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अध्याय 15

अदृश्य सामर्थ्य

हमारी विरासत · बख्त सिंह

अदृश्य सामर्थ्य

अब इस्राएल की सन्तान यरीहो के सामने थी। उसी समय यहोवा की सेना का प्रधान यहोशू को दिखाई दिया। इस दर्शन के द्वारा (Josh. 5:13-15), परमेश्वर ने उसे यह आश्वासन दिया कि वह स्वयं अपने लोगों की ओर से लड़ेगा। इसके बाद यहोशू को अनेक लड़ाइयाँ लड़नी पड़ीं परन्तु वह सेनापति उसे फिर कभी दिखाई नहीं दिया और न ही उसका फिर उल्लेख हुआ। इसके बाद यहोवा एक अनदेखी और अदृश्य रीति से उनकी ओर से लड़ता रहा (Josh. 21:43-45। वही प्रभु हमारे साथ भी रहने का वादा करता है। यद्यपि वह हमारी आँखों को दिखाई नहीं देता, फिर भी यदि हम अपने जीवन, योजनाओं और परिस्थितियों की पूरी बागडोर उसे सौंप दें, तो वह हमारे साथ रहकर हमारी लड़ाइयाँ स्वयं लड़ेगा।

उस सेनापति ने यहोशू से अपने पाँवों की जूतियाँ उतारने को कहा। इसका अर्थ था कि यहोशू को हर प्रकार की मलिनता से मुक्त होना था। जब हम अलग-अलग जगहों पर घूमते हैं, तो किसी न किसी तरह गन्दे हुए बिना नहीं रह सकते। जब तक हम इस दुष्ट संसार में हैं, तब तक हम जो देखते और सुनते हैं उनके द्वारा मलिन होने के खतरे में सदैव रहते हैं। कोई विचार, वचन या कर्म मलिनता ला सकता है। हमें शुद्धि के लिए अपने प्रभु यीशु मसीह के अनमोल लहू का दावा करना चाहिए, तभी यहोवा की सेना का प्रधान हर समय हमारे साथ रहेगा। इस प्रकार लहू में सरल विश्वास के द्वारा अपने आप को निर्मल बनाए रखते हुए, हम प्रभु की अदृश्य किन्तु अत्यन्त वास्तविक उपस्थिति का आनन्द ले सकेंगे और उसमें अपनी सम्पदाओं को अपना सकेंगे।

[अस्पष्ट]

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