकार में लेना अभी शेष है।
1. Quum autem senuisset Josue, et venisset in dies, dixit ei Jehova, Tu senuisti, venisti in dies, et multa terra admodum superest ad possidendum.
2. जो देश रह गया है वह यह है: पलिश्तियों का सारा प्रान्त, और सारा गशूरी देश,
2. Haec est terra quae residua est, omnes limites Philisthinorum, et omnis Gessuri.
3. मिस्र के साम्हने के शीहोर से लेकर उत्तर की ओर एक्रोन के सिवाने तक, जो कनानियों का भाग गिना जाता है; पलिश्तियों के पाँचों सरदार, अर्थात् अज्जाती, अशदोदी, अश्कलोनी, गती और एक्रोनी; और अव्वी भी;
3. A Nilo qui est e regione AEgypti usque ad terminum Ecron, qui est ab aquilone, quae Chananeae reputatur, quinque principatus Philisthinorum, Azathaeus, Asdodaeus, Ascalonaeus, Gitthaeus et Ekronaeus et Auaei.
4. दक्षिण की ओर से कनानियों का सारा देश, और मारा जो सीदोनियों के पास है, अपेक तक, अर्थात् एमोरियों के सिवाने तक;
4. Ab austro universa terra Chananaei et Meara, quae est Sidoniorum usque ad Paera, usque ad terminum Aemorrhaei.
5. और गबालियों का देश, और सूर्योदय की ओर सारा लबानोन, हेर्मोन पर्वत के नीचे के बालगाद से लेकर हमात की घाटी तक;
5. Et terra Gibli, et totus Libanus ad ortum solis a Baal-gad sub monte Hermon, donec pervenias Hemath.
6. लबानोन से लेकर मिस्रपोतमैम तक पहाड़ी देश के सब निवासी, अर्थात् सब सीदोनी; उनको मैं इस्राएलियों के साम्हने से निकाल दूँगा; केवल तू मेरी आज्ञा के अनुसार चिट्ठी डालकर उसे इस्राएलियों का भाग होने के लिये बाँट दे।
6. Omnes habitotores montis a Libano usque ad fervores aquarum: omnes Sidonios ego expellam a facie filiorum Israel: tantum jacias sortem, ut sit in haereditatem Israel, sicut praecepi tibi.
7. इसलिए अब तू इस देश को नौ गोत्रों और मनश्शे के आधे गोत्र को उनका भाग होने के लिये बाँट दे;
7. Nunc ergo divide terram istam in haereditatem novem tribubus, et dimidiae tribui Manasse.
8. जिसके साथ रूबेनियों और गादियों ने अपना वह भाग पा लिया है जिसे मूसा ने उन्हें यरदन के पार पूर्व की ओर दिया था, जैसा यहोवा के दास मूसा ने उन्हें दिया था;
8. Praeter eam Rubenitae, et Gaditae acceperunt partes suas, quas dedit iis Moses trans Jordanem ad orientem, sicut dedit eis Moses servus Jehovae.
9. अर्थात् अर्नोन नाले के किनारे के अरोएर से लेकर, और उस नगर से जो नाले के बीच में है, और दीबोन तक मेदबा का सारा चौरस देश;
9. Ab Aroer quae est juxta ripam fluminis Arnon, et urbem ipsam quae est in medio vallis, et totam planitiem Medeba usque ad Dibon.
10. और एमोरियों के राजा सीहोन के, जो हेशबोन में राज्य करता था, सब नगर अम्मोनियों के सिवाने तक;
10. Et omnes urbes Sihon regis Aemorrhaei, qui regnabat in Hesbon, usque ad terminum filiorum Ammon.
11. और गिलाद, और गशूरियों और माकियों का सिवाना, और सारा हेर्मोन पर्वत, और सल्का तक सारा बाशान;
11. Et Gilead et terminum Gessuri, et Maachati, et totum montem Hermon, et universum Basan usque ad Salchah.
12. बाशान में ओग का सारा राज्य, जो अश्तारोत और एद्रेई में राज्य करता था, और जो रपाइयों में से बचे हुओं में रह गया था; क्योंकि इन्हीं को मूसा ने मारकर निकाल दिया था।
12. Universum regnum Og in Basan, qui regnabat in Astaroth, et in Edrei: hic supererat ex residuo Rephaim, quos percussit Moses et expulit.
13. तौभी इस्राएलियों ने गशूरियों और माकियों को न निकाला; इसलिए गशूरी और माकी इस्राएलियों के बीच आज तक रहते हैं।
13. Non expulerunt autem filii Israel Gessuri et Maachati: propterea habitavit Gessur et Maachat in medio Israel usque ad hunc diem.
14. केवल लेवी के गोत्र को उसने कोई भाग न दिया; इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के हव्य ही उनका भाग हैं, जैसा उसने उनसे कहा था।
14. Tantum tribui Levi non dedit haereditatem, sacrificia Jehovae Dei Israel sunt hereditas ejus, quemadmodum loquutus est de ea.
