आरम्भिक भाग

शीर्षक-पृष्ठ और विषय-सूची

On the Law of God · John Calvin

यह हिन्दी संस्करण UECF.NET के लिए AI-सहायता से किए गए पूर्ण अनुवाद और सम्पादकीय गुणवत्ता-समीक्षा के द्वारा तैयार किया गया है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।

शीर्षक-पृष्ठ और विषय-सूची

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परमेश्वर की व्यवस्था पर

जॉन कैल्विन द्वारा

“मसीही होने का, अर्थात् अनुग्रह की व्यवस्था के अधीन होने का, यह अर्थ नहीं कि हम व्यवस्था से बाहर निरंकुश भटकते फिरें, वरन् यह कि हम मसीह में कलम लगाए जाएँ, जिसके अनुग्रह से हम व्यवस्था के श्राप से स्वतंत्र हैं, और जिसके आत्मा के द्वारा व्यवस्था हमारे हृदयों पर खुदी हुई है।” ~ जॉन कैल्विन

विषय-सूची

हम सब व्यवस्था के द्वारा दोषी ठहरे हैं

व्यवस्था हमें निरुत्तर करती और निराशा की ओर ले जाती है

व्यवस्था की दासता से स्वतंत्रता

व्यवस्था की आत्मिकता

जब श्राप आशीष बन जाता है

वचन ही हमारा एकमात्र नियम

नैतिक व्यवस्था की व्याख्या

पहली आज्ञा

दूसरी आज्ञा

तीसरी आज्ञा

चौथी आज्ञा

पाँचवीं आज्ञा

छठी आज्ञा

सातवीं आज्ञा

आठवीं आज्ञा

नौवीं आज्ञा

दसवीं आज्ञा

मसीह व्यवस्था के अधीन यहूदियों को ज्ञात था, फिर भी सुसमाचार के अधीन ही प्रकट किया गया

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