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अध्याय 16

भेदन

हमारी विरासत · बख्त सिंह

भेदन

यरीहो की बहुत मज़बूत शहरपनाह थी और इस्राएल की सन्तान के भय से सब फाटक कसकर बन्द कर दिए गए थे। भीतर शूरवीर पुरुष थे। उन ऊँची, मज़बूत दीवारों को देखकर किसी को भी भय हो सकता था, परन्तु इस्राएलियों के साथ ऐसा नहीं हुआ। यहोवा ने उनसे वादा किया था कि उसने यरीहो को उसके सब निवासियों के साथ पहले ही उनके हाथ में दे दिया है (Josh. 6:2। इसलिए यरीहो के आस-पास पहुँचने से पहले ही उन्हें दृढ़ विश्वास था कि विजय उन्हीं की है। यरीहो का राजा और उसके शूरवीर पुरुष शैतान और उसके दूतों की ओर संकेत करते हैं। हमें भी दुष्ट शक्तियों से लड़ना है (Eph. 6:12। परन्तु हमारे प्रभु यीशु मसीह ने शैतान को पहले ही हरा दिया है और उसे लज्जित कर दिया है (Col. 2:15। उसने वह विजय हमारी ओर से प्राप्त की है। इसलिए विश्वास के द्वारा हम भी दुष्ट के हर आक्रमण पर उसकी विजय का दावा कर सकते हैं।

यदि परमेश्वर चाहता तो अपने दूतों के द्वारा यरीहो को नष्ट करवा सकता था। परन्तु वह इस्राएलियों को अपने सहकर्मी बनाना चाहता था। उसके सहकर्मी बनने के लिए हमें दृढ़ विश्वास की आवश्यकता है। इसीलिए इस्राएलियों को परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करना था और बिना किसी सन्देह या प्रश्न के उसकी आज्ञाओं का पालन करना था। यदि यहोवा चाहता, तो इस्राएली यरीहो नगर के चारों ओर केवल एक बार घूमते और शहरपनाह गिर जाती। परन्तु हम देखते हैं कि उन्हें नगर के चारों ओर तेरह बार घूमना पड़ा। हर बार जब वे घूमते, उनका विश्वास और अधिक बढ़ता गया। उन्हें आज्ञा दी गई थी कि शहरपनाह की चोटी से उन्हें देखने वाले लोगों पर कोई ध्यान न दें। शायद वे लोग भी उन पर हँस रहे थे और उनका उपहास कर रहे थे। दूसरी ओर, तुरहियाँ फूँके जाने के द्वारा, इस्राएल की सन्तान यहोवा की ओर से मिली विजय में आनन्दित हो रही थी।

उनकी आँखें उस नगर और उसके निवासियों से हटकर केवल यहोवा पर टिकी हुई थीं। यहोवा के वचनों पर इसी दृढ़, सक्रिय विश्वास और उसकी आज्ञाओं की पूर्ण आज्ञाकारिता के द्वारा ही वे प्रतिज्ञा किए हुए देश में प्रवेश करके उस पर अधिकार कर सके।

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