सच्चा अनुसरण
6. सच्चा अनुसरण।
यरदन नदी को पार करने के बाद इस्राएल की सन्तान को ऊँची शहरपनाह वाले नगर यरीहो पर विजय पानी थी। यहोवा ने उनसे कहा कि यदि वे उसके आगे-आगे चलते हुए उसका अनुसरण करें और जो कुछ भी वह आज्ञा दे वह करें, तो वे शत्रु को हारते हुए देखेंगे। परमेश्वर ने इस्राएलियों को बहुत स्पष्ट रूप से बता दिया था कि वे इस मार्ग से पहले कभी नहीं गए और वे मिस्र में प्राप्त की गई बुद्धि या अपने किसी भी पिछले अनुभव पर भरोसा नहीं कर सकते। केवल यहोवा ही वह मार्ग जानता था और केवल वही उन्हें ले जा सकता था। उन्हें केवल उसका अनुसरण करना था।
कनान देश के अलग-अलग नगर अलग-अलग रीतियों से जीते गए। अई नगर यरीहो की भाँति नहीं जीता गया। इसलिए हर बार यहोवा के पास एक अलग योजना होती थी। उसने अपनी योजनाएँ यहोशू पर एक-एक करके प्रगट कीं, और इस्राएल की सन्तान जब उन्होंने प्रगट की गई योजना का पूरी तरह पालन किया, तभी उन्हें विजय की निश्चितता मिली। यहोवा ने उन्हें अपने और वाचा के सन्दूक के बीच दूरी बनाए रखने को क्यों कहा (यहो. 3:4), इसका कारण यह था कि वे अपनी आँखें उसी पर लगाए रखें और भय तथा सावधानी के साथ उसका अनुसरण करें।
