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परम आदरणीय सर रॉबर्ट इरमिन, नाइट के नाम, और उनकी परम आदरणीय, भक्त और सद्गुणी पत्नी लेडी
जूडिथ इरमिन के नाम,
थॉमस स्टॉकर की ओर से इस जीवन में सब आत्मिक और सांसारिक भली वस्तुओं की निरन्तर वृद्धि की शुभकामना, साथ ही यीशु मसीह के महिमामय सुसमाचार के प्रति सच्चे उत्साह की, और अन्त तक तथा अन्त में भी उसके पालन में स्थिर बने रहने की, और इस जीवन के पश्चात् आनेवाले जीवन में उसी मसीह यीशु हमारे प्रभु के द्वारा अनन्त आनन्द और सुख की।
यद्यपि (परम आदरणीयो) सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र सब प्रकार से मानो एक ईश्वरीय गुरुआनी है, जो सद्गुण और सच्चा विश्वास दोनों सिखाती है, तथापि भजन संहिता की पुस्तक में इसके अतिरिक्त आत्माओं की दशा और स्थिति की मानो स्पष्ट छवि है, और इसलिए वह सब लोगों के लिए सामान्यतः अत्यन्त आवश्यक है। फिर भी यह एक सौ उन्नीसवाँ भजन विशेष रूप से राजकीय भविष्यद्वक्ता की एक सिद्ध कला और अद्भुत उत्साह को समाए हुए है, जिसमें वह परमेश्वर की व्यवस्था की स्तुति और उसकी उत्तमता का वर्णन और बड़ा गुणगान करता है, और जिसमें वह न अपने आप से सन्तुष्ट हो पाता है, न उस प्रेम को जो वह उसके प्रति रखता है पर्याप्त रीति से व्यक्त कर पाता है; इसके अतिरिक्त वह अनेक उल्लेखनीय विलाप और सान्त्वनाएँ भी जोड़ता है। इसलिए परमेश्वर की सब सन्तानों के लिए यही सबसे उचित है कि वे इसे सदा अपने हृदय में भी रखें और अपने मुँह में भी, और इस पर निरन्तर मनन करते रहें, जैसा इस पवित्र भविष्यद्वक्ता ने अपने संकट में किया, ताकि जब कभी और जैसा भी क्लेश उन पर आए, वे भी वैसी ही शान्ति पाएँ, और उस बात से भागें और घृणा करें जो प्रभु की दृष्टि में दुष्ट और बुरी है।
इस भजन को, जो इब्रानी वर्णमाला के अनुसार आठ-आठ पदों के बाईस भागों में बँटा है, हमारे उद्धारकर्ता और छुड़ानेवाले मसीह के महिमामय सुसमाचार के उस भक्त और विद्वान पिता तथा अति प्रसिद्ध प्रचारक ने उसी क्रम के अनुसार अत्यन्त भक्तिपूर्वक सम्भालकर उतने ही उपदेशों में ढाला है, ताकि परमेश्वर की पाठशाला के उन सब सच्चे और विश्वासी शिष्यों को लाभ और शान्ति मिले जो उन्हें परिश्रम से पढ़ेंगे और अपने जीवन और चाल-चलन में उसी निर्देश पर चलने का यत्न करेंगे।
इन उपदेशों को मैंने अपनी अल्प योग्यता के अनुसार फ्रेंच से अंग्रेज़ी में किया है, और अपने इस साधारण परिश्रम को आप श्रीमानों को समर्पित करने और भेंट करने का साहस किया है, कि यह मसीह में मेरी सद्भावना का एक विशेष चिह्न हो; और मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप मेरे इस श्रम को अनगढ़ अनुवाद के अनुसार नहीं, वरन् उन बातों की उत्तमता के अनुसार, जो ये प्रस्तुत करते हैं, और आपके प्रति मेरे हार्दिक स्नेह के अनुसार स्वीकार करें। और मुझे यह करने का साहस इसलिए और भी हुआ कि मुझे विश्वसनीय सूत्रों से आपके ऐसे ही भक्तिपूर्ण ग्रन्थों को पढ़ने में आपके बड़े परिश्रम का समाचार मिला है, और इसलिए भी कि स्टफ के इस देश में होनेवाले सब उपदेशों और भक्ति के कार्यों में आपकी नित्य उपस्थिति और परिश्रमी ध्यान का मैं स्वयं Testis oculatus अर्थात् प्रत्यक्षदर्शी साक्षी हूँ। आपके इन भले और भक्तिपूर्ण आरम्भों को, और इन क्षेत्रों के अन्य सब परम आदरणीय स्त्री-पुरुषों के (तथा अन्य सब के भी, चाहे वे किसी भी पद और दशा के हों) आरम्भों को, मैं हार्दिक रूप से हमारे भले परमेश्वर और दयालु पिता से, उसके मसीह, उसके सत्य और उसकी दया के निमित्त, विनती करता हूँ कि वह इन्हें बढ़ाए, दृढ़ करे और आपके जीवन और चाल-चलन में इनके नित्य अभ्यास के साथ कुछ मात्रा में बनाए रखे, और यहाँ आपके जीवन के अन्तिम दिनों तक पूरी स्थिरता प्रदान करे, जिसके बिना बाकी सब परिश्रम व्यर्थ ही है। क्योंकि प्रेरित गवाही देता है कि यदि हम अपने उस आरम्भ को, जिसके द्वारा हम थामे गए हैं, अन्त तक दृढ़ता से थामे रहें, तो हम मसीह के भागी हुए हैं।
इसलिए प्रभु परमेश्वर अपने पवित्र आत्मा के द्वारा ये फल आप में और हम सब में, जो उसके सुसमाचार को मानते हैं, उत्पन्न करे, और हमारे विरोधियों को (जब उसे भाए) सत्य की ओर ले आए, क्योंकि वह सत्य का परमेश्वर है; ताकि जब उसका पुत्र मसीह हमारा उद्धारकर्ता महिमा में प्रकट हो, तब हम उन सब बातों में, जो उसने हमारे उद्धार के लिए हम पर प्रकट करना उचित समझा, बिना लड़खड़ाए चलनेवाले पाए जाएँ। मिल्डनहॉल से, 4 नवम्बर, 1579।
प्रभु में आप श्रीमानों की आज्ञा के अधीन, थॉ. स्टॉकर।
