इस पुस्तक में खोजें
यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
1. सम्भव है कि बच्चों को माता-पिता के रोग विरासत में मिलें। परन्तु यदि माता-पिता हाथ, पैर या आँखें खो दें, तो आवश्यक नहीं कि बच्चे लँगड़े, अपंग या अन्धे जन्में। मूल पाप के साथ भी ऐसा ही है। माता-पिता के सब गुण, अच्छे या बुरे, बच्चों को विरासत में नहीं मिलते; बच्चों के चरित्र का बहुत कुछ उनके अपने सचेत कार्यों का परिणाम है। यदि उन्हें अपने माता-पिता के सब गुण विरासत में मिलते, तो उन्हें अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता था। योग्यता और चरित्र थोड़ी ही मात्रा में विरासत में मिलते हैं; उनकी वृद्धि या परिपक्वता बहुत हद तक उनके अपने प्रयत्नों पर निर्भर है।
2. यदि कोई वस्तु प्रकाश के सामने आ जाए, तो वह छाया डालती है या अन्धकार उत्पन्न करती है। चन्द्र-ग्रहण सूर्य और चन्द्रमा के बीच पृथ्वी के आ जाने से होता है। जब किसी दूसरी वस्तु की छाया हम पर पड़ती है, तो हम उसके लिए उत्तरदायी नहीं, क्योंकि छाया हमने नहीं, बल्कि बाहरी वस्तु ने डाली है। चूँकि हम उस छाया के घेरे में हैं, हम उससे प्रभावित होते हैं, परन्तु हम उसके लिए उत्तरदायी नहीं। परन्तु हम उन बुरे विचारों के लिए उत्तरदायी हैं जो हमारे हृदयों से बादलों के समान उठते हैं और आकाश में तैरते हुए अन्धकार उत्पन्न करते हैं।
3. पाप और उनके परिणाम, यद्यपि ख़तरनाक हैं, अनन्त नहीं हैं। परमेश्वर और उनके सिवा जिन्हें वह अनन्तता प्रदान करता है, और कुछ भी अनन्त नहीं है। यदि कोई दूसरा प्राणी परमेश्वर से अलग स्वयं अपने बल पर अस्तित्व में होता, तो उसमें भी वे असीम गुण होने चाहिए जो परमेश्वर में हैं। यह असम्भव है, क्योंकि निरपेक्ष सत्ता केवल एक ही है।
परमेश्वर का अस्तित्व इस बात की गारण्टी है कि एक आदर्श व्यवस्था स्थायी रूप से बनी रहेगी। जो कुछ उसके स्वभाव के विरुद्ध है (अर्थात् बुराई), वह सदा के लिए उसकी उपस्थिति में टिक नहीं सकता। इसलिए सारी सृष्टि, जो बुराई और व्यर्थता के अधीन होने के कारण कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है, सदा के लिए विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी (रोमियों 8:20-22)।
