भाग 14

व्यर्थता का मेला

चार्ल्स एच. स्पर्जन · जॉन बनयन की ‘मसीही यात्रा’ पर टिप्पणी

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    यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

    “तब मैंने अपने स्वप्न में देखा कि जब वे जंगल से बाहर निकल आए, तो तुरन्त उन्हें अपने सामने एक नगर दिखाई दिया, और उस नगर का नाम व्यर्थता है; और उस नगर में एक मेला लगता है, जो व्यर्थता का मेला कहलाता है। वह पूरे वर्ष भर लगा रहता है। उसका नाम व्यर्थता का मेला इसलिए है कि जिस नगर में वह लगता है वह व्यर्थता से भी हल्का है (भजन संहिता 62:9), और इसलिए भी कि जो कुछ वहाँ बेचा जाता है, या जो कुछ वहाँ आता है, वह सब व्यर्थ है; जैसा कि बुद्धिमान का कथन है, ‘सब कुछ जो होता है वह व्यर्थ है’ (सभोपदेशक 11:8)।” मसीही की सबसे सुखी अवस्था उसकी सबसे पवित्र अवस्था है। जैसे सूर्य के सबसे निकट सबसे अधिक गर्मी होती है, वैसे ही मसीह के सबसे निकट सबसे अधिक सुख होता है। जब किसी मसीही की आँखें व्यर्थता पर लगी होती हैं, तब उसे कोई शान्ति नहीं मिलती। मैं भक्तिहीन लोगों को अपने भोग-विलास की ओर दौड़ने के लिए दोष नहीं देता। उन्हें जी भरकर भोग लेने दीजिए। उनके पास भोगने को बस यही है; परन्तु मसीहियों को संसार की फीकी और ओछी बातों से ऊँचे क्षेत्र में अपना आनन्द ढूँढ़ना चाहिए। व्यर्थ बातों के पीछे दौड़ना नये किए गए प्राणों के लिए खतरनाक है। “अब, जैसा मैंने कहा, स्वर्गीय नगर का मार्ग ठीक इसी नगर में से होकर जाता है जहाँ यह रंगीला मेला लगता है; और जो कोई उस नगर को जाना चाहे, और फिर भी इस नगर में से होकर न जाए, ‘उसे जगत में से निकल जाना ही पड़ेगा’ (1 कुरिन्थियों 5:10)।” जब आप उस संघर्ष और पाप से थक जाएँ जो हर ओर आपका सामना करता है, तो सोचिए कि सब पवित्र लोगों ने यही परीक्षा सही है। वे रुई के गद्दों पर लेटे हुए स्वर्ग नहीं पहुँचाए गए, और आपको यह आशा नहीं करनी चाहिए कि आप उनसे अधिक आसानी से यात्रा करेंगे। उन्हें मैदान के ऊँचे स्थानों पर अपने प्राणों को मृत्यु तक जोखिम में डालना पड़ा, और आपको भी तब तक मुकुट नहीं मिलेगा जब तक आप भी यीशु मसीह के अच्छे योद्धा की नाईं कठिनाई न सह लें। इसलिए, “विश्वास में स्थिर रहो, पुरुषार्थ करो, बलवन्त होओ।” “अब इन यात्रियों को, जैसा मैंने कहा, इस मेले में से होकर जाना ही था। सो वे गए; परन्तु देखो, ज्यों ही वे मेले में दाखिल हुए, मेले के सब लोग हलचल में पड़ गए, और मानो सारा नगर ही उनके कारण कोलाहल से भर गया, और इसके कई कारण थे: क्योंकि, “पहला, यात्रियों ने ऐसे वस्त्र पहन रखे थे जो उस मेले में व्यापार करनेवाले किसी भी व्यक्ति के वस्त्रों से भिन्न थे। इसलिए मेले के लोग उन्हें आँखें फाड़-फाड़कर