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यह हिन्दी संस्करण मशीन-सहायता से अनुवादित है और समीक्षा की प्रक्रिया में है। अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी मूल पाठ ही प्रामाणिक है। कोई त्रुटि दिखे तो [email protected] पर लिखें।
मूल वचन
आओ; अब सब कुछ तैयार है।
लूका 14:17 KJV
उपदेश
“आओ; अब सब कुछ तैयार है।”—लूका 14:17। यह निमन्त्रण सबसे पहले यहूदियों को दिया गया था, परन्तु मुझे ऐसा लगता है कि यह हम पर भी विशेष रूप से लागू होता है। जब प्रभु पहली बार यहाँ था, उसकी अपेक्षा अब दिन और ढल चुका है, और इसलिये भोजन का समय स्पष्ट रूप से और निकट आ गया है। छायाएँ लम्बी होती जा रही हैं, वर्तमान युग का सूर्य अस्त होने को है; जब से प्रभु ने पहली बार भोजन के समय अपने दासों को भेजा था, तब से लगभग उन्नीस सौ वर्ष इस दिन में से घट चुके हैं। मेम्ने के ब्याह के भोज का समय पूरा होना शीघ्र ही आनेवाला है, और इसलिये हमें उचित है कि नेवता पाए हुए अतिथियों तक सन्देश पहुँचाने में हम पहले से कहीं अधिक उत्सुक हों।
और यदि हमारे उद्धारकर्ता के दिनों में भी कहा जा सकता था कि सब कुछ तैयार है, तो आज हम इसे और भी अधिक बल देकर कह सकते हैं; क्योंकि जब उसने यह दृष्टान्त सुनाया था तब पवित्र आत्मा अभी दिया नहीं गया था, परन्तु अब पिन्तेकुस्त बीत चुका है, और परमेश्वर का आत्मा हमारे साथ बना रहता है, कि वचन के साथ-साथ चले, उसे सामर्थ से भर दे, और जब हम सत्य को भोजन के समान ग्रहण करें तब हमारे प्राणों को आशीष दे। अतः इस समय बड़े ज़ोर के साथ कहा जा सकता है कि अब सब कुछ तैयार है, और भोज अतिथियों की बाट जोह रहा है।
मैं आपसे विनती करता हूँ कि बहाने बनाना आरम्भ न कीजिए, परन्तु जब हम आपको आने का नेवता दें तब हमारे पीछे आने को तैयार रहिए, जब हम आपको भीतर लाने का यत्न करें तब हमारे साथ चलिए, या कम से कम तब हमारी विनतियों के आगे झुक जाइए जब हम प्रेम की सारी पवित्र जबरदस्ती के साथ आपको भीतर आने के लिये विवश करना चाहें। जब तक आप बस इस बात तक पहुँचाए जाएँ कि “आओ; अब सब कुछ तैयार है,” तब तक हम मनाने के इन तीनों, एक से एक बढ़कर, उपायों को काम में लाने से पीछे नहीं हटेंगे। मूल वचन में स्पष्ट रूप से दो बातें हैं, और इनका एक-दूसरे से घनिष्ठ सम्बन्ध है। एक सीधा-सादा निमन्त्रण—“आओ,” और फिर एक प्रबल तर्क—“क्योंकि सब कुछ तैयार है।” यह तर्क परमेश्वर की तैयारियों से लाया गया है, राजकीय भोज के स्वादिष्ट व्यंजनों के बीच से बटोरा गया है।
“मेरे बैल और पले हुए पशु मारे गए हैं; भोज में आओ।” परमेश्वर की ओर से हर वस्तु का तैयार होना ही वह तर्क है जिसके कारण मनुष्यों को आकर उसके अनुग्रह में भागी होना चाहिए: और इसी बात पर हम इस समय ध्यान देंगे—दया के भोज का तैयार होना ही वह कारण है जिसके लिये मनुष्यों को तुरन्त उसमें आना चाहिए।
1. हम अपने मनन का आरम्भ पहला कथन रखकर करेंगे, जो हमारे प्रवचन का पहला भाग होगा, अर्थात् यह कि
सब कुछ तैयार रखना परमेश्वर की रीति है, चाहे अपने अतिथियों के लिये हो चाहे अपने प्राणियों के लिये। आप उसे कभी किसी बात में पिछड़ा हुआ नहीं पाएँगे। जब अतिथि आते हैं तो मेज़ सजाने और भोजन तैयार करने के लिये कोई भागदौड़ नहीं मचती, परन्तु प्रभु बड़ी दूरदर्शिता रखता है, और छोटी से छोटी बात का भी भली-भाँति प्रबन्ध किया गया होता है। सृष्टि में भी ऐसा ही था। उसने पृथ्वी पर घास की एक पत्ती भी तब तक नहीं रची जब तक उसके लिये भूमि और वायुमण्डल तैयार नहीं कर दिए गए, और जब तक दयालु सूर्य ने पृथ्वी पर दृष्टि डालना नहीं सीख लिया। सूर्य के बिना, या दिन और रात के आने-जाने के बिना, वनस्पति की कल्पना तो कीजिए।
परन्तु वायु प्रकाश से भर गई थी, आकाशमण्डल ने बादलों को थाम रखा था, और सूखी भूमि समुद्र में से प्रकट हो चुकी थी, और तब घास, पौधों और वृक्षों के लिये सब कुछ तैयार था। न ही परमेश्वर ने कोई भी जीवित प्राणी—न आकाश के बीच उड़नेवाले पक्षी, न समुद्रों में तैरनेवाली मछलियाँ, न सूखी भूमि पर चलनेवाले पशु—तब तक रचा जब तक उसने उसका निवास-स्थान तैयार न कर लिया और उसका ठहराया हुआ भोजन तैयार न कर दिया। चरने के लिये चरागाहें होने से पहले कोई मवेशी न थे; घोंसलों के लिये वृक्ष होने से पहले कोई पक्षी न थे; नहीं, रेंगनेवाला एक कीड़ा भी तब तक न था जब तक उसके भोजन का भाग उपलब्ध न करा दिया गया। किसी भी प्राणी को भूखे पेट इस बाट में नहीं रहना पड़ा कि उसका भोजन उगे; सब कुछ तैयार था: पहले वनस्पति के लिये तैयार, और फिर उसके बाद पशु-जीवन के लिये।
जहाँ तक आदम की बात है, जब परमेश्वर उसे अपनी सृष्टि के अन्तिम और सबसे श्रेष्ठ कार्य के रूप में बनाने आया, तब सब कुछ तैयार था। बहती नदियों के किनारों पर वाटिका लगाई जा चुकी थी, और उसमें सब प्रकार के वृक्ष लगाए गए थे; उसके आहार के लिये फल पक चुके थे, और उसके आनन्द के लिये फूल खिले हुए थे। वह किसी खाली, बिना सजे घर में नहीं आया, परन्तु उसने ऐसे घर में प्रवेश किया जिसे उसके पिता ने उसके रहने के लिये मनोहर और सुखदायक बना दिया था। पहले संसार को सुसज्जित किया गया, और फिर वह मनुष्य जिसे उस संसार पर शासन करना था, उसमें रखा गया।
मानो प्रभु कहता है, “सब कुछ तैयार है; हे बीजवाले पौधो, उग आओ”; और फिर, “सब कुछ तैयार है, हे मैदान के मृगो और हरिणियो, निकल आओ!” और फिर, “सब कुछ तैयार है, हे मनुष्य, जो मेरे ही स्वरूप में बनाया गया है, आगे आ खड़ा हो!” बाद के समयों में भी मनुष्यों के साथ परमेश्वर के व्यवहारों से हम इसी सत्य के उदाहरण बटोर सकते हैं। पहले जहाज़ बनाया गया, और उस विचित्र यात्रा के लिये जिस पर वे निकलनेवाले थे, विभिन्न प्राणी अपनी सारी आवश्यक खाद्य-सामग्री समेत उसमें इकट्ठे किए गए: और तब प्रभु ने नूह से कहा, “तू अपने सारे घराने समेत जहाज़ में आ।” जब वे चुने हुए आठ जन जहाज़ में प्रवेश कर रहे थे, तब उनके लिये उसकी वाणी यही थी, “सब कुछ तैयार है, आओ।”