1. “यहोशू बूढ़ा हो गया था” इत्यादि। क्योंकि हम ऊपर देख चुके हैं कि इकतीस राजाओं के वश में किए जाने से देश में शान्ति स्थापित हो गई थी, इसलिए सम्भव है कि अब थकान से विश्राम पाने के लिये कुछ समय तक युद्ध रुका रहा, ताकि निरन्तर सेवा से प्रजा थककर चूर न हो जाए। और इसका उचित रूप से दोष भी नहीं लगाया जा सकता था, बशर्ते वे केवल कुछ समय के लिये विश्राम करते और अपने सामने रखे गए लक्ष्य पर सदा दृष्टि लगाए रहते। परन्तु कहीं ऐसा न हो कि जो विराम नया बल संचित करने के लिये दिया गया था वह आलस्य का अवसर बन जाए, इसलिए प्रभु उन्हें आगे बढ़ने को उकसाने के लिये एक नया अंकुश काम में लाता है। क्योंकि वह आज्ञा देता है कि सारा निज भाग गोत्रों में बाँटा जाए, और भूमध्य सागर का वह सारा तटवर्ती प्रदेश, जो शत्रु के अधिकार में था, चिट्ठी में डाला जाए। ऐसा बँटवारा सचमुच बेतुका और हास्यास्पद, वरन् निरा उपहास प्रतीत हो सकता था, क्योंकि वे दूसरों की सम्पत्ति को आपस में ऐसे बाँट रहे थे मानो वह उनकी अपनी हो। परन्तु प्रभु ने उत्तम कारणों से ऐसा ठहराया। पहला, वे प्रतिज्ञा की आशा को त्यागकर अपनी वर्तमान दशा से सन्तुष्ट हो सकते थे। वरन्, यद्यपि चिट्ठी डाले जाने के पश्चात् जो कुछ परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की थी उस सब के लिये उनके पास पूरी जमानत थी, तौभी उन्होंने अपनी कायरता से, जहाँ तक उनके बस में था, उसके वचनों की विश्वसनीयता को नष्ट कर दिया। और यह उनके किसी गुण के कारण नहीं था कि उसकी सच्चाई कटी-छँटी और अंग-भंग होकर न पड़ी रही। इसलिए चिट्ठी के द्वारा किया गया बँटवारा उनके लिये निश्चित अधिकार का बयाना ठहरना था, जिससे वे उसके लिये सदा तत्पर बने रहें। दूसरा, जिनका भाग शत्रु के देश में पड़ा, वे इस बीच अपने निज भाग से बाहर अनिश्चित आतिथ्य पर परदेशियों के समान रहते हुए, दूसरों को आगे बढ़ने के लिये उकसानेवाले एक प्रकार के कार्य-निरीक्षकों का काम करते होंगे। और जो कुछ परमेश्वर की ओर से उन्हें सौंपा गया था उसकी उपेक्षा करना और उसे छोड़ देना निश्चय ही घोर जड़ता का लक्षण होता।
“बूढ़ा और बहुत उम्र का” — ये शब्द पुनरुक्ति नहीं हैं, वरन् जीवन की उस अवस्था को ठीक-ठीक प्रकट करते हैं, उस विभाजन के अनुसार जो यहूदियों में लम्बे समय से प्रचलित था, और जो कदाचित् इस आरम्भिक काल में भी उनके लिये अपरिचित न रहा हो। इस विभाजन के अनुसार बुढ़ापे की तीन अवस्थाएँ थीं — पहली साठवें वर्ष से सत्तरवें वर्ष तक, जो ठीक-ठीक कहलानेवाले बुढ़ापे का आरम्भ थी; दूसरी सत्तरवें से अस्सीवें वर्ष तक, जो पक्के बालों की अथवा श्वेत-केशी अवस्था कहलाती थी; और तीसरी अस्सीवें वर्ष से जीवन के अन्त तक, जो ढली हुई अवस्था कहलाती थी, और जिस मनुष्य ने उसे प्राप्त कर लिया हो उसके विषय में कहा जाता था कि वह बहुत उम्र का हो गया है। इस अन्तिम अवस्था तक यहोशू अब पहुँच चुका था। — सं.