घूरने लगे! कुछ ने कहा कि वे मूर्ख हैं; कुछ ने कहा कि वे पागल हैं; और कुछ ने कहा कि वे परदेसी हैं (1 कुरिन्थियों 4:9)। “दूसरा, जैसे वे उनके पहनावे पर चकित हुए, वैसे ही उनकी बोली पर भी चकित हुए; क्योंकि बहुत थोड़े लोग समझ पाते थे कि वे क्या कहते हैं। वे स्वाभाविक रूप से कनान की भाषा बोलते थे; परन्तु जो लोग मेला लगाए हुए थे वे इस संसार के लोग थे। इसलिए मेले के एक छोर से दूसरे छोर तक वे एक-दूसरे को परदेशी और बर्बर जान पड़ते थे (1 कुरिन्थियों 2:7, 8)।” यदि आप पूरी रीति से मसीह के पीछे चलेंगे, तो निश्चय ही आपको कोई न कोई बुरा नाम दिया जाएगा। वे कहेंगे कि आप कितने विचित्र हैं। यदि आप सच्चे मसीही बन जाएँगे, तो शीघ्र ही आप पर सबकी नज़र रहने लगेगी। वे कहेंगे, “वह कितना अजीब है!” “वह कितनी निराली है!” वे सोचेंगे कि हम अपने आप को विशिष्ट दिखाने का प्रयत्न करते हैं, जबकि वास्तव में हम केवल विवेकशील हैं, और परमेश्वर की इच्छा का पालन करने का प्रयत्न कर रहे हैं। वे कहेंगे, “अरे, तुम तो पुराने ज़माने के हो!” आप वही पुरानी बातें मानते हैं जिन पर लोग ओलिवर क्रॉमवेल के दिनों में विश्वास करते थे—वे पुराने प्यूरिटन सिद्धान्त। वे हमारे विश्वास पर हँसते हैं और दावा करते हैं कि हमने अपनी स्वतन्त्रता खो दी है। “यह मेला कोई नया खड़ा किया गया कारोबार नहीं, परन्तु बहुत पुराने समय से चली आ रही चीज़ है। मैं आपको इसका मूल बताता हूँ। “लगभग पाँच हज़ार वर्ष पहले भी यात्री स्वर्गीय नगर की ओर चले जा रहे थे, जैसे ये दोनों ईमानदार व्यक्ति जा रहे हैं; और बालज़बूल, अपुल्लयोन और सेना (लीजन) ने अपने साथियों समेत, यात्रियों के बनाए हुए पथ से यह जान लिया कि उस नगर का उनका मार्ग व्यर्थता के इसी नगर में से होकर जाता है; तब उन्होंने यहाँ एक मेला लगाने की युक्ति की; एक ऐसा मेला जिसमें हर प्रकार की व्यर्थता बेची जाए, और जो पूरे वर्ष भर लगा रहे। इसलिए इस मेले में ऐसी-ऐसी सब वस्तुएँ बेची जाती हैं, जैसे घर, भूमि, व्यापार, पद, सम्मान, पदोन्नतियाँ, उपाधियाँ, देश, राज्य, वासनाएँ, भोग-विलास; और हर प्रकार के सुख, जैसे वेश्याएँ, पत्नियाँ, पति, बच्चे, स्वामी, दास, प्राण, लहू, शरीर, आत्माएँ, चाँदी, सोना, मोती, बहुमूल्य रत्न, और न जाने क्या-क्या।” व्यर्थता के कई प्रकार हैं। विदूषक की घंटियोंवाली टोपी, संसार की हँसी-ठिठोली, नाच, वीणा, और लम्पटों का प्याला; इन सबको लोग व्यर्थता ही जानते हैं। ये अपने माथे पर अपना ठीक-ठीक नाम और पदवी लिए फिरते हैं। इनसे कहीं अधिक विश्वासघाती वे वस्तुएँ हैं जो उतनी ही व्यर्थ हैं—इस संसार की चिन्ताएँ, और धन का धोखा। मनुष्य जितनी सच्चाई से नाटकघर में व्यर्थता के पीछे चल सकता है, उतनी ही सच्चाई से हिसाब-किताब के दफ़्तर