अब और ठहरने की आवश्यकता न थी, हर तैयारी हो चुकी थी, और इसलिये परमेश्वर ने उन्हें भीतर बन्द कर दिया। एकमात्र बुद्धिमान परमेश्वर हर काम ठीक समय पर और पूरी सटीकता के साथ करता है। जिस दिन किसी वस्तु की आवश्यकता होती है, उसी दिन वह तैयार की जाती है। परमेश्वर के विधान की एक और घटना लीजिए, जैसे इस्राएल का मिस्र में उतर जाना। परमेश्वर ने ठान लिया था कि याकूब और उसका वंश कुछ समय के लिये हाम के देश में परदेशी होकर रहें, परन्तु उसने सारी बात को कितनी बुद्धिमानी से तैयार किया! उसने उनके आगे एक पुरुष को भेजा, अर्थात् यूसुफ को, और यूसुफ वहाँ सामर्थ से विभूषित होकर सिंहासन पर था, कि अकाल के समय उनका पालन-पोषण करे। वह बरसों पहले से वहाँ था, ठीक समय पर, कि जब तक बहुतायत के सात वर्ष रहें तब तक गेहूँ का भण्डार भर ले, ताकि अकाल के सात वर्षों में उनका भली-भाँति पेट भरा जाए।
गोशेन भी यूसुफ के अधिकार में था, ताकि इस्राएल की भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल उस उपजाऊ देश में रह सकें। जब तक सब कुछ तैयार न हो, परमेश्वर का इस्राएल मिस्र में नहीं जाएगा; और जब सब कुछ तैयार होगा तब वे ऊँचे हाथ और बढ़ाई हुई भुजा के साथ फिर निकल आएँगे। ऐसा ही तब भी हुआ जब गोत्र स्वयं कनान में जा बसे। जब तक सब कुछ तैयार न हो गया, परमेश्वर उन्हें प्रतिज्ञा के देश में नहीं ले गया।
उन्हें उपयुक्त समय की बाट जोहनी पड़ी, क्योंकि प्रभु ने कहा था, “अब तक एमोरियों का अधर्म पूरा नहीं हुआ।” जब तक उस देश के निवासी दया की सीमाओं को पार न कर चुके और मृत्यु के लिये दोषी न ठहराए गए, तब तक इस्राएली उस दृश्य पर नहीं लाए गए, कि एक साथ उनके दण्ड देनेवाले भी हों और उनके उत्तराधिकारी भी; और जब गोत्र यरदन नदी पर पहुँचे, तब परमेश्वर ने उनके लिये सब कुछ तैयार कर रखा था, क्योंकि उसने लोगों को निकालने के लिये उनके आगे बर्रें भेज दी थीं, और मरी भी, क्योंकि भेदियों ने कहा था, “वह देश अपने निवासियों को निगल जाता है।” प्रभु परमेश्वर उनके आने से पहले ही उनके आगे-आगे जाकर उनकी लड़ाइयाँ लड़ चुका था और उनके लिये स्थान तैयार कर चुका था, यहाँ तक कि जब वे भीतर गए तब ऐसे घरों में रहे जिन्हें उन्होंने नहीं बनाया था, और ऐसे जैतून के फल बटोरे जिन्हें उन्होंने नहीं लगाया था।
वे एक ऐसे देश में आए जिसमें दूध और मधु की धाराएँ बहती थीं, ऐसा देश जो भली-भाँति जोता-बोया हुआ था, न कि कोई जंगल जिसे कठिन परिश्रम से फिर खेती के योग्य बनाना पड़े। इस्राएल ऐसे देश में आया जो प्रभु की वाटिका के समान था, जिसका फल तुरन्त भोगा जा सकता था, क्योंकि यरदन पार करने के लगभग तुरन्त बाद ही उन्होंने उस देश का पुराना अनाज खाया। तो आप देखते हैं कि “सब कुछ तैयार है” एक ऐसी घोषणा है जिसे प्रभु ने आत्मा में उन लोगों के लिये अक्सर किया है जिन्हें वह आशीष देने के लिये चुनता है। अब यह तथ्य कि सुसमाचार के महान भोज में सब कुछ तैयार है, हमें पहले तो यह सिखाता है कि परमेश्वर के विचार मनुष्यों के आने से पहले ही आगे चल पड़ते हैं।
“आओ, क्योंकि सब कुछ तैयार है।” यह नहीं कि “यदि तुम आओगे तो सब कुछ तैयार हो जाएगा,” परन्तु यह कि “सब कुछ तैयार है, इसलिये आओ।” अनुग्रह पहले है, और मनुष्य अपनी सबसे अच्छी दशा में भी उसके पदचिह्नों पर पीछे-पीछे चलता है। हमने परमेश्वर के विषय में सोचा भी न था, उससे बहुत पहले उसने हमारे विषय में सोचा; हाँ, हमारे अस्तित्व में आने से पहले और स्वयं समय के आरम्भ होने से भी पहले, सनातन परमेश्वर के हृदय में उन लोगों के प्रति प्रेम के विचार थे जिनके लिये अब उसकी दया की मेज़ बिछी हुई है। उसने प्राचीनकाल से ही अपने प्रतापी मन में हर बात की योजना और प्रबन्ध कर रखा था; उसने सचमुच अपने भोज की सारी सामग्री और सारे अतिथियों को पहले से जान लिया और पहले से ठहरा दिया था; पृथ्वी के बनने से भी पहले उसकी सनातन वाचा और अभिप्राय में सब बातें निश्चित हो चुकी थीं।
हे पापी, कभी यह न सोचिए कि आप परमेश्वर के प्रेम से आगे निकल सकते हैं; जब आप दौड़ के आरम्भ पर भी नहीं पहुँचे होते, तब तक वह उसके अन्त पर पहुँच चुका होता है। आपके आरम्भ करने से पहले ही परमेश्वर पूरा कर चुका है। उसके विचार हमारे विचारों से पहले हैं, और उसके कार्य भी, क्योंकि वह यह नहीं कहता, “सब बातों की योजना और प्रबन्ध हो चुका है,” परन्तु यह कि “सब कुछ तैयार है।” यीशु, वह महान बलिदान, बलि किया जा चुका है; हमारे शुद्ध होने का सोता लहू से भर चुका है; पवित्र आत्मा दिया जा चुका है; वह वचन जिसके द्वारा हमें शिक्षा मिलनी है, हमारे हाथों में है; और वह ज्योति जो उस पवित्र पृष्ठ को प्रकाशित करेगी, पवित्र आत्मा के द्वारा हमसे प्रतिज्ञा की गई है। प्रतिज्ञा की हुई बातों से हमें मसीह के पास आने का प्रोत्साहन मिलना चाहिए, परन्तु जो बातें दी जा चुकी हैं, उन्हें तो ऐसा आकर्षण होना चाहिए जिसका विरोध किया ही न जा सके।
हमारे दया के लिये पुकारने को आने से पहले ही पवित्र त्रिएकता के द्वारा सब बातें पूरी की जा चुकी हैं; यह बात प्रभु के निकट आने में हमें बड़ी आशा और उत्सुकता से भर देनी चाहिए। आइए, हे पापी, अभी आइए: इससे आपको प्रोत्साहन मिलना चाहिए, क्योंकि आपके उद्धार में जो कुछ परमेश्वर को करना है, वह सब आपके उसके विषय में सोचने से या उसके निवास की ओर एक पग भी बढ़ाने से पहले ही किया जा चुका है। आइए! यह इस बात को भी प्रमाणित करता है कि जो आते हैं उनका कितना स्वागत होता है। यदि आपको किसी मित्र से मिलने का निमन्त्रण मिले, और जब आप वहाँ पहुँचें तो द्वार बन्द पाएँ, और बहुत बार खटखटाने पर भी कोई उत्तर न दे, क्योंकि घर पर कोई है ही नहीं, तो आप समझ लेते हैं कि कोई भूल हुई है, या वह निमन्त्रण सच्चे मन से नहीं दिया गया था।
चाहे आपका मेज़बान द्वार पर आकर आपको भीतर ले भी ले, परन्तु स्पष्ट रूप से उलझन में हो, क्योंकि कोई भोजन तैयार नहीं किया गया है, और रात को आपके विश्राम का उसने कोई प्रबन्ध नहीं किया है, तो आप शीघ्र ही भाँप लेते हैं, और एक समझदार मनुष्य के समान तुरन्त कहीं और चल देते हैं, क्योंकि यदि आपका स्वागत होता तो आपके लिये सब कुछ तैयार किया गया होता। परन्तु हे दीन आत्मा, यदि आप परमेश्वर के पास आते हैं तो आपके आतिथ्य के लिये सब कुछ तैयार है। “तेरे लिये उत्सव की मेज़ बिछी है, उसके सबसे उत्तम व्यंजनों से भरी हुई।” विश्राम और शान्ति का बिछौना आपके लिये तैयार है। यहोवा कितनी उदारता से आपका स्वागत करता है, उसका स्वागत कितना सच्चा है, और उसकी यह अभिलाषा कितनी सच्ची है कि आप आकर उसके साथ भोज करें!
