पोषण
जिस प्रकार अपने दैनिक कार्यों को करने के लिए शारीरिक शक्ति हेतु हमें भोजन की आवश्यकता है, उसी प्रकार अपनी विभिन्न ज़िम्मेदारियों को उठाने और विभिन्न परीक्षाओं पर विजय पाने के लिए हमें अपने प्रभु यीशु मसीह के जीवन की आवश्यकता है। यदि हम ठीक से भोजन नहीं करते तो हमारा शरीर हमारा साथ नहीं देगा। साथ ही, एक बार भोजन करके लम्बे समय तक बलवान बने रहना सम्भव नहीं है। हमारे शरीर इस प्रकार बनाए गए हैं कि हमें दिन में दो या तीन बार भोजन करना पड़ता है। आत्मिक रूप से भी यही सत्य है। बलवान बनने के लिए हमें विश्वास से प्रभु यीशु के जीवन को ग्रहण करना चाहिए। हम प्रतिदिन उससे कह सकते हैं, “हे प्रभु, तेरा जीवन ही मेरा जीवन है। आज के कर्तव्यों और कार्यों के लिए मुझे वही जीवन चाहिए।” इस प्रकार हम बलवान बनकर अपनी दुर्बलताओं पर विजय पा सकते हैं, अन्यथा हम अवश्य असफल होकर दुर्बल ही बने रहेंगे।