अब हम देखते हैं कि किस उद्देश्य से सारे देश का चिट्ठी डालकर बाँटा जाना, और प्रत्येक गोत्र का निवास-स्थान ठहराया जाना आवश्यक था। यह भी आवश्यक था कि यह काम यहोशू के जीवित रहते ही हो, क्योंकि उसकी मृत्यु के पश्चात् इस्राएली आज्ञापालन की ओर कम झुकते, क्योंकि उसके उत्तराधिकारियों में से किसी के पास इतने कठिन कार्य को पूरा करने के लिये पर्याप्त अधिकार न था। इसके अतिरिक्त, क्योंकि परमेश्वर मूसा के मुख से पहले ही इसे करने की आज्ञा दे चुका था, यदि यहोशू उसे सौंपा गया यह काम पूरा न करता, तो वैध सेवक के उठा लिए जाने पर सारा काम नष्ट हो सकता था। यद्यपि ठीक समय नहीं बताया गया, तौभी सम्भव है कि क्योंकि इसकी कोई आशा न थी कि यहोशू के जीवित रहते प्रजा अपने सिवानों को और विस्तृत करने के विचार से फिर हथियार उठाएगी, इसलिए उसने तभी देश को बाँटने का काम हाथ में लिया, मानो वह एक गम्भीर साक्षी के द्वारा घोषणा और प्रतिज्ञा कर रहा हो कि यह बँटवारा निश्चय ही पूरा किया जाएगा, क्योंकि किसी मनुष्य की मृत्यु के कारण परमेश्वर की सच्चाई विफल नहीं हो सकती थी।
2. “जो देश रह गया है” इत्यादि। परमेश्वर के द्वारा बहुत पहले ठहराए गए प्राचीन सिवाने स्मरण दिलाए जाते हैं, ताकि यहोशू और प्रजा को पूरा निश्चय हो जाए कि अब्राहम के साथ बाँधी गई वाचा हर अंश में पूरी होगी। इसलिए उन्हें आज्ञा दी जाती है कि वे उन भागों को प्राप्त करने का यत्न करें जो अभी अधिकार में लिए जाने को शेष हैं। यदि हम इस दृढ़ता को उस बात पर व्यावहारिक रूप से लागू करें जो हम से अपेक्षित है, तो यह निष्कर्ष उचित ठहरेगा, अर्थात् यह कि हम पीछे की बातों को भूलकर आगे की बातों की ओर बढ़ते जाएँ, और निशाने की ओर दौड़े चले जाएँ, ताकि अपनी ऊँची बुलाहट का इनाम पाएँ। (फिलिप्पियों 3:14।) क्योंकि लक्ष्य तक पहुँचने का यत्न किए बिना दौड़ में दौड़ना किसी काम का न होगा।
सिवाना उस नदी से आरम्भ होता था जो समुद्र की ओर मिस्र को पवित्र देश से अलग करती थी, और वह अधिकतर सम्भावना में नील नदी थी, जैसा कि हम प्रचलित मत के अनुसार उसका अर्थ लगाते हैं, अथवा एक छोटी धारा जो रिनोकोर्निया नगर के पास से बहती थी, जिसे बहुत लोग रफ़िया अथवा रफ़ाने मानते हैं। यह तो निर्विवाद है कि उस दिशा से आरम्भ होनेवाला प्रजा का निज भाग मिस्र से सटा हुआ था। परन्तु यद्यपि मैंने अधिकांश व्याख्याकारों के इस मत का अनुसरण किया है कि सिवाने कम जोते-बोए गए और एक प्रकार से मरुस्थल-से देश से आगे नहीं बढ़ाए गए, ऐसा न हो कि अधिक निकटता मिस्रियों के साथ अत्यधिक घनिष्ठता उत्पन्न करके हानिकारक सिद्ध हो, तौभी मैं किसी भिन्न मत को कदापि अस्वीकार नहीं करता।
मूल पाठ में यह हवाला फिलिप्पियों 2:14 दिया गया था, जो स्पष्टतः छपाई की भूल है। —fj.
कैल्विन के समय में सामान्यतः माना जानेवाला यह मत, कि यहाँ अभिप्रेत नदी नील, अथवा कम से कम उसकी कोई शाखा है, कुछ तो शब्द सीहोर के अर्थ पर आधारित था, जिसका शाब्दिक अर्थ काला है, और जिसे व्याख्याकारों ने गँदला के समानार्थी बताया, जो शब्द नील पर ठीक-ठीक लागू होता है; और कुछ यिर्मयाह के एक खण्ड पर, (यिर्मयाह 2:18) जिसमें भविष्यद्वक्ता पूछता है, “सीहोर का जल पीने के लिये तुझे मिस्र के मार्ग से क्या काम?” — यहाँ सीहोर निःसन्देह नील के व्यक्तिवाचक नाम के रूप में प्रयुक्त हुआ है। कैल्विन द्वारा उल्लिखित दूसरा मत अब लगभग सर्वत्र एकमात्र ग्राह्य मत माना जाता है। यहाँ सीहोर का जो वर्णन दिया गया है, (यहोशू 13:3,) कि वह “मिस्र के साम्हने” है, वह भी नील पर सर्वथा लागू नहीं होता, जो मिस्र के साम्हने, अर्थात् उसकी सीमाओं पर होने के बदले, लगभग उसके बीचों-बीच बहती है। जिस नदी का अभिप्राय है और जिसका स्पष्ट उल्लेख मूसा (गिनती 34:5) और यहोशू (यहोशू 15:4) दोनों ने मिस्र के नाले के नाम से किया है, वह अब वादी अल-अरीश कहलाती है, जो उसके मुहाने के निकट स्थित उसी नाम के नगर के कारण पड़ा, और जो प्राचीन रिनोकोलूरा, अथवा कदाचित् अधिक शुद्ध रूप में रिनोकोरूरा, के स्थान से दूर नहीं है। कैल्विन इसे रिनोकोर्निया लिखता है, जो, यदि फ्रांसीसी अनुवाद में भी यही न दोहराया गया होता, तो छपाई की भूल प्रतीत हो सकता था। — सं.
