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यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
जब मसीही की पत्नी क्रिस्टियाना तीर्थयात्रा पर निकली, तो निःसन्देह वह उसी फाटक से होकर गई जिससे उसका पति गया था। कहानी इस प्रकार चलती है:— “इसलिए, मुझे ऐसा लगा कि मैंने क्रिस्टियाना और दया, और लड़कों को, सब के सब को फाटक तक जाते देखा; और जब वे वहाँ पहुँचे, तो वे आपस में थोड़ी देर इस विषय पर विचार करने लगे कि फाटक पर उन्हें पुकार कैसे लगानी चाहिए, और जो उनके लिए द्वार खोले, उससे क्या कहना चाहिए। अतः यह निश्चय हुआ कि क्योंकि क्रिस्टियाना सबसे बड़ी है, इसलिए वही प्रवेश के लिए दस्तक देगी, और जो द्वार खोले उससे बाकी सब की ओर से वही बात करेगी। सो क्रिस्टियाना दस्तक देने लगी; और जैसे उसके बेचारे पति ने किया था, उसने दस्तक दी, और फिर दस्तक दी। परन्तु किसी के उत्तर देने के बजाय, उन सब को ऐसा लगा मानो कोई कुत्ता उन पर भौंकता हुआ आ रहा हो; एक कुत्ता, और वह भी बड़ा सा, और इससे स्त्रियाँ और बच्चे डर गए; और कुछ समय तक उन्हें फिर दस्तक देने का साहस न हुआ, इस भय से कि कहीं वह शिकारी कुत्ता उन पर झपट न पड़े। इसलिए अब वे अपने मन में बहुत उथल-पुथल में पड़ गए, और नहीं जानते थे कि क्या करें: दस्तक देने का साहस उन्हें कुत्ते के भय से न होता था; लौट जाने का साहस उन्हें इस भय से न होता था कि कहीं उस फाटक का रखवाला उन्हें इस प्रकार जाते हुए देख न ले, और उनसे अप्रसन्न न हो जाए। अन्त में, उन्होंने फिर दस्तक देने का विचार किया, और पहली बार से कहीं अधिक ज़ोर से दस्तक दी। तब फाटक के रखवाले ने कहा, ‘कौन है?’ तब कुत्ते ने भौंकना बन्द कर दिया, और उसने उनके लिए द्वार खोल दिया।” जब बनयन किसी बलवान पुरुष के अनुभवों की बात करते हैं, तो वे दिखाते हैं कि उस पर तीर चलाए जा रहे हैं। जब वे स्त्रियों और बच्चों की बात करते हैं, तो वे दिखाते हैं कि उन पर एक कुत्ता भौंक रहा है। कुछ डरपोक प्राणी कुत्ते के भौंकने से उतना ही घबरा जाते हैं जितना अधिक साहसी हृदयवाले जलते हुए तीरों की बौछार से। परमेश्वर निर्बलों की उस सीमा तक परीक्षा नहीं होने देता जितनी बलवानों की। उन पर अग्निबाण नहीं चलाए जाते; उसके बजाय एक खूँख्वार कुत्ता उन पर भौंकता है। जब मैं कुछ मसीहियों की कठिन परीक्षाओं का वर्णन कर रहा होता हूँ, तो आप में से कुछ लोग अपने मन में कहते हैं, “परन्तु हमने तो ऐसा कुछ कभी अनुभव नहीं किया।” तो अब, इस बात पर अपने आप से खीझिए मत कि आपको ऐसा कठिन अनुभव नहीं हुआ, वरन् इसके लिए धन्यवादी होइए। आनन्द कीजिए कि आप क्रिस्टियाना और दया के समान केवल एक कुत्ते के भौंकने के बीच भीतर आ गए। तीरों की कामना नहीं करनी चाहिए। यदि, जब आप प्रभु यीशु मसीह के पास आए, तब आपको जिस विरोध का सामना करना पड़ा वह एक ऐसे कुत्ते के भौंकने से अधिक कुछ नहीं था जो आपको काट भी न सकता था, तो धन्यवादी होइए कि आप इतनी सहजता से आ गए, और कि शैतान को ऐसा रोके रखा गया कि वह आपको सता न सका। संसार भर में जो कुछ भी किसी पापी को मसीह के पास आने से रोक सकता है, वह कुत्ते के भौंकने से बढ़कर कुछ नहीं है। दूर भौंकते हुए कुत्ते से घबराने का कोई विशेष कारण नहीं होता। यदि इस टैबरनेकल में आते समय मैं किसी कुत्ते को भौंकते सुनता, तो मैं नहीं समझता कि मैं उस पर अधिक ध्यान