हमारी पहली बात के विषय में इतना ही—अपने अतिथियों के लिये सब कुछ तैयार रखना प्रभु की रीति है। हमारा दूसरा कथन यह है कि यह तैयारी इस बात का तर्क होनी चाहिए कि उसके पवित्र लोग निरन्तर उसके पास आते रहें और हर आवश्यकता के समय सहायता के लिये अनुग्रह पाएँ। हे परमेश्वर की सन्तानो, मैं इस दृष्टान्त को उस तात्कालिक उपयोग से, जो उद्धारकर्ता ने इसका किया था, अलग उठाकर आपकी भलाई के लिये काम में लाऊँगा। प्रियो, आप जानते हैं कि जब कभी प्रभु यीशु मसीह अपने लोगों को अपने पास आने और अपनी उदारता का स्वाद चखने का निमन्त्रण देता है, तब सब कुछ तैयार होता है।
तिबिरियास की झील के किनारे का वह दृश्य कितना सुन्दर था, जब प्रभु ने उन लोगों से, जो झील पर मछली पकड़ने में परिश्रम करते रहे थे, बात की और उनसे कहा, “आओ, भोजन करो।” वे भोजन करने को तो बहुत इच्छुक थे, परन्तु वे उन बड़ी-बड़ी मछलियों को किनारे पर खींचने में लगे हुए थे। स्मरण कीजिए, जब वे किनारे पर उतरे तो उन्होंने पाया कि वह निमन्त्रण व्यर्थ नहीं था, क्योंकि लिखा है, “उन्होंने कोयले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी।” वे कोयले, वह मछली और वह रोटी वहाँ कैसे आए, यह सुसमाचार-लेखक हमें नहीं बताता, परन्तु यदि हमारा प्रभु उनका गरमागरम स्वागत करने में समर्थ न होता तो वह उन्हें भोजन पर न बुलाता; वहाँ कोयले की आग थी, और उस पर मछली रखी हुई थी, और रोटी भी।
इसलिये जब कभी आपका प्रभु और स्वामी अपने धन्य आत्मा के द्वारा आपको अपने निकट आने के लिये बुलाता है, तो आप पूरी तरह निश्चित हो सकते हैं कि आपके तुरन्त आनन्द उठाने के लिये सब कुछ तैयार है: आपको कभी रुकने या हिचकिचाने की आवश्यकता नहीं, परन्तु बिना देर किए उसके पास आइए। मैं आपको सावधान करना चाहता हूँ कि आप यह उत्तर न दें, “परन्तु प्रभु, मैं अपने आपको तैयार अनुभव नहीं करता।” यह बिलकुल सच है, परन्तु यह ऐसा तर्क नहीं है जिसे आप पीछे हटे रहने के बहाने के रूप में काम में लाएँ। मुख्य बात उसकी तैयारी है, आपकी नहीं; और जब सब कुछ तैयार है, तो आप आइए, चाहे आप अपने आपको तैयार अनुभव करें या न करें। मैंने कुछ मसीहियों के विषय में सुना है जिन्होंने कहा है, “मैं प्रार्थना करने के लिये अपने मन को उचित दशा में नहीं पाता।” मेरे भाई, तब तक प्रार्थना करते रहिए जब तक आपका मन उस दशा में न आ जाए।
कुछ लोगों ने कहा है, “मुझे नहीं लगता कि आज मैं परमेश्वर के भवन को जाऊँगा; मैं बहुत दुखी, बहुत उदास हूँ।” आपको उस समय से बढ़कर और कब वहाँ जाना चाहिए, ताकि आप शान्ति पाएँ? कोई कहता है, “फिर भी, जब मेरा मन भारी हो तब क्या आप चाहेंगे कि मैं भजन गाऊँ?” हाँ, क्यों नहीं, मैं सचमुच यही चाहूँगा; मैं चाहूँगा कि आप गाते-गाते उस समुद्र की गहराइयों से ऊपर उठ आएँ जहाँ परमेश्वर की सारी लहरें आपके ऊपर से बह गई हैं। दाऊद ने बहुत बार ऐसा ही किया, जब उसने गहिरे स्थानों में से भजन आरम्भ किया, और फिर धीरे-धीरे ऊपर उठता गया, उठता गया, उठता गया, यहाँ तक कि भजन पूरा होने से पहले ही वह आनन्द के पूर्ण हर्षोन्माद में था। इसलिये, चाहे आप तैयार हों या न हों, प्रभु के पास आइए।
ध्यान दीजिए कि किन-किन समयों में इस सत्य का आप पर प्रभाव होना चाहिए। सब कुछ तैयार है, इसलिये ईश्वरीय प्रतिज्ञाओं के भण्डार-घर में आइए। क्या आप आत्मिक दरिद्रता में हैं? आइए और जो कुछ परमेश्वर ने आपके लिये जुटा रखा है उसे ले लीजिए, क्योंकि सब कुछ आपका है, और सनातन पहाड़ियों की सारी आशीषें परमेश्वर के सब लोगों की हैं। क्या आपको बल की आवश्यकता है? यह प्रतिज्ञा है, “जैसे तेरे दिन वैसी ही तेरी शक्ति हो।” वह तैयार है, आइए और उसे ले लीजिए। क्या आपको शान्ति की घटी है? क्या आप नहीं जानते कि परमेश्वर का झूठा ठहरना अनहोना है, और दृढ़ ढाढ़स देनेवाली बातें पहले से ही आपके सामने रखी हुई हैं? आइए, और अपनी सान्त्वना ले लीजिए।
हाँ, स्मरण रखिए कि जो कुछ परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है, वह उन सबका है जो उस प्रतिज्ञा पर विश्वास करते हैं, और इसलिये आप हर समय आ सकते हैं, चाहे आपकी आवश्यकता कितनी ही गहरी क्यों न हो, और यदि आपमें केवल विश्वास हो तो आप उस विशेष घटी के लिये विशेष पूर्ति पाएँगे। इसलिये पवित्र भरोसे के साथ आइए, और जो बटोरने के लिये पक चुका है, आपके लिये पक चुका है, उसे ले लीजिए। फिर प्रार्थना में दया के आसन के पास आइए; वहाँ सब कुछ तैयार है। दया का आसन मसीह के बहुमूल्य लहू से छिड़का हुआ है। पर्दा भी फटकर दो टुकड़े हो गया है, और करूबों के बीच से यहोवा की महिमा अब अत्यन्त कोमल आभा के साथ चमकती है। इसलिये आइए, हम स्वर्गीय अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्धकर चलें, क्योंकि वहाँ विनती करनेवाले याचक के लिये सब कुछ तैयार है। आपको अपने साथ वहाँ कुछ भी लाने की आवश्यकता नहीं।
आपको उस तैयारी के सिवा और कोई तैयारी करने की आवश्यकता नहीं, जो पवित्र आत्मा आपको ऐसी आहों के रूप में देने की बाट जोह रहा है जो बयान से बाहर हैं। हे परमेश्वर की सन्तान, आइए, अपनी लापरवाही और उदासीनता के होते हुए भी, या जिस किसी भी बात की आपको शिकायत हो उसके होते हुए भी; क्योंकि यद्यपि आप तैयार नहीं हैं, तौभी अनुग्रह का सिंहासन तैयार है, और इसलिये आप उसके निकट आइए और वह अनुग्रह पाइए जिसकी आपको आवश्यकता है। यदि इस समय हम मसीह के साथ संगति की ओर प्रबल प्रेरणा अनुभव करते हैं, तो स्मरण रखें कि वह स्वयं अपने लोगों के साथ संगति करने को तैयार है।