तीसरा पद एक प्रश्न उठाता है। यह कहे जाने के पश्चात् कि समुद्र-तट की ओर के प्रदेश पाँच थे, एक छठा जोड़ा जाता है, अर्थात् अव्वियों का। कुछ लोग सोचते हैं कि उसे पाँचों में इसलिए नहीं गिना गया कि वह एक नगण्य प्रान्त था। परन्तु मैं चाहूँगा कि मेरे पाठक विचार करें कि कहीं यहाँ एक स्वतन्त्र प्रजा, जो अपनी स्वामी आप थी, और राजाओं द्वारा शासित पाँच प्रदेशों के बीच अप्रत्यक्ष विरोध तो नहीं दिखाया गया। इसलिए अव्वी, जिनकी परिस्थिति भिन्न थी, अलग से उल्लिखित हैं, और भेद दिखाने के लिये बहुवचन का प्रयोग किया गया है। राज्यों की गणना में वे अपनी प्रतिष्ठा या सम्पन्नता के क्रम में नहीं रखे गए, वरन् मिस्र से निकट होने के कारण पहला स्थान अज्जा को दिया गया है, और यही बात अशदोद तथा अन्य पर भी लागू होती है।
सेप्टुआजिंट के अनुवादक, अपनी सामान्य रीति के अनुसार, इब्रानी (ע ऐन) को प्रकट करने के लिये यूनानी γ (गामा) का प्रयोग करते हैं, और इस प्रकार जो इब्रानी में अज्जा है उसे गाज़ा नाम देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे वे अमोर्रा को गमोर्रा में बदल देते हैं। इससे उन लोगों की भूल भली-भाँति प्रकट हो जाती है जो समझते हैं कि उसका नाम फ़ारसी है, और उसके धन से निकला है, क्योंकि कैम्बिसीस ने, जब वह यूनान में युद्ध करने को था, उसे अपने कोष का भण्डार-स्थान बनाया था। परन्तु क्योंकि प्रेरितों के काम में (प्रेरितों के काम 8:26) लूका “गाज़ा जो जंगल में है” का उल्लेख करता है, इससे प्रतीत होता है कि उसी नाम का एक नगर उसके निकट, परन्तु भिन्न स्थान पर, बसाया गया था। अशदोद वही है जिसे यूनानी अजोतुस कहते थे। यह सारा भू-भाग, जो या तो समुद्र-तट पर है या उसकी ओर झुका हुआ है, सीदोन तक फैला है। और कुछ लोग ऐसे हैं जो सोचते हैं कि फ़ीनीकी लोग कभी गाज़ा और अजोतुस दोनों के स्वामी थे। लबानोन कहाँ तक फैला है, यह भली-भाँति ज्ञात है। क्योंकि कभी-कभी वह हेर्मोन पर्वत को भी सम्मिलित करता है; और अपनी लम्बाई के कारण उसका एक भाग अन्तिलिबानुस कहलाता है। हेर्मोन पर्वत के विषय में पाठक व्यवस्थाविवरण के चौथे अध्याय में विचार पाएँगे। पूर्व की ओर हमात है, जो सीरिया का अन्ताकिया भी है।
यहाँ यह मान लिया गया है कि इब्रानी अक्षर ऐन से प्रकट होनेवाली एकमात्र वास्तविक ध्वनि अ की है। क्या यह तथ्य है? इसके विपरीत, गेसेनियस, इसके आधुनिक यहूदी उच्चारण को अनुनासिक ग्न अथवा ङ के रूप में निश्चय ही अशुद्ध कहकर अस्वीकार करते हुए, कहता है कि इसकी सबसे कठोर ध्वनि ग की है, और इसके लिये वह गाज़ा और गमोर्रा का हवाला देता है, वही दो शब्द जिन्हें कैल्विन ने इसके विपरीत बात के उदाहरण में प्रस्तुत किया है। देखिए गेसेनियस का इब्रानी व्याकरण। (बैग्स्टर, 1852।)
फ्रांसीसी अनुवाद इतना और जोड़ता है, “Et qu'il signifie Richesses;” “और कि इसका अर्थ धन है।” — सं.
फ्रांसीसी में, “Quant au Liban, c'est une chose assez notoire quelle longeur d'etendue il a;” “जहाँ तक लबानोन की बात है, यह भली-भाँति ज्ञात है कि उसका विस्तार कितना लम्बा है।”
यह निश्चय ही अशुद्ध है। अन्तिलिबानुस को यह नाम उसकी लम्बाई के कारण नहीं, वरन् इस कारण मिला कि वह लिबानुस, अर्थात् मूल लबानोन, के साम्हने और उसके समानान्तर एक पर्वत-श्रेणी है, जिससे वह उस सुन्दर घाटी द्वारा अलग होती है जो यूनानियों और रोमियों में कोईले-सीरिया, अथवा ठीक-ठीक कहें तो कोईले (खोखली) सीरिया के नामों से प्रसिद्ध थी, और जिसे लियोन्टेस नदी सींचती है। — सं.
