संगति
8. संगति।
वाचा का सन्दूक याजकों द्वारा उठाया जाना था, और बाकी सब लोगों को उनके पीछे-पीछे चलना था।
हमें भी अपने आप को पूरी कलीसिया के साथ पहचानना है, तभी हम सब बाधाओं पर विजय पाने में सफल हो सकेंगे
। हमें अन्य विश्वासियों के साथ संगति में रहकर कलीसिया की उन्नति में अपना पूरा भाग लेना चाहिए। बहुत से विश्वासी...
अन्य विश्वासियों के साथ संगति नहीं करते। वे सोचते हैं...
घर पर ही रहकर कुछ अच्छी पुस्तकें पढ़ने या कुछ अच्छे कार्य करने से भी उन्हें आशीष मिल जाएगी। वे
रेडियो पर दिन भर आने वाले सन्देश सुन सकते हैं ऐसा सोचते हैं। बहुत से लोग
इन प्रसारणों से ही सन्तुष्ट हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि अच्छा संगीत और अच्छे सन्देश सुनकर ही उन्हें परमेश्वर की सब आशीषें मिल जाएँगी। परन्तु उन्हें
[अस्पष्ट] वह संगति जो हमें आराधना के लिए, प्रार्थना के लिए, या उसके वचन के अध्ययन के लिए इकट्ठा होने पर मिलती है। यह सोचकर संगति से दूर मत रहो कि रेडियो के सन्देशों, अच्छी पुस्तकों या पत्रिकाओं के माध्यम से तुम्हें पूरी आशीष मिल जाएगी। ऐसा करने से तुम केवल कमज़ोर और शक्तिहीन बने रहोगे। बार-बार साथी विश्वासियों के साथ प्रार्थना और संगति के लिए इकट्ठा होने के अनेक लाभों को तुम खो दोगे। हमारी शक्ति और वृद्धि एक दूसरे के साथ हमारी संगति पर निर्भर करती है। आरम्भिक विश्वासी आत्मिक रूप से बढ़ने लगे, क्योंकि वे प्रेरितों की शिक्षा, संगति, रोटी तोड़ने और प्रार्थना में लगातार बने रहे (प्रेरि. 2:42)।
