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अध्याय 1

सरल विश्वास

हमारी विरासत · बख्त सिंह

सरल विश्वास

.. यहोशू अध्याय 2 में लिखी गई रहाब की कहानी हमें सिखाती है कि हम विश्वास के द्वारा अपनी विरासत को कैसे अपना सकते हैं। परिवार और जाति की दृष्टि से देखें तो रहाब एक अन्यजाति वेश्या होने के कारण, परमेश्वर इस्राएल की सन्तान को जो महान विरासत देना चाहता था उस पर उसका कोई अधिकार नहीं था। शायद यही एक कारण था कि उसका घर नगर के भीतर न होकर शहरपनाह पर था। आश्चर्य की बात है कि हम पाते हैं कि इस तुच्छ समझी गई स्त्री में इस्राएलियों के महान परमेश्वर पर सच्चा, जीवन्त विश्वास था। नगर के अन्य लोगों ने भी परमेश्वर द्वारा अपने लोगों के लिए किए गए अद्भुत कार्यों के बारे में सुना था और वे भय से भरे हुए थे। परन्तु रहाब उन भेदियों से कह सकी, “क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा ऊपर आकाश में और नीचे पृथ्वी पर परमेश्वर है” (पद 11)। उसने यह भी विश्वास किया कि यहोवा ने उन्हें वह देश पहले ही दे दिया है। उसने विश्वास से देखा कि परमेश्वर का न्याय निश्चय ही यरीहो और उसके निवासियों पर आने वाला है, इसलिए उसने अपने और अपने परिवार के लिए छुटकारे का दावा किया। उस समय इस्राएल की सन्तान अभी यरदन तक भी नहीं पहुँची थी और कनान देश अब भी सात बड़ी जातियों के अधिकार में था। फिर भी रहाब कह सकी कि वह देश उन्हें पहले ही दिया जा चुका है (पद 9)। उसी विश्वास के साथ वह परमेश्वर के लोगों की विरासत में आ गई। उस समय उसे उस विरासत में अपने हिस्से के बारे में कुछ भी मालूम नहीं था। वह केवल आने वाले न्याय से बचने के विचार से ऐसा कर रही थी, परन्तु इसने न केवल उसे उसके पापमय जीवन से छुड़ाया वरन उसे एक पवित्र और चुनी हुई पीढ़ी में भी ले आया। इसी प्रकार वह दाऊद की परदादी बनी (Matt. 7:5), और अन्ततः उसी वंश में प्रभु यीशु मसीह भी जन्मे। इस प्रकार हम देखते हैं कि सबसे पहले, जीवते और सच्चे परमेश्वर पर विश्वास करने के द्वारा ही वह उस विरासत में लाई गई।

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