देता। यदि मैं रात को अपने घर में होता, और किसी कुत्ते को भौंकते सुनता, तो सम्भव है वह मेरी नींद में बाधा डालता, परन्तु वह मुझे बहुत भयभीत नहीं करता। यदि कोई मनुष्य किसी महत्त्वपूर्ण काम पर जा रहा हो, और कोई छोटा सा तुच्छ पिल्ला उसकी एड़ियों के पीछे चिल्लाता हुआ आए, तो वह उस पर ध्यान देने का कष्ट भी नहीं करेगा। मसीह के पास आनेवाले और उस पर भरोसा रखनेवाले किसी प्राणी के विरुद्ध दुष्टात्माएँ या मनुष्य जो कुछ भी कभी कह सकते हैं, उससे कुत्ते के भौंकने से रत्ती भर भी अधिक डरने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए, मैं आप से विनती करता हूँ, इसके कारण अपने मन को दुःखी न कीजिए। अपने प्राण में कहिए, “मसीह मुझे आने को कहता है, और मैं कुत्ते के भौंकने से पीछे नहीं रुकूँगा। मसीह मुझे बुलाता है; मैं परमेश्वर का शब्द सुनता हूँ; मैं स्वर्ग का निमन्त्रण स्वीकार करता हूँ; यदि कुत्ते भौंकना चाहें तो थक जाने तक भौंकते रहें; मेरे कानों में ऐसा मधुर संगीत गूँज रहा है जो उनके हुआँने को दबा देता है। “‘मैं यीशु के पास जाऊँगा, चाहे मेरा पाप पहाड़ के समान ऊँचा उठ गया हो; मैं उसके आँगनों को जानता हूँ, मैं भीतर प्रवेश करूँगा, चाहे कुछ भी विरोध करे।’” अब मैं आप से कहता हूँ कि सुनिए, जब तीर्थयात्री भीतर पहुँच गए तब क्या हुआ। दया को छोड़ सब भीतर चले गए, और वह बाहर काँपती और रोती हुई रह गई, जैसा कुछ लोग तब करते हैं जब उनके साथियों को शान्ति मिल चुकी होती है। फिर भी, दया ने फिर दस्तक दी; और कुछ समय बाद, फाटक के रखवाले ने उसे खोला, और वह भीतर ले ली गई, और मार्ग के प्रभु ने सब का स्वागत किया और सब को क्षमा किया। “सो वह उन्हें कुछ समय के लिए नीचे की एक ग्रीष्मकालीन बैठक में छोड़ गया, जहाँ वे आपस में बातें करने लगे; और क्रिस्टियाना ने इस प्रकार आरम्भ किया: ‘हे प्रभु, मैं कितनी आनन्दित हूँ कि हम यहाँ भीतर आ गए हैं!’ “दया। आप ऐसा कह ही सकती हैं; परन्तु सब में से मुझे ही आनन्द से उछलने का सबसे अधिक कारण है। “क्रिस्टियाना। जब मैं फाटक पर खड़ी थी (क्योंकि मैंने दस्तक दी थी, और किसी ने उत्तर नहीं दिया था), तब एक समय मैंने सोचा कि हमारा सारा परिश्रम व्यर्थ हो गया, विशेषकर जब वह भद्दा कुत्ता हम पर इतनी ज़ोर से भौंक रहा था। “दया। परन्तु मेरा सबसे बड़ा भय तब था जब मैंने देखा कि आपको उसकी कृपा में ले लिया गया है, और मैं पीछे छूट गई हूँ। तब मैंने सोचा, जो लिखा है वह पूरा हुआ, ‘दो स्त्रियाँ चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी।’ (मत्ती 24:41।) मुझे ‘मैं नष्ट हो गई! मैं नष्ट हो गई!’ चिल्लाने से अपने आप को रोकने में बड़ी कठिनाई हुई। और मैं फिर दस्तक देने से डर रही थी; परन्तु जब मैंने ऊपर देखा कि फाटक के ऊपर क्या लिखा है, तो मुझे साहस मिला। मैंने यह भी सोचा कि मुझे या तो फिर दस्तक देनी होगी, या मर जाना होगा; सो मैंने दस्तक दी, परन्तु मैं नहीं बता सकती कि कैसे, क्योंकि उस समय मेरी आत्मा जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थी। “क्रिस्टियाना। क्या तुम नहीं बता सकतीं कि तुमने कैसे दस्तक दी? मुझे निश्चय है कि तुम्हारी दस्तकें ऐसी उत्कट थीं कि उनकी आवाज़ ही से मैं चौंक उठी; मैंने सोचा कि मैंने अपने सारे जीवन में ऐसी दस्तक कभी नहीं सुनी; मैंने सोचा कि तुम बलपूर्वक भीतर घुस आओगी, या