वह कहता है, “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ।” हम सोचते हैं कि हम द्वार पर खड़े होकर खटखटाते हैं, परन्तु बात ऐसी कम ही है; अपने लोगों के सम्बन्ध में बड़ा सत्य यह है कि यीशु हमसे संगति माँगता है, और हमसे कहता है कि यदि हम द्वार खोलें—और बस इतना ही वह अपने लोगों से करने को कहता है—तो वह भीतर आकर उनके साथ भोजन करेगा, और वे उसके साथ। मान लीजिए कि भोजन है ही नहीं, तो वह उसका प्रबन्ध करेगा—उसने सब कुछ तैयार कर रखा है। स्वामी कहता है, “पाहुनशाला कहाँ है?” वह यह नहीं कहता, “भोज कहाँ है?” यदि आपका हृदय पाहुनशाला बनेगा, तो वह भोजन का प्रबन्ध करेगा, और आप उसके साथ भोजन करेंगे और वह आपके साथ। पवित्रशास्त्र के अनुसार मसीह ने किसके द्वार पर खटखटाया था?
लौदीकिया की कलीसिया के द्वार पर, ठीक उसी कलीसिया के द्वार पर जिसके विषय में उसने कहा था, “इसलिये कि तू न ठण्डा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुँह में से उगल दूँगा।” इसलिये हे लौदीकिया के समान दीन विश्वासी, जो आज प्रातः यहाँ उपस्थित हैं, यदि आपके भीतर मसीह की ओर कोई भी प्रेरणा है, तो उठिए, क्योंकि सब कुछ तैयार है, और इससे पहले कि आपको पता चले, आपका प्राण अम्मीनादीब के रथों के समान हो जाएगा। वह हमें अपने अन्तरतम हृदय में ग्रहण करने को तैयार है। यह बात हमें कितनी मधुरता से विवश करनी चाहिए कि हम उड़कर यीशु की बाहों में जा पहुँचें। मैं सोचता हूँ कि यही विचार हर दैनिक कर्तव्य के सम्बन्ध में भी हमारे मन में आना चाहिए।
हम प्रातः जागते हैं, परन्तु हमें ठीक-ठीक पता नहीं होता कि हमारे आगे क्या है, क्योंकि परमेश्वर का विधान निरन्तर नई-नई बातें प्रकट करता रहता है: परन्तु मुझे प्रातःकाल यह सोचना अच्छा लगता है कि दिन भर के मेरे मार्ग के लिये सब कुछ तैयार है; कि यदि मैं अपनी सेवकाई में परमेश्वर की सेवा करने निकलूँगा, तो उसने कोई ऐसा कान तैयार कर रखा है जिसमें मुझे अनुग्रह का कोई वचन डालना है, और कोई ऐसा हृदय जिसकी कूँडों में मैं कोई धन्य बीज प्रभावशाली रीति से बोऊँगा। देखिए, परमेश्वर का सारा विधान अपने शक्तिशाली पहियों समेत जीवते परमेश्वर के सेवक के साथ मिलकर काम कर रहा है; मेरे भाई, बस उत्साह और भरोसे के साथ आगे बढ़ते चलिए, और आप पाएँगे कि आपके मार्ग का हर पग आपके लिये तैयार है।
आपके स्वामी ने वह मार्ग पहले ही तय कर लिया है और आपके लिये विश्राम के वे घर चिह्नित कर दिए हैं जहाँ आपको स्वर्गीय नगर तक पहुँचने तक ठहरना है, और वे पवित्र स्थान भी जहाँ आप उसके धन्य नाम की महिमा करेंगे। एक उपयोगी जीवन के लिये हमारे लिये सब कुछ तैयार है। हाँ, और यदि जीवन की दैनिक सेवा से आगे बढ़कर हम पवित्रता के और ऊँचे स्तर की अभिलाषा करने की प्रेरणा अनुभव करें, यदि हम अनुग्रह में बढ़ना और मसीह यीशु में मनुष्य के डील-डौल की परिपूर्णता तक पहुँचना चाहें, तो हमारे लिये सब कुछ तैयार है। कोई भी मसीही पवित्रता के लिये ऐसी पवित्र महत्वाकांक्षा नहीं रख सकता जिसे पूरा करने के लिये प्रभु तैयार न हो।
हे आप जो अपने स्वामी के समान बनना चाहते हैं, हे आप जो ऐसा आत्म-बलिदान करने की इच्छा रखते हैं जो आपमें उसके अनुग्रह की सामर्थ को प्रकट करे, पवित्र आत्मा आपकी सहायता करने की बाट जोह रहा है, सब बातें आपके लिये काम करेंगी, क्योंकि सब कुछ तैयार है। इसलिये निडर होकर आइए। सम्भव है कि किसी दिन आप और मैं या तो बहुत बूढ़े हो जाएँ, या कोई रोग हमें आ पकड़े, और हम रोगशय्या पर पड़े हुए अपने स्वामी के आने की बाट जोहते और प्रतीक्षा करते रहें।
तब अचानक उसकी ओर से एक दूत प्रकट होगा, जो हमारे पास यह वचन लाएगा, “सब कुछ तैयार है, भोज में आओ,” और पृथ्वी पर अपनी आँखें मूँदकर हम उन्हें स्वर्ग में खोलेंगे और देखेंगे कि उसने क्या किया है जिसने इतनी मधुरता से कहा था, “मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ, और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा, कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो।” आह, वह कितना आनन्दमय क्षण होगा जब हम यह बुलावा सुनेंगे, “सब कुछ तैयार है; अपने मिट्टी के घर को, अपने खेत को, अपने व्यापार को, और उसे भी जो तेरी गोद में सोती है, छोड़ दे, क्योंकि मेम्ने का ब्याह आ पहुँचा है, और तुझे वहाँ होना ही है; इसलिये, हे मेरी प्रिय, हे मेरी सुन्दरी, उठकर चली आ।
जाड़ा बीत गया और जाता रहा, तेरे लिये चिड़ियों के गाने का समय आ पहुँचा है; सब कुछ तैयार है, आ!” यहाँ ठहरने का मेरा बड़ा मन होता है, परन्तु अगली बात पर आगे बढ़ने के लिये मुझे अपने आपको इस बात से खींचकर अलग करना ही होगा। 3. ईश्वरीय दया के भोज की पूर्ण तैयारी स्पष्ट रूप से इसलिये ठहराई गई है कि वह पापियों के लिये इस बात का प्रबल तर्क हो कि वे तुरन्त क्यों आएँ। तो अब मैं पापी से ही बात करता हूँ। हे आत्मा, क्या आप अनन्त जीवन चाहते हैं? क्या आपकी आत्मा के भीतर ऐसी वस्तुओं के लिये भूख और प्यास है जो आपकी आत्मा को तृप्त करें और आपको सदा के लिये जीवित रखें? तो सुनिए, जब स्वामी का सेवक आपको निमन्त्रण देता है। “आओ, क्योंकि सब कुछ तैयार है,”—सब कुछ; कुछ-कुछ नहीं, परन्तु सब कुछ।