6. “पहाड़ी देश के सब निवासी” इत्यादि। यहोशू को फिर से चेतावनी दी जाती है कि यद्यपि इस्राएली अभी उन प्रदेशों के स्वामी नहीं हैं, तौभी वह बँटवारे को न टाले, वरन् परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर भरोसा रखे, क्योंकि यदि परिणाम के विषय में कुछ भी सन्देह होता तो इससे उसकी महिमा की हानिकारक रूप से घटती होती। इसलिए कहा जाता है: देश के बँटवारे में तू केवल अपना कर्तव्य कर; और जो कुछ अभी शत्रु के दृढ़ अधिकार में है उसे भी चिट्ठी से अलग न रख; क्योंकि जो मैंने प्रतिज्ञा की है उसे पूरा करना मेरा काम होगा। अतः आइए, हम सीखें कि कोई भी काम आरम्भ करते समय परमेश्वर के मुख के वचनों पर ऐसा निर्भर रहें कि कोई सन्देह हमें रोक न सके। सचमुच अपने लिये व्यर्थ आशाएँ गढ़ना हमारा काम नहीं है; परन्तु जब हमारा भरोसा प्रभु पर आधारित हो, तब हम केवल उसकी आज्ञाओं का पालन करें, और यह डरने का कोई कारण नहीं कि परिणाम हमें निराश करेगा।
इसके पश्चात् वह कनान देश को नौ गोत्रों और आधे गोत्र को सौंपता है, क्योंकि रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र का भाग यरदन के पार पहले ही ठहराया जा चुका था। यद्यपि इन शब्दों में, जिसे मूसा ने उन्हें दिया था, जैसा मूसा ने उन्हें दिया था, पुनरुक्ति-सी दिखाई देती है, तौभी इनमें कुछ भी व्यर्थ नहीं है, क्योंकि दूसरे उपवाक्य में उस दान की पुष्टि की गई है; मानो परमेश्वर आज्ञा दे रहा हो कि जो किया गया था वह स्थिर रखा जाए, अथवा दूसरे शब्दों में कह रहा हो, जैसा मूसा ने उन्हें वह देश दिया, वैसे ही वे उसके अधिकार में शान्ति से बने रहें। इसी कारण वह परमेश्वर के दास की उपाधि से भी विभूषित किया गया है, मानो यह कहा गया हो, जिस निर्णय को एक विश्वासयोग्य सेवक ने परमेश्वर के अधिकार से सुनाया है उसमें कोई हस्तक्षेप न करे। उन विवादों के विरुद्ध पहले से प्रबन्ध करना निश्चय ही आवश्यक था, जो अन्यथा प्रतिदिन उठ खड़े होते।
14. “केवल लेवी के गोत्र को” इत्यादि। यह अपवाद भी आवश्यक था, ऐसा न हो कि लेवीय यह दावा करें कि उन्हें अन्यायपूर्वक भाग से वंचित किया गया है, और इस प्रकार अपने अधिकार के विषय में बड़ा उपद्रव खड़ा करें। इसलिए वह उन्हें स्मरण दिलाता है कि इस भेद का कर्ता मूसा था, और साथ ही यह भी दिखाता है कि उनके पास यह शिकायत करने का कोई कारण नहीं कि उनके साथ किसी प्रकार का छल हुआ है, क्योंकि उन्हें एक उत्तम प्रतिफल दिया गया था। क्योंकि यद्यपि बलिदान लेवियों में समान रूप से नहीं बाँटे जाते थे, तौभी सब पहली उपज और दशमांशों के द्वारा उनकी जीविका का पर्याप्त प्रबन्ध किया गया था। इसके अतिरिक्त, जैसे परमेश्वर उन्हें पवित्र वस्तुओं का भार उठाने के लिये मज़दूरी के द्वारा आकर्षित करता है, वैसे ही वह प्रजा को भी यह घोषणा करके पवित्र भेंटें चुकाने में विश्वासयोग्य रहने का उपदेश देता है कि उनके बलिदान लेवियों का भरण-पोषण हैं।
सेप्टुआजिंट पद को संक्षिप्त करके और भिन्न विराम-चिह्न अपनाकर, दोनों प्रकार से, पुनरुक्ति के आभास से बचता है, और उसका अनुवाद इस प्रकार करता है: “रूबेन और गाद को प्रभु ने यरदन के उस पार (भाग) दिया; सूर्योदय की ओर यहोवा के दास मूसा ने उसे उन्हें दिया।” परन्तु सेप्टुआजिंट अनुवाद द्वारा किया गया यह एकमात्र परिवर्तन नहीं है। क्योंकि अभी उद्धृत पद के ठीक पहले वह निम्नलिखित शब्दों में एक और पद जोड़ देता है, “यरदन से लेकर पश्चिम की ओर महासागर तक तू उसे देना: महासागर दोनों गोत्रों और मनश्शे के आधे गोत्र का सिवाना होगा।” — सं.