राज्य को धावा बोलकर छीन लोगी। (मत्ती 11:12।) “दया। हाय! मेरी जैसी दशा में होकर, जो कोई ऐसी दशा में होता, वह और कर ही क्या सकता था? आपने देखा कि द्वार मेरे लिए बन्द कर दिया गया था, और वहीं आस-पास एक अत्यन्त क्रूर कुत्ता था। मैं कहती हूँ, मेरे जैसा कायर-हृदय कौन होगा जो अपनी पूरी शक्ति से दस्तक न देता? परन्तु कृपया बताइए, मेरी इस उद्दण्डता पर मेरे प्रभु ने क्या कहा? क्या वह मुझ से क्रोधित नहीं हुआ? “क्रिस्टियाना। जब उसने तुम्हारा धमधमाता शोर सुना, तो वह बड़ी ही अद्भुत, निश्छल मुस्कान मुस्कुराया; मैं विश्वास करती हूँ कि तुमने जो किया वह उसे भली-भाँति भाया, क्योंकि उसने इसके विपरीत कोई संकेत नहीं दिखाया। परन्तु मैं अपने मन में अचम्भा करती हूँ कि वह ऐसा कुत्ता क्यों रखता है; यदि मुझे यह पहले से मालूम होता, तो मुझे डर है कि मुझ में इस प्रकार अपने आप को जोखिम में डालने का साहस न होता। परन्तु अब हम भीतर हैं, सो भीतर हैं; और मैं पूरे मन से आनन्दित हूँ। “दया। यदि आप चाहें, तो अगली बार जब वह नीचे आएगा, मैं उससे पूछूँगी कि वह अपने आँगन में ऐसा गन्दा कुत्ता क्यों रखता है। मुझे आशा है कि वह इसका बुरा नहीं मानेगा। “‘हाँ, अवश्य पूछिए,’ बच्चों ने कहा, ‘और उसे मना लीजिए कि वह उसे फाँसी पर लटका दे; क्योंकि हमें डर है कि जब हम यहाँ से जाएँगे तो वह हमें काट लेगा।’” आप देखते हैं, बच्चे चाहते थे कि कुत्ते को फाँसी दे दी जाए, उस अश्वेत व्यक्ति के समान जिसने कहा था, “अगर परमेस्सर सैतान से इत्ता जादा बलवान है, तो वह सैतान को मार काहे नहीं डालता?” मैंने भी प्रायः यही कामना की है, परन्तु स्वामी को ऐसा करना भाता नहीं। “सो अन्त में वह फिर उनके पास नीचे आया, और दया उसके सामने भूमि पर मुँह के बल गिर पड़ी, और आराधना करके बोली, ‘मेरा प्रभु उस स्तुति-बलि को ग्रहण करे जो मैं अब अपने होंठों के बछड़ों के साथ उसे चढ़ाती हूँ।’ “तब उसने उससे कहा, ‘तुझे शान्ति मिले: खड़ी हो जा।’ परन्तु वह मुँह के बल पड़ी रही, और बोली, ‘हे प्रभु, जब मैं तुझ से वाद-विवाद करती हूँ, तब भी तू धर्मी है; तौभी मुझे अपने न्याय के विषय में तुझ से बातें करने दे।’ (यिर्मयाह 12:1।) ‘तू अपने आँगन में ऐसा क्रूर कुत्ता क्यों रखता है, जिसे देखकर हमारी जैसी स्त्रियाँ और बच्चे डर के मारे तेरे फाटक से भाग जाने को तैयार हो जाते हैं?’ “उसने उत्तर देकर कहा, ‘उस कुत्ते का स्वामी कोई दूसरा है, वह भी किसी दूसरे मनुष्य की भूमि में बन्द रखा जाता है, केवल मेरे तीर्थयात्री उसका भौंकना सुनते हैं; वह उस गढ़ का है जिसे तुम वहाँ दूर पर देखती हो, परन्तु वह इस स्थान की दीवारों तक आ सकता है। उसने अपनी गरज की ऊँची आवाज़ से बहुत से सच्चे तीर्थयात्रियों को बुरी दशा से अच्छी दशा की ओर डराकर भगाया है। सचमुच, जो उसका स्वामी है वह उसे मेरे या मेरे लोगों के प्रति किसी सद्भावना से नहीं रखता, वरन् इस इरादे से रखता है कि तीर्थयात्रियों को मेरे पास आने से रोके, और वे इस फाटक पर प्रवेश के लिए दस्तक देने से डरें। कभी-कभी वह छूट भी निकला है, और उसने कुछ ऐसों को सताया है जिनसे मैं प्रेम करता था; परन्तु अभी मैं सब कुछ धीरज से सह लेता हूँ। मैं अपने तीर्थयात्रियों को ठीक समय पर सहायता भी देता हूँ, ताकि वे उसके वश में न सौंपे जाएँ कि वह उनके साथ वह करे जो उसका कुत्ते-जैसा स्वभाव उसे