यहाँ से स्वर्ग तक आपको जिस किसी वस्तु की आवश्यकता हो सकती है, वह सब यीशु मसीह में, उसके व्यक्तित्व और उसके कार्य में, जुटा दी गई है। सब कुछ तैयार है: आपकी मृत्यु के बदले जीवन, आपके पाप के लिये क्षमा, आपकी मलिनता के लिये शुद्धि, आपकी नंगाई के लिये वस्त्र, आपके दुःख के बदले आनन्द, आपकी निर्बलता के लिये बल; हाँ, जितनी वस्तुओं की आपको कभी भी आवश्यकता हो सकती है, उन सबसे बढ़कर मसीह के असीम स्वभाव और कार्य में भण्डार करके रखा हुआ है। आपको यह नहीं कहना चाहिए, “मैं नहीं आ सकता क्योंकि मेरे पास यह नहीं है, या वह नहीं है।” क्या भोज आपको तैयार करना है? क्या आपको कुछ जुटाना है? क्या नमक या पानी जैसी छोटी वस्तु भी आपको जुटानी है? आप अपनी सच्ची दशा नहीं जानते, नहीं तो आप ऐसी बात का सपना भी न देखते।
उस महान गृहस्वामी ने स्वयं सारा भोज तैयार किया है; सामग्री जुटाने से आपका कोई लेना-देना नहीं, केवल उसमें भागी होना है। यदि आपको किसी बात की घटी है तो आइए और जिसकी घटी है उसे ले लीजिए; आपकी आवश्यकता जितनी बड़ी है, उतना ही बड़ा कारण है कि आप वहाँ आएँ जहाँ आपकी आवश्यकता जो कुछ भी माँग सकती है, वह सब तुरन्त पूरा किया जाएगा। यदि आप इतने कंगाल हैं कि आपमें कुछ भी भला नहीं है, तो भी सब कुछ तैयार है। जब परमेश्वर ने सब कुछ जुटा दिया है, तो आप और क्या जुटाएँगे? यदि आप उसके “सब कुछ” में कुछ जोड़ने की सोचें तो यह दुष्टता की अति होगी; यह तो महान राजा की जुटाई हुई सामग्री से ढिठाई भरी होड़ करना ही होगा, और इसे वह सहन नहीं करेगा।
जो कुछ आपको चाहिए—मैं इन शब्दों को दोहरा ही सकता हूँ—नरक के फाटकों से, जहाँ आप अभी पड़े हैं, स्वर्ग के फाटकों तक, जहाँ यदि आप विश्वास करें तो अनुग्रह आपको पहुँचा देगा,—वह सब यीशु मसीह उद्धारकर्ता में जुटाया और तैयार किया गया है। और सब कुछ तैयार है—इस शब्द पर ठहरकर विचार कीजिए। बैल और पले हुए पशु मारे जा चुके थे; इससे भी बढ़कर, वे खाए जाने के लिये पकाए जा चुके थे, वे दावत के लिये तैयार थे, वे मेज़ पर भाप छोड़ रहे थे। जब राजा भोज के लिये इतने बछड़ों को मारने की आज्ञा देता है तो यह कुछ तो है, परन्तु तब भोज तैयार नहीं होता; और जब कुल्हाड़ी के नीचे पशु गिरते हैं, और उनकी खाल उतारकर उन्हें आग पर चढ़ाने के लिये लटका दिया जाता है, तब कुछ काम तो हुआ है, परन्तु वे तैयार नहीं हैं।
जब माँस के टुकड़े गरमागरम, भाप छोड़ते हुए मेज़ पर परोसे जाते हैं, और जो कुछ चाहिए वह सब लाकर भोज के लिये उचित क्रम में सजा दिया जाता है, तभी आप पाएँगे कि भोज अपनी सबसे अच्छी सम्भव दशा में है; वह न कभी इससे अच्छा था और न कभी इससे अच्छा हो सकता है जैसा वह अब है। सब कुछ तैयार है, ठीक उसी दशा में जिसमें आपको उसकी आवश्यकता है, ठीक ऐसी दशा में जो आपके प्राण की शान्ति और आनन्द के लिये सबसे उत्तम हो। सनातन प्रेम किसी वस्तु को जितना उत्तम बना सकता है, हर वस्तु उतनी ही उत्तम है। परन्तु “अब” शब्द पर ध्यान दीजिए: “अब सब कुछ तैयार है”—ठीक अभी, इसी क्षण। आप जानते हैं कि भोजों में यदि अतिथि देर से आएँ तो अच्छी गृहिणी अक्सर परेशान हो जाती है।
यदि वे आधा घण्टा पहले आ जाएँ तो उसे खेद होगा, परन्तु आधा घण्टा देर सब कुछ बिगाड़ देती है; और जब अब सब कुछ तैयार हो और फिर भी उसके मित्र देर करें, तो वह कैसी झुँझलाहट और चिन्ता की दशा में होती है! भोजन को कुछ देर आग पर छोड़ दीजिए, तो वह “अब तैयार” नहीं लगता, परन्तु तैयार से कुछ अधिक, बल्कि बिगड़ा हुआ। इसी प्रकार वह महान गृहस्वामी इस बात पर बल देता है कि अब सब कुछ तैयार है, इसलिये तुरन्त आओ। वह यह नहीं कहता कि यदि आप और सात वर्ष ठहरेंगे तो तब सब कुछ तैयार होगा: परमेश्वर करे कि उस अवधि से बहुत पहले ही आप भोज का स्वाद चखनेवाले बनकर मनाए जाने की आवश्यकता से आगे निकल चुके हों; परन्तु वह यही कहता है कि वे सब अब तैयार हैं, ठीक अभी।
ठीक अभी, जबकि आपका हृदय इतना भारी है और आपका मन इतना लापरवाह है, और आपकी आत्मा इतनी भटकी हुई है—अब सब कुछ तैयार है। ठीक अभी, चाहे आपने इन बातों पर पहले कभी विचार न किया हो, परन्तु आज प्रातः अपने उद्धार के विषय में बिना किसी भी उद्देश्य के केवल इस बड़ी सभा को देखने के लिये यों ही चले आए हों, तौभी अब सब कुछ तैयार है।
चाहे आपके पाप आकाश के तारों के समान हों, और आपका प्राण आनेवाले न्याय की भयानक आशंका से काँपता हो, तौभी “अब सब कुछ तैयार है।” मसीह को आपके सब बार-बार ठुकराने के बाद भी, उन बहुत से निमन्त्रणों के बाद भी जो आप पर व्यर्थ गए हैं, भोज में आइए। यदि वे अब तैयार हैं, तो तर्क यही है कि अभी आइए, जब तक सब कुछ अब भी तैयार है। जब तक आत्मा ठहरा हुआ है और अब भी मनुष्यों से संघर्ष करता है, जब तक दया के फाटक अब भी पूरे खुले हैं कि “जो कोई चाहे वह आए,” जब तक जीवन, स्वास्थ्य और बुद्धि अब भी आपके लिये बचे हुए हैं, और सेवकाई की वह वाणी जो आपको आने को कहती है अब भी सुनी जा सकती है, अभी आइए, तुरन्त आइए—सब कुछ तैयार है—आइए! अब जबकि सब कुछ तैयार है, देर करना जितना दुष्टता है उतना ही मूर्खता भी है।
ध्यान दीजिए कि जिन्हें नेवता दिया गया था, उनके लिये सब कुछ तैयार था। वे नहीं आए, परन्तु जब उन्हें आने का नेवता दिया गया तब उनका उपहास नहीं किया गया था। सब कुछ तैयार होने का तथ्य यह प्रमाणित करता था कि निमन्त्रण सच्चा था, यद्यपि वह ठुकरा दिया गया। कुछ लोग ऐसे हैं जो नहीं चाहते कि हम किसी को भी निमन्त्रण दें सिवाय उनके जिनके विषय में हम मानते हैं कि वे निश्चय आएँगे, नहीं, बल्कि जो एक प्रकार से आ ही चुके हैं; अर्थात् वे पादरी को एक निरी अनावश्यक वस्तु बना देते हैं। उसे आकर उन लोगों को निमन्त्रण देने की क्या आवश्यकता है जिन्होंने आना आरम्भ कर ही दिया है?