इस पद के अन्त में सेप्टुआजिंट निम्नलिखित उपवाक्य जोड़ता है: “καὶοὖτος ὁ καταμερισμὸς ὅν κατεμέρισε Μωνσὢς τοῖς υἱοῖς Ισραὴλ ἐν Αραβὼθ Μωὰβ ἐν τῷ πέραν τοῦΙορδάνου κατὰΙεριχὼ;” “और यह वह बँटवारा है जो मूसा ने यरदन के पार यरीहो के साम्हने अराबोत-मोआब में इस्राएलियों के लिये किया।” — सं.
यहोशू 13:15-33
15. मूसा ने रूबेनियों के गोत्र को उनके कुलों के अनुसार भाग दिया।
15. Dedit ergo Moses tribui filiorum Ruben per familias suas:
16. और उनका सिवाना अरोएर से था, जो अर्नोन नाले के किनारे पर है, और उस नगर से जो नाले के बीच में है, और मेदबा के पास का सारा चौरस देश;
16. Fuitque illis terminus ab Aroer, quae est juxta ripam torrentis Arnon, et urbs quae est in medio vallis, et universa planities quae est juxta Medeba.
17. हेशबोन और उसके सब नगर जो चौरस देश में हैं; दीबोन, और बामोतबाल, और बेतबालमोन,
17. Hesbon et omnes urbes ejus, quae erant in planitie: Dibon et Bamoth-baal, et Beth-baalmeon.
18. और यहसा, और कदेमोत, और मेपात,
18. Et Jahassah, et Cedemoth, et Mephaath.
19. और किर्यातैम, और सिबमा, और तराई के पहाड़ पर का सेरेथश्शहर,
19. Et Ciriathaim, et Sibmah, et Sereth-sahar in monte vallis.
20. और बेतपोर, और पिसगा की ढलान, और बेत्यशीमोत,
20. Et Beth-peor, et AsdothPisgah, et Beth-jesimoth.
21. और चौरस देश के सब नगर, और एमोरियों के राजा सीहोन का सारा राज्य, जो हेशबोन में राज्य करता था, और जिसे मूसा ने मिद्यान के प्रधानों के साथ मारा, अर्थात् एवी, और रेकेम, और सूर, और हूर, और रेबा को, जो सीहोन के सरदार थे और उस
21. Et omnes urbes planitiei, et universum regnum Sihon regis Aemorrhaei, qui regnabat in Hesbon, quem percussit Moses: et principes Midian, Evi, et Rekem, et Sur, et Hur, et Reba duces Sihon habitatores terrae. देश में रहते थे।
22. और बोर के पुत्र भावी कहनेवाले बिलाम को भी इस्राएलियों ने उनके मारे हुओं के बीच तलवार से मार डाला।
22. Et Bileam filium Beor divinatorem occiderunt filii Israel gladio cum interfectis eorum.
23. और रूबेनियों का सिवाना यरदन और उसका तट था। रूबेनियों का भाग उनके कुलों के अनुसार यही था, अर्थात् नगर और उनके गाँव।
23. Fuit autem terminus filiorum Ruben, Jordanes et terminus. Haec est haereditas filiorum Ruben per familias suas, urbes et villae earum.
24. और मूसा ने गाद के गोत्र को, अर्थात् गादियों को, उनके कुलों के अनुसार भाग दिया।
24. Deditque Moses tribui Gad, filiis Gad per familias suas.
25. और उनका सिवाना याजेर था, और गिलाद के सब नगर, और अम्मोनियों का आधा देश, रब्बा के साम्हने के अरोएर तक;
25. Et fuit eis terminus Jazer, et omnes urbes Gilead, et dimidium terrae filiorum Ammon usque ad Aroer, quae est coram Rabbah.
26. और हेशबोन से रामतमिस्पे और बतोनीम तक; और महनैम से दबीर के सिवाने तक;
26. Et ab Hesbon usque ad Ramath ipsuis Mispe, et Bethonim: et a Mahanaim usque ad terminum ipsius Debir.
27. और तराई में बेथारम, और बेतनिम्रा, और सुक्कोत, और सापोन, अर्थात् हेशबोन के राजा सीहोन के राज्य का बचा हुआ भाग, यरदन और उसका सिवाना, यहाँ तक कि
27. Et in valle Beth-haram, et Beth-nimrah, et Succoth, et Saphon: residuum regni Sihon, regis Hesbon, Jordanem, et confinium, usque ad extremum maris Chinnereth, trans Jordanem ad orientem. यरदन के उस पार पूर्व की ओर किन्नेरेत ताल के छोर तक।
28. गादियों का भाग उनके कुलों के अनुसार यही था, अर्थात् नगर और उनके गाँव।
28. Haec est haereditas filiorum Gad per familias suas, urbes et villae earum.
29. और मूसा ने मनश्शे के आधे गोत्र को भी भाग दिया; और मनश्शेइयों के आधे गोत्र का निज भाग उनके कुलों के अनुसार यह था।
29. Dedit praeterea Moses dimidiae tribui Manasse: fuitque dimidiae tribui filiorum Manasse per familias suas:
30. और उनका सिवाना महनैम से था, अर्थात् सारा बाशान, बाशान के राजा ओग का सारा राज्य, और याईर की सब बस्तियाँ जो बाशान में हैं, साठ नगर;
30. Fuit, inquam, terminus eorum a Mahanaim omnis Basan totius regni Og regis Basan, et omnes Havoth-Jair, quae sunt in Basan, sexaginta urbes.