में भी चल सकता है। यदि वह अपना जीवन धन बटोरने में बिता रहा है, तो वह अपने दिन छाया के समान दिखावे में बिता रहा है। जब तक हम मसीह के पीछे नहीं चलते, और अपने परमेश्वर को जीवन का महान लक्ष्य नहीं बनाते, तब तक हम सबसे ओछे लोगों से केवल दिखावे में ही भिन्न हैं। पाप की मिठास ही उसे और अधिक खतरनाक बनाती है। शैतान अपना विष कभी खुला नहीं बेचता; वह उसे बेचने से पहले सदा उस पर सोने का पानी चढ़ा देता है। भोग-विलास से सावधान रहिए। उनमें से बहुत से निर्दोष और हितकर हैं, परन्तु बहुत से विनाशकारी हैं। कहा जाता है कि जहाँ सबसे सुन्दर कैक्टस उगते हैं, वहीं सबसे विषैले साँप छिपे रहते हैं। पाप के साथ भी ऐसा ही है। आपके सबसे सुहावने सुखों में आपके सबसे घिनौने पाप छिपे रहेंगे। सावधान रहिए! क्लियोपेट्रा के पास वह विषैला नाग फूलों की एक टोकरी में पहुँचाया गया था। शैतान पियक्कड़ के सामने नशीले प्याले की मिठास रखता है। वह हममें से प्रत्येक के सामने हमारे अपने विशेष सुख का प्रस्ताव रखता है; वह हमें सुखों से गुदगुदाता है, ताकि हमें पकड़ ले। “और इसके अतिरिक्त, इस मेले में हर समय बाज़ीगरियाँ, छल, जुए, तमाशे, मूर्ख, बन्दर, धूर्त और बदमाश, और वह भी हर प्रकार के, देखने को मिलते हैं। “यहाँ, और वह भी मुफ़्त में, चोरियाँ, हत्याएँ, व्यभिचार, झूठी शपथ खानेवाले भी देखने को मिलते हैं, और वह भी लहू जैसे लाल रंग के।” यदि आप अपने जी उठे प्रभु की सामर्थ्य में जीना चाहते हैं, तो शरीर की लालसाओं को पूरा करने का हर विचार सदा के लिए निकाल फेंकिए। यह बुरी बात होगी कि जो मनुष्य मसीह में जीवित है, वह पाप की सड़ाहट में निवास करे। “तुम जीवते को मरे हुओं में क्यों ढूंढ़ती हो?” स्वर्गदूत ने मगदलीनी से कहा। क्या जीवित लोग कब्र में निवास करें? क्या ईश्वरीय जीवन शारीरिक वासना के मुर्दाघर में बन्द किया जाए? हम प्रभु के कटोरे में सहभागी होकर बलियाल का कटोरा कैसे पी सकते हैं? हे विश्वासी, निश्चय ही आप खुली वासनाओं और पापों से छुड़ाए गए हैं; परन्तु क्या आप शैतानी बहेलिये की अधिक गुप्त और धोखा देनेवाली लासा लगी टहनियों से भी बच निकले हैं? क्या आप घमण्ड की लालसा से बाहर निकल आए हैं? क्या आप आलस्य से बच निकले हैं? क्या आप शारीरिक निश्चिन्तता से पूरी तरह छूट गए हैं? क्या आप प्रतिदिन सांसारिकता, जीविका के घमण्ड, और लोभ की फँसानेवाली बुराई से ऊपर उठकर जीने का प्रयत्न कर रहे हैं? पवित्रता के पीछे लगे रहिए; वह मसीही का मुकुट और महिमा है। “तीसरा, परन्तु जिस बात ने व्यापारियों को कुछ कम चकित नहीं किया, वह यह थी कि ये यात्री उनके सारे माल को बहुत तुच्छ समझते थे। वे उसकी ओर देखने की भी परवाह नहीं करते थे: और यदि वे उन्हें खरीदने के लिए पुकारते, तो वे अपने कानों में उँगलियाँ डाल लेते, और पुकार उठते, ‘मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे,’ और ऊपर की ओर देखते, यह संकेत करते हुए कि उनका व्यापार और लेन-देन स्वर्ग में है (फिलिप्पियों 3:20, 21)। “उन मनुष्यों का यह चाल-चलन देखकर किसी ने ठट्ठा करते हुए उनसे कहा, ‘तुम क्या खरीदोगे?’ परन्तु उन्होंने गम्भीरता से उसकी ओर देखकर कहा, ‘हम सत्य को मोल लेते हैं।’ ” आजकल का साधारण धर्म मसीह और बलियाल की खिचड़ी है। “यदि परमेश्वर परमेश्वर हो, तो उसकी सेवा करो; और यदि बाल परमेश्वर हो, तो उसकी सेवा करो।” दोनों के बीच कोई मेल नहीं हो सकता। यहोवा और बाल कभी मित्र नहीं हो सकते। “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।” “कोई मनुष्य दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता।” सत्य और पवित्रता के विषयों में समझौते के सारे प्रयत्न झूठ पर आधारित हैं। परमेश्वर हमें ऐसे घृणित दुचित्तेपन से बचाए। आपको अन्धकार के निष्फल कामों में सहभागी नहीं होना चाहिए, वरन उन पर उलाहना देना चाहिए। अपनी ऊँची बुलाहट और प्रतिष्ठा के योग्य चाल चलिए। हे मसीही, स्मरण रख कि तू राजाओं के राजा का पुत्र है। इसलिए अपने आप को संसार से निष्कलंक रख। उन उँगलियों को मैला न कर जो शीघ्र ही स्वर्गीय वीणा के तार छेड़नेवाली हैं; उन आँखों को वासना की खिड़कियाँ न बनने दे जो शीघ्र ही राजा को उसकी शोभा सहित देखनेवाली हैं; उन पाँवों को कीचड़ भरे स्थानों में अशुद्ध न होने दे जो शीघ्र ही सोने की सड़कों पर चलनेवाले हैं; उन हृदयों को घमण्ड और कड़वाहट से न भरने दे जो थोड़े ही समय में स्वर्ग से भर जानेवाले हैं, और परमानन्द से उमड़नेवाले हैं:— “उठो वहाँ, जहाँ अनन्त सौन्दर्य खिलते हैं, और सारे सुख ईश्वरीय हैं; जहाँ वह धन है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता, और अनन्त महिमाएँ चमकती हैं!” “इस पर उन मनुष्यों को और भी अधिक तुच्छ जानने का अवसर मिल गया; कुछ ठट्ठा करने लगे, कुछ ताने मारने लगे, कुछ निन्दा की बातें कहने लगे, और कुछ दूसरों को उन्हें मारने के लिए उकसाने लगे। अन्त में मेले में ऐसा कोलाहल और भारी उपद्रव मच गया कि सारी व्यवस्था गड़बड़ा गई। तब तुरन्त मेले के बड़े सरदार के पास समाचार पहुँचाया गया, और वह शीघ्र नीचे आया, और उसने अपने सबसे विश्वसनीय मित्रों में से कुछ को नियुक्त किया कि वे उन मनुष्यों से पूछताछ करें जिनके कारण मेला लगभग उलट-पुलट हो गया था। सो उन मनुष्यों को पूछताछ के लिए लाया गया; और जो उनका न्याय करने बैठे उन्होंने पूछा कि वे कहाँ से आए हैं, कहाँ जा रहे हैं, और ऐसे निराले पहनावे में वहाँ क्या कर रहे हैं। उन मनुष्यों ने उन्हें बताया कि वे संसार में यात्री और परदेशी हैं, और अपने