परन्तु हम मानते हैं कि सारी मानवजाति को निमन्त्रण देना हमारा कर्तव्य और हमारा सौभाग्य है; और उन्हें भी जो नहीं आएँगे: यदि हम जानते भी कि वे नहीं आएँगे तो भी इस कारण हम उन्हें नेवते से वंचित न करते, क्योंकि दास उन्हें ब्याह में बुलाने के लिये भेजा गया था जो फिर भी सब के सब एक मन होकर बहाने बनाने लगे। उन्हें नेवता दिया गया, और बड़ी उत्सुकता से नेवता दिया गया, और सब कुछ तैयार था, यद्यपि वे नहीं आए। हे मेरे प्रिय सुननेवालो, यदि आप मसीह के पास नहीं आएँगे तो आप नाश हो जाएँगे, परन्तु आप कभी यह न कह सकेंगे कि आपको नेवता नहीं दिया गया था, और आपके लिये कुछ तैयार नहीं था। नहीं, वह भोज पूरा बिछा हुआ सामने है, और आपको सच्चाई और ईमानदारी से आने का नेवता दिया गया है। परमेश्वर करे कि आप आएँ, और तुरन्त आएँ।
4. अब मैं अपनी चौथी और अन्तिम बात पर आगे बढ़ता हूँ; परमेश्वर करे कि यह किसी खोजनेवाली आत्मा की शान्ति के लिये आशीषित हो।
यह मूल वचन पापी के तैयार होने या तैयार न होने के विषय में बहुत सी बातों का निपटारा कर देता है: क्योंकि यदि पापी के आने का कारण यह है कि सब कुछ तैयार है, तो उसका यह कहना व्यर्थ है, “परन्तु मैं तैयार नहीं हूँ।” यह स्पष्ट है कि मनुष्य की ओर से जितनी तैयारी की आवश्यकता है, वह बस आने और उस आशीष को ग्रहण करने की इच्छा है जिसे परमेश्वर ने जुटा रखा है। और किसी बात की आवश्यकता नहीं; यदि मनुष्य आने को इच्छुक हैं, तो वे आ सकते हैं, वे आएँगे। जहाँ प्रभु को यह भाया है कि इच्छा को ऐसा छुए कि मनुष्य में मसीह की ओर लालसा उत्पन्न हो, जहाँ हृदय सचमुच धार्मिकता का भूखा और प्यासा है, बस यही वह सारी तैयारी है जिसकी आवश्यकता है।
जितनी योग्यता वह चाहता है वह यह है कि पहले तो आप अपने लिये उसकी आवश्यकता अनुभव करें (और यह भी वही आपको देता है), और दूसरे, उसकी आवश्यकता अनुभव करते हुए आप उसके पास आने को इच्छुक हों। आने की इच्छा ही सब कुछ है। यीशु पर विश्वास करने की तत्परता, अपने प्राण को उस पर डाल देने की इच्छा, उसे ठीक जैसा वह है वैसा ही ग्रहण करने की तैयारी, क्योंकि आप अनुभव करते हैं कि वह ठीक वैसा ही उद्धारकर्ता है जिसकी आपको आवश्यकता है—बस इतना ही: उन लोगों के विषय में जो कंगाल और अन्धे, और लंगड़े, और टुण्डे थे, फिर भी भोज में आए, कोई और तैयारी न थी, और हो भी न सकती थी।
मूल वचन यह नहीं कहता, “तुम तैयार हो, इसलिये आओ”—यह तो सुसमाचार को व्यवस्था की रीति से प्रस्तुत करना है; परन्तु वह कहता है, “सब कुछ तैयार है, सुसमाचार तैयार है, इसलिये तुम्हें आना है।” जहाँ तक आपकी तैयारी की बात है, जितनी तैयारी की कभी भी आवश्यकता हो सकती है वह ऐसी तैयारी है जो आत्मा हमें देता है, अर्थात् यीशु के पास आने की इच्छा। अब ध्यान दीजिए कि जिन्हें नेवता दिया गया था उनका तैयार न होना उनकी सम्पत्ति और उनकी योग्यताओं के कारण था। एक इसलिये नहीं आया कि उसने एक खेत मोल लिया था। शैतान प्राण और उद्धारकर्ता के बीच कैसा बड़ा ढेर खड़ा कर देता है! सांसारिक सम्पत्ति और भले कामों से वह पापी और उसके प्रभु के बीच विशाल आकार का एक मिट्टी का मोर्चा बाँध देता है।
कुछ सज्जनों के पास इतनी अधिक एकड़ भूमि है कि वे कभी मसीह के पास आ ही नहीं पाते: वे संसार के विषय में इतना अधिक सोचते हैं कि उसके विषय में अधिक सोच ही नहीं पाते। बहुतों के पास भले कामों के इतने अधिक खेत हैं, जिनमें ऐसी फसलें उग रही हैं जिन पर वे घमण्ड करते हैं, और ये उन्हें ऐसा अनुभव कराती हैं कि वे बड़े महत्व के व्यक्ति हैं। बहुत से मनुष्य सब कुछ पाने के लिये मसीह के पास इसलिये नहीं आ सकते क्योंकि उनके पास पहले ही से इतना कुछ है। उनमें से दूसरे इसलिये नहीं आ सके क्योंकि उनके पास करने को इतना कुछ था, और वे उसे भली-भाँति कर भी सकते थे—एक ने पाँच जोड़े बैल मोल लिए थे, वह उन्हें परखने जा रहा था; एक बलवान मनुष्य, हल चलाने में पूरी तरह समर्थ; उसके न आने का कारण यह था कि उसमें इतनी अधिक योग्यता थी। हज़ारों लोग जो कुछ उनके पास है और जो कुछ वे कर सकते हैं, उसी के कारण अनुग्रह से दूर रखे जाते हैं।
भोज के लिये भरे पेट की अपेक्षा खालीपन कहीं अच्छी तैयारी है। कितनी बार ऐसा होता है कि कंगाली और असमर्थता प्राण को मसीह तक ले जाने में सहायता भी करती हैं। जब मनुष्य अपने आपको धनी समझता है तब वह उद्धारकर्ता के पास नहीं आएगा। जब मनुष्य यह सपना देखता है कि वह जब चाहे पश्चाताप और विश्वास कर सकता है, और जो कुछ आवश्यक है वह सब अपने लिये आप कर सकता है, तो इसकी सम्भावना कम है कि वह आकर सरल विश्वास से मसीह पर निर्भर होकर विश्राम करे। आपमें से बहुतों को जो बात मसीह से दूर रखती है, वह यह नहीं कि आपके पास क्या नहीं है, परन्तु यह कि आपके पास क्या है। पापमय ‘स्व’ एक दुष्टात्मा है, परन्तु अपने को धर्मी समझनेवाला ‘स्व’ सात दुष्टात्माएँ है।