31. और आधा गिलाद, और अश्तारोत, और एद्रेई, जो बाशान में ओग के राज्य के नगर थे, माकीर की सन्तान के थे,
31. Et dimidium Gilead, et Astaroth, et Edrei, urbes regni Og in Basan, filiorum Machir, filii Manasse, dimidiae parti filiorum Machir, per familias suas. अर्थात् मनश्शे के पुत्र माकीर की आधी सन्तान के, उनके कुलों के अनुसार।
32. जो देश मूसा ने मोआब के अराबा में, यरीहो के पास यरदन के उस पार पूर्व की ओर, भाग करके बाँट दिए, वे ये ही हैं।
32. Istae sunt hereditates quas tradidit Moses in campestribus Moab a transitu Jordanis ipsi Jericho ad orientem.
33. परन्तु लेवी के गोत्र को मूसा ने कोई भाग न दिया; इस्राएल का परमेश्वर यहोवा ही उनका भाग है, जैसा उसने उनसे कहा था।
33. Tribui autem Levi non dedit Moses haereditatem: Jehova Deus Israel ipse est haereditas eorum, quemadmodum dixit illis.
15. “मूसा ने गोत्र को … भाग दिया” इत्यादि। जो बात वह पर्याप्त स्पष्टता से कह चुका प्रतीत होता था, उसी को अब वह और विस्तार से ब्योरेवार बताता है, केवल इसलिए नहीं कि उसका पढ़ा जाना प्रजा को कृतज्ञता के लिये उकसाए, जब वे परमेश्वर की भलाई को सार्वजनिक लेखों में अंकित, और मानो निरन्तर अपनी आँखों के सामने, देखें, वरन् इसलिए भी कि प्रत्येक जन बिना छेड़-छाड़ और झगड़े के अपने निज भाग का उपभोग करे। क्योंकि हम जानते हैं कि मुकद्दमेबाज़ी के बहाने गढ़ने में मनुष्य का लोभ कितना चतुर है, यहाँ तक कि कोई भी अपने अधिकार को सुरक्षित रूप से तब तक नहीं रख सकता जब तक उसके अधिकार की कोई सरल और सुस्पष्ट परिभाषा उस पर प्रश्न उठाना असम्भव न कर दे। वह देश चिट्ठी डाले बिना दिया गया था। इसलिए दूसरों के लिये यह आपत्ति करने का मार्ग खुला था कि उचित अनुपात नहीं रखा गया, और कि उस असमानता को सुधारना आवश्यक है। इसलिए, कि कोई असामयिक विवाद कभी सार्वजनिक शान्ति को भंग न करे, सिवाने हर स्थान पर परमेश्वर के अधिकार से ठहराए जाते हैं, और सीमा-चिह्न खड़े करके हर प्रकार के विवाद दूर किए जाते हैं। परमेश्वर एक ही वाक्य से सीहोन का सारा राज्य केवल रूबेन के गोत्र को निर्णीत करके नहीं दे देता, वरन् अरोएर से अर्नोन के किनारों तक उनकी अन्तिम सीमा खींचता है, और इस प्रकार पूरा घेरा बनाते हुए उनके प्रदेश को इस रीति से संकुचित या विस्तृत करता है कि एक बीघे भूमि का अधिकार भी अनिश्चित न रह जाए। इसके अतिरिक्त, यह सूक्ष्म रेखांकन कितना उपयोगी था, यह सांसारिक इतिहास से सीखा जा सकता है, जहाँ हमें सर्वत्र पड़ोसियों के बीच उनके सिवानों के विषय में न केवल द्वेषपूर्ण वरन् विनाशकारी विवाद भी मिलते हैं।
हम यह भी जोड़ सकते हैं कि जो चिन्ता प्रभु ने अपनी प्रजा का प्रबन्ध करने और उनके बीच परस्पर शान्ति को पोषित करने में कृपापूर्वक की, वह उसके सच्चे पितृतुल्य प्रेम को प्रमाणित करती है, क्योंकि उसने ऐसा कुछ भी नहीं छोड़ा जो उनकी शान्ति में सहायक हो सकता था। और सचमुच, यदि इस प्रकार पहले से ही प्रबन्ध न किया गया होता, तो वे गृह-कलह से भस्म हो सकते थे।
मैं फिर अपने पाठकों से विनती करता हूँ कि यदि मैं नगरों की स्थिति का वर्णन करने में व्यग्र परिश्रम न करूँ, और नामों के विषय में भी कौतूहल न दिखाऊँ, तो मुझे क्षमा करें। वरन्, जिन नामों को इब्रानी में व्यक्तिवाचक संज्ञाओं के रूप में रहने देना उचित समझा गया, उन्हें मैं सहर्ष जातिवाचक रूप में प्रयुक्त होने, और इतना बदले जाने की अनुमति दूँगा कि उन्हें लातीनी रूप दिया जा सके।
फ्रांसीसी में, “Et de faict, s'il n'euste pourveu a cela de bonne heure, ils se fussent mangez et consumez les uns les autres en debatant entre eux;” “और वास्तव में, यदि समय रहते इसका प्रबन्ध न किया गया होता, तो वे आपस में विवाद करते हुए एक दूसरे को खा जाते और नष्ट कर डालते।” — सं.