देश को जा रहे हैं, जो स्वर्गीय यरूशलेम है; और उन्होंने नगर के लोगों को, और न ही व्यापारियों को, कोई ऐसा कारण दिया है कि वे उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार करें और उनकी यात्रा में बाधा डालें; सिवाय इसके कि जब किसी ने उनसे पूछा कि वे क्या खरीदेंगे, तो उन्होंने कहा था कि वे सत्य को मोल लेंगे। परन्तु जो उनकी जाँच करने के लिए नियुक्त थे, उन्होंने यही समझा कि वे पागल और सनकी हैं, या फिर ऐसे लोग हैं जो मेले में सब कुछ गड़बड़ कर देने आए हैं। इसलिए उन्होंने उन्हें पकड़कर पीटा, और उन पर कीचड़ पोत दिया, और फिर उन्हें एक पिंजरे में डाल दिया, ताकि वे मेले के सब लोगों के लिए तमाशा बन जाएँ। इसलिए वे कुछ समय तक वहाँ पड़े रहे, और हर किसी के मनोरंजन, या द्वेष, या बदले का निशाना बने रहे; और मेले का बड़ा सरदार उन पर जो कुछ बीतता था उस पर बराबर हँसता रहा।” यात्री व्यर्थता के मेले में से सन्दिग्ध व्यक्तियों की तरह होकर गुज़रते हैं। न केवल हम पर निगरानी रखी जाती है, बल्कि जितना हम सोचते हैं उससे कहीं अधिक जासूस हैं। यह जासूसी हर जगह है, घर में भी और बाहर भी। यदि हम शत्रुओं के हाथ पड़ जाएँ, तो हम भेड़िये से उदारता की, या किसी दुष्टात्मा से दया की, उससे पहले आशा कर सकते हैं जितनी उन लोगों से हमारी दुर्बलताओं के प्रति किसी धीरज की, जो परमेश्वर के प्रति अपने अविश्वास को उसके लोगों के विरुद्ध निन्दा से मसालेदार बनाते हैं। भक्तिपूर्ण, अनुग्रह से भरा जीवन जीइए, तो आप सताव से नहीं बच सकेंगे। हो सकता है कि आप ऐसी सुखद परिस्थितियों में हों कि उत्साही मसीहियों के बीच रहते हों और इस प्रकार सताव से बच जाएँ; परन्तु एक साधारण मसीही मनुष्य को लीजिए, यदि वह विश्वासयोग्य है तो उसे बड़ी कठिनाई झेलनी पड़ेगी। भक्तिहीन लोग उनकी निन्दा करेंगे जो प्रभु यीशु के प्रति सच्चे हैं। कारखाने में मसीहियों की हँसी उड़ाई जाती है, गली में उनकी ओर उँगली उठाई जाती है, और उन पर कोई अपमानजनक नाम चिल्लाया जाता है। अब हम जानेंगे कि परमेश्वर के चुने हुए कौन हैं और कौन नहीं। सताव फटकनेवाले सूप का काम करता है, और जो भूसी के समान हल्के हैं वे उसकी फूँक से उड़ जाते हैं; परन्तु जो सच्चा अन्न हैं वे बने रहते हैं, और शुद्ध किए जाते हैं। मनुष्य के आदर की परवाह न करते हुए, सच्चा परमेश्वर का भय माननेवाला मनुष्य अपने मार्ग पर बढ़ता जाता है, और सदा प्रभु का भय मानता रहता है। “सब कुछ सुना गया; अन्त की बात यह है।” मेरी लालसा यह है कि कलीसियाएँ और अधिक पवित्र हों। संसार के अनुरूप बनने की इतनी अधिकता देखकर मुझे दुःख होता है। धन कितनी बार मनुष्यों को भटका देता है; कितने मसीही इस दुष्ट संसार के फ़ैशन के पीछे चलते हैं। हाय! मेरे इतने