जो मनुष्य अपने आपको दोषी अनुभव करता है वह कुछ समय के लिये अपने दोष के कारण दूर रखा जा सकता है, परन्तु जो मनुष्य अपने आपको धर्मी समझता है वह कभी नहीं आएगा: जब तक प्रभु उसका घमण्ड उससे दूर न कर दे, वह सेंत-मेंत के अनुग्रह के भोज को ठुकराता ही रहेगा। योग्यताओं, सम्मानों और धन-सम्पत्ति का होना मनुष्यों को छुड़ानेवाले के पास आने से रोकता है। परन्तु दूसरी ओर, व्यक्तिगत दशा मसीह के पास आने की अयोग्यता नहीं बनाती, क्योंकि जो लोग अतिथि बने उनकी दुर्दशा ने उन्हें भोज से वंचित नहीं किया।
कुछ कंगाल थे, और निःसन्देह दुखी और चिथड़ों में; जैसा हम कहते हैं, उनके पास फूटी कौड़ी भी न थी; उनके वस्त्र फटे-पुराने थे, शायद इससे भी बुरे, वे मैले थे, वे सम्मानित लोगों के पास बैठने योग्य न थे, वे निश्चय ही स्वामी की मेज़ की शोभा न बढ़ाते; परन्तु जो उन्हें भीतर लाने गए थे उन्होंने न तो उनकी जेबें टटोलीं, न उनके कोटों को देखा, परन्तु उन्हें भीतर ले आए। वे कंगाल थे, परन्तु दूतों से कहा गया था कि कंगालों को भीतर ले आओ, और इसलिये वे उन्हें ले आए। उनकी कंगाली ने उन्हें तैयार होने से नहीं रोका; और हे दीन आत्मा, यदि आप अक्षरशः कंगाल हैं या आत्मिक रूप से कंगाल हैं, तो किसी भी प्रकार की कंगाली ईश्वरीय दया के लिये अयोग्यता नहीं बन सकती।
“जितना अधिक कंगाल अभागा, उतना ही अधिक यहाँ उसका स्वागत।” यदि आप अपनी अन्तिम कौड़ी तक पहुँच गए हैं, हाँ, यदि वह भी खर्च हो चुकी है, और यदि आपने सब कुछ गिरवी रख दिया है, और आप सिर से पाँव तक कर्ज़ में डूबे हुए हैं, और सोचते हैं कि अब आपके लिये इसके सिवा कुछ नहीं बचा कि आपको बेड़ियों में जकड़कर सदा के लिये बन्दीगृह में डाल दिया जाए, तौभी आप आ सकते हैं—अपनी कंगाली समेत। उनमें से एक और वर्ग टुण्डों का था, और इसलिये वे देखने में बहुत सुन्दर न थे: किसी की बाँह काट दी गई थी, या किसी की आँख निकाल ली गई थी। किसी की नाक कट गई थी, तो किसी की टाँग। वे अंग-भंग की सब प्रकार की दशाओं और रूपों में थे। कभी-कभी हम अपना मुँह फेर लेते हैं, और अनुभव करते हैं कि उन भिखारियों को देखने की अपेक्षा जो अपने घाव दिखाते हैं और बताते हैं कि वे कैसे अपंग हुए, हम कुछ भी दे देना पसन्द करेंगे।
परन्तु इससे कुछ अन्तर नहीं पड़ा कि वे कितनी बुरी तरह कुरूप हो गए थे; वे भीतर लाए गए, और उनमें से एक भी उन भद्दे घावों के कारण जो उसे लगे थे, लौटाया नहीं गया। इसी प्रकार, हे दीन आत्मा, शैतान ने आपको चाहे कितना ही फाड़ा और काटा हो, और चाहे जिस किसी दशा में पहुँचा दिया हो, यहाँ तक कि आपको जीते हुए भी लज्जा आती हो, तौभी यह आने की अयोग्यता नहीं है; आप जैसे हैं वैसे ही उसकी अनुग्रह की मेज़ पर आ सकते हैं। जब यीशु चरित्र को अपने हाथ में लेता है तो नैतिक कुरूपताएँ शीघ्र ही सुधर जाती हैं। पाप ने आपको चाहे कितनी ही बुरी तरह घायल किया हो, आप उसके पास आइए।
कुछ और थे जो लंगड़े थे, अर्थात् उनकी एक टाँग नहीं रही थी, या उनके किसी काम की न थी, और वे बैसाखी के बिना आ ही नहीं सकते थे, और उसी के सहारे घिसटते या उछलते हुए चलते थे; परन्तु फिर भी यह कोई कारण न था कि उनका स्वागत न हो। आह, यदि आपको विश्वास करना कठिन लगता है, तो यह कोई कारण नहीं कि आप आकर वह महान पापमोचन ग्रहण न करें जो यीशु मसीह आपको देने को तैयार है।
सन्देह और अविश्वास से लंगड़े होकर भी भोज में आइए और कहिए, “हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूँ; मेरे अविश्वास का उपाय कर।” कुछ और लोग अन्धे थे, और जब उनसे आने को कहा गया तो वे मार्ग देख नहीं सकते थे; परन्तु उस दशा में दूत से यह नहीं कहा गया था कि उनसे आने को कहे, उसे आज्ञा दी गई थी कि उन्हें ले आए; और अन्धा मनुष्य आ सकता है यदि उसे लाया जाए। बस इतनी ही आवश्यकता थी कि वह हाथ पकड़कर सही दिशा में ले जाए जाने को इच्छुक हो। अब आप जो सुसमाचार को उतनी पूरी तरह नहीं समझ सकते जितना आप चाहते हैं, जो उलझन और घबराहट में हैं, अपना हाथ यीशु के हाथ में दे दीजिए, और ले चले जाने को इच्छुक होइए; जो आप समझ नहीं सकते उस पर विश्वास करने को, और जिसे आप अभी अपनी समझ से माप नहीं सकते उसे भरोसे के साथ थाम लेने को इच्छुक होइए।
अन्धे, चाहे कितने ही अज्ञानी या अशिक्षित हों, इस कारण दूर नहीं रखे जाएँगे। फिर सड़कों पर के लोग थे—मैं समझता हूँ कि वे भिखारी थे; और बाड़ों के लोग—मैं समझता हूँ कि वे छिपे हुए थे, और सम्भवतः चोर थे; परन्तु फिर भी उनसे आने को कहा गया, और यद्यपि वे राहज़न और बाड़ों के पंछी थे, इस बात ने भी उन्हें आने और स्वागत पाने से नहीं रोका। चाहे वे निकाले हुए, ठुकराए हुए, आत्मिक बंजारे, ऐसे लोग थे जिनकी किसी को परवाह न थी, तौभी वे चाहे जो कुछ भी हों, प्रश्न यह नहीं था; उन्हें इसलिये आना था क्योंकि सब कुछ तैयार था: चिथड़ों में आओ, मैल में आओ, अंग-भंग होकर आओ, फोड़ों से भरे हुए आओ, हर प्रकार की मलिनता और घिनौनेपन में आओ; फिर भी, क्योंकि सब कुछ तैयार है, उन्हें लाया जाना था या भीतर आने के लिये विवश किया जाना था।
अब, अन्त में, मैं सोचता हूँ कि इन लोगों में से किसी में भी जो बात अयोग्यता जैसी दिखती थी, वही उनकी सहायक थी। यह एक बड़ा सत्य है कि जिसे हम अयोग्यता समझते हैं, वह अक्सर हमारी सबसे सच्ची योग्यता होती है। मैं चाहता हूँ कि आप इन कंगाल, अन्धे और लंगड़े लोगों पर ध्यान दें। जिन्हें नेवता दिया गया था उनमें से कुछ इसलिये नहीं आए कि उन्होंने कुछ भूमि या पाँच जोड़े बैल मोल लिए थे; परन्तु जब दूत चिथड़ों में लिपटे उस कंगाल के पास गया और कहा, “भोज में आओ,” तो यह बिलकुल स्पष्ट है कि वह यह नहीं कहता कि उसने खेत या बैल मोल लिए हैं, क्योंकि वह ऐसा कर ही नहीं सकता था, उसके पास ऐसा करने के लिये एक कौड़ी भी न थी; अतः वह उस परीक्षा से पूरी तरह छूटा हुआ था।
