प्रभु का आनन्द — 2. अप्रतिबंधित आनन्द
2. अप्रतिबंधित आनन्द
दूसरे, यह आनन्द भी दैवीय अधिकार के अन्तर्गत सम्पूर्ण मानवजाति के लिए स्वर्ग से भेजा गया है। यह आनन्द “सब लोगों” के लिए है। यह किसी एक वर्ग तक सीमित रहने के लिए नहीं है। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा है, “यह सब लोगों के लिए होगा”। इसलिए यदि कोई सोचता है कि यह आनन्द केवल उसी के लिए है, तो इस भ्रामक विचार के परिणामस्वरूप वह स्वयं उस आनन्द से वंचित रह जाएगा। परमेश्वर बाइबल में जो कहता है वह पूर्णतः सत्य है। उसे बदला नहीं जा सकता। “सब लोग” शब्द का अर्थ है, सब देशों के, सब भाषाओं के, सब आयु के, सब वर्गों के लोग, धनी और निर्धन, शिक्षित और अशिक्षित, सभ्य और असभ्य, ऊँचे और नीचे, गोरे और काले। यह आनन्द सबके द्वारा पाया और भोगा जा सकता है।
जब आज से दो हज़ार वर्ष पहले प्रभु यीशु मसीह बैतलहम में जन्मे, तब जगत पर आत्मिक अन्धकार छाया हुआ था। वह अव्यवस्था और उथल-पुथल का समय था। यहूदी रोमी शासन के अधीन होने के कारण दासत्व के दिनों में थे। मूर्तिपूजा ने पूरे देश को ढँक लिया था, परमेश्वर के लोग यहूदी परमेश्वर की वाणी सुनने के लिए न कोई भविष्यद्वक्ता था, न कोई आराधनास्थल। ऐसे ही समय में परमेश्वर का आनन्द और शान्ति का सन्देश सब लोगों तक पहुँचाया गया। “सब लोग” इन शब्दों में तुम भी शामिल हो। इसलिए यह सोचकर अपने आप को अपवाद मत बनाओ कि यह तुम पर लागू नहीं होता।