उकसाए। परन्तु क्या! हे मेरी मोल ली हुई, मैं समझता हूँ, यदि तू पहले से यह सब भली-भाँति जानती होती, तो तू किसी कुत्ते से न डरती। द्वार-द्वार भीख माँगनेवाले भिखारी, किसी सम्भावित दान को खोने के बजाय, कुत्ते के चिल्लाने, भौंकने, और काटने तक का जोखिम उठा लेते हैं; और क्या एक कुत्ता—किसी दूसरे मनुष्य के आँगन का कुत्ता, ऐसा कुत्ता जिसके भौंकने को मैं तीर्थयात्रियों के लाभ में बदल देता हूँ,— किसी को मेरे पास आने से रोके? मैं उन्हें सिंहों से, और अपने प्रिय को कुत्ते के पंजे से छुड़ाता हूँ।’” तो, खोजनेवाले बेचारे प्राणियों की परीक्षाएँ पवित्र आत्मा की ओर से नहीं आतीं। वे शैतान की ओर से आती हैं। ध्यान दीजिए कि प्रभु ने कहा, “अभी मैं सब कुछ धीरज से सह लेता हूँ।” मैं समझता हूँ कि परमेश्वर स्वयं शैतान को भी सहन करने में अपनी बड़ी सहनशीलता दिखाता है। इसके अतिरिक्त, उसने यह भी कहा कि वह कुत्ते के भौंकने को तीर्थयात्रियों के लाभ में बदल देता है। उनमें से कुछ आधे सोए हुए फाटक तक आते थे; परन्तु जब कुत्ता भौंकता था, तो वे सचेत और उत्कट हो जाते थे। किसी ने ठीक ही कहा है कि सोते हुए शैतान से गरजता हुआ शैतान अच्छा है। सोए रहने से भय और काँपने से भरा होना अच्छा है। इस प्रकार प्रभु शैतान की परीक्षाओं को भी आनेवाले बेचारे पापियों की भलाई के लिए काम में लाता है। तो फिर, कुत्ते को फाँसी मत दीजिए, वरन् उसे भलाई के काम में लगने दीजिए। केवल, हे बेचारे पापी, उससे मत डर। हे काँपनेवाले, यीशु के पास आ। पवित्र आत्मा तुझे आने की सामर्थ्य दे, और उसे सदा-सर्वदा के लिए अपना बना ले, और फिर कुत्ते जितनी ज़ोर से चाहें भौंकते रहें। अब आइए हम उस अद्भुत स्वप्न के अन्त की ओर चलें, और क्रिस्टियाना और उसके मित्रों को नदी के किनारे पर देखें। आप क्या सोचते हैं, ब्यूला देश में रहनेवाले तीर्थयात्री मृत्यु को किस दृष्टि से देखते थे? वह किसी भी प्रकार शोक का विषय नहीं थी। यहाँ स्वर्ग के सीमा-प्रदेश के आनन्दों का मनमोहक वर्णन है:— “इसके बाद, मैंने देखा कि वे ब्यूला देश में आ पहुँचे, जहाँ सूर्य रात-दिन चमकता है। यहाँ, क्योंकि वे थके हुए थे, वे कुछ समय विश्राम करने लगे; और क्योंकि यह देश तीर्थयात्रियों के लिए साझा था, और क्योंकि यहाँ के फलों के बाग और दाख की बारियाँ स्वर्गीय देश के राजा की थीं, इसलिए उन्हें उसकी किसी भी वस्तु का निःसंकोच उपयोग करने की अनुमति थी। परन्तु यहाँ थोड़ी ही देर में वे तरोताज़ा हो गए; क्योंकि घण्टियाँ ऐसी बजती थीं, और तुरहियाँ निरन्तर ऐसे मधुर स्वर में फूँकी जाती थीं, कि वे सो न सके; फिर भी उन्हें उतनी ही ताज़गी मिली मानो वे कितनी ही गहरी नींद सोए हों। यहाँ सड़कों पर चलनेवालों का शोर भी यही था, ‘और तीर्थयात्री नगर में आ गए हैं।’ और कोई दूसरा उत्तर देकर कहता, ‘और आज इतने सारे लोग जल के पार गए, और सुनहरे फाटकों के भीतर ले लिए गए।’ वे फिर पुकारते, ‘अभी-अभी चमकते हुए जनों की एक पूरी सेना नगर में आई है, जिससे हम जानते हैं कि मार्ग पर और तीर्थयात्री हैं; क्योंकि वे यहाँ उनकी बाट जोहने, और उनके सारे दुःख के बाद उन्हें शान्ति देने आते हैं।’ तब तीर्थयात्री उठकर इधर-उधर टहलने लगे; परन्तु अब उनके कान कैसे स्वर्गीय ध्वनियों से भर गए, और उनकी आँखें कैसे स्वर्गीय दर्शनों से आनन्दित हुईं! इस देश में उन्होंने कुछ भी ऐसा न सुना, न देखा, न अनुभव किया, न सूँघा, न चखा, जो उनके पेट या मन को अप्रिय हो; केवल जब उन्होंने उस नदी का जल चखा जिसके पार उन्हें जाना था, तो उन्हें लगा कि वह तालु को कुछ कड़वा सा है, परन्तु नीचे उतरने पर वह मीठा निकला।” उनका बड़ा आनन्द यह था कि दूसरे तीर्थयात्री वहाँ पहुँच रहे थे जहाँ वे थे, और कुछ लोग प्रतिदिन नदी पार कर रहे थे। जो संत ब्यूला देश तक पहुँच गए हैं, उन्हें तीर्थयात्रियों के नदी पार करने का समाचार सुनकर आनन्द मनाना चाहिए। यदि हमारा विश्वास पूर्ण है, तो हम उन प्रियजनों के विषय में बड़े आनन्द से सोचेंगे जो राजा को उसकी शोभा में देखने भीतर चले गए हैं; और शोक से यह कहने के बजाय कि “वे मर गए हैं,” हम विजय के साथ पुकार उठेंगे, “अब वे मृत्यु की पहुँच से परे हैं!” यह मानने के बजाय कि हमने उन्हें खो दिया है, हम यह समझेंगे कि वे केवल थोड़े समय के लिए हमसे आगे चले गए हैं; हम मार्ग पर हैं, और शीघ्र ही घर पहुँच जाएँगे, और धन्य होगा वह दिन जब हम महिमा में उनसे फिर मिलेंगे। “जब वे यहाँ पड़े हुए उस शुभ घड़ी की बाट जोह रहे थे, तब नगर में यह चर्चा फैली कि स्वर्गीय नगर से एक डाकिया आया है, जिसके पास तीर्थयात्री मसीही की पत्नी क्रिस्टियाना नामक स्त्री के लिए बड़े महत्त्व का सन्देश है। सो उसके विषय में पूछताछ की गई, और वह घर मिल गया जहाँ वह थी; तब डाकिये ने उसे एक पत्र दिया; जिसका विषय यह था, ‘नमस्कार, हे भली स्त्री! मैं तेरे लिए यह समाचार लाया हूँ कि स्वामी तुझे बुलाता है, और आशा रखता है कि इन दस दिनों के भीतर तू अमरता के वस्त्र पहने हुए उसकी उपस्थिति में खड़ी हो।’ “जब वह यह पत्र उसे पढ़कर सुना चुका, तो उसने उसके साथ उसे एक पक्का चिह्न भी दिया कि वह सच्चा दूत है, और उससे यह कहने आया है कि वह जाने के लिए शीघ्रता करे। वह चिह्न प्रेम से पैनी की हुई नोकवाला एक तीर था, जो धीरे से उसके हृदय में उतार दिया गया, और जिसने धीरे-धीरे उस पर ऐसा प्रभावशाली काम किया कि ठहराए हुए समय पर उसे जाना ही था।” हाँ, तीर्थयात्रियों के साथ आज भी ऐसा ही होता है; उनके जाने के ठहराए हुए समय से एक महीना, या एक वर्ष, या उससे भी अधिक पहले उन्हें प्रेम से पैने किए हुए तीर मिलते हैं। उन्हें यह सूचना मिलती है कि स्वामी शीघ्र ही उनकी आशा रखता है; और वे आत्मा में पकते और कोमल होते जाते हैं। “जब क्रिस्टियाना ने देखा कि उसका समय आ गया है, और कि इस दल में से पार जानेवाली वह पहली है, तो उसने अपने मार्गदर्शक श्रीमान महाहृदय को बुलवाया, और उन्हें सब बातें बताईं। तब उन्होंने उससे कहा कि वे इस समाचार से हृदय से आनन्दित हैं, और यदि वह डाकिया उनके लिए आया होता तो वे आनन्दित होते। तब उसने उनसे कहा कि वे सलाह दें कि उसकी यात्रा के लिए सब कुछ कैसे तैयार किया जाए। सो उन्होंने उससे कहा, ‘ऐसा-ऐसा होना चाहिए; और हम जो बचे रहेंगे, नदी के किनारे तक आपके साथ चलेंगे।’ “तब उसने अपने बच्चों को बुलाया, और उन्हें आशीष दी, और उनसे कहा कि उनके माथों पर जो चिह्न लगाया गया था उसे वह अब भी शान्ति के साथ पढ़ती है, और उन्हें वहाँ अपने साथ देखकर आनन्दित है, और इस बात से भी कि उन्होंने अपने वस्त्र इतने उजले रखे हैं। अन्त में, उसके पास जो थोड़ा सा था वह उसने कंगालों के नाम कर दिया, और अपने पुत्रों और अपनी पुत्रियों को आज्ञा दी कि जब दूत उनके लिए आए तब के लिए तैयार रहें।” ज्यों ही क्रिस्टियाना को अपना चिह्न मिला, उसने वही किया जो अधिकांश मसीही लोग करते हैं, उसने अपने पादरी को बुलवाया, जिनका नाम श्रीमान महाहृदय था, क्योंकि उन्होंने तीर्थयात्रा में उसकी और उसके परिवार की तब तक सहायता की थी जब तक वे नदी तक न आ पहुँचे; और आप क्या सोचते हैं, जब उसने श्रीमान महाहृदय को बताया कि एक तीर उसके हृदय में प्रवेश कर गया है, तब उन्होंने क्या कहा? क्या वे बैठकर उसके साथ रोने लगे? नहीं, “उन्होंने उससे कहा कि वे इस समाचार से हृदय से आनन्दित हैं, और यदि वह डाकिया उनके लिए आया होता तो वे आनन्दित होते।” और यद्यपि मैं श्रीमान महाहृदय नहीं हूँ, तौभी मैं सच्चाई से यही बात कह सकता हूँ। आपको और मुझे इस सन्देश से डरना नहीं चाहिए, वरन् हम इसकी लालसा भी कर सकते हैं, और उन पर ईर्ष्या कर सकते हैं जो परम प्रिय की उपस्थिति में हमसे पहले पहुँच जाते हैं, और जिन्हें पहले यह अवसर मिलता है कि वे अपने सिर उस छाती पर टिकाएँ जहाँ से वे उन्हें फिर कभी उठाना नहीं चाहेंगे, क्योंकि वहीं वे सदा के लिए आनन्द और परमसुख पाते हैं। क्रिस्टियाना ने अपने प्रस्थान को किसी खेद से नहीं देखा; उसने अपने बच्चों से और अपने सब मित्रों और संगी-तीर्थयात्रियों से प्रेम के साथ विदा ली। वैसे ही हमारे प्रिय मित्र भी, जो हमारे बीच से बुला लिए जाते हैं, किसी भी प्रकार की आशंका के साथ मृत्यु की ओर नहीं देखते। जब हम उनके साथ बैठकर आनेवाले संसार के विषय में बातें करते हैं, तो हमारी बातचीत उन लोगों की सी होती है जो तब आनन्दित होंगे जब हम में से कोई भी विश्राम में प्रवेश करे, और जिन्हें नदी के उस पार फिर मिलने का पूरा भरोसा है। “अब वह दिन निकट आया कि क्रिस्टियाना को जाना था। सो मार्ग उसे अपनी यात्रा पर जाते देखने के लिए लोगों से भर गया। परन्तु देखो, नदी के उस पार के सारे तट घोड़ों और रथों से भरे हुए थे, जो उसे नगर के फाटक तक पहुँचाने के लिए ऊपर से नीचे आए थे। सो वह आगे बढ़ी, और जो लोग नदी के किनारे तक उसके पीछे आए थे, उन्हें हाथ के संकेत से विदा कहकर नदी में उतर गई। यहाँ उसके मुँह से सुने गए अन्तिम शब्द ये थे, ‘हे प्रभु, मैं तेरे पास रहने, और तुझे धन्य कहने आती हूँ।’ “तब उसके बच्चे और मित्र अपने स्थान को लौट गए, क्योंकि जो क्रिस्टियाना की बाट जोह रहे थे वे उसे उनकी दृष्टि से ओझल ले गए थे। सो वह गई, और पुकारी, और आनन्द के उन्हीं सब समारोहों के साथ फाटक के भीतर प्रवेश कर गई जिनके साथ उससे पहले उसका पति मसीही गया था। उसके प्रस्थान पर उसके बच्चे रोए। परन्तु श्रीमान महाहृदय और श्रीमान वीर ने आनन्द के मारे सुरीली झाँझ और वीणा बजाई।” आप क्या सोचते हैं, स्वर्ग में हमारे उन प्रियजनों के विषय में क्या कहा जाता है जो यीशु में सो जाते हैं? अरे, स्वर्गदूत उनसे मिलने आएँगे! लाज़र मर गया, और स्वर्गदूत उसे उठाकर अब्राहम की गोद में ले गए, और सब संतों के साथ यही होता है। हाँ, स्वर्गदूत संतों से मिलने, और उन्हें उनके अनन्त आसनों तक पहुँचाने आते हैं। जब परमेश्वर के पुत्र महिमा में आते हैं, तो वे शोक नहीं करते। वे अपने चमचमाते हाथ बढ़ाकर कहते हैं, “स्वागत है, भाई; स्वागत है, बहन! आप बहुत समय तक तीर्थयात्री रहे हैं; अब आप सदा के लिए विश्राम करेंगे। अपने अनन्त घर में आपका स्वागत है!” और आप क्या समझते हैं, ज्योति