प्रचार के बावजूद बहुत से लोग भटकते हैं, और कलीसिया के सदस्य भी बने रहना चाहते हैं और संसार के नागरिक भी। हमारे बीच ऐसे लोग हैं जो खुले आम मसीह से प्रेम रखने का दावा करते हैं, पर बहुत कुछ “सुखविलास के चाहनेवालों” की तरह व्यवहार करते हैं। मसीही धर्म को माननेवाले किसी व्यक्ति का उन संगीत-भवनों, मदिरालयों और रंगरेलियों के स्थानों में पाया जाना लज्जा की बात है, जहाँ आप अपने चरित्र को दूषित किए बिना जा ही नहीं सकते; क्योंकि वहाँ आप न अपनी आँखें खोल सकते हैं और न अपने कान, बिना तुरन्त यह जाने कि आप शैतान के इलाके में हैं। मैं जीवते परमेश्वर की शपथ देकर आपसे कहता हूँ, यदि आप अच्छी संगति नहीं रख सकते, और भोग-विलास की मण्डली से दूर नहीं रह सकते, तो मसीह के अनुयायी होने का दावा मत कीजिए; क्योंकि वे आपसे कहते हैं कि उनके बीच में से निकलो और अलग रहो। यदि आपको अश्लील संगति और कामुक गीतों में आनन्द मिल सकता है, तो आपको पवित्र लोगों की संगति में मिलने का, या भजनों के गाने में सम्मिलित होने का क्या अधिकार है? सबसे अच्छी संगति रखिए। उनके साथ बहुत रहिए जो परमेश्वर के साथ बहुत रहते हैं। तेरे सबसे प्रिय साथी वे हों जिन्होंने मसीह को अपना सबसे प्रिय साथी बनाया है; मसीह का प्रेम ही तेरा प्रेम हो। विश्वासी विश्वासियों के सिवा और किसके साथ रहें? हमारी अंग्रेज़ी कहावत है, “एक ही पंख के पक्षी एक साथ झुंड बनाते हैं।” किसी संत और किसी पापी को मेल-जोल रखते देखना ऐसा है जैसे जीवित और मुर्दे को एक साथ घर बसाते देखना। चीथड़ों में लिपटे लाज़र के साथ रहना बहुमूल्य वस्त्र पहने धनवान के साथ रहने से भला है। वहाँ निवास कीजिए जहाँ परमेश्वर निवास करता है। पृथ्वी पर उन्हें अपना साथी बनाइए जो स्वर्ग में आपके साथी होंगे। एक अपवित्र कलीसिया! वह संसार के लिए व्यर्थ है, और मनुष्यों के बीच उसका कोई मान नहीं। वह एक घृणित वस्तु है, नरक का ठट्ठा, स्वर्ग की घृणा। संसार पर जो सबसे बुरी बुराइयाँ कभी आई हैं, वे एक अपवित्र कलीसिया के द्वारा ही उस पर लाई गई हैं। हे मसीही, प्रभु की मन्नतें तुझ पर हैं। तू परमेश्वर का याजक है: याजक के समान आचरण कर। तू परमेश्वर का राजा है: अपनी वासनाओं पर राज्य कर। तू परमेश्वर का चुना हुआ है: बलियाल से मेल-जोल न रख। स्वर्ग तेरा भाग है: स्वर्गीय आत्मा के समान जी। इसी प्रकार तू सिद्ध करेगा कि यीशु में तेरा विश्वास सच्चा है, क्योंकि जब तक जीवन में पवित्रता न हो, तब तक हृदय में विश्वास हो ही नहीं सकता: “हे प्रभु, मैं उसके समान जीना चाहता हूँ जो लहू से मोल लिया हुआ नाम धारण करता है; उसके समान, जो केवल तुझे दुःखी करने से डरता है, और कोई दूसरी लज्जा नहीं जानता।”

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