और जब किसी मनुष्य को मसीह के पास आने का नेवता दिया जाता है और वह कहता है, “मुझे उसकी आवश्यकता नहीं, मेरे पास अपनी धार्मिकता है,” तो वह दूर ही रहेगा; परन्तु जब प्रभु यीशु मेरे पास आया तो मुझ पर उस प्रकार की परीक्षा कभी नहीं आई, क्योंकि मेरे पास अपनी कोई धार्मिकता न थी, और यदि मैं प्रयत्न भी करता तो एक भी न बना सकता। मैं यहाँ कुछ लोगों को जानता हूँ जो यदि अपने सारे चिथड़े इकट्ठे कर लें तो भी धार्मिकता का एक वस्त्र जोड़-तोड़कर नहीं बना सकते, और यह प्रभु यीशु को ग्रहण करने में उनके लिये बड़ी सहायता है। प्राण की कंगाली का ऐसा बोध होना कितनी बड़ी धन्यता है कि आप अपने पास की किसी वस्तु के कारण मसीह से कभी दूर न रहें। फिर, कुछ इसलिये नहीं आ सके क्योंकि उन्होंने ब्याह कर लिया था।
अब, मैं सोचता हूँ कि बहुत सम्भव है कि ये लोग जो टुण्डे और कटे-फटे थे, इतने घायल थे कि उनकी कोई पत्नी न थी, और शायद कोई उन्हें अपनाने को तैयार भी न होता। अच्छा, तो उनके सामने दूर रहने की वह परीक्षा न थी। वे इतने अंग-भंग थे कि सुन्दरता खोजनेवाले किसी की भी आँख को आकर्षित न कर सकते थे, और इसलिये उस ओर से उनकी परीक्षा न होती थी। परन्तु उन्होंने मेम्ने के सदा धन्य भोज में एक अनन्त विवाह-बन्धन पाया, जो असीम रूप से उत्तम था। इस प्रकार प्राण सांसारिक आनन्दों और सुखों को खो देते हैं, और उस हानि के द्वारा वे सर्वोच्च लाभ पाते हैं: इस प्रकार वे मसीह को अपनाने के लिये इच्छुक बनाए जाते हैं, और एक ऊँची शान्ति और एक ऊँचा आनन्द पाते हैं।
वह अंग-भंग जो अयोग्यता जैसा दिखता था, योग्यता निकला। एक बहाना यह बनाया गया था, “मैं ने पाँच जोड़े बैल मोल लिए हैं, और उन्हें परखने जाता हूँ।” लंगड़ा ऐसा नहीं कर सकता था। जब दूत ने लंगड़े मनुष्य के कन्धे को छूकर कहा, “आओ,” तो वह यह नहीं कह सकता था, “मैं आज रात अपनी नई जोड़ी के साथ हल चलाने जा रहा हूँ।” बेचारा, जब से उसकी टाँग गई थी तब से वह कभी ढेलों पर चला ही न था, अतः वह ऐसा बहाना नहीं बना सकता था। अन्धा मनुष्य यह नहीं कह सकता था, “मैं ने एक खेत मोल लिया है, और अवश्य है कि जाकर उसे देखूँ;” वह आँखों की सारी अभिलाषाओं से स्वतन्त्र था, और इस हद तक भोज में ले जाए जाने के लिये और भी अधिक तैयार था।
जब कोई प्राण अपनी पापमयता, और दुर्दशा, और खोई हुई दशा को अनुभव करता है, तो वह अपने आपको मसीह के पास आने के अयोग्य समझता है; परन्तु यह उसके लिये सहायता है, क्योंकि यह उसे मसीह को छोड़ और किसी भी वस्तु की ओर देखने से रोकती है। परन्तु सड़कों पर के लोगों के विषय में क्या? अच्छा, मुझे ऐसा लगता है कि वे पहले ही से मार्ग पर थे, और कम से कम अपने घरों से बाहर थे, यदि उनके कोई घर थे। यदि वे वहाँ बाहर भीख माँग रहे थे, तो वे भोजन के निमन्त्रण को स्वीकार करने के लिये और भी अधिक तैयार थे, क्योंकि वे उसी के लिये तो गा-गाकर माँग रहे थे। जो मनुष्य अपनी स्व-धार्मिकता के घर से बाहर निकल आया है, चाहे वह बड़ा पापी ही क्यों न हो, वह उस मनुष्य की अपेक्षा अधिक अनुकूल स्थिति में है और उसके मसीह के पास आने की अधिक सम्भावना है, जो अपनी तथाकथित स्व-धार्मिकता पर घमण्ड करता है।
और जो बाड़ों के नीचे थे, उनके विषय में—अच्छा, उनका अपना कोई घर न था, और इसलिये उनके आकर परमेश्वर के घर को भरने की और भी अधिक सम्भावना थी। जब तक मनुष्यों के पास सिर टिकाने के लिये एक झोंपड़ी भी होती है, वे सोने के लिये बाड़ों की शरण नहीं लेते; परन्तु हे दीन आत्मा, जब आप ऐसे संकट में धकेल दिए गए हैं कि किसी भी बाड़े के नीचे छिप जाना चाहते हैं, जब आपके पास दण्ड के भयानक बाट जोहने के सिवा कुछ नहीं बचा, जब आप अपने आपको परमेश्वर के सामने एक विधि-बहिष्कृत और निकाला हुआ समझते हैं, कैन के समान भटकने के लिये छोड़ा हुआ, एक आवारा और बेघर, सब भलाई से वंचित—तो आप ही ठीक वह मनुष्य हैं जिसे मसीह के पास आना चाहिए। तो अपने बाड़ों में से निकल आइए। मैं आपको ढूँढ़ रहा हूँ।
यद्यपि आप अपने आपको छिपा लें, तौभी परमेश्वर का अपना आत्मा आपको खोज निकालेगा, और—मुझे भरोसा है कि आज ही प्रातः—आपको ईश्वरीय प्रेम पर भोजन करने के लिये ले आएगा। यीशु मसीह पर भरोसा कीजिए, बस इतना ही; जैसे आप हैं वैसे ही, अपनी सारी अयोग्यता और अतैयारी समेत। जो कुछ परमेश्वर ने आपके लिये तैयार किया है उसे ले लीजिए: आपको शुद्ध करने के लिये बहुमूल्य लहू, आपको ढाँपने के लिये धार्मिकता का वस्त्र, आपका भाग होने के लिये अनन्त आनन्द। मसीह यीशु में परमेश्वर के अनुग्रह को ग्रहण कीजिए, आह, उसे अभी ग्रहण कीजिए। परमेश्वर करे कि आप ऐसा करें, यीशु मसीह के निमित्त। आमीन। उपदेश से पहले पढ़ा गया पवित्रशास्त्र का भाग—लूका 14:12-35। “अवर ओन हिम बुक” से भजन—909, 504, 488 (पद 3-8)।