में रहनेवाले संत उन लोगों के आगमन को किस दृष्टि से देखते हैं जो थोड़ा बाद में आते हैं? निःसन्देह, वे आनन्दभरे जयजयकार के साथ उनका स्वागत करते हैं; और सुनहरी सड़कों पर सब ओर दौड़ते हुए पुकारते हैं, “और तीर्थयात्री नगर में आ गए हैं! और तीर्थयात्री नगर में आ गए हैं! और छुड़ाए हुए लोग घर आ गए हैं!” और प्रभु यीशु मसीह मुस्कुराता है, और कहता है, “हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ कि जिन्हें तू ने मुझे दिया है, वे वहाँ मेरे साथ हैं जहाँ मैं हूँ।” वह उनका स्वागत करता है। और परमेश्वर पिता भी महिमा में उनका अभिनन्दन करके आनन्दित होता है। क्या आप सब आनन्दित नहीं होते जब आपके बच्चे घर आते हैं? क्या आप में कोई ऐसा मनुष्य है जो अपने लड़कों और लड़कियों को, थोड़ी सी छुट्टियों के लिए ही सही, अपने पास लौटते देखकर आनन्दित न होता हो? हमें उनकी मीठी आवाज़ें सुनना अच्छा लगता है, यद्यपि वे कभी-कभी हमें परेशान भी करते हैं; परन्तु फिर भी वे हमारे अपने बच्चे हैं, हमारी अपनी सन्तान, और किसी न किसी प्रकार हमारे कानों को उनकी आवाज़ जैसी मीठी कोई आवाज़ नहीं लगती; और परमेश्वर के लिए उसकी सन्तानों की आवाज़ों जैसा कोई संगीत नहीं है। वह उन्हें अपने पास घर ले आकर आनन्दित होता है, कि वे फिर कभी बाहर न जाएँ। और धन्य आत्मा भी, आइए हम उसे न भूलें,—वह उन पवित्र प्राणियों को देखकर आनन्दित होता है जिन्हें उसने नये सिरे से रचा, जिनके साथ उसने संघर्ष किया, जिनमें उसने इतने वर्षों तक काम किया। जैसे कोई कारीगर अपनी पूरी की हुई कारीगरी पर आनन्दित होता है, वैसे ही परमेश्वर का आत्मा उन पर आनन्दित होता है जिन्हें उसने ज्योति में रहनेवाले पवित्र लोगों की मीरास में भागी बनाया है। बनयन इसे बड़ी सुन्दरता से कहते हैं,— “परन्तु यह देखना कितना महिमामय था कि ऊपरी लोक किस प्रकार घोड़ों और रथों से, तुरही और बाँसुरी बजानेवालों से, गानेवालों और तारवाले बाजे बजानेवालों से भरा हुआ था, जो तीर्थयात्रियों का स्वागत करने को थे जब वे ऊपर जा रहे थे, और एक के बाद एक नगर के सुन्दर फाटक के भीतर प्रवेश कर रहे थे।” भाइयो और बहनो, यदि आप मसीह में हैं, तो मरने से मत डरिए, क्योंकि आपके मरने के क्षणों के लिए आपको मरने का अनुग्रह दिया जाएगा। स्मरण कीजिए कि इन तीर्थयात्रियों ने नदी कैसे पार की। श्रीमान अटल ने कहा, “सचमुच, यह जल तालु को कड़वा, और पेट को ठण्डा लगता है; तौभी मैं जिस स्थान को जा रहा हूँ उसका, और उस पार मेरी बाट जोहनेवाले रक्षक-दल का विचार मेरे हृदय में दहकते अंगारे के समान है।” उन्होंने यह भी कहा, “यह नदी बहुतों के लिए भय का कारण रही है; हाँ, इसके विचार ने मुझे भी प्रायः डराया है। अब, मुझे लगता है, मैं निश्चिन्त खड़ा हूँ, मेरा पाँव उस पर जमा हुआ है जिस पर वाचा का सन्दूक उठानेवाले याजकों के पाँव खड़े थे, जब इस्राएल इस यरदन के पार गया था।” स्मरण कीजिए कि बेचारे श्रीमान लड़खड़ाने-को-तैयार ने अपनी बैसाखियाँ कैसे पीछे छोड़ दीं। प्रिय मित्र, आप जो वर्षों से लड़खड़ाने-को-तैयार रहे हैं, क्या आप इस बात से आनन्दित नहीं हैं? फिर प्रिय बूढ़े श्रीमान निर्बल-मन थे, जिन्होंने सत्य-के-लिए-वीर से कहा, “रहा मेरा निर्बल मन, उसे मैं पीछे छोड़ जाऊँगा, क्योंकि जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ मुझे उसकी कोई आवश्यकता