फ्रांसीसी में, “Qui plus est, je suis content qu'on traduise en d'autres langues certains noms, qu'il m'a semble bon de laisser ici en la langue Hebraique comme noms propres;” “इससे भी बढ़कर, मैं सन्तुष्ट हूँ कि कुछ शब्द, जिन्हें मैंने यहाँ इब्रानी भाषा में व्यक्तिवाचक नामों के रूप में रहने देना अच्छा समझा है, अन्य भाषाओं में अनूदित किए जाएँ।” — सं.
इस उल्लेखनीय मनुष्य के आचरण में पाए जानेवाले विचित्र विरोधाभास, जिसका अन्त यहाँ लिखा गया है, और साधारण जीवन में उनके समान उदाहरण, बिशप बटलर ने इस विषय पर अपने एक उपदेश में अत्यन्त उत्तम रीति से चित्रित किए हैं। — सं.
यह ध्यान देने योग्य है कि जब मिद्यानियों के देश का उल्लेख होता है, तो उस पर शासन करनेवाले प्रधान सीहोन के क्षत्रप कहलाते हैं, ताकि हम जान लें कि वे भी उसी विनाश में सहभागी हुए, क्योंकि उन्होंने अपने आप को एक अन्यायपूर्ण युद्ध में उलझा लिया था, और वे सीहोन के, जो खुला शत्रु था, शासन के अधीन थे। और यह और भी स्पष्ट करने के लिये कि वे न्यायपूर्वक नष्ट हुए, बताया जाता है कि मारे हुओं में बिलाम भी था, जिसकी जीभ से उन्होंने इस्राएलियों को हज़ार तलवारों से भी अधिक गहरा घाव पहुँचाने का प्रयत्न किया था; मानो यह कहा गया हो कि उस संहार में उन्हें वह शत्रु-ध्वजा मिल गई जिसके द्वारा उन्होंने इस्राएलियों के साथ खुले युद्ध की घोषणा की थी। जब यह कहा जाता है कि यरदन एक सिवाना, और एक सिवाना था, तो व्यर्थ पुनरुक्ति से बचने के लिये इसका यह अर्थ लगाना उचित होगा कि यरदन अपनी सीमाओं के अनुसार उनका सिवाना था।
24. “और मूसा ने गाद के गोत्र को भाग दिया” इत्यादि। ऊपर जो टिप्पणी की गई थी वह गाद के गोत्र पर भी लागू होती है, अर्थात् यह कि उनके अधिकार के विषय में विवादों को रोकने के लिये उनके वैध सिवाने सावधानी से निर्धारित किए गए। इस बीच परमेश्वर की उदारता के लिये उसकी स्तुति की जाती है, कि उसने बड़ी ख्याति की जातियों को निकालकर उनके स्थान पर इन्हें बसाया। मनश्शे के आधे गोत्र के विषय में यह और भी स्पष्ट रूप से प्रकट किया गया है, जब उनके निज भाग में सम्मिलित साठ नगर गिनाए जाते हैं। इससे यह भी प्रत्यक्ष है कि मूसा भूल से उदार नहीं हुआ था, क्योंकि परमेश्वर भली-भाँति जानता था कि वह अपनी असीम उदारता में से उन्हें कितने नगर दे रहा था। एक छोटे से उपवाक्य में लेवी का गोत्र फिर से अलग रखा गया है, ताकि लेवीय भविष्य में किसी समय यह बहाना न कर सकें कि जो दान रूबेनियों, गादियों और मनश्शे के आधे गोत्र ने चिट्ठी डाले बिना पाया था, वह सामूहिक रूप से उनका भी था; क्योंकि उन्हें अपने भाइयों के साथ भागी होने से स्पष्ट रूप से मना किया गया है। अन्यथा उनके लिये चतुराई से अपने लाभ के अनुसार यह अर्थ लगाना सहज हो जाता कि वे दूसरों के साथ भाग पाने के अधिकारी हैं। परन्तु यहाँ, थोड़ा पहले के समान बलिदान नहीं, वरन् स्वयं परमेश्वर उनका भाग कहा गया है; यदि वे इससे सन्तुष्ट नहीं होते, तो वे केवल अपने आप को अत्यधिक घमण्ड और असहनीय नकचढ़ेपन का दोषी ठहराते हैं।
लातीनी में, “Terminum illis fuisse Jordanem secundum suos fines.” फ्रांसीसी में, “Que le Jordain estoit leur borne selon ses limites;” “कि यरदन अपनी सीमाओं के अनुसार उनका सिवाना था।” सेप्टुआजिंट में यह पुनरुक्ति छोड़ दी गई है। — सं.
तैंतीसवाँ पद सेप्टुआजिंट में पूरी तरह छोड़ दिया गया है। — सं.
