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ट्रेंट की महासभा के तीसरे अधिवेशन में प्रकाशित प्रथम आदेश
बृहस्पतिवार, 4 फरवरी, 1546।
पवित्र और अविभाजित त्रिएकता, पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम में। ट्रेंट की यह पवित्र, विश्वव्यापी और सामान्य महासभा, जो प्रेरितीय पीठ के उपर्युक्त तीनों प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में पवित्र आत्मा में विधिपूर्वक एकत्र हुई है, संचालित किए जानेवाले कार्यों की गुरुता पर विचार करते हुए, विशेषकर उन कार्यों पर जो झूठी शिक्षाओं के उन्मूलन और आचरण के सुधार, इन दो शीर्षकों के अन्तर्गत आते हैं और जिनके लिए वह विशेष रूप से एकत्र हुई है; और प्रेरित के साथ यह स्वीकार करते हुए कि उसे केवल मांस और लहू से ही नहीं, वरन् आकाशमण्डल की दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से भी जूझना है, उसी प्रेरित के साथ सब को और प्रत्येक को विशेष रूप से यह उपदेश देती है कि वे प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवन्त बनें, और सब बातों में विश्वास की ढाल लें, जिससे वे उस दुष्ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सकें, और उद्धार का टोप, अर्थात् परमेश्वर का वचन, धारण करें। इसलिए, ताकि महासभा की यह भक्तिपूर्ण चिन्ता परमेश्वर के अनुग्रह से आरम्भ हो और आगे बढ़े, उसने सब बातों से पहले यह ठहराया और आदेश दिया है कि विश्वास का एक अंगीकार सबसे आगे रखा जाए; इसमें वह उन पिताओं के उदाहरणों का अनुसरण करती है जो अधिक गम्भीर महासभाओं में अपनी कार्यवाही के आरम्भ में ही सब झूठी शिक्षाओं के विरुद्ध यह ढाल खड़ी करने के अभ्यस्त थे; और इसी के द्वारा उन्होंने कभी-कभी अविश्वासियों को विश्वास की ओर खींच लिया, विधर्मियों को भगा दिया, और विश्वासियों को दृढ़ किया। अतः वह विश्वास-सूत्र, जिसे पवित्र रोमी कलीसिया उन आरम्भिक सिद्धान्तों के रूप में प्रयोग करती है जिन पर मसीही विश्वास का अंगीकार करनेवाले सब लोग अनिवार्य रूप से एकमत हैं, और वह दृढ़ और एकमात्र नींव जिसके विरुद्ध अधोलोक के फाटक कभी प्रबल न होंगे, उसे महासभा ने उन्हीं शब्दों में प्रस्तुत करना उचित समझा जिनमें वह कलीसियाओं में पढ़ा जाता है, और जो इस प्रकार है:—
“मैं एक परमेश्वर पिता, सर्वशक्तिमान, स्वर्ग और पृथ्वी के, और सब दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के सृष्टिकर्ता में विश्वास करता हूँ: और एक प्रभु यीशु मसीह में, जो परमेश्वर का एकलौता पुत्र है, और सब युगों से पहले पिता से उत्पन्न हुआ: परमेश्वर से परमेश्वर, ज्योति से ज्योति, सच्चे परमेश्वर से सच्चा परमेश्वर, उत्पन्न हुआ, सृजा नहीं गया, पिता के साथ एक ही तत्व का, जिसके द्वारा सब कुछ बना: जो हम मनुष्यों के लिए और हमारे उद्धार के लिए स्वर्ग से उतरा, और पवित्र आत्मा से कुँवारी मरियम के द्वारा देहधारी हुआ; और मनुष्य बना: वह हमारे लिए पुन्तियुस पिलातुस के अधीन क्रूस पर चढ़ाया भी गया, दुःख उठाया और गाड़ा गया, और पवित्रशास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी उठा, और स्वर्ग पर चढ़ गया, और पिता के दाहिने हाथ बैठा है: और वह महिमा के साथ जीवितों और मरे हुओं का न्याय करने के लिए फिर आएगा; और उसके राज्य का अन्त न होगा। और मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता हूँ, जो प्रभु और जीवन का देनेवाला है, जो पिता और पुत्र से निकलता है, जिसकी पिता और पुत्र के साथ आराधना और महिमा की जाती है; जो भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बोला। और मैं एक पवित्र, सार्वभौमिक और प्रेरितीय कलीसिया में विश्वास करता हूँ। मैं पापों की क्षमा के लिए एक ही बपतिस्मा को मानता हूँ, और मरे हुओं के पुनरुत्थान और आनेवाले युग के जीवन की बाट जोहता हूँ। आमीन।”
इसके अतिरिक्त, ट्रेंट की पवित्र, विश्वव्यापी और सामान्य महासभा, जो प्रेरितीय पीठ के उपर्युक्त तीनों प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में पवित्र आत्मा में विधिपूर्वक एकत्र हुई है, यह जानकर कि भिन्न-भिन्न स्थानों से बहुत से धर्माध्यक्ष यात्रा के लिए तैयार हैं और कुछ मार्ग में भी हैं, और यह विचार करके कि पवित्र महासभा द्वारा जो कुछ ठहराया जाना है वह सब की दृष्टि में उतना ही अधिक आदरणीय और सम्मानित प्रतीत होगा जितनी बड़ी और पूर्ण वह सभा और पिताओं की उपस्थिति होगी जिसके द्वारा वह अनुमोदित और पक्का किया जाता है, महासभा ने निश्चय और आदेश किया है कि इस अधिवेशन के बाद का अगला अधिवेशन आनेवाले लाएटारे रविवार के बाद के पहले बृहस्पतिवार को होगा। फिर भी इस बीच वे यह ध्यान रखेंगे कि जिन विषयों की चर्चा और जाँच महासभा द्वारा उचित जान पड़े, उनमें विलम्ब न हो।