नहीं है। न ही वह किसी अत्यन्त कंगाल तीर्थयात्री को भी दिए जाने के योग्य है; इसलिए, जब मैं चला जाऊँ, तो मेरी इच्छा है कि आप, श्रीमान वीर, उसे किसी घूरे में गाड़ दें।” और फिर बेचारे श्रीमान हताश थे, अपनी बेटी अति-भयभीत के साथ, जिन्होंने एक साथ धारा पार की। “श्रीमान हताश के अन्तिम शब्द थे, ‘विदा, हे रात्रि; स्वागत, हे दिन।’” रही कुमारी अति-भयभीत, वह गाती हुई नदी के पार गई, परन्तु कोई ठीक-ठीक समझ न सका कि उसके शब्द क्या थे, ऐसा लगता था मानो वह अपने आनन्द को व्यक्त करने की सामर्थ्य से परे पहुँच गई हो। ओह, यह कितना अद्भुत है कि ये तीर्थयात्री मरने के समय कैसा व्यवहार करते हैं! जीते जी वे भले ही काँपते रहें; परन्तु मरते समय वे नहीं काँपते। तब उनमें से सबसे निर्बल सबसे बलवान बन जाते हैं। मैंने मार्ग में बहुत से तीर्थयात्रियों की सहायता की है, और उनमें कुछ श्रीमान निर्बल-मन और श्रीमान भयभीत जैसे लोग भी थे, और मार्ग में रहते हुए वे मेरे लिए बहुत बड़ी चिन्ता का कारण रहे हैं; परन्तु अन्त में, या तो नदी सूखी रही है, और वे बिना पाँव भिगोए पार हो गए हैं, या फिर जब वे उसकी गहराइयों में पहुँचे, तो उन्होंने ऐसी मर्दानगी दिखाई कि मैं चकित रह गया हूँ। मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि वे इतने साहसी हो सकते हैं। पहले वे एक तिनके से ठोकर खा जाते थे; परन्तु मृत्यु में उन्होंने पहाड़ चढ़ लिए हैं। वे सबसे निर्बल, डरपोक, गौरैया-जैसे लोग रहे हैं जिनसे आप मिल सकते हैं; और अब वे उड़ जाने के लिए उकाबों के पंख धारण कर लेते हैं। इसलिए मैं आपको सम्मति देता हूँ, अपने प्रियजनों की कब्रों पर आनन्द के गीतों के साथ जाइए। वहाँ खड़े होइए, और यदि आप एक आँसू भी गिराएँ, तो परमेश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता की मुस्कान से उसे चमका दीजिए, और उसे एक रत्न में बदल दीजिए; और फिर आप में से हर एक घर जाए, और भरोसे के साथ तब तक प्रतीक्षा करे जब तक उसका अपना परिवर्तन न आ जाए। रहा मैं, जैसा मैंने टैबरनेकल की बड़ी मंडली में अपनी आनन्दमय विश्रामदिन की आराधनाओं के अन्त में आपको प्रायः स्मरण दिलाया है, वैसे ही मैं फिर कहूँगा,— “मेरे लिए अब बस इतना ही शेष है कि प्रेम करूँ और गाऊँ, और तब तक प्रतीक्षा करूँ जब तक स्वर्गदूत आकर मुझे अपने राजा के पास न ले जाएँ।”
मोनर्जिज़्म बुक्स
सी. एच. स्पर्जन कृत ‘मसीही यात्रा’ के चित्र (Pictures from Pilgrim's Progress), कॉपीराइट © 2021 अन्तर्राष्ट्रीय और पैन-अमेरिकी कॉपीराइट सन्धियों के अन्तर्गत सर्वाधिकार सुरक्षित। आवश्यक शुल्क के भुगतान द्वारा, आपको इस ई-पुस्तक के पाठ को स्क्रीन पर देखने और पढ़ने का अनन्य-रहित, अहस्तान्तरणीय अधिकार प्रदान किया गया है। मोनर्जिज़्म बुक्स की स्पष्ट लिखित अनुमति के बिना इस पाठ के किसी भी अंश को किसी भी रूप में या किसी भी माध्यम से, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक हो या यान्त्रिक, अभी ज्ञात हो या आगे आविष्कृत हो, पुनरुत्पादित, प्रसारित, डाउनलोड, डीकम्पाइल या रिवर्स इंजीनियर नहीं किया जा सकता, और न ही किसी सूचना-संग्रह और पुनर्प्राप्ति प्रणाली में संग्रहीत या डाला जा सकता है। ePub, .mobi & .pdf संस्करण मार्च 2021 जानकारी के लिए अनुरोध इस पते पर भेजें: Monergism Books, PO Box 491, West Linn, OR 97068
