68 में से अध्याय 50

मैंने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण किया है" (कुलुस्सियों 2:6)। मसीह आने को प्रस्तुत है

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मैंने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण किया है" (कुलुस्सियों 2:6)। मसीह आने को प्रस्तुत है

वैद्य, जिसके पास सब पापियों को, जिन्हें सहायता की आवश्यकता है, जाने की आज्ञा दी गई है। विश्वासी विश्वास के द्वारा उसके पास आता है—और चंगा हो जाता है।

2. विश्वास करना आत्मा का मसीह को ग्रहण करना है। पौलुस कहता है, "तुमने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण किया है" (कुलुस्सियों 2:6)। मसीह मनुष्य के हृदय में क्षमा, दया और अनुग्रह के साथ आने को, और वहाँ उसके मेल करानेवाले और राजा के रूप में वास करने को प्रस्तुत है। वह कहता है, "मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। विश्वासी उसका शब्द सुनता है, द्वार खोलता है, और मसीह को अपने शिक्षक, याजक और राजा के रूप में भीतर आने देता है।

3. विश्वास करना आत्मा का मसीह पर निर्माण करना है। पौलुस कहता है, तुम "उसमें जड़ पकड़ते और बढ़ते जाते हो।" "तुम प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नींव पर बनाए गए हो" (कुलुस्सियों 2:7; इफिसियों 2:20)। मसीह वही निश्चित कोने का पत्थर है, वही दृढ़ नींव है, जो अकेले ही पापी आत्मा का भार उठा सकती है। विश्वासी अनन्तकाल के लिए अपनी आशा उसी पर रखता है—और सुरक्षित है। पृथ्वी हिल जाए और घुल जाए—परन्तु वह एक चट्टान पर बना है, और कभी लज्जित न होगा।

4. विश्वास करना आत्मा का मसीह को पहिन लेना है। पौलुस कहता है, "तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है, उन्होंने मसीह को पहिन लिया है" (गलातियों 3:27)। मसीह वही शुद्ध श्वेत वस्त्र है, जिसे परमेश्वर ने उन सब पापियों के लिए ठहराया है जो स्वर्ग में प्रवेश करना चाहते हैं। विश्वासी विश्वास के द्वारा यह वस्त्र पहिन लेता है—और तुरन्त परमेश्वर की दृष्टि में सिद्ध और निष्कलंक हो जाता है।

5. विश्वास करना आत्मा का मसीह को थाम लेना है। पौलुस कहता है, "हम ने शरण ली है कि उस आशा को जो हमारे साम्हने रखी है, थाम लें" (इब्रानियों 6:18)। मसीह वही सच्चा शरण-नगर है, जिसकी ओर लहू का पलटा लेनेवाले से भागता हुआ मनुष्य दौड़ता है, और जिसमें वह सुरक्षित रहता है। मसीह वही वेदी है जो उस मनुष्य के लिए शरणस्थान बनी जिसने उसके सींगों को थाम लिया। मसीह वही दया का सर्वशक्तिमान हाथ है, जिसे परमेश्वर स्वर्ग से खोए हुए और डूबते हुए पापियों की ओर बढ़ाता है। विश्वासी विश्वास के द्वारा इस हाथ को थाम लेता है, और नरक के गड्ढे से बचाया जाता है।

6. विश्वास करना आत्मा का मसीह को खाना है। प्रभु यीशु कहता है, "मेरा मांस वास्तव में खाने की वस्तु है। जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा"

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